प्र1.
सेठ के घर से लौटकर जाते हुए हीरासिंह सुंदरिया को बहुत प्यार करता है, उसको सहलाता है एवं उससे बातें करता है। यदि सुंदरिया भी बोल सकती तो कल्पना कीजिए कि सुंदरिया और हीरासिंह के बीच क्या बातचीत होती।
उत्तर
पुस्तक के पृष्ठ 56 पर चार खाली बुलबुले बने हैं। पहला और चौथा सुंदरिया के पास है, दूसरा और तीसरा हीरासिंह के पास। नीचे चारों बुलबुले भरकर दिए गए हैं।
| बुलबुला | कौन बोल रहा है | क्या कहेगा |
|---|---|---|
| 1 | सुंदरिया | “मुझे माफ़ कर देना, हीरा। मैंने जान-बूझकर दूध नहीं रोका था। तुम्हारे बिना मेरे तले दूध उतरता ही नहीं था।” |
| 2 | हीरासिंह | “माफ़ी तो मुझे माँगनी चाहिए, सुंदरिया। घर की भूख ने मुझसे यह गलती करा दी। मैंने तुझे बेच दिया था।” |
| 3 | हीरासिंह | “अब चिंता मत कर। हम गाँव चल रहे हैं। जवाहर तुझे देखते ही दौड़ा आएगा — वह तुझे आज भी मौसी ही कहता है।” |
| 4 | सुंदरिया | “बस, यही सुनना था। चारा कम मिले तो कोई बात नहीं, पर अब मुझे कभी अपने से दूर मत करना।” |
अपना संवाद लिखते समय ध्यान रखिए:
- बातचीत में एक बोले, फिर दूसरा — बारी-बारी से।
- हर बुलबुले में एक-दो छोटे वाक्य ही लिखिए। बुलबुले में लंबा उत्तर नहीं आता।
- बात कहानी से जुड़ी होनी चाहिए — दूध, चारा, घोसी, जवाहरसिंह, गाँव।
- संवाद के आगे-पीछे उद्धरण चिह्न (“ ”) लगाना मत भूलिए।
यह अभ्यास क्यों दिया गया है: कहानी में गाय बोलती नहीं, पर लेखक बार-बार लिखता है — ‘मानो पूछ रही हो’, ‘जैसे कहती हो’। यानी लेखक ने भी यही कल्पना की थी। अब वही काम आपको करना है।