प्र1.
पुस्तकालय में से यह पुस्तक (सिंहासन बत्तीसी) खोजकर पढ़िए और अपनी मनपसंद कहानी कक्षा में सुनाइए।
उत्तर
यह करके देखने वाला काम है। पहले जान लीजिए कि आप ढूँढ़ क्या रहे हैं।
पुस्तक के बारे में (पाठ्यपुस्तक से): आपने जो कहानी पढ़ी, वह हमारे देश की सैकड़ों वर्ष पुरानी पुस्तक सिंहासन बत्तीसी पर आधारित है। इसमें राजा भोज को ज़मीन में गड़ा राजा विक्रमादित्य का सिंहासन मिलता है, जिसमें बत्तीस मूर्तियाँ जड़ी होती हैं। हर मूर्ति राजा भोज को राजा विक्रमादित्य की एक कहानी सुनाती है।
कैसे कीजिए — चार चरण:
- पुस्तकालय जाकर कहानी-संग्रह वाली अलमारी देखिए, या पुस्तकालय-प्रभारी से “सिंहासन बत्तीसी” माँगिए।
- अनुक्रमणिका से कोई एक कहानी चुनिए और उसे दो बार पढ़िए — पहली बार समझने के लिए, दूसरी बार सुनाने के लिए।
- कागज़ पर पाँच बिंदु लिखिए — पात्र, समस्या, मोड़, फैसला, सीख।
- कक्षा में उन्हीं पाँच बिंदुओं के सहारे कहानी सुनाइए। पात्रों की बात कहते समय आवाज़ बदलिए, इससे सुनने का मज़ा बढ़ता है।
नमूना (कहानी सुनाने की शुरुआत ऐसी हो सकती है): “आज मैं आपको सिंहासन बत्तीसी की एक कहानी सुनाऊँगा। इसमें राजा भोज एक बार फिर सिंहासन पर बैठने चलते हैं और सत्रहवीं मूर्ति उन्हें रोक देती है। वह कहती है — पहले यह सुनिए कि राजा विक्रमादित्य ने एक भूखे यात्री के लिए क्या किया था…”
इस पाठ से जोड़िए: हमारी कहानी में मूर्तियाँ केवल चार हैं और वे प्रश्न पूछती हैं। सिंहासन बत्तीसी में मूर्तियाँ बत्तीस हैं और वे कहानी सुनाती हैं। दोनों जगह मूर्तियों का काम एक ही है — यह जाँचना कि बैठने वाला सचमुच योग्य है या नहीं।