कक्षा ५ हिंदी अध्याय 4 मेरी कलाकारी के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
यहाँ कुछ प्राणियों के चित्र दिए गए हैं जिन्हें सूखे पत्तों से बनाया गया है। इन प्राणियों को पहचानिए।
सूखे पत्तों से बनाए गए तीन चित्र
पृष्ठ 42 पर दिए गए तीन चित्र, जो सूखे पत्तों से बनाए गए हैं।
उत्तर

पृष्ठ 42 पर तीन चित्र छपे हैं। बाएँ से दाएँ ये हैं —

क्रमप्राणीपत्तों से क्या-क्या बना है
1मोर (पक्षी)एक लंबे पत्ते का शरीर, सिर पर तीन पतली कलगी, नीचे दो पतली टाँगें और पीछे कई पत्तों की लंबी-फैली हुई पूँछ।
2कछुआबीच में जाली जैसी लकीरों वाली गोल पीठ (कवच), चारों ओर चार पत्तों के पैर और एक छोटे पत्ते का सिर, जिस पर दो आँखें बनी हैं।
3हाथीबड़े-बड़े पत्तों का मोटा शरीर, एक चौड़े पत्ते का कान, लंबे पत्तों के चार मोटे पैर और मुड़ी हुई पत्ती की सूँड़।
पहचानने का तरीका: पूरा चित्र मत देखिए — उसका सबसे खास अंग ढूँढ़िए। मोर की पहचान उसकी लंबी पूँछ और कलगी है, कछुए की पहचान उसकी जालीदार गोल पीठ है और हाथी की पहचान उसकी सूँड़ तथा बड़े कान हैं। कलाकार ने इन्हीं खास अंगों के लिए ठीक आकार के पत्ते चुने हैं।
प्र2.
पत्तों से किसी भी प्राणी की आकृति बनाकर नीचे दिए गए स्थान पर चिपकाइए।
उत्तर

यह करके देखने वाला काम है। नीचे पूरी विधि दी गई है — इसे चरण दर चरण कीजिए।

सामग्री: अलग-अलग आकार के सूखे पत्ते, गोंद या फेविकोल, कैंची, एक सादा कागज़ और एक पेंसिल।

  1. पत्ते इकट्ठे कीजिए — बगीचे या रास्ते से केवल गिरे हुए सूखे पत्ते उठाइए। पेड़ से हरे पत्ते मत तोड़िए। पीपल, बरगद, आम, केला और नीम के पत्ते अच्छे रहते हैं।
  2. सुखाइए — पत्तों को दो-तीन दिन किसी मोटी किताब के पन्नों के बीच दबाकर रखिए। इससे वे सीधे और सपाट हो जाएँगे।
  3. प्राणी चुनिए — पहले तय कीजिए कि क्या बनाना है — मछली, तितली, चिड़िया, खरगोश, ऊँट या हाथी।
  4. पत्ते जमाइए — गोंद लगाने से पहले पत्तों को कागज़ पर रखकर देखिए। सबसे बड़ा पत्ता शरीर बनेगा, छोटे पत्ते पैर और कान, पतला-लंबा पत्ता पूँछ, और नुकीला पत्ता चोंच।
  5. चिपकाइए — जब जमावट अच्छी लगे, तब एक-एक पत्ता उठाकर उसके पीछे गोंद लगाइए और उसी जगह चिपका दीजिए।
  6. अंतिम रूप दीजिए — पेंसिल या काले पेन से आँख बनाइए। नीचे अपने प्राणी का नाम लिखिए।
सुझाव: मछली सबसे आसान है — एक बड़ा पत्ता शरीर, एक छोटा पत्ता पूँछ, एक बिंदु आँख। पहली बार यही बनाकर देखिए।
यह काम पाठ से क्यों जुड़ा है: साङ्केन के मंदिर की सजावट भी बाँस, टहनियों और फूलों से हुई थी — यानी वहीं आसपास मिलने वाली चीज़ों से। यह गतिविधि भी वही सिखाती है: प्रकृति से मिली साधारण चीज़ों से भी सुंदर कला बन सकती है।
क्या यह उपयोगी रहा?