कक्षा ५ हिंदी अध्याय 5 सुंदरिया और हीरासिंह के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
कहानी में सुंदरिया की बहुत-सी विशेषताओं का पता चलता है। उन विशेषताओं को नीचे लिखिए। आपकी सुविधा के लिए एक उदाहरण दिया जा रहा है— [वह बहुत आकर्षक है।]
उत्तर

पुस्तक में गाय के चित्र के चारों ओर छह खाने बने हैं। पहले खाने में उदाहरण पहले से भरा है। बाकी पाँच खाने आपको भरने हैं। नीचे सभी छह खाने भरकर दिए गए हैं।

खानासुंदरिया की विशेषतापाठ से प्रमाण
1 (दिया हुआ)वह बहुत आकर्षक है।“उसे देखकर लोगों को ईर्ष्या होती थी।”
2वह डील-डौल में काफी बड़ी और स्वस्थ है।“सुंदरिया गाय डील-डौल में काफी बड़ी थी।” और सेठ ने “वैसी सुंदर, स्वस्थ गाय अब तक न देखी थी।”
3वह बहुत दूध देती है — पंद्रह सेर से भी ऊपर।“पंद्रह सेर दूध उसके तले उतरता है।” “दूध पंद्रह सेर से कुछ ऊपर ही बैठा।”
4वह अपने परिवार से बहुत प्यार करती है और उससे अलग नहीं होना चाहती।“गाय ने उसकी ओर देखा। जैसे पूछना चाहती थी — ‘क्या सचमुच ही इसके साथ चली जाऊँ?’”
5वह मनुष्य की भावनाएँ समझती है और अपनी बात आँखों से कह देती है।“गाय ने मुँह ऊपर उठाया मानो पूछ रही हो — ‘बोलो मुझे क्या करना है?’”
6उसमें अपनापन और पछतावा दोनों हैं — गलती लगने पर वह क्षमा भी माँगती है।“सुंदरिया उसे अपराधी की आँखों से देख रही थी। मानो क्षमा याचना कर रही हो।”
तरीका: विशेषता ढूँढ़ने के लिए यह पूछिए — ‘वह कैसी है?’ और ‘वह क्या करती है?’ हर उत्तर एक विशेषता है। फिर उसके लिए पाठ की एक पंक्ति ढूँढ़ लीजिए। बिना प्रमाण के लिखी विशेषता कमज़ोर होती है।
प्र2.
अब आप हीरासिंह की विशेषताओं को अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर

हीरासिंह की विशेषताएँ नीचे दी गई हैं। इन्हें अपनी लेखन-पुस्तिका में इसी तरह तालिका बनाकर लिखिए।

हीरासिंह की विशेषतापाठ से प्रमाण
वह ईमानदार है।उसने सेठ को सच बता दिया — “सेठ जी, सच यह है कि वह गाय अपनी ही है।” और सेठ ने खुद कहा — “तुम्हारे जैसा ईमानदार चौकीदार हमें दूसरा कहाँ मिलेगा?”
वह मेहनती है।नौकरी की तलाश में गाँव से दिल्ली आ गया और चौकीदार का काम करने लगा। बाद में कहा — “जितने महीने चाहें कसकर चाकरी करवाएँ।”
वह पशुओं से प्यार करता है।“हीरासिंह ने खुद उसे सानी-पानी दिया, सहलाया और अपने हाथों से दुहा।”
वह भावुक है — दिल का कोमल।“देखकर हीरासिंह विह्वल हो उठा। उसके आँसू रोके न रुके। वह सुंदरिया की गर्दन से लिपट देर तक सिसकता रहा।”
वह अपने परिवार के प्रति ज़िम्मेदार है।गाय बेचने का विचार भी उसने घर की भूख मिटाने के लिए किया, और मिले हुए रुपए गाँव भेज दिए, जिनसे मकान की मरम्मत हुई।
वह त्याग करना जानता है।गाय को गाँव भेजने के लिए वह महीनों बिना रुपए के काम करने को तैयार हो गया — “रुपए जब आपके चुकता हो जाएँ, मुझसे कह दीजिएगा।”
वह स्वाभिमानी है।उसने सेठ से भीख नहीं माँगी। जो रुपया लिया, उसे लौटाने या काम से चुकाने की बात कही।
छोटा-सा गुर: किसी पात्र की विशेषता जाननी हो तो उसके काम देखिए, उसकी बातें नहीं। हीरासिंह ने कहीं नहीं कहा कि “मैं ईमानदार हूँ” — उसके कामों से यह अपने आप दिख जाता है।
क्या यह उपयोगी रहा?