कक्षा ५ हिंदी अध्याय 4 पाठ से के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए— साङ्केन का त्योहार मनाते समय वल्लरी को होली की याद क्यों आई?
उत्तर

वल्लरी को होली की याद इसलिए आई, क्योंकि साङ्केन में लोग वैसे ही खेल रहे थे जैसे होली में खेला जाता है — एक-दूसरे पर पानी डालना और एक-दूसरे के चेहरे पर कुछ लगाना

पाठ की पंक्तियाँ —
“हँसी-खुशी के इस वातावरण में वल्लरी ने देखा कि लोग एक-दूसरे पर बालटियाँ भर-भरकर पानी डाल रहे हैं।
वे एक-दूसरे के चेहरों पर चावल का आटा भी लगा रहे हैं।
वल्लरी को होली की याद आ गई।”

वल्लरी दिल्ली से आई है। वहाँ होली में यही सब होता है — रंगीन पानी डाला जाता है और मुँह पर गुलाल लगाया जाता है। इसीलिए उसने चाऊतान से कहा, “चाऊतान भाई, लगता है कि लोग होली का त्योहार मना रहे हैं।”

साङ्केन मेंहोली में
बालटियाँ भर-भरकर पानी डालनाएक-दूसरे पर रंगीन पानी फेंकना
चेहरों पर चावल का आटा लगानामुँह पर गुलाल लगाना
घरों में पकवान बनना और मिलना-जुलनामिठाई-नमकीन बनना और अतिथियों का स्वागत
इसी दिन से नया वर्ष आरंभहोली से ही नया वर्ष आरंभ माना जाता है
असली बात: वल्लरी ने कोई नई चीज़ नहीं देखी थी — उसने अपनी जानी-पहचानी बात दूसरे रूप में देखी। जब कोई अनजानी जगह की बात हमारी अपनी किसी बात से मिल जाती है, तो वह जगह भी अपनी-सी लगने लगती है।
प्र2.
वल्लरी को चौखाम और दिल्ली में क्या अंतर लगा?
उत्तर

वल्लरी को सबसे बड़ा अंतर यह लगा कि दिल्ली में भीड़ और शोर है, जबकि चौखाम खुला, शांत और हरा-भरा है

पाठ की पंक्तियाँ —
“कहाँ दिल्ली की भीड़भरी सड़कें, हॉर्न बजाती हुई कारें और बसें, आदमियों की लंबी-लंबी कतारें
और कहाँ चौखाम का खुला और शांत वातावरण।
जिधर देखो, हरियाली ही हरियाली और फूल ही फूल।”
बातदिल्लीचौखाम
सड़केंभीड़भरीखुली और शांत
आवाज़कारों और बसों के हॉर्नशांत वातावरण
लोगलंबी-लंबी कतारों में खड़ेचेहरों पर सदैव मुस्कान
चारों ओरइमारतें और गाड़ियाँहरियाली ही हरियाली और फूल ही फूल
भाषा की सुंदरता: लेखक ने “कहाँ … और कहाँ …” का प्रयोग किया है। यह वाक्य-रचना दो चीज़ों का बड़ा अंतर दिखाने के लिए बरती जाती है। जैसे — “कहाँ मिट्टी का घड़ा और कहाँ काँच का गिलास!”
प्र3.
मंदिर की सजावट कैसे की गई थी?
उत्तर

मंदिर की सजावट बाँस, हरी टहनियों और रंग-बिरंगे फूलों से की गई थी। कुछ भी महँगा नहीं लगाया गया था, फिर भी वह बहुत सुंदर लग रहा था।

पाठ की पंक्तियाँ —
“मंदिर की जालीदार दीवारें बाँस और बाँस की खपच्चियों से बनी हुई थीं।
बीच-बीच में पेड़ों की हरी-भरी टहनियाँ लगाई गई थीं
और खोंस-खोंसकर उन पर रंग-बिरंगे फूल सजा दिए गए थे।
इतना सादा और सुंदर मंदिर वल्लरी ने पहले कभी नहीं देखा था।”

सजावट के तीन चरण थे —

  1. दीवारें बाँस और बाँस की पतली खपच्चियों से जाली की तरह बुनी गईं।
  2. उन जालियों के बीच-बीच में पेड़ों की हरी-भरी टहनियाँ लगाई गईं।
  3. उन टहनियों में खोंस-खोंसकर रंग-बिरंगे फूल सजाए गए।
‘सादा और सुंदर’ का अर्थ: मंदिर में न संगमरमर था, न सोना, न बिजली की झालर। जो चीज़ें वहीं आसपास मिलती हैं — बाँस, टहनी और फूल — उन्हीं से सजावट हुई। इसीलिए वल्लरी को वह अनोखा लगा। सुंदरता महँगी चीज़ों से नहीं, सलीके से आती है।
प्र4.
आपको कौन-कौन आशीर्वाद देते हैं? वे क्या आशीर्वाद देते हैं?
उत्तर

यह प्रश्न आपके अपने घर और आसपास का है। उत्तर में दो बातें लिखिए — कौन आशीर्वाद देता है, और वह क्या कहकर देता है।

