कक्षा ५ हिंदी अध्याय 5 पाठ से आगे के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। इनको देखते हुए अपने समूह में चर्चा कर यह सुझाइए कि हम पशु-पक्षियों के लिए क्या-क्या कर सकते हैं। आप इनके अतिरिक्त भी कुछ और बिंदु जोड़ सकते हैं।
उत्तर

पुस्तक के पृष्ठ 55 पर छह चित्र दिए गए हैं। नीचे हर चित्र और उससे निकलने वाला सुझाव दिया गया है।

चित्रचित्र में क्या हैहम क्या कर सकते हैं
1पेड़ पर लकड़ी का घर, उसमें दाना बिखरा है और तीन नीली चिड़ियाँ बैठी हैंपेड़ पर या छत पर दाना-घर बनाकर बाँधिए और उसमें रोज़ थोड़ा बाजरा या चावल डालिए।
2एक बछड़ा लाल रंग की झूल ओढ़े खड़ा हैसर्दी में पशुओं को झूल या बोरी ओढ़ाइए, ताकि उन्हें ठंड न लगे।
3कटी हुई सब्ज़ियाँ — गोल-गोल सफ़ेद टुकड़े और गाजर-मूली; दो हाथ कैंची से सब्ज़ी काट रहे हैंगाजर, मूली जैसी सब्ज़ियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर पशुओं को खिलाइए, ताकि वे आसानी से खा सकें।
4एक लड़की गाय को नहला-पोंछ रही है, पास बालटी रखी हैपशुओं को नहलाइए और साफ़ रखिए। गंदगी से उन्हें बीमारी और कीड़े लग जाते हैं।
5दीवार पर पीला कटोरा भरा है, एक चिड़िया पानी पी रही है, दूसरी उड़कर आ रही हैगरमी में छत या दीवार पर पानी का बरतन रखिए और रोज़ पानी बदलिए।
6एक लड़की कटोरे से कुत्ते को खाना डाल रही हैगली के कुत्ते-बिल्ली को खाना दीजिए। बचा हुआ खाना फेंकने के बजाय उन्हें दे दीजिए।

और भी कुछ बिंदु जो आप जोड़ सकते हैं —

  1. किसी भी पशु-पक्षी को न मारिए, न पत्थर फेंकिए
  2. चोट लगे या बीमार पशु के बारे में बड़ों को बताइए और पशु-चिकित्सालय तक खबर पहुँचाइए।
  3. घोंसले से अंडे या बच्चे मत उठाइए।
  4. पतंग का माँझा पेड़ों पर मत छोड़िए — उसमें पक्षी फँस जाते हैं।
  5. पक्षियों को पिंजरे में बंद मत कीजिए।
  6. कूड़ा-प्लास्टिक खुले में मत फेंकिए, क्योंकि गाय उसे खा लेती है।
समूह-चर्चा का तरीका: चारों-पाँच के समूह बनाइए। हर समूह एक चित्र लेकर उस पर दो मिनट बोले। फिर सारे सुझाव श्यामपट्ट पर एक सूची में लिखिए और तय कीजिए कि इस महीने आपकी कक्षा कौन-से दो काम सचमुच करेगी।
प्र2.
आपके घर में दूध कहाँ से आता है? यह भी पता कीजिए कि किन-किन पशुओं का दूध पीने के लिए उपयोग किया जाता है।
उत्तर

यह पता लगाने वाला काम है। पहले घर में पूछिए कि दूध कहाँ से आता है, फिर उसे लिख लीजिए।

दूध आने के तरीके —

  1. अपने घर की गाय या भैंस से — गाँवों में प्रायः ऐसा ही होता है।
  2. दूधवाले (ग्वाले) से — वह रोज़ सवेरे बरतन में दूध देकर जाता है।
  3. डेयरी या दूध-बूथ से — थैली या बोतल में बंद दूध।
  4. दुकान से — डिब्बाबंद या पाउडर वाला दूध।

