कक्षा ५ हिंदी अध्याय 4 बातचीत के लिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
त्योहारों पर घरों में कई प्रकार की मिठाइयाँ और नमकीन बनाई जाती हैं। आपको कौन-सी मिठाइयाँ और नमकीन अच्छी लगती हैं? वे किस त्योहार पर बनाई जाती हैं?
उत्तर

यह आपके अपने घर का प्रश्न है। उत्तर में तीन बातें ज़रूर आनी चाहिए — मिठाई या नमकीन का नाम, वह किस त्योहार पर बनती है, और आपको वह क्यों अच्छी लगती है।

त्योहारमिठाईनमकीन
होलीगुझिया, मालपुआदहीबड़े, नमकपारे
दीपावलीलड्डू, बर्फ़ीमठरी, चकली, सेव
रक्षाबंधनघेवर, नारियल के लड्डूमठरी
ईदसेवइयाँ (सिवैयाँ)समोसे
पोंगल / मकर संक्रांतितिल-गुड़ के लड्डू, चिक्कीमुरुक्कु
साङ्केन (अरुणाचल प्रदेश)चावल के आटे की मीठी पीठाबाँस में पकाए चावल-पकवान

नमूना उत्तर: मुझे गुझिया सबसे अच्छी लगती है। वह होली पर बनती है। उसके भीतर खोया, सूजी और मेवा भरा होता है। माँ जब गुझिया तलती हैं तो पूरे घर में सुगंध फैल जाती है। नमकीन में मुझे मठरी अच्छी लगती है, जो हमारे घर दीपावली पर बनती है।

कक्षा में करने का काम: सब बच्चे अपनी-अपनी मिठाई का नाम बोर्ड पर लिखें। फिर गिनिए — किस मिठाई का नाम सबसे ज़्यादा बार आया? इससे पता चलेगा कि एक ही त्योहार पर अलग-अलग घरों में अलग-अलग चीज़ें बनती हैं।
प्र2.
आप कौन-से त्योहार मनाते हैं? उनमें और साङ्केन में कौन-कौन सी समानताएँ हैं?
उत्तर

पहले अपने त्योहारों के नाम बताइए — जैसे होली, दीपावली, ईद, क्रिसमस, पोंगल, बिहू, ओणम, गुरुपर्व। फिर उन्हें साङ्केन से मिलाकर देखिए। सबसे ज़्यादा समानता होली से मिलती है।

बातसाङ्केन मेंहमारे त्योहारों में
नया वर्षसाङ्केन से नया वर्ष आरंभ होता है।होली, गुड़ी पड़वा, बैसाखी, बिहू और उगादि से भी नया वर्ष शुरू माना जाता है।
पानी और रंगलोग एक-दूसरे पर बालटियाँ भर-भरकर पानी डालते हैं और चेहरे पर चावल का आटा लगाते हैं।होली में हम एक-दूसरे पर रंगीन पानी डालते हैं और गुलाल लगाते हैं।
पकवानघरों में कई प्रकार के पकवान बनते हैं।हमारे यहाँ भी मिठाइयाँ और नमकीन बनते हैं।
मेल-मिलापलोग ताऊजी, बुआजी के यहाँ जाते हैं, प्रणाम करते हैं, आशीर्वाद लेते हैं।होली-दीवाली पर भी हम बड़ों के पैर छूते हैं और रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं।
पूजामूर्तियों पर जल चढ़ाया जाता है, भिक्षु मंत्र पढ़ते हैं।हमारे त्योहारों पर भी पूजा होती है और मंत्र या प्रार्थना बोली जाती है।
कितने दिनतीन दिन तक चलता है।होली दो दिन (होलिका दहन और धुलेंडी), दीपावली पाँच दिन तक चलती है।
सोचने की बात: भारत बहुत बड़ा देश है। भाषा, कपड़े और खाना जगह-जगह बदल जाते हैं, पर खुशी मनाने का तरीका बहुत मिलता-जुलता है — मिलकर गाना, पानी-रंग, मीठा खाना और बड़ों का आशीर्वाद। इसी को हम ‘विविधता में एकता’ कहते हैं।
प्र3.
हमारे देश में अनेक अवसरों पर शोभायात्राएँ (जुलूस) निकाली जाती हैं। आपने कौन-कौन सी शोभायात्राएँ देखी हैं? उनके बारे में अपने अनुभव बताइए।
उत्तर

