कक्षा ५ हिंदी अध्याय 4 सोचिए और लिखिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
इस पाठ में आपको सबसे अच्छा क्या लगा और क्यों?
उत्तर

इस प्रश्न का उत्तर हर बच्चे का अलग होगा। बस इतना ध्यान रखिए — पहले बताइए कि क्या अच्छा लगा, फिर बताइए कि क्यों। ‘क्यों’ के बिना उत्तर अधूरा है।

पाठ का हिस्सावह अच्छा क्यों लग सकता है
मंदिर की सजावटबाँस, हरी टहनियों और फूलों से बना सादा मंदिर — बिना महँगी चीज़ों के भी इतना सुंदर!
एक-दूसरे पर पानी डालनायह होली जैसा खेल है और इसमें कोई किसी से नाराज़ नहीं होता।
भिक्षुओं का आशीर्वादउसमें खेती, स्वास्थ्य और मेल-जोल — तीनों की कामना है।
वल्लरी और चाऊतान की मित्रतादो अलग-अलग जगह के बच्चे इतनी जल्दी मित्र बन गए।
शोभायात्राढोल, नाच-गाना, पालकियाँ — पूरा दृश्य आँखों के सामने आ जाता है।

नमूना उत्तर: मुझे इस पाठ में मंदिर की सजावट सबसे अच्छी लगी। उसकी दीवारें बाँस की खपच्चियों से जाली की तरह बनाई गई थीं और उनमें हरी टहनियाँ लगाकर उन पर रंग-बिरंगे फूल खोंस दिए गए थे। मुझे यह इसलिए अच्छा लगा क्योंकि उसमें कुछ भी महँगा नहीं था, फिर भी वह इतना सुंदर था कि वल्लरी ने ऐसा मंदिर पहले कभी नहीं देखा था। इससे मैंने सीखा कि आसपास मिलने वाली चीज़ों से भी बहुत सुंदर सजावट हो सकती है।

प्र2.
नीचे दिए गए उदाहरण को देखकर आगे की कड़ी बनाइए— (उदाहरण: गेहूँ → आटा → रोटी/पूरी; गेहूँ → दलिया → हलवा) दूध, गन्ना, चना, चावल
उत्तर

पहले उदाहरण समझिए। गेहूँ एक चीज़ है। उसे पीसने से आटा बनता है और आटे से रोटी या पूरी। गेहूँ को मोटा दलने से दलिया बनता है और दलिया से हलवा।

गेहूँ → आटा → रोटी/पूरी
गेहूँ → दलिया → हलवा

यानी कड़ी इस तरह बनती है — कच्ची चीज़ → उससे बनी सामग्री → उससे बना खाना। अब इसी तरह चारों की कड़ियाँ देखिए।

कच्ची चीज़पहली कड़ीदूसरी कड़ीतीसरी कड़ी
दूधदहीमक्खनघी
दूधखोयापेड़ाबर्फ़ी
गन्नागन्ने का रसगुड़गजक / तिल-गुड़ के लड्डू
गन्नागन्ने का रसचीनीमिठाई, शरबत
चनाबेसनपकौड़े / कढ़ीबेसन के लड्डू
चनाभुना चनासत्तूसत्तू का शरबत / लिट्टी
चावलचावल का आटाचीला / पिट्ठाखीर, फिरनी
चावलपोहा (चूड़ा)पोहे की खिचड़ीचिवड़ा
पाठ से जोड़िए: साङ्केन में लोग एक-दूसरे के चेहरों पर चावल का आटा लगाते हैं। यानी चावल की एक कड़ी तो पाठ में ही आ गई — चावल → चावल का आटा।
यह अभ्यास क्या सिखाता है: हमारे खाने की हर चीज़ किसी खेत से आती है। रोटी सीधे नहीं बनती — पहले गेहूँ उगता है, फिर पिसता है, तब रोटी बनती है। हर निवाले के पीछे किसान की मेहनत है।
प्र3.
अपने मित्र को साङ्केन के बारे में पूरे दिन का आँखों-देखा वर्णन अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखकर बताइए। आपकी सहायता के लिए कुछ मुख्य संकेत बिंदु नीचे दिए गए हैं— (स्वागत, पकवान, शोभायात्रा, मूर्तियाँ, मंदिर, एक-दूसरे पर पानी डालना, मिल-जुलकर खुशी मनाना, पालकी, बाँस की खपच्चियाँ, भगवान बुद्ध का मंदिर, बौद्ध भिक्षु, होली, आशीर्वाद, घर, फूल)
उत्तर

