कक्षा ५ हिंदी अध्याय 5 भाषा की बात के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
नीचे दिए गए मुहावरों का प्रयोग कहानी में किया गया है। कहानी में इन्हें ढूँढ़िए और इनके अर्थ लिखकर अपनी लेखन-पुस्तिका में वाक्य बनाइए— लाज से गड़ जाना
उत्तर

अर्थ — बहुत शर्मिंदा हो जाना; शर्म के मारे किसी से आँख न मिला पाना।

कहानी में यह पंक्ति पृष्ठ 47 पर है —
“हीरासिंह लाज से गड़ गया कि वह कैसे बताए कि सुंदरिया उसके परिवार का अंग है।”
वहाँ शर्म क्यों आई: सेठ धनी था और हीरासिंह उसका नौकर। अपने सेठ के सामने यह कहना कि “एक गाय मेरे लिए परिवार जैसी है” — उसे बहुत छोटा और कमज़ोर लगा। इसलिए वह चुप रह गया।

अपने वाक्य —

  • चोरी पकड़ी जाने पर मोहन लाज से गड़ गया।
  • पूरी कक्षा के सामने अपनी गलती सुनकर वह लाज से गड़ गई।
प्र2.
मुहावरा — दूध देने में कामधेनु
उत्तर

अर्थ — बहुत अधिक दूध देने वाली गाय। कामधेनु पुरानी कथाओं की वह गाय है जो माँगी हुई हर चीज़ दे देती थी। इसलिए जो गाय खूब दूध दे, उसे कामधेनु कहा जाता है।

कहानी में यह पंक्ति पृष्ठ 46 पर है —
“गाय तो ऐसी है कि दूध देने में कामधेनु। पंद्रह सेर दूध उसके तले उतरता है।”

यह बात हीरासिंह सेठ से कहता है। वह गाय की तारीफ़ इसी एक शब्द में कर देता है।

अपने वाक्य —

  • चाचा जी की भैंस तो दूध देने में कामधेनु है।
  • हमारी गौशाला की लाली दूध देने में कामधेनु मानी जाती है।
प्र3.
मुहावरा — जी भर जाना
उत्तर

अर्थ — मन भर आना; दुख या प्यार के कारण रोने जैसा हो जाना।

कहानी में यह पंक्ति पृष्ठ 48 पर है —
“रुपए तो ले लिए लेकिन हीरासिंह का जी भरा जा रहा था।”
ध्यान दीजिए: ‘जी भर जाना’ और ‘जी भरकर खाना’ एक बात नहीं है। ‘जी भरकर’ का अर्थ है — मन भर जाने तक, यानी खूब। पर ‘जी भर आना/जाना’ का अर्थ है — रोना आ जाना। यहाँ दूसरा अर्थ है, क्योंकि हीरासिंह दुखी था।

अपने वाक्य —

  • दादी को स्टेशन पर छोड़ते समय मेरा जी भर आया।
  • पुरानी तस्वीरें देखकर माँ का जी भर गया।
प्र4.
मुहावरा — एकटक देखना
उत्तर

अर्थ — बिना पलक झपकाए लगातार देखते रहना।

कहानी में यह पंक्ति पृष्ठ 48 पर है —
“घोसी के पीछे-पीछे चली गई। हीरासिंह एकटक देखता रहा।”

‘टक’ का अर्थ है नज़र। ‘एक-टक’ यानी एक ही नज़र से — नज़र हटाए बिना। हीरासिंह गाय को जाते हुए तब तक देखता रहा, जब तक वह दिखती रही।

अपने वाक्य —

  • बच्चा आसमान में उड़ते हवाई जहाज़ को एकटक देखता रहा।
  • वह चित्र इतना सुंदर था कि सब उसे एकटक देखते रह गए।
प्र5.
मुहावरा — आँख लगना
उत्तर

