कक्षा ५ हिंदी अध्याय 3 पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
पुस्तकालय में चाँद, सूरज, तारे, आकाश आदि पर बहुत-सी रोचक, मनोरंजक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें अवश्य उपलब्ध होंगी। उन पुस्तकों को ढूँढ़कर पढ़िए और उनके बारे में कक्षा में भी चर्चा कीजिए।
उत्तर

यह पुस्तकालय जाकर करने वाला काम है। पहले जान लीजिए कि किस तरह की पुस्तकें ढूँढ़नी हैं और उन्हें कैसे ढूँढ़ें।

किस तरह की सामग्रीउसमें क्या मिलेगा
बच्चों की विज्ञान पत्रिकाएँचकमक (एकलव्य), फिरकी (एनसीईआरटी), विज्ञान प्रगति — इनमें आकाश, ग्रहों और तारों पर सरल और चित्रों वाले लेख छपते हैं।
बच्चों की कहानी-पत्रिकाएँनंदन, चंपक, बालहंस — इनमें चाँद-तारों की कहानियाँ और पहेलियाँ मिलती हैं।
एनबीटी और एनसीईआरटी की बाल पुस्तकेंनेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) आकाश, ग्रहों और अंतरिक्ष यात्रियों पर बच्चों के लिए सस्ती और सुंदर पुस्तकें छापता है।
विज्ञान की चित्र-पुस्तकें (एटलस)सौरमंडल के चित्र, ग्रहों की तालिका, चाँद की सतह की तस्वीरें।
अंतरिक्ष यात्रियों की कहानियाँराकेश शर्मा, कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स और चंद्रयान की कहानियाँ।
लोककथाएँ और कविताएँ‘चंदा मामा’ की कहानियाँ, चाँद पर लिखी बाल-कविताएँ, दादी-नानी की सुनाई कथाएँ।
तारामंडल (प्लेनेटेरियम)दिल्ली का नेहरू तारामंडल, मुंबई का नेहरू तारामंडल और कोलकाता का बिड़ला तारामंडल — यहाँ गुंबद पर तारे दिखाए जाते हैं।
पुस्तक ढूँढ़ने का तरीका — पाँच चरण:
चरण 1 — पुस्तकालय के प्रभारी से कहिए कि आपको चाँद और आकाश पर पुस्तकें चाहिए।
चरण 2 — विज्ञान वाली अलमारी देखिए। पुस्तकें विषय के अनुसार रखी होती हैं।
चरण 3 — पुस्तक उठाकर पहले उसकी विषय-सूची (कहाँ क्या है) देखिए।
चरण 4 — जो पढ़ें, उसकी तीन-चार काम की बातें अपनी कॉपी में नोट कर लीजिए।
चरण 5 — पुस्तक का नाम और लेखक का नाम भी लिख लीजिए, ताकि कक्षा में बता सकें।

नमूना उत्तर (कक्षा में चर्चा के लिए): मैं अपने विद्यालय के पुस्तकालय गया और वहाँ मुझे आकाश पर एक चित्रों वाली पुस्तक मिली। उसमें सौरमंडल का बड़ा चित्र था। मैंने पढ़ा कि चाँद पृथ्वी का उपग्रह है और उसकी अपनी रोशनी नहीं होती — उस पर सूरज की रोशनी पड़ती है। यह पढ़कर मुझे ‘चाँद का कुरता’ कविता की बात और अच्छी तरह समझ आ गई कि चाँद रोज़ अलग क्यों दिखता है। मैंने चकमक पत्रिका में तारे पहचानने का एक लेख भी पढ़ा। अब मैं रात में सप्तर्षि तारे ढूँढ़ने की कोशिश करता हूँ।

प्र2.
अपने शिक्षक, पुस्तकालय प्रभारी और मित्रों की सहायता से चाँद तथा सूरज की बदलती स्थितियों की और भी जानकारी प्राप्त कीजिए। यह भी पता लगाइए कि चंद्र ग्रहण एवं सूर्य ग्रहण कब-कब और क्यों होते हैं। आप अपने माता-पिता या अभिभावक से भी इनके बारे में बात कर सकते हैं।
उत्तर

पहले तीन बातें समझ लीजिए, फिर ग्रहण की बात एकदम आसान हो जाएगी।

  1. सूरज अपनी रोशनी खुद देता है। चाँद और पृथ्वी अपनी रोशनी नहीं देते — उन पर सूरज की रोशनी पड़ती है।
  2. पृथ्वी सूरज के चारों ओर घूमती है और चाँद पृथ्वी के चारों ओर। तीनों कभी रुकते नहीं।
  3. घूमते-घूमते कभी-कभी तीनों एक सीध में आ जाते हैं। तभी ग्रहण लगता है।
सूर्य ग्रहण — चंद्रमा सूरज और पृथ्वी के बीच आ जाता है छाया सूरज चंद्रमा पृथ्वी चंद्र ग्रहण — पृथ्वी सूरज और चंद्रमा के बीच आ जाती है सूरज पृथ्वी चंद्रमा
बीच में जो आ जाता है, उसकी छाया पीछे वाले पर पड़ जाती है। यही ग्रहण है।
बातसूर्य ग्रहणचंद्र ग्रहण
बीच में कौन आता हैचंद्रमा — सूरज और पृथ्वी के बीचपृथ्वी — सूरज और चंद्रमा के बीच
छाया किस पर पड़ती हैचंद्रमा की छाया पृथ्वी के एक हिस्से परपृथ्वी की छाया चंद्रमा पर
क्या ढका दिखता हैसूरज कुछ देर के लिए ढक जाता हैचाँद कुछ देर के लिए काला पड़ जाता है
कब होता हैअमावस्या के दिनपूर्णिमा के दिन
कब दिखता हैदिन मेंरात में
कहाँ से दिखता हैपृथ्वी के थोड़े-से हिस्से सेपृथ्वी के जिस-जिस हिस्से में उस समय रात है, वहाँ से

एक ज़रूरी बात — हर अमावस्या को सूर्य ग्रहण और हर पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण नहीं होता। ऐसा इसलिए है क्योंकि चाँद का रास्ता पृथ्वी के रास्ते से थोड़ा-सा टेढ़ा है। इसलिए तीनों बहुत कम बार पूरी सीध में आ पाते हैं। साल में गिनती के ही ग्रहण होते हैं।

सावधानी: सूर्य ग्रहण को खाली आँखों से कभी मत देखिए — इससे आँखों को स्थायी नुकसान हो सकता है। इसे केवल विशेष चश्मे से या पानी में परछाईं देखकर ही देखना चाहिए। चंद्र ग्रहण को खाली आँखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित है।
कविता से जोड़िए: कविता में माँ कहती है कि किसी दिन चाँद “किसी की भी आँखों को दिखलाई” नहीं पड़ता। वह दिन अमावस्या है — और मज़े की बात यह है कि सूर्य ग्रहण भी उसी अमावस्या के दिन होता है, जब चाँद ठीक सूरज और हमारे बीच आ जाता है।
क्या यह उपयोगी रहा?