कक्षा ५ हिंदी अध्याय 5 सोचिए और लिखिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
हीरासिंह गाय को बेचने से क्यों डर रहा था?
उत्तर

हीरासिंह गाय को बेचने से इसलिए डर रहा था, क्योंकि उसका बड़ा लड़का जवाहरसिंह सुंदरिया को मौसी कहकर बुलाता था।

पाठ की पंक्ति —
“पर उसका बड़ा लड़का जवाहरसिंह सुंदरिया को मौसी कहा करता था।
इसलिए वह उसे बेचने से डरता था।”
इस एक शब्द में कितनी बात है: ‘मौसी’ माँ की बहन को कहते हैं — यानी घर का बहुत नज़दीकी रिश्ता। जब बच्चा गाय को मौसी कहने लगे, तो वह गाय घर की सदस्य बन जाती है। सदस्य को कोई बेचता नहीं। इसलिए हीरासिंह को डर था कि जवाहरसिंह मानेगा नहीं और घर में दुख फैल जाएगा।

यह डर सच भी निकला। गाय लाने के लिए उसे “जैसे-तैसे जवाहरसिंह को समझा-बुझाकर” ही लाना पड़ा — यानी बहुत मुश्किल से।

प्र2.
सेठ हीरासिंह की गाय को देखकर क्यों प्रसन्न हुआ?
उत्तर

सेठ इसलिए प्रसन्न हुआ, क्योंकि गाय जितनी बताई गई थी, उससे भी अच्छी निकली — वह सुंदर भी थी, स्वस्थ भी, और दूध भी वादे से ज़्यादा दे रही थी।

पाठ की पंक्तियाँ —
“गाय देखकर सेठ बहुत खुश हुए। सचमुच वैसी सुंदर, स्वस्थ गाय उन्होंने अब तक न देखी थी।”
“दूध पंद्रह सेर से कुछ ऊपर ही बैठा।”

हीरासिंह ने कहा था कि गाय पंद्रह सेर दूध देती है। पर जब उसने अपने हाथों से दुहा, तो दूध पंद्रह सेर से भी कुछ ऊपर निकला। खुश होकर सेठ ने सौ के ऊपर सात रुपए और दे दिए।

रुपयों का हिसाब: सौदा दो सौ पाँच रुपए में तय हुआ था। सौ रुपए हीरासिंह पहले ही ले चुका था। अब सेठ ने एक सौ सात रुपए और दिए। कुल हुए 207 रुपए — यानी तय रकम से भी दो रुपए ज़्यादा। इसी से पता चलता है कि सेठ कितना प्रसन्न था।
प्र3.
“तुमने मुझे धोखे में क्यों रखा?” सेठ ने हीरासिंह से ऐसा क्यों कहा?
उत्तर

सेठ ने ऐसा इसलिए कहा, क्योंकि अगले ही दिन गाय ने सवेरे पाँच सेर दूध भी नहीं दिया, जबकि हीरासिंह ने पंद्रह सेर बताया था।

सेठ के अपने शब्द —
“तुमने मुझे धोखे में क्यों रखा? गाय से सवेरे पाँच सेर दूध भी तो नहीं उतरा।”
सेठ की सोच क्या थी: सेठ ने दो सौ पाँच रुपए इसीलिए दिए थे कि गाय पंद्रह सेर दूध देती है। अब दूध पाँच सेर भी नहीं मिला। सेठ को लगा कि हीरासिंह ने पहले दिन खुद दुहकर उसे बहका दिया और असली बात छिपा ली। इसलिए उसने ‘धोखा’ शब्द कहा। आगे तो उसने यह भी कह दिया — “यह तो सरासर धोखा है।” सरासर यानी बिलकुल, पूरी तरह।

पर सच यह था कि हीरासिंह ने कोई धोखा नहीं किया था। उसने अपने हाथों से पंद्रह सेर से ऊपर दूध दुहकर दिखाया था। असली कारण कोई और था — गाय अपने परिवार से अलग होने के कारण दुखी थी, इसलिए घोसी को दूध नहीं दे रही थी।

ध्यान दीजिए: सेठ बुरा आदमी नहीं है। वह हीरासिंह को ‘ईमानदार चौकीदार’ कहता है और उसकी तनख्वाह बढ़ाने को भी तैयार है। वह बस वह बात नहीं देख पा रहा जो हीरासिंह देख रहा है — कि गाय के भी मन होता है।
प्र4.
सेठ के कुछ कहने से पहले ही हीरासिंह गाय को लेकर क्यों चल दिया?
उत्तर

हीरासिंह इसलिए चल दिया, क्योंकि उसका मन पूरी तरह बदल चुका था। अब वह कोई बहस नहीं चाहता था और कोई नया कारण भी नहीं सुनना चाहता था। उसने तय कर लिया था कि गाय आज ही गाँव जाएगी।

उससे पहले वह सेठ से कह चुका था —
“आप मुझसे जितने महीने चाहें कसकर चाकरी करवाएँ,
पर गाय आज ही यहाँ से गाँव चली जाएगी।
रुपए जब आपके चुकता हो जाएँ, मुझसे कह दीजिएगा।”
उसका मन क्यों बदला: उससे पिछली रात सुंदरिया खूँटा तुड़ाकर उसके दरवाज़े पर आ खड़ी हुई थी। वह उसे अपराधी की आँखों से देख रही थी, मानो कह रही हो — “मैं अपराधिनी हूँ। लेकिन मुझे क्षमा कर देना। मैं बड़ी दुखिया हूँ।” यह देखकर हीरासिंह विह्वल हो उठा और गाय की गर्दन से लिपटकर देर तक सिसकता रहा। उसी रात उसने समझ लिया कि गाय यहाँ जीवित नहीं रह पाएगी।

‘चाकरी’ यानी नौकरी। हीरासिंह ने अपना घाटा मंज़ूर कर लिया — रुपए तनख्वाह से कटते रहें, वह बरसों काम करता रहे, पर गाय आज़ाद हो जाए। सेठ शायद फिर कोई सौदा करना चाहते, इसलिए हीरासिंह ने उन्हें बोलने का मौका ही नहीं दिया।

कहानी का अंत यही कहता है: कुछ रिश्ते रुपयों से बड़े होते हैं।
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