अर्थ — नींद आ जाना; सो जाना।

कहानी में यह पंक्ति पृष्ठ 50 पर है —
“हीरासिंह चुपचाप अपनी कोठरी में जाकर लुढ़क गया। कब आँख लगी, कुछ पता नहीं।”
यहाँ यह मुहावरा क्यों सुंदर लगता है: हीरासिंह इतना दुखी और थका हुआ था कि उसे पता ही नहीं चला कि वह कब सो गया। ‘वह सो गया’ लिखने से यह बात नहीं आती। ‘कब आँख लगी, कुछ पता नहीं’ से थकान भी दिखती है और मन का बोझ भी।

अपने वाक्य —

  • पढ़ते-पढ़ते कब आँख लग गई, पता ही नहीं चला।
  • बस में सफ़र करते हुए मेरी आँख लग गई।
प्र6.
नीचे कुछ वाक्य दिए गए हैं। वाक्यों में रेखांकित शब्द से मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द चुनकर वाक्य पुनः लिखिए— सुंदरिया की सुंदरता से कई लोगों को जलन होती थी। (प्रसन्नता/ईर्ष्या)
उत्तर

सही शब्द है — ईर्ष्या

नया वाक्य —
सुंदरिया की सुंदरता से कई लोगों को ईर्ष्या होती थी।

जलन और ईर्ष्या — दोनों का अर्थ एक ही है: दूसरे के पास कोई अच्छी चीज़ देखकर मन में होने वाली कुढ़न।

प्रसन्नता क्यों नहीं: प्रसन्नता का अर्थ है खुशी। खुशी और जलन एक-दूसरे के उलट हैं। यहाँ लोग खुश नहीं थे, वे कुढ़ रहे थे।

पाठ से मिलाइए: कहानी में यही बात इन शब्दों में है — “उसे देखकर लोगों को ईर्ष्या होती थी।”
प्र7.
वहाँ की गायें अच्छी होती हैं। एक गाय का बंदोबस्त कर दो। (प्रबंध/संकेत)
उत्तर

सही शब्द है — प्रबंध

नया वाक्य —
वहाँ की गायें अच्छी होती हैं। एक गाय का प्रबंध कर दो।

बंदोबस्त और प्रबंध — दोनों का अर्थ है: इंतज़ाम करना, व्यवस्था कर देना।

संकेत क्यों नहीं: संकेत का अर्थ है इशारा। सेठ हीरासिंह से इशारा नहीं माँग रहा — वह चाहता है कि गाय का इंतज़ाम हो जाए।

देखिए: ‘प्रबंध’ शब्द इसी पाठ के ‘पाठ से’ प्रश्न 2 (ख) में भी आया है — “सुंदरिया के लिए चारे का प्रबंध करना कठिन हो गया था।”
प्र8.
सुंदरिया मेरी रुसवाई क्यों कराती है? (प्रशंसा/अपमान)
उत्तर

सही शब्द है — अपमान

नया वाक्य —
सुंदरिया मेरा अपमान क्यों कराती है?

रुसवाई का अर्थ है — अपमान, बदनामी। पुस्तक ने पृष्ठ 50 के ‘शिक्षण-संकेत’ में स्वयं यह अर्थ दिया है।

प्रशंसा क्यों नहीं: प्रशंसा का अर्थ है तारीफ़। यहाँ तो हीरासिंह दुखी है — सेठ उसे धोखेबाज़ कह रहा है। तारीफ़ की बात कहीं नहीं है।

वाक्य बनाते समय ध्यान: ‘मेरी रुसवाई’ कहेंगे, पर ‘मेरा अपमान’ कहेंगे — क्योंकि ‘रुसवाई’ स्त्रीलिंग है और ‘अपमान’ पुल्लिंग। शब्द बदलने पर वाक्य के दूसरे शब्द भी बदल जाते हैं।
प्र9.
सुंदरिया को देखकर हीरासिंह विह्वल हो उठा। (भावुक/प्रसन्न)
उत्तर

