कक्षा ५ हिंदी अध्याय 3 जागो प्यारे के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
‘जागो प्यारे’ कविता का सरल अर्थ लिखिए। इसमें कठिन शब्दों के अर्थ भी बताइए।
उत्तर

यह कविता अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की लिखी हुई है। इसमें एक माँ अपने बेटे को सुबह जगा रही है और उसे बाहर का सुंदर दृश्य दिखाकर उठने को कह रही है।

उठो लाल, अब आँखें खोलो।
पानी लाई हूँ, मुँह धो लो।
बीती रात कमल-दल फूले।
उनके ऊपर भौंरे झूले।
चिड़ियाँ चहक उठीं पेड़ों पर।
बहने लगी हवा अति सुंदर।
नभ में न्यारी लाली छाई।
धरती ने प्यारी छवि पाई।
भोर हुआ सूरज उग आया।
जल में पड़ी सुनहरी छाया।
ऐसा सुंदर समय न खोओ।
मेरे प्यारे अब मत सोओ।

पहले कठिन शब्द —

शब्दअर्थ
लालबेटा, प्यारा बच्चा (माँ प्यार से पुकार रही है)
कमल-दलकमल के फूलों का समूह
भौंरेभ्रमर — फूलों पर मँडराने वाले काले कीट
चहकनापक्षियों का मीठी आवाज़ में बोलना
अतिबहुत
नभआकाश, आसमान
न्यारीअनोखी, निराली, सबसे अलग
लालीलाल रंग की आभा
छविसुंदर रूप, शोभा
भोरसुबह, तड़का
सुनहरी छायासुनहरा प्रतिबिंब, यानी पानी में दिखता सूरज का सुनहरा अक्स

अब पंक्ति-दर-पंक्ति सरल अर्थ —

पंक्तिसरल अर्थ
“उठो लाल, अब आँखें खोलो।”उठो मेरे बेटे, अब आँखें खोल दो।
“पानी लाई हूँ, मुँह धो लो।”मैं पानी ले आई हूँ, अपना मुँह धो लो।
“बीती रात कमल-दल फूले।”रात बीत गई है और तालाब में कमल के फूल खिल गए हैं।
“उनके ऊपर भौंरे झूले।”उन फूलों के ऊपर भौंरे मँडरा रहे हैं, मानो झूल रहे हों।
“चिड़ियाँ चहक उठीं पेड़ों पर।”पेड़ों पर बैठी चिड़ियाँ चहचहाने लगी हैं।
“बहने लगी हवा अति सुंदर।”बहुत सुंदर और ठंडी हवा बहने लगी है।
“नभ में न्यारी लाली छाई।”आकाश में सुबह की अनोखी लाली फैल गई है।
“धरती ने प्यारी छवि पाई।”उस लाली से धरती भी बहुत सुंदर दिखाई देने लगी है।
“भोर हुआ सूरज उग आया।”सुबह हो गई है और सूरज निकल आया है।
“जल में पड़ी सुनहरी छाया।”तालाब के पानी में सूरज की सुनहरी परछाईं पड़ रही है।
“ऐसा सुंदर समय न खोओ।”इतना सुंदर समय सोकर मत गँवाओ।
“मेरे प्यारे अब मत सोओ।”मेरे प्यारे बेटे, अब और मत सोओ।
कवि के बारे में: अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (सन् 1865–1947) खड़ी बोली हिंदी के बहुत बड़े कवि थे। ‘हरिऔध’ उनका उपनाम है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले के निज़ामाबाद में हुआ था। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना प्रियप्रवास है। उन्होंने बच्चों के लिए भी बहुत सरल और मीठी कविताएँ लिखीं — यह कविता उन्हीं में से एक है।
प्र2.
‘जागो प्यारे’ कविता का भाव क्या है? इसमें माँ अपने बेटे को जगाने के लिए क्या-क्या दिखाती है?
उत्तर

कविता का भाव यह है कि सुबह का समय सबसे सुंदर और सबसे कीमती होता है, इसलिए उसे सोकर नहीं गँवाना चाहिए। माँ बेटे को डाँटकर नहीं जगाती — वह उसे बाहर की सुंदरता दिखाकर जगाती है।

