बोलना ही बात कहने का इकलौता तरीका नहीं है। यदि चाँद बोल न सके तो वह इशारों, चेहरे के भाव, चित्र और लिखे हुए शब्दों से अपनी बात बता सकता है।
| तरीका | चाँद क्या करेगा | माँ क्या समझ जाएँगी |
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| शरीर से इशारा | ठंड से काँपकर, दाँत किटकिटाकर, दोनों बाँहें अपने शरीर के चारों ओर लपेटकर दिखाएगा। | बेटे को ठंड लग रही है। |
| हाथ से इशारा | अपने शरीर की ओर इशारा करके फिर कपड़े पहनने का इशारा करेगा। | उसे कुछ पहनने को चाहिए। |
| चेहरे के भाव | उदास मुँह बनाएगा, माँ की ओर याचना भरी दृष्टि से देखेगा। | वह कुछ माँग रहा है। |
| चित्र बनाकर | कागज़ पर एक कुरते का चित्र बनाकर माँ को दिखाएगा। | उसे कुरता चाहिए। |
| लिखकर | कागज़ पर लिख देगा — “माँ, मुझे ऊन का मोटा झिंगोला सिलवा दो।” | पूरी बात एक बार में। |
| कोई चीज़ दिखाकर | माँ का पुराना ऊनी शॉल उठाकर ले आएगा और अपने ऊपर डाल लेगा। | उसे ऐसा ही गरम कपड़ा चाहिए। |
| सांकेतिक भाषा | इशारों की भाषा में अपनी बात कहेगा। | यदि माँ भी यह भाषा जानती हों तो पूरी बात। |
नमूना उत्तर: यदि चाँद बोल न सके तो भी वह अपनी बात माँ तक पहुँचा देगा। वह ठंड से काँपकर और अपनी बाँहें शरीर के चारों ओर लपेटकर दिखाएगा कि उसे ठंड लग रही है। फिर वह माँ का पुराना ऊनी शॉल उठाकर अपने ऊपर डाल लेगा, जिससे माँ समझ जाएँगी कि उसे भी ऐसा ही गरम कपड़ा चाहिए। वह कागज़ पर एक झिंगोले का चित्र भी बना सकता है या अपनी बात लिखकर दे सकता है। माँ तो बच्चे का चेहरा देखकर ही उसकी बात समझ जाती है।