पाठ में भी आशीर्वाद आया है। चाऊतान के पिताजी बताते हैं कि गाँव के लोग बौद्ध-विहार जाकर भिक्षुओं को दंडवत प्रणाम करेंगे और भिक्षु आशीर्वाद देंगे —

“खेती फूले-फले तुम्हारी,
तुम्हें न हो कोई बीमारी।
हिल-मिलकर सब नाचें-गाएँ,
नए साल में खुशी मनाएँ।”

देखिए, इस आशीर्वाद में तीन कामनाएँ हैं — अच्छी फ़सल, अच्छा स्वास्थ्य और आपस का मेल-जोल। ये तीनों ही किसी गाँव के जीवन की सबसे बड़ी ज़रूरतें हैं।

कौन आशीर्वाद देते हैंप्रायः क्या कहते हैं
दादा-दादी, नाना-नानी“खूब पढ़ो, नाम रोशन करो।” “दूध पीते रहो, हट्टे-कट्टे रहो।”
माता-पिता“ख़ुश रहो।” “सदा आगे बढ़ो।”
बड़े भाई-बहन, ताऊजी-ताईजी, बुआजी“जीते रहो।” “परीक्षा अच्छी जाए।”
शिक्षक“ख़ूब मन लगाकर पढ़ो।” “ईमानदार बने रहो।”
पड़ोस के बुज़ुर्ग“ईश्वर तुम्हें स्वस्थ रखे।” “सदा सुखी रहो।”

नमूना उत्तर: मुझे मेरे दादाजी, दादीजी, माता-पिता और शिक्षक आशीर्वाद देते हैं। जब मैं सुबह दादीजी के पैर छूता हूँ तो वे सिर पर हाथ रखकर कहती हैं — “ख़ूब पढ़ो और स्वस्थ रहो।” त्योहार पर ताऊजी कहते हैं — “जीते रहो, ख़ुश रहो।” मुझे यह बहुत अच्छा लगता है, क्योंकि इससे लगता है कि सब मेरा भला चाहते हैं।

प्र5.
नीचे पाठ की कुछ पंक्तियों के भावार्थ दिए गए हैं। उदाहरण के अनुसार पाठ की उन पंक्तियों को लिखिए जो दिए गए भावार्थ पर आधारित हैं— (भावार्थ: शोभायात्रा में लोग बहुत प्रसन्न दिखाई दे रहे थे। / मंदिर सुंदर सजा था। / ऐसा लगता है कि लोग होली का त्योहार मना रहे हैं। / त्योहारों में सब एक-दूसरे से मिलते-जुलते हैं।)
उत्तर

पहली पंक्ति पुस्तक में उदाहरण के रूप में भरी हुई है। बाकी तीनों खाने नीचे भरे गए हैं। भावार्थ का अर्थ है — किसी पंक्ति में जो बात कही गई है, उसका सार।

भावार्थपाठ की पंक्तियाँ
शोभायात्रा में लोग बहुत प्रसन्न दिखाई दे रहे थे।“शोभायात्रा में सब लोग नाचते-गाते हुए जा रहे थे। लोगों में बहुत उत्साह था।” (उदाहरण — पुस्तक में दिया हुआ)
मंदिर सुंदर सजा था।“मंदिर की जालीदार दीवारें बाँस और बाँस की खपच्चियों से बनी हुई थीं। बीच-बीच में पेड़ों की हरी-भरी टहनियाँ लगाई गई थीं और खोंस-खोंसकर उन पर रंग-बिरंगे फूल सजा दिए गए थे।”
ऐसा लगता है कि लोग होली का त्योहार मना रहे हैं।“वल्लरी ने देखा कि लोग एक-दूसरे पर बालटियाँ भर-भरकर पानी डाल रहे हैं। वे एक-दूसरे के चेहरों पर चावल का आटा भी लगा रहे हैं। वल्लरी को होली की याद आ गई।”
त्योहारों में सब एक-दूसरे से मिलते-जुलते हैं।“होली के दूसरे दिन लोग एक-दूसरे से मिलने जाते हैं। उस दिन लोग घरों में कई प्रकार की मिठाइयाँ और नमकीन बनाते हैं और अतिथियों का स्वागत करते हैं।”
एक और सही उत्तर: चौथे खाने में चाऊतान की यह बात भी लिखी जा सकती है — “आज शाम को हम लोग भी अपने ताऊजी के यहाँ जाएँगे। … कल मेरी बुआजी और मेरे फूफाजी भी हमारे यहाँ आएँगे।” यह भी मिलने-जुलने की ही बात है।
ऐसे प्रश्न कैसे हल करें — तीन चरण:
चरण 1 — भावार्थ में से मुख्य शब्द छाँटिए (जैसे ‘मंदिर’, ‘सजा’)।
चरण 2 — पाठ में उसी शब्द को ढूँढ़िए।
चरण 3 — उस शब्द के आसपास की पूरी पंक्तियाँ ज्यों-की-त्यों लिखिए। अपने शब्द मत जोड़िए — प्रश्न ‘पाठ की पंक्तियाँ’ माँग रहा है।
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