कक्षा ५ हिंदी अध्याय 5 हाथी और चींटी के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
‘हाथी और चींटी’ रचना किस बारे में है? इसे अपने शब्दों में बताइए।
उत्तर

यह एक छोटी-सी मज़ेदार कहानी है, जो हँसते-हँसते सड़क-सुरक्षा की बात सिखा देती है। यह पाठ 5 के बाद पृष्ठ 59 पर बिना क्रमांक के छपी है।

कहानी इस तरह है —

  1. चींटी रानी अपनी फटफटिया (मोटर साइकिल) पर बैठकर कुश्ती देखने जा रही थी।
  2. रास्ते में हाथी भाई मिले। उन्होंने हाथ दिखाया तो चींटी रुक गई।
  3. हाथी बोला — “मैं सोच रहा था कि मेरे जैसे पहलवान को छोड़कर तुम्हें अकेले कुश्ती देखने में आनंद नहीं आएगा।”
  4. चींटी ने कहा — “ठीक है पहलवान भाई, पीछे बैठ जाइए।” हाथी के बैठते ही उसने सरपट फटफटिया दौड़ा दी।
  5. रास्ते में एक रोड़ा (पत्थर) आ गया। फटफटिया पलट गई।
  6. हाथी के सिर पर बहुत चोट लगी, पर चींटी को केवल मामूली-सी खरोंच आई।
रचना का भाव: कहानी बड़े-छोटे की नहीं है। यह इस बात की है कि नियम मानने वाला बच जाता है। हाथी बड़ा और ताकतवर था, फिर भी उसे ज़्यादा चोट लगी — क्योंकि उसने हेलमेट नहीं पहना था। चींटी छोटी थी, पर सुरक्षित रही।
पिछली कक्षा से जुड़ाव: रचना की पहली पंक्ति कहती है — “आपने कक्षा 3 की पाठ्यपुस्तक ‘वीणा’ में चींटी और हाथी की छुपन-छुपाई का आनंद लिया होगा।” यानी ये दोनों पात्र पहले भी मिल चुके हैं।
प्र2.
सोचिए, चींटी को चोट क्यों नहीं आई?
उत्तर

चींटी को चोट इसलिए नहीं आई, क्योंकि उसने हेलमेट पहन रखा था

पुस्तक ने पृष्ठ 59 के नीचे उत्तर उलटे अक्षरों में छापा है —
“उत्तर — चींटी ने हेलमेट पहन रखा था।”
पन्ने को घुमाकर पढ़िए और अपना उत्तर मिला लीजिए।

चित्र में भी यही दिखता है। चींटी के सिर पर नीले रंग का हेलमेट है। और अस्पताल वाले चित्र में हाथी के सिर पर पट्टियाँ बँधी हैं, जबकि चींटी बगल की छोटी चारपाई पर आराम से बैठी है।

हेलमेट काम कैसे करता है: गिरने पर सबसे पहले और सबसे ज़ोर की चोट सिर पर लगती है। हेलमेट एक कड़ा खोल है, जो चोट को अपने ऊपर ले लेता है और सिर तक पहुँचने नहीं देता — ठीक वैसे ही जैसे कछुए की पीठ उसकी ढाल बन जाती है।
ध्यान दीजिए: हाथी बहुत बड़ा और ताकतवर था, फिर भी चोट उसे ज़्यादा लगी। यानी सुरक्षा ताकत से नहीं, सावधानी से मिलती है
प्र3.
चींटी बनें हाथी नहीं। ट्रैफिक नियमों का पालन करें। आप क्या-क्या कर सकते हैं—
उत्तर

पुस्तक ने पृष्ठ 60 पर स्वयं ये नियम बताए हैं। इन्हें नीचे क्रम से रखा गया है।

क्रमक्या करना हैक्यों
1चलने के लिए सड़क के किनारे बनी पटरियों (फुटपाथ) का उपयोग कीजिए।बीच सड़क पर चलने से वाहन टकरा सकता है।
2सड़क पार करनी हो तो सावधानी बरतिए।जल्दबाज़ी ही सबसे बड़ी दुर्घटना का कारण बनती है।
3लाल बत्ती होने की प्रतीक्षा कीजिए, क्योंकि लाल बत्ती जलने पर वाहनों को रुकना होता है।तब सड़क खाली होती है और पार करना सुरक्षित रहता है।
4सड़क के दोनों ओर देखिए और जेब्रा क्रॉसिंग के चिह्न पर चलकर ही पार कीजिए।जेब्रा क्रॉसिंग पैदल चलने वालों के लिए ही बनी होती है।
5अभिभावकों के साथ हों तो उनका हाथ अवश्य पकड़िएभीड़ में बच्चा अकेला पड़ जाए तो खतरा बढ़ जाता है।
6सड़क पार करते समय न बातचीत कीजिए, न दौड़िएपुस्तक के शब्दों में — “वरना ध्यान भटक सकता है।”

