कक्षा ५ हिंदी अध्याय 5 पाठ से के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
लोग सुंदरिया को देखकर ईर्ष्या क्यों करते थे? (क) सुंदरिया को खाने-पीने को बहुत कुछ मिलता था। (ख) सुंदरिया बहुत आकर्षक थी। (ग) सुंदरिया बहुत दूध देती थी। (घ) सुंदरिया सभी से प्रेम करती थी।
उत्तर

इस प्रश्न में दो विकल्पों पर मुस्कान का चिह्न (☺) बनेगा — (ख) सुंदरिया बहुत आकर्षक थी। और (ग) सुंदरिया बहुत दूध देती थी।

पाठ की दो पंक्तियाँ मिलकर पूरा उत्तर दे देती हैं —
“सुंदरिया गाय डील-डौल में काफी बड़ी थी। उसे देखकर लोगों को ईर्ष्या होती थी।”
“गाय तो ऐसी है कि दूध देने में कामधेनु। पंद्रह सेर दूध उसके तले उतरता है।”

ईर्ष्या का अर्थ है — दूसरे के पास कोई अच्छी चीज़ देखकर मन में होने वाली जलन।

विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) सुंदरिया को खाने-पीने को बहुत कुछ मिलता था।ग़लतपाठ ठीक इसका उलटा कहता है — “गरीबी के कारण हीरासिंह गाय का चारा भी नहीं जुटा पाता था।” जिस गाय को चारा तक नहीं मिलता, उसे देखकर कोई इस बात पर जलन नहीं करेगा।
(ख) सुंदरिया बहुत आकर्षक थी।सही ☺“डील-डौल में काफी बड़ी थी। उसे देखकर लोगों को ईर्ष्या होती थी।” — ये दोनों वाक्य साथ-साथ छपे हैं, इसलिए कारण साफ़ है। आगे सेठ के बारे में भी लिखा है — “सचमुच वैसी सुंदर, स्वस्थ गाय उन्होंने अब तक न देखी थी।”
(ग) सुंदरिया बहुत दूध देती थी।सही ☺वह पंद्रह सेर दूध देती थी। गाँव में इतना दूध देने वाली गाय बहुत बड़ी बात होती है। पड़ोसियों को इसी बात पर जलन होती थी। हीरासिंह उसे ‘दूध देने में कामधेनु’ कहता है — कामधेनु यानी कथाओं की वह गाय जो माँगी हुई हर चीज़ दे देती थी।
(घ) सुंदरिया सभी से प्रेम करती थी।ग़लतयह बात पाठ में लिखी ही नहीं है। गाय हीरासिंह और उसके परिवार से प्रेम करती थी, ‘सभी’ से नहीं। और किसी के प्रेम करने पर लोग ईर्ष्या नहीं करते — ईर्ष्या तो अच्छी चीज़ देखकर होती है।
याद रखिए: इस अभ्यास का निर्देश साफ़ कहता है कि एक से अधिक उत्तर भी सही हो सकते हैं। इसलिए एक विकल्प चुनकर रुक मत जाइए — चारों को पढ़िए और हर एक को पाठ से मिलाइए।
प्र2.
हीरासिंह के मन में सुंदरिया को बेचने की बात क्यों आई? (क) सुंदरिया सभी को परेशान करने लगी थी। (ख) सुंदरिया के लिए चारे का प्रबंध करना कठिन हो गया था। (ग) सुंदरिया हीरासिंह के घर नहीं रहना चाहती थी। (घ) सुंदरिया पड़ोसियों को परेशान करती थी।
उत्तर

मुस्कान का चिह्न (☺) केवल एक विकल्प पर बनेगा — (ख) सुंदरिया के लिए चारे का प्रबंध करना कठिन हो गया था।

पाठ की पंक्तियाँ —
“गरीबी के कारण हीरासिंह गाय का चारा भी नहीं जुटा पाता था।
खाने-पीने की कमी होने लगी तो हीरासिंह ने सोचा — ‘मैं सुंदरिया को बेच दूँ?’”

यानी कारण गाय में नहीं था, गरीबी में था। हीरासिंह गाय से नाराज़ नहीं था — वह बस मजबूर था।

विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) सुंदरिया सभी को परेशान करने लगी थी।ग़लतपूरी कहानी में सुंदरिया ने किसी को परेशान नहीं किया। वह सीधी और शांत गाय है। दूध भी वह तभी रोकती है जब उसे अपने परिवार से अलग कर दिया जाता है।
(ख) सुंदरिया के लिए चारे का प्रबंध करना कठिन हो गया था।सही ☺यही बात पाठ में शब्दशः लिखी है। ‘प्रबंध’ यानी इंतज़ाम। घर में खाने-पीने की कमी होने लगी थी, तब बेचने का विचार आया।
(ग) सुंदरिया हीरासिंह के घर नहीं रहना चाहती थी।ग़लतबात ठीक उलटी है। सुंदरिया उसी घर में रहना चाहती थी। इसीलिए वह सेठ के यहाँ जाकर दूध देना बंद कर देती है और अंत में हीरासिंह उसे गाँव वापस भेज देता है।
(घ) सुंदरिया पड़ोसियों को परेशान करती थी।ग़लतपड़ोसी परेशान नहीं थे — वे तो ईर्ष्या करते थे! यानी उन्हें सुंदरिया अच्छी लगती थी, बुरी नहीं।
एक और बात: हीरासिंह ने ‘बेच दूँ?’ सोचा ज़रूर, पर तुरंत बेचा नहीं। वह डरता रहा, क्योंकि जवाहरसिंह गाय को मौसी कहता था। इसी से पता चलता है कि यह घर गाय से कितना जुड़ा हुआ था।
प्र3.
हीरासिंह ने स्वयं को गाय की नौकरी पर लगाने की बात क्यों कही? (क) सुंदरिया को ठीक से चारा नहीं मिलता था। (ख) वह गाय से बिछोह सहन नहीं कर पा रहा था। (ग) उसे रुपयों की आवश्यकता थी। (घ) गाय घोसी के व्यवहार से प्रसन्न नहीं थी।
उत्तर

