प्र1.
तन है मेरा हरा-भरा, / रस से रहता सदा भरा। / भीतर से हूँ मैं लाल, / प्यास बुझाकर पूछूँ हाला।
उत्तर
पहेली का सरल अर्थ: मेरा शरीर बाहर से हरा है। मेरे भीतर हमेशा रस भरा रहता है। भीतर से मैं लाल हूँ। मैं तुम्हारी प्यास बुझाकर तुम्हारा हालचाल पूछता हूँ।
उत्तर: तरबूज
पकड़ में कैसे आया — वे शब्द हैं “हरा-भरा तन”, “भीतर से लाल” और “प्यास बुझाकर”। सोचिए, कौन-सी चीज़ बाहर से हरी हो, भीतर से लाल हो और उसमें इतना रस हो कि प्यास बुझ जाए? तरबूज ही ऐसा है। उसका छिलका हरा होता है, भीतर का गूदा लाल होता है और उसमें पानी इतना अधिक होता है कि गरमी में उसे खाने से प्यास बुझ जाती है।
| पहेली की पंक्ति | वह तरबूज की कौन-सी बात बताती है |
|---|---|
| “तन है मेरा हरा-भरा” | तरबूज का छिलका बाहर से हरा होता है, जिस पर गहरी धारियाँ भी होती हैं। |
| “रस से रहता सदा भरा” | तरबूज में बहुत रस होता है — उसका अधिकांश भाग पानी ही होता है। |
| “भीतर से हूँ मैं लाल” | काटने पर भीतर का गूदा चटक लाल दिखाई देता है। |
| “प्यास बुझाकर पूछूँ हाला” | ‘हाल’ यानी हालचाल। मतलब — प्यास बुझाकर पूछता हूँ कि अब कैसा लग रहा है? गरमी में तरबूज खाने से सचमुच राहत मिलती है। |
जानने की बात: तरबूज गरमी के मौसम का फल है। इसमें लगभग नब्बे भाग पानी होता है, इसीलिए यह शरीर को ठंडक देता है और गरमी में पानी की कमी नहीं होने देता।