कक्षा ५ हिंदी अध्याय 4 पाठ से के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
साङ्केन क्यों मनाया जाता है? (क) दीपावली पर्व के कारण (ख) नव वर्ष प्रारंभ होने के उपलक्ष्य में (ग) नए मंदिर के उद्घाटन की प्रसन्नता में (घ) बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर
उत्तर

तारे का चिह्न (✱) केवल एक विकल्प पर बनेगा — (ख) नव वर्ष प्रारंभ होने के उपलक्ष्य में।

चाऊतान अपने मुँह से कहता है —
“तुम्हें मालूम नहीं, आज हमारे यहाँ साङ्केन का त्योहार है।
आज से हमारा नया वर्ष आरंभ होता है।”

उपलक्ष्य का अर्थ है — किसी खास अवसर पर, किसी बात की खुशी में।

विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) दीपावली पर्व के कारणग़लतपाठ में दीपावली का नाम एक बार भी नहीं आया। साङ्केन अरुणाचल प्रदेश का त्योहार है और दीपावली उससे बिलकुल अलग त्योहार है।
(ख) नव वर्ष प्रारंभ होने के उपलक्ष्य मेंसही ✱यही उत्तर पाठ में साफ़-साफ़ लिखा है — “आज से हमारा नया वर्ष आरंभ होता है।” आगे चाऊतान यह भी कहता है कि तीन दिन तक इसी तरह साङ्केन मनाया जाता है।
(ग) नए मंदिर के उद्घाटन की प्रसन्नता मेंग़लतयह विकल्प धोखा दे सकता है, क्योंकि गाँव में नया मंदिर सचमुच बना है और उसी में मूर्तियाँ रखी जा रही हैं। पर पढ़िए — मूर्तियाँ मंदिर में तीन दिन के लिए आई हैं और तीसरे दिन वापस बौद्ध-विहार चली जाएँगी। यानी यह साङ्केन की एक रीत है, त्योहार का कारण नहीं।
(घ) बुद्ध पूर्णिमा के अवसर परग़लतपाठ में भगवान बुद्ध की मूर्तियाँ ज़रूर आती हैं, पर ‘बुद्ध पूर्णिमा’ का ज़िक्र कहीं नहीं है। बुद्ध पूर्णिमा अलग दिन होती है। मूर्ति का आना ही किसी त्योहार को बुद्ध पूर्णिमा नहीं बना देता।
उत्तर पकड़ने का तरीका: प्रश्न ‘क्यों’ पूछ रहा है। ऐसे प्रश्न का उत्तर पाठ में प्रायः किसी पात्र की कही हुई बात में मिलता है। यहाँ चाऊतान की बात ही पूरा उत्तर दे देती है।
प्र2.
भगवान बुद्ध का मंदिर कहाँ बना हुआ था? (क) चिकित्सालय के पास (ख) सरोवर के किनारे (ग) नदी के किनारे (घ) समुद्र के किनारे
उत्तर

तारे का चिह्न (✱) बनेगा — (ग) नदी के किनारे।

चाऊतान ने बताया —
“अभी एक-दो दिन पहले ही हमारे गाँव के लोगों ने नदी के किनारे एक मंदिर बनाया है।”
विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) चिकित्सालय के पासग़लत‘चिकित्सालय’ यानी अस्पताल। पाठ में अस्पताल की कोई बात ही नहीं है।
(ख) सरोवर के किनारेग़लत‘सरोवर’ यानी तालाब या झील। पाठ में तालाब नहीं, नदी लिखा है। दोनों में अंतर है — नदी बहती है, सरोवर एक ही जगह ठहरा रहता है।
(ग) नदी के किनारेसही ✱पाठ का वाक्य ज्यों-का-त्यों यही कहता है। इसी कारण ‘भाषा की बात’ के प्रश्न 1 (ख) में भी यही वाक्य दिया गया है।
(घ) समुद्र के किनारेग़लतचौखाम अरुणाचल प्रदेश में है, जो पहाड़ों का प्रदेश है। वहाँ समुद्र है ही नहीं। अरुणाचल प्रदेश की सीमा किसी समुद्र से नहीं लगती।
चारों विकल्प जल-स्थान वाले क्यों हैं? क्योंकि प्रश्न बनाने वाले जाँचना चाहते हैं कि आपने ठीक शब्द पढ़ा या नहीं। नदी, सरोवर और समुद्र — तीनों में पानी है, पर तीनों अलग हैं। पाठ को ध्यान से पढ़ने वाला ही सही शब्द चुन पाएगा।
प्र3.
लोग बहुत देर तक एक-दूसरे पर पानी डालते रहे क्योंकि— (क) उन्हें गरमी लग रही थी। (ख) वे स्नान कर रहे थे। (ग) वे गंदे हो गए थे। (घ) वे साङ्केन मना रहे थे।
उत्तर

