कक्षा ५ हिंदी अध्याय 5 अनुमान और कल्पना के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
गाय का नाम ‘सुंदरिया’ किसने एवं क्यों रखा होगा?
उत्तर

यह नाम सबसे अधिक संभव है कि हीरासिंह के परिवार ने रखा होगा — शायद जवाहरसिंह ने या उसकी माँ ने। और नाम इसलिए रखा होगा, क्योंकि गाय देखने में बहुत सुंदर थी।

‘सुंदरिया’ शब्द को तोड़कर देखिए —
सुंदर + इया = सुंदरिया
‘इया’ लगने से नाम में प्यार और अपनापन आ जाता है।
यह अनुमान क्यों ठीक बैठता है:
  • पाठ कहता है — “उसे देखकर लोगों को ईर्ष्या होती थी।” यानी वह सचमुच सुंदर थी।
  • सेठ ने भी सोचा — “सचमुच वैसी सुंदर, स्वस्थ गाय उन्होंने अब तक न देखी थी।”
  • गाँवों में पशुओं के नाम उनके रंग-रूप या स्वभाव से ही रखे जाते हैं — कालिया, गौरी, चंदा, लाली।

नाम रखने वाला वही होता है जो पशु को सबसे ज़्यादा प्यार करता है। इस घर में वह जवाहरसिंह था, जो उसे मौसी कहकर बुलाता था। इसलिए बहुत संभव है कि नाम भी उसी का दिया हुआ हो।

प्र2.
हीरासिंह के घर से सुंदरिया की विदाई के दृश्य की कल्पना कीजिए।
उत्तर

यह दृश्य कहानी में लिखा नहीं है, इसलिए इसे आपको अपनी कल्पना से लिखना है। एक अच्छे उत्तर में ये चार बातें होनी चाहिए — जगह और समय, घर के लोगों के भाव, गाय के हाव-भाव, और अंत में विदाई का पल

नमूना उत्तर:

सवेरे का समय था। सूरज अभी ठीक से निकला भी नहीं था।
हीरासिंह ने आँगन में खूँटे से सुंदरिया की रस्सी खोली।

जवाहरसिंह दौड़कर आया और गाय के गले से लिपट गया। वह बोला — “मौसी को मत ले जाइए, पिताजी।” उसकी माँ ने उसे पीछे खींच लिया, पर उसकी आँखें भी भरी हुई थीं। छोटे भाई-बहन दरवाज़े की ओट से देख रहे थे।

माँ ने अंदर से एक रोटी और गुड़ लाकर सुंदरिया को खिलाया। उसके माथे पर हाथ फेरा और धीरे से कहा — “अच्छे घर जा रही है, दुखी मत होना।” सुंदरिया ने रोटी तो ले ली, पर चबाना भूल गई।

गाय ने दरवाज़े तक जाकर एक बार मुड़कर आँगन की ओर देखा। फिर लंबी-सी रँभाहट निकाली। गोशाला में बँधा दूसरा पशु भी जवाब में रँभा उठा। पड़ोस की कुछ औरतें बाहर आ गईं। किसी ने कहा — “ऐसी गाय फिर न मिलेगी।”

हीरासिंह ने रस्सी थामी और मुँह फेर लिया, ताकि कोई उसके आँसू न देख ले। जवाहरसिंह गली के मोड़ तक पीछे-पीछे दौड़ता रहा। मोड़ पर आकर सुंदरिया एक बार फिर रुकी, पीछे देखा और तब धीरे-धीरे आगे बढ़ गई।

लिखने का तरीका: दृश्य लिखते समय आँखों-देखा हाल की तरह लिखिए। ‘सब दुखी थे’ मत लिखिए — लिखिए कि कौन क्या कर रहा था। इसी से पाठक को दुख दिखाई देता है।
प्र3.
सुंदरिया को वापस घर लेकर जाते हुए हीरासिंह को कैसा लग रहा होगा एवं क्यों?
उत्तर

हीरासिंह को उस समय दो तरह के भाव एक साथ हुए होंगे — गहरा संतोष और साथ ही थोड़ी चिंता

भावक्यों
संतोष और सुखउसने वही किया जो उसका मन कह रहा था। रात-भर की बेचैनी अब खत्म हो गई थी। सुंदरिया फिर से उसके साथ थी।
हलकापनउसका ‘जी भर’ रहा था, आँसू रुक नहीं रहे थे। अब वह बोझ उतर गया। जैसे कोई गलती सुधार ली हो।
जवाहरसिंह की खुशी की कल्पनाउसे यह सोचकर अच्छा लग रहा होगा कि बेटा अपनी ‘मौसी’ को देखकर कैसे दौड़ता हुआ आएगा।
चिंतारुपए तो खर्च हो चुके थे। अब महीनों तक तनख्वाह में से कटौती होगी। घर कैसे चलेगा — यह डर भी साथ चल रहा होगा।
गाय के लिए फ़िक्रगाँव में फिर चारे की तंगी होगी। पर यह सोचकर वह मन को समझा लेता होगा कि भूखी रहकर भी गाय अपने घर में खुश रहेगी।
सबसे बड़ा भाव कौन-सा है: संतोष। क्योंकि उसने खुद कहा — “जितने महीने चाहें कसकर चाकरी करवाएँ, पर गाय आज ही यहाँ से गाँव चली जाएगी।” जो आदमी अपनी मेहनत देकर भी कुछ पाना चाहे, उसे वह चीज़ पाकर सबसे बड़ा सुख मिलता है।
क्या यह उपयोगी रहा?