कक्षा ५ हिंदी अध्याय 4 साङ्केन के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
साङ्केन एक कहानी है। पुस्तक में इस पाठ के साथ किसी लेखक का नाम नहीं दिया गया है। कहानी अरुणाचल प्रदेश के एक कस्बे चौखाम में घटती है। ‘साङ्केन’ वहाँ मनाया जाने वाला एक त्योहार है, और यही इस पाठ का शीर्षक भी है। कहानी के मुख्य पात्र हैं — वल्लरी , उसके पिताजी , वल्लरी का मित्र चाऊतान तथा चाऊतान के माता-पिता । वल्लरी के पिताजी चौखाम के मंडल कार्यालय में अधिकारी हैं। मंडल कार्यालय यानी किसी सरकारी विभाग का वह दफ़्तर जो एक पूरे मंडल यानी क्षेत्र का काम देखता है। इस बार वे दिल्ली से अपने परिवार को भी अपने पास बुला लेते हैं। कहानी की शुरुआत दिल्ली और चौखाम के अंतर से होती है। दिल्ली में भीड़भरी सड़कें हैं, हॉर्न बजाती कारें-बसें हैं और लोगों की लंबी-लंबी कतारें हैं। चौखाम में खुला और शांत वातावरण है — “जिधर देखो, हरियाली ही हरियाली और फूल ही फूल।” और वहाँ के लोगों के मुखों पर सदैव मुस्कान बनी रहत
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| शब्द | अर्थ | पाठ की पंक्ति | अपने वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|---|
| साङ्केन | अरुणाचल प्रदेश में मनाया जाने वाला त्योहार, जिससे वहाँ नया वर्ष आरंभ होता है | “आज हमारे यहाँ साङ्केन का त्योहार है।” | साङ्केन में लोग एक-दूसरे पर पानी डालते हैं। |
| मंडल कार्यालय | किसी विभाग का वह दफ़्तर जो एक पूरे क्षेत्र (मंडल) का काम देखता है | “चौखाम के मंडल कार्यालय में वल्लरी के पिताजी एक अधिकारी हैं।” | पिताजी मंडल कार्यालय में काम करते हैं। |
| भीड़भरी | जहाँ बहुत भीड़ हो | “कहाँ दिल्ली की भीड़भरी सड़कें…” | मेले की भीड़भरी गली में मैं माँ का हाथ पकड़े रहा। |
| कतार | एक के पीछे एक खड़े लोगों की पंक्ति, लाइन | “आदमियों की लंबी-लंबी कतारें…” | टिकट के लिए लंबी कतार लगी थी। |
| वातावरण | चारों ओर का माहौल | “…चौखाम का खुला और शांत वातावरण।” | पुस्तकालय का वातावरण बहुत शांत रहता है। |
| सदैव | हमेशा | “यहाँ के लोगों के मुखों पर सदैव मुस्कान बनी रहती है।” | दादी के चेहरे पर सदैव शांति रहती है। |
| पकवान | विशेष अवसर पर बनाया गया स्वादिष्ट भोजन | “चाऊतान की माताजी कई प्रकार के पकवान ले आईं।” | दीवाली पर घर में कई पकवान बने। |
| शोभायात्रा | सजी-धजी यात्रा, जुलूस | “तभी वल्लरी ने देखा कि सड़क पर एक शोभायात्रा निकल रही है।” | गाँव में रामलीला की शोभायात्रा निकली। |
| पालकी | वह डोली जिसे लोग कंधों पर उठाकर ले जाते हैं | “कुछ लोगों के कंधों पर पालकियाँ थीं।” | पहले दुल्हन पालकी में बैठकर जाती थी। |
| उत्साह | मन का जोश, उमंग | “लोगों में बहुत उत्साह था।” | खेल-दिवस पर बच्चों में बहुत उत्साह था। |
| बौद्ध-विहार | वह स्थान जहाँ बौद्ध भिक्षु रहते और पूजा करते हैं | “ये लोग बौद्ध-विहार से भगवान बुद्ध…की मूर्तियाँ लाए हैं।” | हम बौद्ध-विहार देखने गए थे। |