सही शब्द है — भावुक

नया वाक्य —
सुंदरिया को देखकर हीरासिंह भावुक हो उठा।

विह्वल का अर्थ है — भावों से भरा हुआ, बेचैन; ऐसा कि अपने पर काबू न रहे।

प्रसन्न क्यों नहीं: प्रसन्न का अर्थ है खुश। पर पाठ आगे कहता है — “उसके आँसू रोके न रुके। वह सुंदरिया की गर्दन से लिपट देर तक सिसकता रहा।” जो आदमी सिसक रहा हो, वह प्रसन्न नहीं होता।

प्र10.
आप मुझसे जितने महीने चाहें, कसकर चाकरी करवाएँ। (नौकरी/बागवानी)
उत्तर

सही शब्द है — नौकरी

नया वाक्य —
आप मुझसे जितने महीने चाहें, कसकर नौकरी करवाएँ।

चाकरी का अर्थ है — नौकरी, सेवा। यह एक पुराना शब्द है।

बागवानी क्यों नहीं: बागवानी का अर्थ है बाग-बगीचे की देखभाल करना। हीरासिंह माली नहीं, चौकीदार था। वह सेठ से कह रहा है कि वे उससे जितने महीने चाहें काम करा लें।

‘कसकर’ का अर्थ: यहाँ इसका अर्थ है — जी भरकर, पूरी सख़्ती से। यानी “मुझसे खूब काम लीजिए, पर गाय छोड़ दीजिए।”
प्र11.
कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ आया? अपने विचार समूह में साझा कीजिए— रुपए तो ले लिए लेकिन हीरासिंह का जी भरा जा रहा था।
उत्तर

अर्थ — हीरासिंह को गाय के रुपए तो मिल गए, पर उसका मन भर आया। उसे खुशी नहीं हुई, दुख हुआ।

यह वाक्य क्या बताता है: इस एक वाक्य में दो उलटी बातें साथ रखी गई हैं — ‘रुपए मिले’ और ‘मन भर आया’। बीच में ‘लेकिन’ लगाकर लेखक कह देता है कि रुपया सुख नहीं देता। जिस चीज़ से हमारा दिल जुड़ा हो, उसके बदले में मिला पैसा भी बोझ जैसा लगता है।

यह वाक्य पूरी कहानी की ‘चाबी’ है। इसके तुरंत बाद हीरासिंह कहता है — “गाय की नौकरी पर मुझे लगा दीजिए। चाहे तनख्वाह कम कर दीजिए।” यानी वह रुपया घटवाने को तैयार है, पर गाय से दूर नहीं होना चाहता।

मेरे विचार: कुछ चीज़ें बिक तो जाती हैं, पर मन से नहीं जातीं। हीरासिंह के हाथ में रुपए थे और आँखों में आँसू।

प्र12.
गाय की नौकरी पर मुझे लगा दीजिए। चाहे तनख्वाह कम कर दीजिए।
उत्तर

अर्थ — हीरासिंह सेठ से कह रहा है कि उसे गाय की देखभाल का काम दे दिया जाए। इसके लिए वह कम वेतन लेने को भी तैयार है।

इसमें कितनी बड़ी बात छिपी है: दुनिया में हर आदमी ज़्यादा तनख्वाह माँगता है। हीरासिंह कम तनख्वाह माँग रहा है। वह भी उस समय, जब उसके घर में खाने की कमी है। इसका सीधा अर्थ है कि उसके लिए सुंदरिया का साथ रुपए से भी बड़ा है।

‘गाय की नौकरी’ कहना भी बहुत सुंदर है। वह ऐसे कह रहा है जैसे गाय कोई मालिक हो और वह उसका नौकर बनना चाहता हो।

मेरे विचार: यह वाक्य बताता है कि सच्चा प्यार सौदा नहीं करता। हीरासिंह गाय बेचकर भी उसे छोड़ना नहीं चाहता — वह बस पास रहना चाहता है।