इनके अलावा आप ये भी कर सकते हैं —

  • दुपहिया वाहन पर बैठते समय हेलमेट ज़रूर पहनिए — चींटी की तरह।
  • कार में बैठें तो सुरक्षा पेटी (सीट बेल्ट) लगाइए।
  • सड़क पर या वाहन में खेलिए नहीं
  • घर के बड़ों को भी याद दिलाइए कि वे नियम मानें।
शीर्षक का अर्थ: “चींटी बनें हाथी नहीं” — यानी चींटी की तरह सावधान बनिए, हाथी की तरह लापरवाह नहीं। यही इस पूरी रचना का संदेश है।
प्र4.
अब आप नीचे दिए गए सड़क संकेतों (रोड साइन) को पहचानिए और समझिए—
उत्तर

पृष्ठ 60 पर छह सड़क संकेत दिए गए हैं। हर संकेत का नाम पुस्तक ने चित्र के नीचे छाप दिया है। नीचे हर संकेत का रूप और उसका अर्थ दिया गया है।

संकेतदिखने में कैसा हैक्या कहता है
यातायात संकेतकखंभे पर लगी बत्ती, जिसमें ऊपर से नीचे तीन गोले — लाल, पीला और हरालाल — रुक जाइए। पीला — तैयार हो जाइए। हरा — अब जाइए। इसे ही ट्रैफिक लाइट कहते हैं।
पैदल क्रॉसिंगलाल किनारी वाला तिकोना बोर्ड, जिसमें एक आदमी सफ़ेद धारियों पर चलता दिख रहा हैयहाँ पैदल चलने वाले सड़क पार करते हैं। पैदल यात्री यहीं से पार करें और वाहन चालक यहाँ गति धीमी करें।
रुकिएलाल रंग का आठ कोनों वाला बोर्डवाहन को यहाँ पूरी तरह रोकना है। यह ‘स्टॉप’ का चिह्न है।
हेलमेट पहनिएपीले चौकोर बोर्ड पर काले रंग का हेलमेटदुपहिया वाहन चलाने और उस पर बैठने वाले, दोनों हेलमेट पहनें। कहानी में चींटी इसी कारण बच गई।
सुरक्षा पेटी अनिवार्य हैनीले गोल चिह्न में बैठा हुआ आदमी, जिसके ऊपर से पेटी बँधी हैकार में बैठते ही सीट बेल्ट लगाना ज़रूरी है। ‘अनिवार्य’ का अर्थ है — जो करना ही पड़ेगा।
फुटपाथ पर चलेंहरे रंग का बोर्ड, जिस पर सफ़ेद रंग में चलता हुआ आदमी और नीचे लिखा है ‘सार्वजनिक पैदल पथ (फुटपाथ)’पैदल चलने वाले सड़क पर नहीं, किनारे बने फुटपाथ पर चलें।
रंग भी कुछ कहते हैं: लाल रंग रोकने या मना करने के लिए होता है। पीला रंग चेतावनी देता है — सावधान हो जाइए। नीला रंग बताता है कि यह काम करना ही है। हरा रंग कहता है कि आगे बढ़िए या यह रास्ता आपके लिए है।
करके देखिए: स्कूल जाते-आते रास्ते में जो संकेत दिखें, उन्हें अपनी कॉपी में बनाइए और नीचे उनका अर्थ लिखिए। कक्षा में सबके चित्र मिलाकर एक ‘सड़क-संकेत चार्ट’ बना लीजिए।
प्र5.
‘हाथी और चींटी’ रचना का ‘सुंदरिया’ पाठ से क्या संबंध है?
उत्तर

दोनों रचनाओं में पशु मुख्य पात्र हैं और दोनों ही यह बात कहती हैं कि बड़ा होना ही सब कुछ नहीं होता

बातसुंदरियाहाथी और चींटी
विधाकहानी — गंभीर और भावुकछोटी हास्य-कहानी — हँसाते हुए सिखाने वाली
मुख्य पात्रएक गाय और एक किसानएक हाथी और एक चींटी
पशु की भूमिकागाय बोलती नहीं, पर आँखों से सब कह देती हैयहाँ पशु मनुष्यों की तरह बोलते और वाहन चलाते हैं
छोटा बनाम बड़ासेठ के पास रुपया और ताकत है, पर जीत गरीब हीरासिंह के प्यार की होती हैहाथी बड़ा और पहलवान है, पर बचती छोटी चींटी है
संदेशरिश्ते और भावनाएँ रुपए से बड़ी हैंसावधानी और नियम ताकत से बड़े हैं
एक और जुड़ाव: ‘सुंदरिया’ में हम सीखते हैं कि पशु हमारी भावनाएँ समझते हैं, इसलिए उनसे प्यार कीजिए। ‘हाथी और चींटी’ में वही पशु हमें सिखाते हैं कि अपना ध्यान कैसे रखा जाए। दोनों मिलकर एक ही बात कहते हैं — दूसरों का भी ध्यान रखिए और अपना भी
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