तारे का चिह्न (✱) बनेगा — (घ) वे साङ्केन मना रहे थे।

पाठ की पंक्ति —
“फिर तो लोग बहुत देर तक एक-दूसरे पर पानी डालते रहे और साङ्केन मनाते रहे।”
विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) उन्हें गरमी लग रही थी।ग़लतगरमी की बात पाठ में कहीं नहीं है। और गरमी लगने पर कोई दूसरों पर बालटी भर पानी नहीं डालता — वह स्वयं छाँव में बैठता है।
(ख) वे स्नान कर रहे थे।ग़लतस्नान अपने ऊपर पानी डालकर किया जाता है, दूसरों के ऊपर नहीं। यहाँ तो लोग एक-दूसरे पर पानी डाल रहे थे और साथ में चावल का आटा भी लगा रहे थे। यह स्नान नहीं, खेल और उत्सव है।
(ग) वे गंदे हो गए थे।ग़लतपाठ में गंदे होने की कोई बात नहीं। उलटे वे एक-दूसरे के चेहरों पर आटा लगा रहे थे — यानी खुशी में ऐसा कर रहे थे, सफ़ाई के लिए नहीं।
(घ) वे साङ्केन मना रहे थे।सही ✱पाठ यही कहता है। साङ्केन में पानी डालना त्योहार की रीत है, ठीक वैसे ही जैसे होली में रंग डालना।
जानने की बात: साङ्केन में पानी को शुद्ध करने वाला माना जाता है। पहले भगवान बुद्ध की मूर्तियों पर जल चढ़ाया जाता है, फिर लोग एक-दूसरे पर पानी डालते हैं — इसका अर्थ है कि बीते वर्ष की सब कड़वाहट धुल जाए और नया वर्ष साफ़ मन से शुरू हो।
प्र4.
“यहाँ के लोगों के मुखों पर सदैव मुस्कान बनी रहती है।” इस वाक्य का क्या अर्थ है? (क) यहाँ के लोग सदैव प्रसन्न रहते हैं। (ख) यहाँ के लोग सदैव प्रसन्न रहने का अभिनय करते हैं। (ग) यहाँ के लोगों को खेलना-कूदना अच्छा लगता है। (घ) यहाँ के लोगों को नाचना-गाना अच्छा लगता है।
उत्तर

तारे का चिह्न (✱) बनेगा — (क) यहाँ के लोग सदैव प्रसन्न रहते हैं।

वाक्य का सीधा अर्थ यही है। मुख यानी चेहरा, सदैव यानी हमेशा। चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहना यानी मन का हमेशा खुश रहना।

विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) यहाँ के लोग सदैव प्रसन्न रहते हैं।सही ✱यही वाक्य का अर्थ है। पूरा पाठ इसी बात का प्रमाण देता है — चाऊतान के पिताजी सफाई छोड़कर स्वागत करते हैं, माताजी पकवान लाती हैं, शोभायात्रा में सबकी “प्रसन्नता का ठिकाना नहीं था।”
(ख) यहाँ के लोग सदैव प्रसन्न रहने का अभिनय करते हैं।ग़लतअभिनय का अर्थ है — बनावटी ढंग से, नाटक करके। लेखक तो यहाँ के लोगों की तारीफ़ कर रहा है, उन पर बनावट का आरोप नहीं लगा रहा। एक शब्द बदलते ही अर्थ उलटा हो जाता है — यही इस विकल्प का जाल है।
(ग) यहाँ के लोगों को खेलना-कूदना अच्छा लगता है।ग़लतवाक्य मुस्कान की बात कर रहा है, खेल की नहीं। खेलना-कूदना पाठ में कहीं नहीं आया।
(घ) यहाँ के लोगों को नाचना-गाना अच्छा लगता है।ग़लतपाठ में लोग नाचते-गाते ज़रूर हैं, पर वह शोभायात्रा के समय की बात है। इस वाक्य का अर्थ नाचना-गाना नहीं है। प्रश्न वाक्य का अर्थ पूछ रहा है, पाठ की कोई और घटना नहीं।
दो विकल्प इतने मिलते-जुलते क्यों हैं? (क) और (ख) में केवल एक अंतर है — ‘प्रसन्न रहते हैं’ और ‘प्रसन्न रहने का अभिनय करते हैं’। ऐसे प्रश्नों में पूरा विकल्प अंत तक पढ़िए। आधा पढ़कर चुनने पर उत्तर ग़लत हो जाता है।
ध्यान दीजिए: इस पाठ के चारों बहुविकल्पी प्रश्नों में एक-एक ही उत्तर सही निकलता है। फिर भी नियम वही है — पहला सही विकल्प मिलते ही रुकिए मत, बाकी तीनों को भी पाठ से मिलाकर जाँचिए।
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