किन-किन पशुओं का दूध पिया जाता है —

पशुकहाँ अधिकदूध की खास बात
गायपूरे भारत मेंहलका और आसानी से पचने वाला। छोटे बच्चों को यही दिया जाता है।
भैंसउत्तर भारत में बहुतगाढ़ा दूध। इससे मलाई, दही और घी अधिक बनता है।
बकरीपहाड़ी और सूखे इलाकों मेंकम मात्रा में, पर बीमारी में लाभदायक माना जाता है।
ऊँटनीराजस्थान, गुजरातरेगिस्तान के लोगों का मुख्य दूध।
भेड़कुछ पहाड़ी क्षेत्रइससे पनीर जैसी चीज़ें बनती हैं।
याकलद्दाख, अरुणाचल, सिक्किमबहुत ठंडे पहाड़ी इलाकों में इसी का दूध और मक्खन काम आता है।

नमूना उत्तर: हमारे घर में दूध पास की डेयरी से आता है। पिताजी रोज़ सवेरे थैली वाला दूध ले आते हैं। कभी-कभी हमारे मोहल्ले का ग्वाला भैंस का दूध भी दे जाता है। हमने पता किया कि हमारे यहाँ सबसे अधिक गाय और भैंस का दूध पिया जाता है। नानी के गाँव में लोग बकरी का दूध भी पीते हैं।

प्र3.
किसी गौशाला अथवा दुग्ध उत्पादन केंद्र (डेयरी फार्म) का भ्रमण कर पता कीजिए कि पशुओं का लालन-पालन कैसे किया जाता है। आप इस गतिविधि में शिक्षकों एवं अभिभावकों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर

यह भ्रमण वाला काम है। इसे शिक्षक या घर के बड़ों के साथ ही कीजिए। नीचे तरीका और एक नमूना रिपोर्ट दी गई है।

भ्रमण से पहले —

  1. शिक्षक या अभिभावक से अनुमति और साथ ले लीजिए।
  2. एक छोटी कॉपी और पेंसिल साथ रखिए।
  3. पहले से पाँच-छह प्रश्न लिख लीजिए, ताकि वहाँ पूछना याद रहे।

वहाँ ये प्रश्न पूछिए —

  • यहाँ कितने पशु हैं और कौन-कौन से हैं?
  • उन्हें दिन में कितनी बार और क्या-क्या खिलाया जाता है?
  • पानी कहाँ से आता है? कितनी बार दिया जाता है?
  • दूध कब-कब दुहा जाता है? हाथ से या मशीन से?
  • बाड़े की सफ़ाई कैसे होती है? गोबर का क्या किया जाता है?
  • पशु बीमार हो जाए तो क्या करते हैं? टीके कब लगते हैं?
  • सर्दी-गरमी में उनके लिए क्या खास इंतज़ाम होता है?

नमूना उत्तर (भ्रमण रिपोर्ट):

बातजो हमने देखा
कहाँ गएअपने शिक्षक के साथ पास की गौशाला में।
कितने पशुवहाँ लगभग चालीस गायें और दस भैंसें थीं। हर पशु के लिए अलग खूँटा था।
खानादिन में तीन बार — हरा चारा, भूसा और खली। पानी की नाँद हमेशा भरी रहती है।
दुहाईसवेरे और शाम — दो बार। कुछ गायें मशीन से दुही जाती हैं, कुछ हाथ से।
सफ़ाईबाड़ा रोज़ धोया जाता है। गोबर अलग गड्ढे में डालकर खाद बनाई जाती है।
इलाजमहीने में एक बार पशु-चिकित्सक आते हैं और समय पर टीके लगाते हैं।
मौसमगरमी में पंखे चलते हैं, सर्दी में बाड़े में परदे लगाए जाते हैं और पशुओं को झूल ओढ़ाई जाती है।
हमने क्या सीखा: पशु पालना केवल दूध लेना नहीं है। समय पर चारा, साफ़ पानी, साफ़ जगह, टीके और थोड़ा प्यार — ये सब मिलकर ही पशु को स्वस्थ रखते हैं। कहानी में हीरासिंह भी यही करता है — “सानी-पानी दिया, सहलाया और अपने हाथों से दुहा।”
क्या यह उपयोगी रहा?