कक्षा ५ हिंदी अध्याय 2 पाठ से आगे के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
कहानी में गाँव वाले न्याय करवाने या झगड़े सुलझाने बच्चों के पास जाया करते थे। आप अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए किन-किनके पास जाते हैं? आप उन्हीं के पास क्यों जाते हैं?
उत्तर

यह आपके अपने जीवन का प्रश्न है। इसका उत्तर हर बच्चे का अलग होगा।

कैसे लिखें — तीन चरण:
चरण 1 — समस्याओं को दो-तीन तरह में बाँटिए (घर की, पढ़ाई की, दोस्तों की)।
चरण 2 — हर तरह की समस्या के लिए बताइए कि आप किसके पास जाते हैं।
चरण 3 — हर एक के लिए कारण दीजिए — वह व्यक्ति यह काम अच्छी तरह क्यों कर पाता है।

नमूना उत्तर (तालिका के रूप में सोचिए):

समस्याकिसके पास जाता हूँक्यों
पढ़ाई में कुछ समझ न आएअपनी शिक्षिका के पासवे धीरे-धीरे और आसान तरीके से समझाती हैं, और डाँटती नहीं।
दोस्तों से झगड़ा हो जाएकक्षा के मॉनीटर या बड़े भाई के पासवे दोनों की बात सुनते हैं और किसी एक का पक्ष नहीं लेते।
घर की कोई परेशानीमाता-पिता के पासवे मुझे सबसे अच्छी तरह जानते हैं और मेरी भलाई चाहते हैं।
मन उदास होदादी के पासवे बिना टोके पूरी बात सुनती हैं और हौसला बढ़ाती हैं।
मोहल्ले का कोई झगड़ागाँव के बुज़ुर्गों या पंचायत के पासउनका अनुभव ज़्यादा है और उनकी बात सब मानते हैं।

पूरा नमूना उत्तर: मैं अपनी अलग-अलग समस्याओं के लिए अलग-अलग लोगों के पास जाता हूँ। पढ़ाई की उलझन में मैं अपनी शिक्षिका के पास जाता हूँ, क्योंकि वे बहुत धीरज से समझाती हैं। दोस्तों से झगड़ा होने पर मैं कक्षा के मॉनीटर के पास जाता हूँ, क्योंकि वह दोनों की बात सुनता है और किसी का पक्ष नहीं लेता। घर की बात हो तो मैं माता-पिता से कहता हूँ। मैं इन्हीं लोगों के पास इसलिए जाता हूँ क्योंकि ये तीनों बातें इनमें हैं — ये मेरी बात पूरी सुनते हैं, ये सच का साथ देते हैं और ये मेरी बात दूसरों में नहीं फैलाते।

कहानी से जोड़िए: गाँव वाले भी इसी कारण उस लड़के के पास जाते थे। उसमें भी ये तीनों बातें थीं — वह ध्यान से सुनता था, सच का साथ देता था, और उसके फैसले से “कभी किसी को असंतोष नहीं हुआ।” भरोसा पद से नहीं, इसी व्यवहार से बनता है।
प्र2.
क्या कभी ऐसा हुआ है कि किसी ने आपके साथ अन्याय किया हो? आपने उस स्थिति का सामना कैसे किया?
उत्तर

यह भी अपने अनुभव का प्रश्न है। कोई सच्ची घटना लिखिए और यह भी लिखिए कि आपने क्या किया।

कैसे लिखें — चार चरण:
चरण 1 — घटना बताइए — कब, कहाँ, क्या हुआ।
चरण 2 — बताइए कि आपको वह अन्याय क्यों लगा।
चरण 3 — बताइए कि आपने क्या किया — किससे कहा, कैसे कहा।
चरण 4 — बताइए कि अंत में क्या हुआ और आपने क्या सीखा।

अच्छे उत्तर में यह ज़रूर हो — घटना, अपनी भावना, अपना कदम और सीख। यह भी ध्यान रहे कि उत्तर में किसी का नाम लेकर बुराई न हो।

नमूना उत्तर: पिछले वर्ष हमारी कक्षा में चित्रकला की प्रतियोगिता हुई थी। मैंने बहुत मेहनत से एक चित्र बनाया था। एक साथी ने वह चित्र अपना बताकर जमा कर दिया और उसे इनाम मिल गया। मुझे बहुत बुरा लगा, क्योंकि मेहनत मेरी थी और नाम किसी और का हो गया। पहले मुझे बहुत गुस्सा आया, पर मैंने शोर नहीं मचाया। मैं अपनी अभ्यास-पुस्तिका लेकर शिक्षिका के पास गया, जिसमें उसी चित्र का कच्चा खाका बना हुआ था। शिक्षिका ने दोनों की बात सुनी और खाका देखकर सच जान लिया। मेरे साथी ने अपनी गलती मान ली और मुझसे क्षमा माँगी। मैंने भी उसे माफ़ कर दिया। मैंने यह सीखा कि अन्याय के समय चिल्लाने से नहीं, सबूत और शांति से बात रखने से न्याय मिलता है।

याद रखने की बात: अन्याय होने पर चुप रह जाना भी ठीक नहीं और लड़ पड़ना भी ठीक नहीं। सही रास्ता है — किसी बड़े और भरोसेमंद व्यक्ति तक बात पहुँचाना। कहानी के गाँव वालों ने भी यही किया था; वे लड़ते नहीं, अपनी फरियाद लेकर जाते थे।
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