यह नाम सबसे अधिक संभव है कि हीरासिंह के परिवार ने रखा होगा — शायद जवाहरसिंह ने या उसकी माँ ने। और नाम इसलिए रखा होगा, क्योंकि गाय देखने में बहुत सुंदर थी।
सुंदर + इया = सुंदरिया
‘इया’ लगने से नाम में प्यार और अपनापन आ जाता है।
- पाठ कहता है — “उसे देखकर लोगों को ईर्ष्या होती थी।” यानी वह सचमुच सुंदर थी।
- सेठ ने भी सोचा — “सचमुच वैसी सुंदर, स्वस्थ गाय उन्होंने अब तक न देखी थी।”
- गाँवों में पशुओं के नाम उनके रंग-रूप या स्वभाव से ही रखे जाते हैं — कालिया, गौरी, चंदा, लाली।
नाम रखने वाला वही होता है जो पशु को सबसे ज़्यादा प्यार करता है। इस घर में वह जवाहरसिंह था, जो उसे मौसी कहकर बुलाता था। इसलिए बहुत संभव है कि नाम भी उसी का दिया हुआ हो।