कक्षा ५ हिंदी अध्याय 5 सुंदरिया के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

सुंदरिया एक कहानी है। इसके रचनाकार जैनेंद्र कुमार हैं — यह नाम कहानी के अंत में पृष्ठ 50 पर छपा है। जैनेंद्र कुमार हिंदी के प्रसिद्ध कहानीकार और उपन्यासकार थे। उनकी कहानियाँ मन के भीतर के भावों को बहुत सादगी से कहती हैं। यह कहानी भी वैसी ही है। कहानी हरियाणा के एक गाँव से शुरू होती है। वहाँ हीरासिंह नाम का एक किसान रहता है। वह गरीब है। उसकी समझ में यह नहीं आता कि वह अपने बीवी-बच्चों और अपनी प्यारी गाय सुंदरिया की परवरिश — यानी पालन-पोषण — कैसे करे। सुंदरिया साधारण गाय नहीं है। वह डील-डौल यानी शरीर के आकार में काफी बड़ी है। उसे देखकर लोगों को ईर्ष्या होती है। वह पंद्रह सेर दूध देती है। हीरासिंह उसे ‘दूध देने में कामधेनु’ कहता है। हीरासिंह का बड़ा लड़का जवाहरसिंह उसे मौसी कहकर बुलाता है। यानी गाय घर की सदस्य जैसी है। गरीबी के कारण हीरासिंह चारा तक नहीं जुटा पाता। वह नौकरी की तलाश में दिल्ली

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दअर्थपाठ की पंक्तिअपने वाक्य में प्रयोग
परवरिशपालन-पोषण, देखभाल“वह अपने बीवी-बच्चों और अपनी प्यारी गाय सुंदरिया की परवरिश कैसे करे?”दादी ने अपने पोते की परवरिश बड़े प्यार से की।
डील-डौलशरीर का आकार और गठन“सुंदरिया गाय डील-डौल में काफी बड़ी थी।”पहलवान का डील-डौल देखकर सब चौंक गए।
ईर्ष्यादूसरे के पास अच्छी चीज़ देखकर होने वाली जलन“उसे देखकर लोगों को ईर्ष्या होती थी।”अच्छे दोस्त एक-दूसरे से ईर्ष्या नहीं करते।
चारापशुओं का खाना — घास, भूसा आदि“गरीबी के कारण हीरासिंह गाय का चारा भी नहीं जुटा पाता था।”सुबह-सुबह किसान भैंस के आगे चारा डालता है।
बंदोबस्तप्रबंध, इंतज़ाम“एक गाय का बंदोबस्त कर दो।”बारिश आने से पहले छत का बंदोबस्त कर लो।
निगाहनज़र, दृष्टि“एक है मेरी निगाह में।”मेरी निगाह में यह किताब सबसे अच्छी है।
कामधेनुकथाओं की वह गाय जो माँगी हुई हर चीज़ दे देती थी; बहुत दूध देने वाली गाय“गाय तो ऐसी है कि दूध देने में कामधेनु।”हमारी काली गाय तो दूध देने में कामधेनु है।
सेरवज़न और मात्रा नापने की एक पुरानी भारतीय इकाई (लगभग एक किलो के बराबर)“पंद्रह सेर दूध उसके तले उतरता है।”पहले लोग आटा सेर में तौलकर लाते थे।
लाज से गड़ जानाबहुत शर्मिंदा हो जाना“हीरासिंह लाज से गड़ गया।”झूठ पकड़े जाने पर मोहन लाज से गड़ गया।
सिपुर्दसौंपना, हवाले करना“घोसी को बुलाकर सेठ जी ने गाय उसके सिपुर्द कर दी।”चाबी मैंने चौकीदार के सिपुर्द कर दी।
घोसीदूध दुहने और पशु सँभालने वाला व्यक्ति; ग्वाला“हीरासिंह ने घोसी से कहा — ‘बालटी लाओ।’”घोसी सवेरे-सवेरे गाय दुहने आ जाता है।
सानी-पानीपशु को दिया जाने वाला भीगा चारा और पानी“हीरासिंह ने खुद उसे सानी-पानी दिया।”भैया रोज़ बछड़े को सानी-पानी देता है।
