प्र1.
लोग सुंदरिया को देखकर ईर्ष्या क्यों करते थे? (क) सुंदरिया को खाने-पीने को बहुत कुछ मिलता था। (ख) सुंदरिया बहुत आकर्षक थी। (ग) सुंदरिया बहुत दूध देती थी। (घ) सुंदरिया सभी से प्रेम करती थी।
उत्तर
इस प्रश्न में दो विकल्पों पर मुस्कान का चिह्न (☺) बनेगा — (ख) सुंदरिया बहुत आकर्षक थी। और (ग) सुंदरिया बहुत दूध देती थी।
पाठ की दो पंक्तियाँ मिलकर पूरा उत्तर दे देती हैं —
“सुंदरिया गाय डील-डौल में काफी बड़ी थी। उसे देखकर लोगों को ईर्ष्या होती थी।”
“गाय तो ऐसी है कि दूध देने में कामधेनु। पंद्रह सेर दूध उसके तले उतरता है।”
“सुंदरिया गाय डील-डौल में काफी बड़ी थी। उसे देखकर लोगों को ईर्ष्या होती थी।”
“गाय तो ऐसी है कि दूध देने में कामधेनु। पंद्रह सेर दूध उसके तले उतरता है।”
ईर्ष्या का अर्थ है — दूसरे के पास कोई अच्छी चीज़ देखकर मन में होने वाली जलन।
| विकल्प | सही / ग़लत | कारण |
|---|---|---|
| (क) सुंदरिया को खाने-पीने को बहुत कुछ मिलता था। | ग़लत | पाठ ठीक इसका उलटा कहता है — “गरीबी के कारण हीरासिंह गाय का चारा भी नहीं जुटा पाता था।” जिस गाय को चारा तक नहीं मिलता, उसे देखकर कोई इस बात पर जलन नहीं करेगा। |
| (ख) सुंदरिया बहुत आकर्षक थी। | सही ☺ | “डील-डौल में काफी बड़ी थी। उसे देखकर लोगों को ईर्ष्या होती थी।” — ये दोनों वाक्य साथ-साथ छपे हैं, इसलिए कारण साफ़ है। आगे सेठ के बारे में भी लिखा है — “सचमुच वैसी सुंदर, स्वस्थ गाय उन्होंने अब तक न देखी थी।” |
| (ग) सुंदरिया बहुत दूध देती थी। | सही ☺ | वह पंद्रह सेर दूध देती थी। गाँव में इतना दूध देने वाली गाय बहुत बड़ी बात होती है। पड़ोसियों को इसी बात पर जलन होती थी। हीरासिंह उसे ‘दूध देने में कामधेनु’ कहता है — कामधेनु यानी कथाओं की वह गाय जो माँगी हुई हर चीज़ दे देती थी। |
| (घ) सुंदरिया सभी से प्रेम करती थी। | ग़लत | यह बात पाठ में लिखी ही नहीं है। गाय हीरासिंह और उसके परिवार से प्रेम करती थी, ‘सभी’ से नहीं। और किसी के प्रेम करने पर लोग ईर्ष्या नहीं करते — ईर्ष्या तो अच्छी चीज़ देखकर होती है। |
याद रखिए: इस अभ्यास का निर्देश साफ़ कहता है कि एक से अधिक उत्तर भी सही हो सकते हैं। इसलिए एक विकल्प चुनकर रुक मत जाइए — चारों को पढ़िए और हर एक को पाठ से मिलाइए।