प्र1.
‘जागो प्यारे’ कविता का सरल अर्थ लिखिए। इसमें कठिन शब्दों के अर्थ भी बताइए।
उत्तर
यह कविता अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की लिखी हुई है। इसमें एक माँ अपने बेटे को सुबह जगा रही है और उसे बाहर का सुंदर दृश्य दिखाकर उठने को कह रही है।
उठो लाल, अब आँखें खोलो।
पानी लाई हूँ, मुँह धो लो।
बीती रात कमल-दल फूले।
उनके ऊपर भौंरे झूले।
चिड़ियाँ चहक उठीं पेड़ों पर।
बहने लगी हवा अति सुंदर।
नभ में न्यारी लाली छाई।
धरती ने प्यारी छवि पाई।
भोर हुआ सूरज उग आया।
जल में पड़ी सुनहरी छाया।
ऐसा सुंदर समय न खोओ।
मेरे प्यारे अब मत सोओ।
पानी लाई हूँ, मुँह धो लो।
बीती रात कमल-दल फूले।
उनके ऊपर भौंरे झूले।
चिड़ियाँ चहक उठीं पेड़ों पर।
बहने लगी हवा अति सुंदर।
नभ में न्यारी लाली छाई।
धरती ने प्यारी छवि पाई।
भोर हुआ सूरज उग आया।
जल में पड़ी सुनहरी छाया।
ऐसा सुंदर समय न खोओ।
मेरे प्यारे अब मत सोओ।
पहले कठिन शब्द —
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| लाल | बेटा, प्यारा बच्चा (माँ प्यार से पुकार रही है) |
| कमल-दल | कमल के फूलों का समूह |
| भौंरे | भ्रमर — फूलों पर मँडराने वाले काले कीट |
| चहकना | पक्षियों का मीठी आवाज़ में बोलना |
| अति | बहुत |
| नभ | आकाश, आसमान |
| न्यारी | अनोखी, निराली, सबसे अलग |
| लाली | लाल रंग की आभा |
| छवि | सुंदर रूप, शोभा |
| भोर | सुबह, तड़का |
| सुनहरी छाया | सुनहरा प्रतिबिंब, यानी पानी में दिखता सूरज का सुनहरा अक्स |
अब पंक्ति-दर-पंक्ति सरल अर्थ —
| पंक्ति | सरल अर्थ |
|---|---|
| “उठो लाल, अब आँखें खोलो।” | उठो मेरे बेटे, अब आँखें खोल दो। |
| “पानी लाई हूँ, मुँह धो लो।” | मैं पानी ले आई हूँ, अपना मुँह धो लो। |
| “बीती रात कमल-दल फूले।” | रात बीत गई है और तालाब में कमल के फूल खिल गए हैं। |
| “उनके ऊपर भौंरे झूले।” | उन फूलों के ऊपर भौंरे मँडरा रहे हैं, मानो झूल रहे हों। |
| “चिड़ियाँ चहक उठीं पेड़ों पर।” | पेड़ों पर बैठी चिड़ियाँ चहचहाने लगी हैं। |
| “बहने लगी हवा अति सुंदर।” | बहुत सुंदर और ठंडी हवा बहने लगी है। |
| “नभ में न्यारी लाली छाई।” | आकाश में सुबह की अनोखी लाली फैल गई है। |
| “धरती ने प्यारी छवि पाई।” | उस लाली से धरती भी बहुत सुंदर दिखाई देने लगी है। |
| “भोर हुआ सूरज उग आया।” | सुबह हो गई है और सूरज निकल आया है। |
| “जल में पड़ी सुनहरी छाया।” | तालाब के पानी में सूरज की सुनहरी परछाईं पड़ रही है। |
| “ऐसा सुंदर समय न खोओ।” | इतना सुंदर समय सोकर मत गँवाओ। |
| “मेरे प्यारे अब मत सोओ।” | मेरे प्यारे बेटे, अब और मत सोओ। |
कवि के बारे में: अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (सन् 1865–1947) खड़ी बोली हिंदी के बहुत बड़े कवि थे। ‘हरिऔध’ उनका उपनाम है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले के निज़ामाबाद में हुआ था। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना प्रियप्रवास है। उन्होंने बच्चों के लिए भी बहुत सरल और मीठी कविताएँ लिखीं — यह कविता उन्हीं में से एक है।