इस प्रश्न का उत्तर हर बच्चे का अलग होगा। बस इतना ध्यान रखिए — पहले बताइए कि क्या अच्छा लगा, फिर बताइए कि क्यों। ‘क्यों’ के बिना उत्तर अधूरा है।
| पाठ का हिस्सा | वह अच्छा क्यों लग सकता है |
|---|---|
| मंदिर की सजावट | बाँस, हरी टहनियों और फूलों से बना सादा मंदिर — बिना महँगी चीज़ों के भी इतना सुंदर! |
| एक-दूसरे पर पानी डालना | यह होली जैसा खेल है और इसमें कोई किसी से नाराज़ नहीं होता। |
| भिक्षुओं का आशीर्वाद | उसमें खेती, स्वास्थ्य और मेल-जोल — तीनों की कामना है। |
| वल्लरी और चाऊतान की मित्रता | दो अलग-अलग जगह के बच्चे इतनी जल्दी मित्र बन गए। |
| शोभायात्रा | ढोल, नाच-गाना, पालकियाँ — पूरा दृश्य आँखों के सामने आ जाता है। |
नमूना उत्तर: मुझे इस पाठ में मंदिर की सजावट सबसे अच्छी लगी। उसकी दीवारें बाँस की खपच्चियों से जाली की तरह बनाई गई थीं और उनमें हरी टहनियाँ लगाकर उन पर रंग-बिरंगे फूल खोंस दिए गए थे। मुझे यह इसलिए अच्छा लगा क्योंकि उसमें कुछ भी महँगा नहीं था, फिर भी वह इतना सुंदर था कि वल्लरी ने ऐसा मंदिर पहले कभी नहीं देखा था। इससे मैंने सीखा कि आसपास मिलने वाली चीज़ों से भी बहुत सुंदर सजावट हो सकती है।