वल्लरी को होली की याद इसलिए आई, क्योंकि साङ्केन में लोग वैसे ही खेल रहे थे जैसे होली में खेला जाता है — एक-दूसरे पर पानी डालना और एक-दूसरे के चेहरे पर कुछ लगाना।
“हँसी-खुशी के इस वातावरण में वल्लरी ने देखा कि लोग एक-दूसरे पर बालटियाँ भर-भरकर पानी डाल रहे हैं।
वे एक-दूसरे के चेहरों पर चावल का आटा भी लगा रहे हैं।
वल्लरी को होली की याद आ गई।”
वल्लरी दिल्ली से आई है। वहाँ होली में यही सब होता है — रंगीन पानी डाला जाता है और मुँह पर गुलाल लगाया जाता है। इसीलिए उसने चाऊतान से कहा, “चाऊतान भाई, लगता है कि लोग होली का त्योहार मना रहे हैं।”
| साङ्केन में | होली में |
|---|---|
| बालटियाँ भर-भरकर पानी डालना | एक-दूसरे पर रंगीन पानी फेंकना |
| चेहरों पर चावल का आटा लगाना | मुँह पर गुलाल लगाना |
| घरों में पकवान बनना और मिलना-जुलना | मिठाई-नमकीन बनना और अतिथियों का स्वागत |
| इसी दिन से नया वर्ष आरंभ | होली से ही नया वर्ष आरंभ माना जाता है |