मुस्कान का चिह्न (☺) बनेगा — (ख) वह गाय से बिछोह सहन नहीं कर पा रहा था।

बिछोह का अर्थ है — बिछड़ने का दुख, जुदाई।

पहले उसका मन भरा —
“रुपए तो ले लिए लेकिन हीरासिंह का जी भरा जा रहा था।”
फिर उसने कहा —
“गाय की नौकरी पर मुझे लगा दीजिए। चाहे तनख्वाह कम कर दीजिए।”
विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) सुंदरिया को ठीक से चारा नहीं मिलता था।ग़लतचारे की कमी गाँव में थी, सेठ के यहाँ नहीं। सेठ धनी था और उसने गाय के लिए अलग घोसी रखा हुआ था। सेठ के घर चारे की कोई शिकायत पाठ में नहीं है।
(ख) वह गाय से बिछोह सहन नहीं कर पा रहा था।सही ☺यही असली कारण है। रुपए मिल जाने पर भी उसका ‘जी भर’ रहा था। गाय जाने लगी तो वह एकटक देखता रहा। जो आदमी बिछड़ना नहीं चाहता, वही कहेगा — मुझे गाय के साथ ही लगा दीजिए।
(ग) उसे रुपयों की आवश्यकता थी।ग़लतयह विकल्प धोखा दे सकता है, क्योंकि रुपयों की ज़रूरत तो उसे सचमुच थी। पर ध्यान से पढ़िए — उसने साथ ही कहा, “चाहे तनख्वाह कम कर दीजिए।” जिसे रुपए चाहिए हों, वह अपनी तनख्वाह घटाने को नहीं कहेगा। यानी यहाँ उसका कारण रुपया नहीं, प्यार था।
(घ) गाय घोसी के व्यवहार से प्रसन्न नहीं थी।ग़लतघोसी ने गाय के साथ कोई बुरा व्यवहार नहीं किया। पाठ में उसकी कोई शिकायत नहीं है। गाय दुखी घोसी के कारण नहीं, अपने परिवार से अलग होने के कारण थी।
प्र4.
गाय घोसी के साथ क्यों नहीं जाना चाहती थी? (क) गाय हीरासिंह और उसके परिवार से अलग नहीं होना चाहती थी। (ख) गाय को भय था कि घोसी उसे स्नेह से नहीं पालेगा। (ग) गाय को अपने गाँव के सभी लोगों की याद आ रही थी। (घ) गाय बीमार थी और चल नहीं पा रही थी।
उत्तर

मुस्कान का चिह्न (☺) बनेगा — (क) गाय हीरासिंह और उसके परिवार से अलग नहीं होना चाहती थी।

पाठ का सबसे सुंदर वाक्य यही उत्तर देता है —
“गाय ने उसकी ओर देखा। जैसे पूछना चाहती थी — ‘क्या सचमुच ही इसके साथ चली जाऊँ?’”

गाय बोल नहीं सकती, पर उसकी आँखें हीरासिंह से पूछ रही हैं। वह घोसी से नहीं डर रही — वह हीरासिंह से अलग नहीं होना चाहती।

विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) गाय हीरासिंह और उसके परिवार से अलग नहीं होना चाहती थी।सही ☺पूरी कहानी इसी बात को बार-बार सिद्ध करती है। सेठ के यहाँ वह दूध नहीं देती, पर हीरासिंह के पुचकारने पर साढ़े तेरह सेर दूध दे देती है। एक रात खूँटा तुड़ाकर उसी के दरवाज़े आ जाती है।
(ख) गाय को भय था कि घोसी उसे स्नेह से नहीं पालेगा।ग़लतयह अनुमान अच्छा लगता है, पर पाठ इसे कहीं नहीं कहता। घोसी ने गाय के साथ कोई बुरा व्यवहार नहीं किया — उसने तो खुद खूँटे से बाँधा भी था। गाय का दुख घोसी को लेकर नहीं, हीरासिंह को लेकर था।
(ग) गाय को अपने गाँव के सभी लोगों की याद आ रही थी।ग़लतपाठ में ‘गाँव के सभी लोगों’ की कोई बात नहीं है। गाय का लगाव एक परिवार से है — हीरासिंह, जवाहरसिंह और उनका घर। पूरे गाँव से नहीं।
(घ) गाय बीमार थी और चल नहीं पा रही थी।ग़लतगाय बिलकुल स्वस्थ थी। सेठ ने खुद सोचा — “सचमुच वैसी सुंदर, स्वस्थ गाय उन्होंने अब तक न देखी थी।” और उसी दिन उसने पंद्रह सेर से ऊपर दूध भी दिया था।
पूरी कहानी का सार यहीं छिपा है: गाय दूध इसलिए नहीं रोकती कि वह जिद्दी है। वह अपनी बात कहने का यही एक तरीका जानती है। बोल नहीं सकती, इसलिए दूध रोककर कहती है — मुझे वापस भेज दो।
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