आगे क्या हुआ: सेठ ने मना कर दिया। उसने कहा कि हीरासिंह जैसा ईमानदार चौकीदार दूसरा नहीं मिलेगा और उसे ड्योढ़ी पर ही रहना होगा। तनख्वाह वह एक रुपया और बढ़ाने को तैयार था — पर काम वही रहेगा।
प्र13.
गाय ने उसकी ओर देखा। जैसे पूछना चाहती थी — “क्या सचमुच ही इसके साथ चली जाऊँ?”
उत्तर

अर्थ — गाय बोल नहीं सकती थी, पर उसकी आँखें हीरासिंह से पूछ रही थीं कि क्या उसे सचमुच घोसी के साथ चला जाना है।

लेखक ने यह कैसे कहा: ध्यान दीजिए — लेखक ने यह नहीं लिखा कि ‘गाय ने पूछा’। उसने लिखा है ‘जैसे पूछना चाहती थी’। यानी गाय ने कुछ कहा नहीं, बस देखा। पर उस देखने में इतना कुछ था कि हीरासिंह समझ गया। यही इस कहानी की सबसे बड़ी बात है — पशु भी हमसे बात करते हैं, बस उनकी भाषा शब्दों की नहीं होती।

इस वाक्य के बाद हीरासिंह ने उसे थपथपाया, तब वह घोसी के पीछे चली गई। यानी गाय ने उसकी ‘हाँ’ का इंतज़ार किया।

मेरे विचार: यह वाक्य पढ़कर लगता है जैसे गाय एक भरोसा माँग रही हो। और सबसे दुखद बात यह है कि हीरासिंह उसे ‘हाँ’ कहता है, जबकि उसका अपना मन ‘ना’ कह रहा है।

प्र14.
फिर गाय के गले पर सिर रखकर बोला — “सुंदरिया, देख... मेरी ओछी मत करा। मैं दूर हूँ तो क्या! इसमें मुझे सुख है?”
उत्तर

अर्थ — हीरासिंह गाय से विनती कर रहा है कि वह उसे नीचा न दिखाए। वह कह रहा है — मैं दूर ज़रूर हूँ, पर इससे मुझे कोई सुख नहीं मिल रहा।

ओछी करना का अर्थ है — किसी को हलका दिखाना, उसकी बात छोटी कर देना। गाय दूध नहीं दे रही थी, इसलिए सेठ हीरासिंह को झूठा समझ रहा था।

यहाँ हीरासिंह क्या कर रहा है: वह गाय को डाँट नहीं रहा। वह उससे ऐसे बात कर रहा है जैसे किसी अपने से करते हैं — गले पर सिर रखकर, धीरे से। और अपनी सफ़ाई भी दे रहा है — “मैं दूर हूँ तो क्या! इसमें मुझे सुख है?” यानी “मैं भी अपनी मर्ज़ी से दूर नहीं हुआ हूँ, मैं भी दुखी हूँ।”

मेरे विचार: यह वाक्य पढ़कर लगता है कि दोनों एक-दूसरे को समझा रहे हैं और दोनों ही मजबूर हैं। यही मजबूरी कहानी को इतना छूने वाला बना देती है।

प्र15.
रेखांकित शब्द किसके लिए प्रयोग किए गए हैं? पहचानकर लिखिए— उसे एक सेठ के यहाँ चौकीदार की नौकरी मिल गई। (रेखांकित — उसे)
उत्तर

