कक्षा ५ हिंदी अध्याय 3 सोचिए, समझिए और बताइए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
कविता में चाँद अपनी माँ से बातें कर रहा है। मान लीजिए कि चाँद बोल नहीं सकता। अब वह अपनी माँ को अपनी बात कैसे बताएगा?
उत्तर

बोलना ही बात कहने का इकलौता तरीका नहीं है। यदि चाँद बोल न सके तो वह इशारों, चेहरे के भाव, चित्र और लिखे हुए शब्दों से अपनी बात बता सकता है।

तरीकाचाँद क्या करेगामाँ क्या समझ जाएँगी
शरीर से इशाराठंड से काँपकर, दाँत किटकिटाकर, दोनों बाँहें अपने शरीर के चारों ओर लपेटकर दिखाएगा।बेटे को ठंड लग रही है।
हाथ से इशाराअपने शरीर की ओर इशारा करके फिर कपड़े पहनने का इशारा करेगा।उसे कुछ पहनने को चाहिए।
चेहरे के भावउदास मुँह बनाएगा, माँ की ओर याचना भरी दृष्टि से देखेगा।वह कुछ माँग रहा है।
चित्र बनाकरकागज़ पर एक कुरते का चित्र बनाकर माँ को दिखाएगा।उसे कुरता चाहिए।
लिखकरकागज़ पर लिख देगा — “माँ, मुझे ऊन का मोटा झिंगोला सिलवा दो।”पूरी बात एक बार में।
कोई चीज़ दिखाकरमाँ का पुराना ऊनी शॉल उठाकर ले आएगा और अपने ऊपर डाल लेगा।उसे ऐसा ही गरम कपड़ा चाहिए।
सांकेतिक भाषाइशारों की भाषा में अपनी बात कहेगा।यदि माँ भी यह भाषा जानती हों तो पूरी बात।

नमूना उत्तर: यदि चाँद बोल न सके तो भी वह अपनी बात माँ तक पहुँचा देगा। वह ठंड से काँपकर और अपनी बाँहें शरीर के चारों ओर लपेटकर दिखाएगा कि उसे ठंड लग रही है। फिर वह माँ का पुराना ऊनी शॉल उठाकर अपने ऊपर डाल लेगा, जिससे माँ समझ जाएँगी कि उसे भी ऐसा ही गरम कपड़ा चाहिए। वह कागज़ पर एक झिंगोले का चित्र भी बना सकता है या अपनी बात लिखकर दे सकता है। माँ तो बच्चे का चेहरा देखकर ही उसकी बात समझ जाती है।

जानने की बात: हमारे आस-पास कई लोग बोल या सुन नहीं पाते। वे सांकेतिक भाषा यानी इशारों की भाषा से बात करते हैं — इसमें हाथों की मुद्राओं, चेहरे के भावों और शरीर की हरकतों से पूरी बात कही जाती है। यह भी एक पूरी भाषा है। ऐसे साथियों से बात करते समय धैर्य रखिए, उनका चेहरा देखकर सुनिए और उनका मज़ाक कभी मत उड़ाइए।
प्र2.
मान लीजिए कि चाँद का एक मित्र है जो देख नहीं सकता। चाँद उसे अपने बदलते हुए आकार के बारे में कैसे समझाएगा?
उत्तर

जो मित्र देख नहीं सकता, उसे छूकर, सुनकर और रोज़ की जानी-पहचानी चीज़ों से मिलाकर समझाना होगा। रंग या चमक की बात करने से कुछ समझ नहीं आएगा।

समझाने की विधि — चार चरण:
चरण 1 — उसके हाथ में ऐसी चीज़ें दीजिए जिनका आकार चाँद के अलग-अलग रूपों जैसा हो।
चरण 2 — बताइए कि कौन-सी चीज़ किस दिन के चाँद जैसी है।
चरण 3 — क्रम से दिन गिनाइए, ताकि उसे बदलाव का सिलसिला समझ आ जाए।
चरण 4 — जो चीज़ें वह पहले से जानता है (जैसे गरमी, आवाज़, समय), उनसे जोड़ दीजिए।
चाँद का रूपमित्र को क्या छूने को देंचाँद क्या कहेगा
अमावस्या — कुछ नहींखाली हथेली“इस दिन मैं ऐसा ही हूँ — बिलकुल कुछ नहीं।”
दूज — पतली रेखाअपने नाख़ून का किनारा या कटी हुई नाख़ून-सी पतली कमानी“इस दिन मैं इतना ही पतला होता हूँ।”
आधा चाँदआधी कटी रोटी या आधी कटोरी“इस दिन मैं आधी रोटी जितना होता हूँ।”
पूर्णिमा — पूरा गोलपूरी गोल रोटी या थाली“इस दिन मैं पूरी थाली जितना गोल हो जाता हूँ।”
फिर घटनाआटे के गोले को रोज़ थोड़ा-थोड़ा दबाकर छोटा करना“फिर मैं रोज़ थोड़ा-थोड़ा ऐसे ही घटता जाता हूँ।”

नमूना उत्तर: चाँद अपने मित्र का हाथ पकड़कर उसे अलग-अलग चीज़ें छुआएगा। पहले वह उसकी खाली हथेली पर हाथ फेरकर कहेगा — “अमावस्या को मैं ऐसा ही होता हूँ, बिलकुल कुछ नहीं।” फिर वह उसे अपने नाख़ून का किनारा छुआकर कहेगा — “दूज को मैं इतना ही पतला होता हूँ।” इसके बाद आधी कटी रोटी छुआकर कहेगा — “आठवें दिन मैं आधी रोटी जितना होता हूँ।” और फिर पूरी गोल रोटी छुआकर कहेगा — “पूर्णिमा को मैं पूरी थाली जितना गोल हो जाता हूँ।” वह आटे का एक गोला बनाकर रोज़ उसे थोड़ा-थोड़ा दबाएगा, जिससे मित्र अपनी उँगलियों से महसूस कर ले कि मैं रोज़ थोड़ा-थोड़ा घटता हूँ। इस तरह उसका मित्र बिना देखे भी मेरे बदलते आकार को समझ जाएगा।

यह सीखने लायक बात है: जो साथी देख नहीं सकते, वे छूकर, सुनकर और सूँघकर दुनिया को जानते हैं। वे ब्रेल लिपि से पढ़ते हैं, जिसमें कागज़ पर उभरे हुए बिंदु उँगलियों से पढ़े जाते हैं। इसलिए ऐसे मित्र को कुछ समझाना हो तो चीज़ को उसके हाथ में दे दीजिए — वही सबसे अच्छा तरीका है।
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