कक्षा ५ हिंदी अध्याय 3 भाषा की बात के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
“सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ।” कविता की इस पंक्ति में ‘भर’ शब्द का प्रयोग किया गया है। अब आप ‘भर’ की सहायता से पाँच वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए, जैसे – पानी गिलास भर है, उसने दिन भर पढ़ाई की आदि।
उत्तर

‘भर’ एक छोटा-सा शब्द है, पर इसके दो काम हैं। पहले वे दोनों काम समझ लीजिए, फिर वाक्य बनाना आसान हो जाएगा।

‘भर’ का अर्थकैसे पहचानेंउदाहरण
पूरा, पूरे समय तकसमय बताने वाले शब्द के बाद आता हैरात भर, दिन भर, साल भर, उम्र भर
पूरा भरा हुआ, उतनी मात्राबरतन या नाप बताने वाले शब्द के बाद आता हैगिलास भर, मुट्ठी भर, अंगुल भर, बाल्टी भर

अब पाँच वाक्य —

  1. कल रात भर तेज़ हवा चलती रही और मुझे नींद नहीं आई।
  2. परीक्षा से पहले उसने दिन भर पढ़ाई की।
  3. माँ ने मुझे एक गिलास भर दूध पीने को दिया।
  4. चिड़िया अपनी चोंच में मुट्ठी भर तिनके ले आई।
  5. दूज का चाँद केवल अंगुल भर चौड़ा दिखाई देता है।

पाँच और वाक्य, यदि आप अधिक लिखना चाहें —

  1. दादी ने साल भर का अनाज कोठरी में रख दिया।
  2. बाल्टी भर पानी से मैंने पूरा आँगन धो दिया।
  3. वह उम्र भर अपने गाँव में ही रहा।
  4. मैंने हाथ भर लंबा रिबन खरीदा।
  5. बच्चे शाम भर मैदान में खेलते रहे।
ध्यान दीजिए: ‘भर’ को उस शब्द से जोड़कर मत लिखिए जिसके साथ वह आया है। ‘रातभर’ नहीं, ‘रात भर’ — बीच में थोड़ी जगह छोड़िए, जैसा कविता में छपा है।
प्र2.
नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यान से पढ़िए — (क) “ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।” (ख) “ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।” अपनी बात पर बल देने के लिए हम इस प्रकार के कुछ शब्दों का प्रयोग दो बार करते हैं, जैसे – जल्दी चलो, जल्दी-जल्दी चलो आदि। अब आप ऐसे ही पाँच वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर

पहले दोनों वाक्यों का अंतर देखिए — इसी में पूरा नियम छिपा है।

वाक्यउसका अर्थ
(क) “ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।”चाँद ठंड से काँपा और यात्रा पूरी कर ली। बात एक बार की लगती है।
(ख) “ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।”चाँद बार-बार, रात भर, लगातार ठिठुरता रहा और तब कहीं जाकर यात्रा पूरी हुई। तकलीफ़ कहीं अधिक बड़ी लगती है।

नियम: जब हमें अपनी बात पर बल देना होता है — यानी यह बताना होता है कि काम बार-बार हुआ, लगातार हुआ या बहुत अधिक हुआ — तब हम शब्द को दो बार बोल देते हैं। ऐसे शब्दों को पुनरुक्त शब्द कहते हैं (‘पुनरुक्त’ यानी फिर से कहा हुआ)।

पाँच वाक्य —

  1. देर हो रही है, जल्दी-जल्दी चलो।
  2. ठंड में मेरे हाथ काँप-काँपकर रुक गए।
  3. वह धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़ रहा था।
  4. बच्चे हँसते-हँसते लोटपोट हो गए।
  5. माँ मुझे बार-बार जगाती रहीं, पर मैं सोता ही रहा।