यह उदाहरण पुस्तक में पहले से भरा हुआ है — हीरासिंह के लिए

पूरा वाक्य पाठ में इस तरह है —
“नौकरी की तलाश में वह दिल्ली चला आया। वहाँ उसे एक सेठ के यहाँ चौकीदार की नौकरी मिल गई।”
पहचानने का तरीका: ‘उसे’, ‘वह’, ‘उसके’, ‘उन्होंने’ जैसे शब्द सर्वनाम कहलाते हैं। सर्वनाम किसी नाम की जगह आता है। यह जानने के लिए कि वह किसकी जगह आया है, उससे पहले वाला वाक्य पढ़िए। यहाँ पहले वाक्य में ‘वह दिल्ली चला आया’ है और उससे भी पहले हीरासिंह का नाम है। इसलिए ‘उसे’ = हीरासिंह।
प्र16.
उसे देखकर लोगों को ईर्ष्या होती थी। (रेखांकित — उसे)
उत्तर

सुंदरिया (गाय) के लिए।

पाठ में इससे पहले का वाक्य —
“सुंदरिया गाय डील-डौल में काफी बड़ी थी। उसे देखकर लोगों को ईर्ष्या होती थी।”

ठीक पहले वाले वाक्य में ‘सुंदरिया गाय’ लिखा है। इसलिए ‘उसे’ सुंदरिया के लिए ही आया है।

ध्यान दीजिए: प्र.4 (क) में भी ‘उसे’ था और यहाँ भी ‘उसे’ है, पर दोनों अलग-अलग के लिए हैं। इसीलिए सर्वनाम पढ़ते समय आस-पास का वाक्य देखना ज़रूरी होता है।
प्र17.
वह कैसे बताए कि सुंदरिया उसके परिवार का अंग है। (रेखांकित — वह, उसके)
उत्तर

दोनों रेखांकित शब्द हीरासिंह के लिए आए हैं।

रेखांकित शब्दकिसके लिएकैसे पता चला
वहहीरासिंहपूरा वाक्य पाठ में यह है — “हीरासिंह लाज से गड़ गया कि वह कैसे बताए…” यानी बताने वाला हीरासिंह ही है।
उसकेहीरासिंहसुंदरिया जिस परिवार का अंग है, वह हीरासिंह का ही परिवार है — बीवी, बच्चे और जवाहरसिंह।
‘अंग’ का अर्थ यहाँ: शरीर का हिस्सा नहीं, बल्कि सदस्य। ‘परिवार का अंग’ यानी परिवार का ही एक सदस्य।
प्र18.
सचमुच वैसी सुंदर, स्वस्थ गाय उन्होंने अब तक न देखी थी। (रेखांकित — उन्होंने)
उत्तर

सेठ जी के लिए।

पाठ में इससे पहले का वाक्य —
“गाय देखकर सेठ बहुत खुश हुए। सचमुच वैसी सुंदर, स्वस्थ गाय उन्होंने अब तक न देखी थी।”
‘उन्होंने’ क्यों, ‘उसने’ क्यों नहीं: सेठ एक ही व्यक्ति है, फिर भी लेखक ने ‘उन्होंने’ लिखा। ऐसा आदर दिखाने के लिए किया जाता है। इसी कारण पाठ में ‘सेठ बहुत खुश हुए’ भी लिखा है, ‘हुआ’ नहीं। बड़े या आदरणीय व्यक्ति के लिए हिंदी में बहुवचन का प्रयोग होता है।
प्र19.
गाय उसके साथ जाना ही नहीं चाहती थी। (रेखांकित — उसके)
उत्तर

घोसी के लिए।

पाठ में पूरा वाक्य —
“जब घोसी गाय को ले जाने लगा, तब गाय उसके साथ जाना ही नहीं चाहती थी।”

घोसी यानी दूध दुहने और पशुओं की देखभाल करने वाला व्यक्ति, ग्वाला। सेठ ने गाय उसी के सिपुर्द यानी हवाले कर दी थी।

अभ्यास कीजिए: इसी वाक्य को उलटकर देखिए — “गाय हीरासिंह के साथ जाना चाहती थी।” अब ‘उसके’ का काम एक नाम ने ले लिया। सर्वनाम इसीलिए आते हैं — ताकि एक ही नाम बार-बार न दोहराना पड़े।
क्या यह उपयोगी रहा?