अपनी देखी हुई किसी एक शोभायात्रा को चुनिए और चार बातें बताइए — कब निकली, कहाँ से कहाँ गई, उसमें क्या-क्या था, और आपको कैसा लगा

कुछ शोभायात्राएँ जो हमारे देश में निकलती हैं —

  • गणेश चतुर्थी और दुर्गा पूजा के विसर्जन की शोभायात्रा
  • रामनवमी, जन्माष्टमी और महावीर जयंती की शोभायात्रा
  • बुद्ध पूर्णिमा पर बौद्ध-विहार से निकलने वाली शोभायात्रा
  • ईद-मिलादुन्नबी का जुलूस और मुहर्रम के ताज़िए
  • पुरी की रथयात्रा, जिसमें रथ खींचे जाते हैं
  • गणतंत्र दिवस की झाँकियाँ और विद्यालय की प्रभात-फेरी

नमूना उत्तर: पिछले वर्ष मैंने अपने मुहल्ले में गणेश विसर्जन की शोभायात्रा देखी थी। शाम को ढोल बजने लगा। सबसे आगे बच्चे नाच रहे थे, बीच में एक सजी हुई गाड़ी पर गणेशजी की मूर्ति थी और पीछे बड़े लोग चल रहे थे। रास्ते में लोग फूल बरसा रहे थे। मैं भी अपने पिताजी के साथ थोड़ी दूर तक साथ चला। सबके चेहरों पर खुशी थी — ठीक वैसी ही, जैसी पाठ में साङ्केन की शोभायात्रा में थी।

ध्यान रखने की बात: शोभायात्रा में हमेशा बड़ों के साथ रहिए, सड़क के किनारे चलिए और भीड़ में हाथ छुड़ाकर आगे मत भागिए।
प्र4.
आप नया वर्ष कब और कैसे मनाते हैं?
उत्तर

भारत में नया वर्ष एक ही दिन नहीं मनाया जाता। हर प्रदेश का अपना नया वर्ष है, और वह प्रायः फ़सल कटने या नए मौसम के आने पर पड़ता है।

नए वर्ष का नामकहाँकब
साङ्केनअरुणाचल प्रदेश (चौखाम, नामसाई क्षेत्र)अप्रैल के मध्य में, तीन दिन
गुड़ी पड़वा / उगादिमहाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगानाचैत्र मास का पहला दिन (मार्च–अप्रैल)
बैसाखीपंजाब, हरियाणा13 या 14 अप्रैल
बिहू (रोंगाली)असम14 अप्रैल के आसपास
पोइला बैशाखपश्चिम बंगाल14 या 15 अप्रैल
पुथांडु / विशुतमिलनाडु / केरलअप्रैल के मध्य में
नवरेहकश्मीरचैत्र शुक्ल प्रतिपदा
अंग्रेज़ी नववर्षपूरे देश में1 जनवरी

नमूना उत्तर: हमारे घर में नया वर्ष गुड़ी पड़वा के दिन मनाया जाता है। उस दिन माँ सुबह जल्दी उठकर आँगन में रंगोली बनाती हैं। दरवाज़े पर आम के पत्तों का तोरण बाँधा जाता है और गुड़ी खड़ी की जाती है। हम सब नए कपड़े पहनते हैं, बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं और घर में पूरन-पोली बनती है। शाम को हम दादा-दादी के घर जाते हैं।

ध्यान दीजिए: साङ्केन, बैसाखी, बिहू, पुथांडु और विशु — ये सब अप्रैल के आसपास ही पड़ते हैं। कारण यह है कि उस समय सर्दी बीत चुकी होती है, फ़सल पक जाती है और नया मौसम आरंभ होता है। नया वर्ष असल में नए मौसम की खुशी है।
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