प्र1.
मान लीजिए कि चाँद, झिंगोले के लिए माँ, कपड़े के दुकानदार और दर्ज़ी से संवाद करता है। बातचीत के कुछ अंश नीचे दिए गए हैं। आप इन्हें आगे बढ़ाइए। आप संवाद अपनी मातृभाषा में भी लिख सकते हैं। — चाँद और माँ का संवाद (चाँद: माँ, मुझे बहुत ठंड लगती है। मेरे लिए एक मोटा झिंगोला सिलवा दो! / माँ: तुझे सच में ठंड सताती होगी लेकिन एक समस्या है। / चाँद: समस्या? कैसी समस्या, माँ? / माँ: तेरा आकार तो प्रतिदिन बदलता रहता है। कभी छोटा, कभी बड़ा, कभी एकदम गायब! मैं कैसे नाप लूँ? / चाँद: (सोचकर) अरे हाँ! लेकिन फिर भी कोई उपाय तो होगा?) — आगे के संवाद लिखिए।
उत्तर
यहाँ चार पंक्तियाँ खाली छोड़ी गई हैं — माँ, चाँद, माँ, चाँद। इन्हें इस तरह भरा जा सकता है कि बात आगे भी बढ़े और कोई हल भी निकल आए।
अच्छा संवाद कैसे लिखें — चार बातें:
1. जो बात पहले कही जा चुकी है, उसी से आगे बढ़ाइए।
2. हर पात्र अपने स्वभाव के हिसाब से बोले — चाँद बच्चों जैसा, माँ समझदार।
3. वाक्य छोटे रखिए, जैसे लोग सचमुच बोलते हैं।
4. अंत में या तो कोई हल निकले या बात हँसी में खत्म हो।
1. जो बात पहले कही जा चुकी है, उसी से आगे बढ़ाइए।
2. हर पात्र अपने स्वभाव के हिसाब से बोले — चाँद बच्चों जैसा, माँ समझदार।
3. वाक्य छोटे रखिए, जैसे लोग सचमुच बोलते हैं।
4. अंत में या तो कोई हल निकले या बात हँसी में खत्म हो।
नमूना उत्तर — पूरा संवाद:
| कौन | क्या कहता है |
|---|---|
| चाँद | माँ, मुझे बहुत ठंड लगती है। मेरे लिए एक मोटा झिंगोला सिलवा दो! (पुस्तक में दिया हुआ) |
| माँ | तुझे सच में ठंड सताती होगी लेकिन एक समस्या है। (पुस्तक में दिया हुआ) |
| चाँद | समस्या? कैसी समस्या, माँ? (पुस्तक में दिया हुआ) |
| माँ | तेरा आकार तो प्रतिदिन बदलता रहता है। कभी छोटा, कभी बड़ा, कभी एकदम गायब! मैं कैसे नाप लूँ? (पुस्तक में दिया हुआ) |
| चाँद | (सोचकर) अरे हाँ! लेकिन फिर भी कोई उपाय तो होगा? (पुस्तक में दिया हुआ) |
| माँ | एक उपाय तो है, बेटा। तेरे लिए ऐसा कपड़ा चुना जाए जो खिंच भी जाए और सिकुड़ भी जाए। |
| चाँद | वाह माँ! फिर तो मैं छोटा होऊँ या बड़ा, झिंगोला मेरे बदन में आ ही जाएगा। |
| माँ | पर एक बात और है। अमावस्या को तो तू दिखता ही नहीं। उस दिन झिंगोला पहनाऊँगी किसे? |
| चाँद | (हँसकर) उस दिन आप उसे तह करके रख देना, माँ। छुट्टी के दिन मुझे कपड़े की क्या ज़रूरत! |
ध्यान दीजिए: इस नमूने में दोनों समस्याएँ उठाई गई हैं — नाप की और अमावस्या की। अच्छे संवाद में बात आगे बढ़ती है, वहीं की वहीं नहीं रहती। आप चाहें तो अपनी मातृभाषा (भोजपुरी, मालवी, अवधी, मराठी, बांग्ला — जो भी आपकी हो) में भी यही संवाद लिख सकते हैं।