कक्षा ५ हिंदी अध्याय 3 बूझो तो जानें के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
तन है मेरा हरा-भरा, / रस से रहता सदा भरा। / भीतर से हूँ मैं लाल, / प्यास बुझाकर पूछूँ हाला।
उत्तर

पहेली का सरल अर्थ: मेरा शरीर बाहर से हरा है। मेरे भीतर हमेशा रस भरा रहता है। भीतर से मैं लाल हूँ। मैं तुम्हारी प्यास बुझाकर तुम्हारा हालचाल पूछता हूँ।

उत्तर: तरबूज

पकड़ में कैसे आया — वे शब्द हैं “हरा-भरा तन”, “भीतर से लाल” और “प्यास बुझाकर”। सोचिए, कौन-सी चीज़ बाहर से हरी हो, भीतर से लाल हो और उसमें इतना रस हो कि प्यास बुझ जाए? तरबूज ही ऐसा है। उसका छिलका हरा होता है, भीतर का गूदा लाल होता है और उसमें पानी इतना अधिक होता है कि गरमी में उसे खाने से प्यास बुझ जाती है।
पहेली की पंक्तिवह तरबूज की कौन-सी बात बताती है
“तन है मेरा हरा-भरा”तरबूज का छिलका बाहर से हरा होता है, जिस पर गहरी धारियाँ भी होती हैं।
“रस से रहता सदा भरा”तरबूज में बहुत रस होता है — उसका अधिकांश भाग पानी ही होता है।
“भीतर से हूँ मैं लाल”काटने पर भीतर का गूदा चटक लाल दिखाई देता है।
“प्यास बुझाकर पूछूँ हाला”‘हाल’ यानी हालचाल। मतलब — प्यास बुझाकर पूछता हूँ कि अब कैसा लग रहा है? गरमी में तरबूज खाने से सचमुच राहत मिलती है।
जानने की बात: तरबूज गरमी के मौसम का फल है। इसमें लगभग नब्बे भाग पानी होता है, इसीलिए यह शरीर को ठंडक देता है और गरमी में पानी की कमी नहीं होने देता।
प्र2.
हम दोनों हैं पक्के मित्र, / करते रहते काम विचित्र। / पाँच-पाँच सेवक हैं साथ, / लेकिन करते कभी न बात।
उत्तर

पहेली का सरल अर्थ: हम दो हैं और आपस में पक्के दोस्त हैं। हम मिलकर अजीब-अजीब काम करते रहते हैं। हम दोनों के साथ पाँच-पाँच सेवक रहते हैं, पर वे कभी बोलते नहीं।

उत्तर: हाथ का पंजा — यानी हमारे दोनों हाथ, जिनमें पाँच-पाँच उँगलियाँ होती हैं।

पकड़ में कैसे आया — वे शब्द हैं “हम दोनों” और “पाँच-पाँच सेवक”। शरीर में ऐसी कौन-सी चीज़ है जो दो होती है और जिनमें से हर एक के साथ ठीक पाँच और चीज़ें जुड़ी रहती हैं? हाथ! हमारे दो हाथ हैं और हर हाथ में पाँच उँगलियाँ। उँगलियाँ हाथ का हर काम करती हैं, इसीलिए उन्हें ‘सेवक’ कहा गया है — और उनके मुँह नहीं होते, इसलिए वे “कभी बात नहीं करतीं”।
पहेली की पंक्तिवह हाथों की कौन-सी बात बताती है
“हम दोनों हैं पक्के मित्र”हमारे दो हाथ हैं और वे हमेशा मिलकर काम करते हैं। एक अकेला हाथ बहुत-से काम कर ही नहीं सकता।
“करते रहते काम विचित्र”हाथ अनोखे-अनोखे काम करते हैं — लिखना, खाना, ताली बजाना, गेंद फेंकना, कपड़े धोना, चित्र बनाना।
“पाँच-पाँच सेवक हैं साथ”हर हाथ में पाँच उँगलियाँ होती हैं, जो हाथ का हर काम पूरा करती हैं।
“लेकिन करते कभी न बात”उँगलियाँ बोलती नहीं। वे चुपचाप अपना काम करती रहती हैं।
पुस्तक की उत्तर-पंक्ति: पृष्ठ 31 पर सबसे नीचे, दाहिनी ओर उलटा छपा हुआ है — “उत्तर – तरबूज, हाथ का पंजा”। दोनों उत्तर ठीक उसी क्रम में हैं जिस क्रम में पहेलियाँ छपी हैं। पुस्तक को घुमाकर आप इसे स्वयं पढ़ सकते हैं।
पहेली बूझने का तरीका: पहेली में हमेशा एक-दो शब्द सुराग होते हैं। पहली पहेली में सुराग था “भीतर से लाल”, दूसरी में “पाँच-पाँच सेवक”। पूरी पहेली पढ़कर पहले यह ढूँढ़िए कि सबसे खास बात कौन-सी है — उत्तर वहीं छिपा होता है।
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