आँखों-देखा वर्णन यानी ऐसा लिखना मानो आप वहीं खड़े होकर देख रहे हों। इसमें ‘मैंने देखा’, ‘मैंने सुना’, ‘मुझे लगा’ जैसे शब्द आते हैं और घटनाएँ समय के क्रम से आती हैं।

अच्छे वर्णन में ये बातें ज़रूर हों —

  1. सुबह से शाम तक का क्रम — पहले क्या हुआ, फिर क्या।
  2. दिए गए संकेत-शब्दों का प्रयोग।
  3. जो दिखा, सुनाई दिया और महसूस हुआ — तीनों का ज़िक्र।
  4. अंत में अपनी भावना — आपको कैसा लगा।

नमूना उत्तर:

प्रिय मित्र,

आज मैंने साङ्केन देखा और पूरा दिन आँखों के सामने से एक चित्र की तरह गुज़र गया।

सुबह मैं अपने पिताजी के साथ चाऊतान के घर गया। उसके पिताजी सफाई कर रहे थे, पर हमें देखते ही उन्होंने काम छोड़ दिया और हमारा स्वागत किया। चाऊतान की माताजी कई प्रकार के पकवान ले आईं। वे बहुत स्वादिष्ट थे।

तभी सड़क पर एक शोभायात्रा निकली। लोगों के कंधों पर पालकी थी और उसमें भगवान बुद्ध तथा उनके शिष्यों की मूर्तियाँ रखी थीं। सब लोग नाचते-गाते चल रहे थे। हम भी उसमें सम्मिलित हो गए।

शोभायात्रा नदी के किनारे बने नए मंदिर पर पहुँची। मैंने देखा कि उसकी जालीदार दीवारें बाँस की खपच्चियों से बनी थीं, बीच-बीच में हरी टहनियाँ लगी थीं और उन पर रंग-बिरंगे फूल खोंसे हुए थे। बौद्ध भिक्षु मंत्र पढ़ते हुए मूर्तियों को मंदिर में ले गए और उन पर जल चढ़ाने लगे।

फिर मज़ा शुरू हुआ। लोग एक-दूसरे पर पानी डालने लगे और चेहरों पर चावल का आटा लगाने लगे। मुझे बिलकुल होली जैसा लगा। किसी ने मुझ पर भी बालटी भर पानी डाल दिया और मैं भीग गया, पर किसी को गुस्सा नहीं आया — सब मिल-जुलकर खुशी मना रहे थे।

शाम को चाऊतान अपने ताऊजी के घर गया। बड़ों ने उसे आशीर्वाद दिया — “खेती फूले-फले तुम्हारी, तुम्हें न हो कोई बीमारी।”

मित्र, तुम भी कभी चौखाम आना। तब हम दोनों मिलकर साङ्केन मनाएँगे।

तुम्हारा मित्र
पुस्तक कहती है: आप इन शब्दों के अतिरिक्त अन्य शब्दों की सहायता भी ले सकते हैं और ये शब्द आपकी अपनी भाषा से भी हो सकते हैं। यानी अपनी बोली का कोई सुंदर शब्द आ जाए तो उसे लिखने में झिझकिए मत।
क्या यह उपयोगी रहा?