दुहनापशु का दूध निकालना“अपने हाथों से दुहा।”नानी अब भी खुद गाय दुहती हैं।
ड्योढ़ीघर के मुख्य दरवाज़े के भीतर की जगह, देहरी“बहुत-सा दूध ड्योढ़ी में बिखरा हुआ था।”अम्मा ड्योढ़ी में बैठकर हमारा रास्ता देखती थीं।
तनख्वाहकाम के बदले मिलने वाला महीने का वेतन“चाहे तनख्वाह कम कर दीजिए।”पिताजी को हर महीने की पहली तारीख़ को तनख्वाह मिलती है।
चाकरीनौकरी, सेवा“जितने महीने चाहें कसकर चाकरी करवाएँ।”उसने बरसों तक इस दुकान में चाकरी की।
बिछोहबिछड़ने का दुख, जुदाई(अभ्यास ‘पाठ से’ प्रश्न 3 में)गाँव छोड़ते समय बिछोह का दुख सबसे बड़ा होता है।
रुसवाईअपमान, बदनामी“सुंदरिया, मेरी रुसवाई क्यों कराती है?”सच बोलने वाले को कभी रुसवाई नहीं झेलनी पड़ती।
ओछी करनाहलका दिखाना, नीचा दिखाना“सुंदरिया, देख... मेरी ओछी मत करा।”भरी सभा में किसी की ओछी मत करो।
मसनूईबनावटी, बनाई हुई“ऐसी मसनूई बातें औरों से कहना।”उसकी मुस्कान मसनूई थी, दिल से नहीं थी।
करतूतबुरा काम, हरकत“खबर लगाओ कि वह कौन आदमी है, जिसकी करतूत है?”शीशा किसकी करतूत से टूटा, यह पता लगाइए।
सरासरबिलकुल, पूरी तरह“यह तो सरासर धोखा है।”बिना सुने सज़ा देना सरासर अन्याय है।
मरम्मतटूटी चीज़ को ठीक कराना“काफी रुपया मकान की मरम्मत में लग गया था।”बारिश से पहले छत की मरम्मत करा लीजिए।
पुचकारनाप्यार से थपथपाकर या मीठी आवाज़ से बुलाना“उसने गाय को पुचकारकर कहा।”माँ ने रोते बच्चे को पुचकारकर चुप कराया।
एकटक देखनाबिना पलक झपकाए लगातार देखना“हीरासिंह एकटक देखता रहा।”बच्चा आसमान में उड़ते हवाई जहाज़ को एकटक देखता रहा।
जी भर जानामन भर आना, रोने को हो आना“रुपए तो ले लिए लेकिन हीरासिंह का जी भरा जा रहा था।”विदाई के समय सबका जी भर आया।
आँख लगनानींद आ जाना“कब आँख लगी, कुछ पता नहीं।”पढ़ते-पढ़ते कब आँख लग गई, पता ही नहीं चला।
विह्वलभावुक और बेचैन“देखकर हीरासिंह विह्वल हो उठा।”माँ की चिट्ठी पढ़कर वह विह्वल हो उठा।
क्षमा याचनामाफ़ी माँगना“मानो क्षमा याचना कर रही हो।”गलती हो जाए तो क्षमा याचना कर लेनी चाहिए।
अपराधिनीगलती करने वाली स्त्री“मैं अपराधिनी हूँ।”उसने खुद को अपराधिनी मानकर सिर झुका लिया।
दुखियादुखी, दुख भोगने वाली“मैं बड़ी दुखिया हूँ।”वह दुखिया माँ रात-भर जागती रही।
थपथपानाहलके-हलके हाथ मारकर दुलारना“हीरासिंह ने उसे थपथपाया।”कोच ने खिलाड़ी की पीठ थपथपाई।
चौकीदारपहरा देने वाला“उसे एक सेठ के यहाँ चौकीदार की नौकरी मिल गई।”रात-भर चौकीदार गली में पहरा देता है।
  1. बातचीत के लिए
  2. पाठ से
  3. सोचिए और लिखिए
  4. सुंदरिया और हीरासिंह
  5. समझ और अनुभव
  6. अनुमान और कल्पना
  7. भाषा की बात
  8. पाठ से आगे
  9. कल्पना की उड़ान
  10. नाटक-मंचन
  11. बूझो पहेली
  12. पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत
  13. भूल-भुलैया
  14. हाथी और चींटी
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