| शिष्य | पढ़ने-सीखने वाला, चेला | “भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों की मूर्तियाँ…” | गुरुजी के शिष्य दूर-दूर से आते हैं। |
| प्रतिदिन | हर दिन, रोज़ | “गाँव के लोग इन मूर्तियों पर प्रतिदिन जल चढ़ाएँगे…” | मैं प्रतिदिन आधा घंटा पढ़ता हूँ। |
| सम्मिलित होना | शामिल होना, साथ हो जाना | “क्या हम लोग भी शोभायात्रा में सम्मिलित हो सकते हैं?” | मैं भी सफाई अभियान में सम्मिलित हुआ। |
| ठिकाना न होना | बहुत अधिक होना, सीमा न रहना | “उनकी प्रसन्नता का ठिकाना नहीं था।” | परिणाम सुनकर उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। |
| जालीदार | जिसमें जाली जैसे छेद हों | “मंदिर की जालीदार दीवारें बाँस…से बनी हुई थीं।” | खिड़की पर जालीदार परदा लगा है। |
| खपच्ची | बाँस की पतली-लंबी फट्टी | “…बाँस की खपच्चियों से बनी हुई थीं।” | पतंग में बाँस की खपच्ची लगाई जाती है। |
| टहनी | पेड़ की पतली डाली | “बीच-बीच में पेड़ों की हरी-भरी टहनियाँ लगाई गई थीं…” | चिड़िया टहनी पर बैठी थी। |
| खोंसना | किसी चीज़ के बीच में दबाकर अटका देना | “…खोंस-खोंसकर उन पर रंग-बिरंगे फूल सजा दिए गए थे।” | दीदी ने बालों में गजरा खोंस लिया। |
| एकत्रित | इकट्ठा, जमा | “देखते-देखते भीड़ मंदिर के द्वार पर एकत्रित होने लगी।” | सभा के लिए सब मैदान में एकत्रित हुए। |
| भिक्षु | बौद्ध साधु | “बौद्ध भिक्षुओं ने मंत्र पढ़ते हुए इन मूर्तियों को…उतारा…” | भिक्षु सादा जीवन जीते हैं। |
| गुलाल | होली में लगाया जाने वाला रंगीन सूखा चूर्ण | “…मुँह पर गुलाल लगाते हैं।” | होली पर हमने एक-दूसरे को गुलाल लगाया। |
| अतिथि | मेहमान | “…अतिथियों का स्वागत करते हैं।” | अतिथि को पानी पिलाना अच्छी बात है। |
| दंडवत प्रणाम | ज़मीन पर सीधे लेटकर किया जाने वाला प्रणाम | “…भिक्षुओं को बार-बार दंडवत प्रणाम करेंगे।” | उसने मंदिर में दंडवत प्रणाम किया। |
| पुनः | फिर से, दुबारा | “…इन मूर्तियों को पुनः पालकियों में रखकर…” | मैंने प्रश्न पुनः पढ़ा। |
| अभिवादन | मिलने पर आदर से किया जाने वाला नमस्कार | “हमारे देश में लोग अनेक प्रकार से अभिवादन करते हैं।” | बड़ों का अभिवादन करना चाहिए। |
| उद्धरण चिह्न | किसी की बात ज्यों-की-त्यों लिखने पर लगाया जाने वाला चिह्न “ ” | “इसे उद्धरण चिह्न कहते हैं।” | संवाद लिखते समय उद्धरण चिह्न लगाइए। |
| अमराई | आमों का बगीचा (कविता ‘होली आई, होली आई’) | “अमराई का आँगन महका॥” | अमराई में कोयल बोल रही थी। |
| टेसू | पलाश का चटक लाल-नारंगी फूल, जिससे होली का रंग बनता था | “फूल गया टेसू जंगल में,” | टेसू के फूलों से प्राकृतिक रंग बनता है। |
| फाग | होली के दिनों में गाया जाने वाला लोकगीत | “गली-गली में ‘फागें’ गाईं,” | गाँव में ढोलक पर फाग गाई जा रही थी। |
| उछाह | उत्साह, उमंग | “बालक, बूढ़े सब उछाह में॥” | विजय की खबर सुनकर सब उछाह में थे। |
| मंजीरा | हाथ में बजाया जाने वाला छोटा ताल-वाद्य | “इस आँगन में मंजीरे खनके,” | भजन में मंजीरे की खनक अच्छी लगती है। |
अभ्यास
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