प्र1.
साङ्केन क्यों मनाया जाता है? (क) दीपावली पर्व के कारण (ख) नव वर्ष प्रारंभ होने के उपलक्ष्य में (ग) नए मंदिर के उद्घाटन की प्रसन्नता में (घ) बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर
उत्तर
तारे का चिह्न (✱) केवल एक विकल्प पर बनेगा — (ख) नव वर्ष प्रारंभ होने के उपलक्ष्य में।
चाऊतान अपने मुँह से कहता है —
“तुम्हें मालूम नहीं, आज हमारे यहाँ साङ्केन का त्योहार है।
आज से हमारा नया वर्ष आरंभ होता है।”
“तुम्हें मालूम नहीं, आज हमारे यहाँ साङ्केन का त्योहार है।
आज से हमारा नया वर्ष आरंभ होता है।”
उपलक्ष्य का अर्थ है — किसी खास अवसर पर, किसी बात की खुशी में।
| विकल्प | सही / ग़लत | कारण |
|---|---|---|
| (क) दीपावली पर्व के कारण | ग़लत | पाठ में दीपावली का नाम एक बार भी नहीं आया। साङ्केन अरुणाचल प्रदेश का त्योहार है और दीपावली उससे बिलकुल अलग त्योहार है। |
| (ख) नव वर्ष प्रारंभ होने के उपलक्ष्य में | सही ✱ | यही उत्तर पाठ में साफ़-साफ़ लिखा है — “आज से हमारा नया वर्ष आरंभ होता है।” आगे चाऊतान यह भी कहता है कि तीन दिन तक इसी तरह साङ्केन मनाया जाता है। |
| (ग) नए मंदिर के उद्घाटन की प्रसन्नता में | ग़लत | यह विकल्प धोखा दे सकता है, क्योंकि गाँव में नया मंदिर सचमुच बना है और उसी में मूर्तियाँ रखी जा रही हैं। पर पढ़िए — मूर्तियाँ मंदिर में तीन दिन के लिए आई हैं और तीसरे दिन वापस बौद्ध-विहार चली जाएँगी। यानी यह साङ्केन की एक रीत है, त्योहार का कारण नहीं। |
| (घ) बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर | ग़लत | पाठ में भगवान बुद्ध की मूर्तियाँ ज़रूर आती हैं, पर ‘बुद्ध पूर्णिमा’ का ज़िक्र कहीं नहीं है। बुद्ध पूर्णिमा अलग दिन होती है। मूर्ति का आना ही किसी त्योहार को बुद्ध पूर्णिमा नहीं बना देता। |
उत्तर पकड़ने का तरीका: प्रश्न ‘क्यों’ पूछ रहा है। ऐसे प्रश्न का उत्तर पाठ में प्रायः किसी पात्र की कही हुई बात में मिलता है। यहाँ चाऊतान की बात ही पूरा उत्तर दे देती है।