माँ क्या-क्या दिखाती है —

क्र.माँ क्या दिखाती हैकविता की पंक्ति
1तालाब में खिले हुए कमल“बीती रात कमल-दल फूले।”
2फूलों पर मँडराते भौंरे“उनके ऊपर भौंरे झूले।”
3पेड़ों पर चहचहाती चिड़ियाँ“चिड़ियाँ चहक उठीं पेड़ों पर।”
4सुंदर बहती हुई हवा“बहने लगी हवा अति सुंदर।”
5आकाश में छाई सुबह की लाली“नभ में न्यारी लाली छाई।”
6निखरी हुई धरती“धरती ने प्यारी छवि पाई।”
7उगता हुआ सूरज“भोर हुआ सूरज उग आया।”
8पानी में पड़ती सुनहरी परछाईं“जल में पड़ी सुनहरी छाया।”
माँ का तरीका देखिए: वह एक बार भी नहीं कहती कि “देर हो गई” या “उठो वरना डाँट पड़ेगी”। वह पहले पानी लाकर रख देती है, फिर एक-एक करके बाहर की आठ सुंदर चीज़ें गिनाती है, और सबसे अंत में अपनी बात कहती है — “ऐसा सुंदर समय न खोओ।” यही सबसे अच्छा तरीका है — पहले मन जगाओ, फिर शरीर अपने आप जाग जाएगा।
कविता क्या सिखाती है:
1. सुबह जल्दी उठना चाहिए — तभी हम प्रकृति का यह सुंदर रूप देख पाते हैं।
2. सुबह की हवा शुद्ध और ठंडी होती है, जो सेहत के लिए अच्छी है।
3. सुबह देर तक सोने से दिन का सबसे अच्छा समय हाथ से निकल जाता है।
4. प्रकृति की छोटी-छोटी चीज़ें — कमल, भौंरा, चिड़िया, हवा — देखने लायक हैं, बस उन्हें देखने का समय निकालना पड़ता है।
प्र3.
‘चाँद का कुरता’ और ‘जागो प्यारे’ — इन दोनों कविताओं में क्या-क्या समानताएँ और क्या-क्या अंतर हैं?
उत्तर

दोनों कविताएँ एक ही अध्याय में छपी हैं और दोनों में माँ और बच्चे का प्यार है। पर एक रात की कविता है और दूसरी सुबह की।

पहले समानताएँ —

क्र.समानता
1दोनों में एक माँ और उसका बच्चा है। दोनों में माँ बच्चे से बात कर रही है।
2दोनों में माँ का प्यार भरा संबोधन है — एक में “अरे सलोने!”, दूसरी में “उठो लाल” और “मेरे प्यारे”।
3दोनों कविताएँ आकाश और प्रकृति की बात करती हैं — चाँद, सूरज, हवा, धरती।
4दोनों की भाषा बहुत सरल है और हर दो पंक्तियों में तुक मिलती है।
5दोनों में माँ बच्चे को डाँटती नहीं, प्यार से समझाती है।

अब अंतर —

बातचाँद का कुरताजागो प्यारे
रचनाकाररामधारी सिंह ‘दिनकर’अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
समयरात का — चाँद की यात्रा का समयसुबह का — सूरज निकलने का समय
बच्चा कौन हैचाँद, जिसे इंसान के बच्चे जैसा दिखाया गया हैघर का एक असली बच्चा, जो अपने बिस्तर पर सो रहा है
बात कौन शुरू करता हैबच्चा (चाँद) — वह हठ करके माँग रखता हैमाँ — वह बेटे को जगाने आती है
मौसमजाड़े का — ठंड और सन-सन हवाकोई भी सुहावना मौसम — सुंदर हवा और खिले कमल
भावहँसी-मज़ाक के साथ चाँद के घटने-बढ़ने की बातसुबह की सुंदरता और जल्दी उठने की सीख
अंत कैसा हैप्रश्न पर खत्म होती है — “नाप तेरी किस रोज लिवाएँ?” कोई हल नहीं निकलता।अनुरोध पर खत्म होती है — “मेरे प्यारे अब मत सोओ।”
दोनों को साथ रखकर देखिए: ‘चाँद का कुरता’ में आसमान का एक जीव हमारे घर जैसा बच्चा बन जाता है, और ‘जागो प्यारे’ में हमारे घर का बच्चा आसमान और धरती की सुंदरता देखने के लिए जगाया जाता है। यानी एक कविता आसमान को घर तक ले आती है और दूसरी घर के बच्चे को आसमान तक ले जाती है। इसीलिए पुस्तक ने इन दोनों को एक ही अध्याय में साथ छापा है।
क्या यह उपयोगी रहा?