अर्थ — हीरासिंह गाय से विनती कर रहा है कि वह उसे नीचा न दिखाए। वह कह रहा है — मैं दूर ज़रूर हूँ, पर इससे मुझे कोई सुख नहीं मिल रहा।
ओछी करना का अर्थ है — किसी को हलका दिखाना, उसकी बात छोटी कर देना। गाय दूध नहीं दे रही थी, इसलिए सेठ हीरासिंह को झूठा समझ रहा था।
यहाँ हीरासिंह क्या कर रहा है: वह गाय को डाँट नहीं रहा। वह उससे ऐसे बात कर रहा है जैसे किसी अपने से करते हैं — गले पर सिर रखकर, धीरे से। और अपनी सफ़ाई भी दे रहा है — “मैं दूर हूँ तो क्या! इसमें मुझे सुख है?” यानी “मैं भी अपनी मर्ज़ी से दूर नहीं हुआ हूँ, मैं भी दुखी हूँ।”
मेरे विचार: यह वाक्य पढ़कर लगता है कि दोनों एक-दूसरे को समझा रहे हैं और दोनों ही मजबूर हैं। यही मजबूरी कहानी को इतना छूने वाला बना देती है।