कक्षा ५ हिंदी अध्याय 5 बूझो पहेली के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
राग सुरीला रंग से काली, सबके मन को भाती। बैठ पेड़ की डाली पर जो, मीठे गीत सुनाती।
उत्तर

सरल अर्थ — इसकी आवाज़ बहुत मीठी है और रंग काला है। यह सबको अच्छी लगती है। पेड़ की डाली पर बैठकर यह मीठे गीत गाती है।

उत्तर — कोयल

पहेली का सुराग-शब्दवह कोयल पर कैसे बैठता है
राग सुरीलाकोयल की कूक सबसे मीठी मानी जाती है। ‘राग’ यानी गाने का सुर।
रंग से कालीकोयल का रंग काला होता है। यही सबसे बड़ा सुराग है।
बैठ पेड़ की डाली परकोयल पेड़ों पर रहने वाली चिड़िया है, आम के पेड़ पर वह खूब कूकती है।
मीठे गीत सुनातीवसंत में उसकी कूक सुनकर सबका मन खुश हो जाता है।
मिलान: पुस्तक ने पृष्ठ 57 के नीचे तीनों उत्तर उलटे अक्षरों में छापे हैं — “उत्तर — कोयल, कछुआ, नाव”। पन्ने को घुमाकर पढ़िए और अपने उत्तर मिला लीजिए। पहली पहेली का उत्तर कोयल ही है।
कौआ क्यों नहीं: कौआ भी काला होता है और पेड़ पर बैठता है। पर उसकी आवाज़ ‘सुरीली’ या ‘मीठी’ नहीं कही जाती। ‘राग सुरीला’ और ‘मीठे गीत’ — ये दो शब्द कौए को बाहर कर देते हैं।
प्र2.
जल-थल दोनों में है रहता, धीमी जिसकी चाल। खतरा पाकर सिमट जाए झट, बन जाता खुद ढाल।
उत्तर

सरल अर्थ — यह पानी में भी रहता है और ज़मीन पर भी। इसकी चाल बहुत धीमी है। खतरा दिखते ही यह अपने आप को समेटकर छिपा लेता है और उसकी अपनी पीठ ही उसकी ढाल बन जाती है।

उत्तर — कछुआ

जल-थल का अर्थ है — पानी और ज़मीन। ढाल वह चीज़ होती है जिससे लड़ाई में वार रोका जाता है।

पहेली का सुराग-शब्दवह कछुए पर कैसे बैठता है
जल-थल दोनों में है रहताकछुआ पानी में तैरता भी है और ज़मीन पर चलता भी है।
धीमी जिसकी चालकछुए की धीमी चाल तो कहावत बन चुकी है — ‘खरगोश और कछुए’ की कहानी याद कीजिए।
खतरा पाकर सिमट जाए झटडर लगते ही वह अपना सिर, पैर और पूँछ खोल के भीतर खींच लेता है।
बन जाता खुद ढालउसकी कड़ी पीठ ही उसकी ढाल है। उसे अलग से कोई हथियार नहीं चाहिए।
मिलान: उलटी छपी पंक्ति में दूसरा उत्तर कछुआ ही दिया है।
प्र3.
लकड़ी का एक ऐसा घर, जो है जल में चलता। सबको अपने साथ बिठाकर, पार सभी को करता।
उत्तर

सरल अर्थ — यह लकड़ी का बना हुआ है और घर जैसा दिखता है, पर यह ज़मीन पर नहीं, पानी पर चलता है। यह सब लोगों को अपने भीतर बिठाकर नदी के उस पार पहुँचा देता है।

उत्तर — नाव

पहेली का सुराग-शब्दवह नाव पर कैसे बैठता है
लकड़ी का एक ऐसा घरपुराने ज़माने की नावें लकड़ी की बनती थीं और ऊपर से खुली-सी झोपड़ी जैसी लगती थीं।
जो है जल में चलतानाव ज़मीन पर नहीं, पानी पर तैरती है। यही उसकी सबसे बड़ी पहचान है।
सबको अपने साथ बिठाकरएक नाव में कई लोग एक साथ बैठ जाते हैं।
पार सभी को करतानाव का काम ही यही है — इस किनारे से उस किनारे तक पहुँचाना।
मिलान: उलटी छपी पंक्ति का तीसरा उत्तर नाव है। पूरी पंक्ति है — “उत्तर — कोयल, कछुआ, नाव”।
पहेली बूझने का तरीका: हर पहेली में एक शब्द सबसे बड़ा सुराग होता है। पहली में ‘काली’ और ‘सुरीला’, दूसरी में ‘जल-थल’ और ‘सिमट जाए’, तीसरी में ‘जल में चलता’। पहले वह शब्द ढूँढ़िए, फिर बाकी पंक्तियों से जाँच लीजिए कि उत्तर हर पंक्ति पर सही बैठता है या नहीं।
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