पाँच और वाक्य —

  1. चिड़िया चहक-चहककर पूरे पेड़ को जगा रही थी।
  2. वर्षा में हम भीगते-भीगते घर पहुँचे।
  3. दादी ने समझा-समझाकर मुझे सारा पाठ याद करा दिया।
  4. वह दौड़ते-दौड़ते थक गया।
  5. आसमान में तारे टिमटिम-टिमटिम कर रहे थे।
कविता में और कहाँ है यह बात: इसी कविता में एक और दोहराया हुआ शब्द है — “सन-सन चलती हवा”। ‘सन’ एक बार कहने से हवा का एक झोंका लगता; ‘सन-सन’ कहने से लगता है कि हवा रात भर लगातार चलती रही। एक और है — “घटता-बढ़ता रोज” — यहाँ दो अलग शब्द जुड़कर बता रहे हैं कि यह क्रम रुकता ही नहीं।
प्र3.
नीचे दी गई कविता की पंक्तियों में संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया पहचानकर उन्हें दिए गए स्थानों में लिखिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए — (पंक्तियाँ) हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला। / आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का। / सिलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला। / ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।
उत्तर

पहले चारों नाम याद कर लीजिए, फिर तालिका भरना आसान हो जाएगा।

शब्द-भेदक्या बताता हैपहचान का सवाल
संज्ञाकिसी व्यक्ति, वस्तु, जगह या भाव का नाम“किसका नाम है?” — जैसे चाँद, माता, ऊन
सर्वनामसंज्ञा की जगह आने वाला शब्द“नाम की जगह क्या आया है?” — जैसे यह, मुझे, किसी
विशेषणसंज्ञा की विशेषता — कैसा, कितना, कौन-सा“कैसा या कितना?” — जैसे मोटा, एक, पूरी
क्रियाकाम होने या करने का बोध“क्या किया?” — जैसे बोला, सिलवा दो, करता हूँ

अब पूरी भरी हुई तालिका देखिए — पहली पंक्ति पुस्तक में पहले से भरी है, बाकी तीन हमने भरी हैं।

पंक्तिसंज्ञासर्वनामविशेषणक्रिया
हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला।हठ, चाँद, दिन, मातायहएककर बैठा, बोला
आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का।आसमान, सफर, मौसम, जाड़ायहजाड़े काहै
सिलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला।माँ, ऊन, झिंगोलामुझेमोटा, एक, ऊन कासिलवा दो
ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।यात्रा, तरहकिसी (और छिपा हुआ ‘मैं’)पूरीठिठुर-ठिठुरकर, करता हूँ

अब इन शब्दों का अपने वाक्यों में प्रयोग —

शब्दशब्द-भेदवाक्य
आसमानसंज्ञावर्षा के बाद आसमान बिलकुल साफ़ हो गया।
सफरसंज्ञागाँव तक का सफर बस से दो घंटे में पूरा हुआ।
मौसमसंज्ञाइस बार जाड़े का मौसम बहुत लंबा चला।
ऊनसंज्ञादादी ऊन से मेरे लिए स्वेटर बुन रही हैं।
झिंगोलासंज्ञाठंड में उसने ऊन का मोटा झिंगोला पहन लिया।
यात्रासंज्ञाहमारी रेल-यात्रा बहुत सुखद रही।
यहसर्वनामयह मेरी लेखन-पुस्तिका है।
मुझेसर्वनाममुझे हरी सब्ज़ी बहुत पसंद है।
किसीसर्वनामकिसी ने दरवाज़े पर दस्तक दी।
मोटाविशेषणसर्दी में मोटा कंबल ओढ़ना अच्छा लगता है।
एकविशेषणमैंने बाज़ार से एक कलम खरीदी।
पूरीविशेषणमैंने अपनी पूरी कहानी एक ही दिन में पढ़ ली।
हैक्रियाआज मौसम बहुत सुहावना है।
सिलवा दोक्रियामाँ, मेरे लिए नई कमीज़ सिलवा दो।
करता हूँक्रियामैं रोज़ सुबह उठकर व्यायाम करता हूँ।
दो बातें ध्यान रखिए:
1. दूसरी और तीसरी पंक्ति में ‘यह’ और ‘जाड़े का’ जैसे शब्द संज्ञा के साथ लगकर उसकी विशेषता भी बता रहे हैं। ‘यह मौसम’ में ‘यह’ बताता है — कौन-सा मौसम। इसलिए इसे सर्वनाम भी कहा जाता है और सार्वनामिक विशेषण भी।
2. आखिरी पंक्ति में कर्ता (‘मैं’) लिखा हुआ नहीं है, पर ‘करता हूँ’ से पता चल जाता है कि काम करने वाला ‘मैं’ ही है। ऐसे छिपे हुए कर्ता को भी पहचानना चाहिए।
क्या यह उपयोगी रहा?