कक्षा ५ हिंदी अध्याय 2 भाषा की बात के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
अब नीचे दिए गए वाक्यों में उचित स्थानों पर विराम चिह्न लगाइए — (क) चौथी मूर्ति ने कहा ठहरो जो लड़के इस सिंहासन पर बैठते थे वे भोले भाले थे उनके मन में कलुष नहीं था अगर तुमको विश्वास है कि तुम इस योग्य हो तो इस सिंहासन पर बैठ सकते हो
उत्तर

विराम चिह्न लगाने के बाद वाक्य ऐसा बनेगा —

चौथी मूर्ति ने कहा, ठहरो! जो लड़के इस सिंहासन पर बैठते थे, वे भोले-भाले थे उनके मन में कलुष नहीं था अगर तुमको विश्वास है कि तुम इस योग्य हो तो इस सिंहासन पर बैठ सकते हो

कौन-सा चिह्न कहाँ और क्यों — एक-एक करके:

चिह्ननामकहाँ लगाक्यों लगा
,अल्पविराम“कहा” के बादअब किसी की कही हुई बात शुरू हो रही है, इसलिए ज़रा-सा ठहरना है।
“ ”उद्धरण चिह्नमूर्ति की पूरी बात के दोनों ओरये बताते हैं कि यह शब्द मूर्ति के अपने हैं, लेखक के नहीं।
!विस्मयादिबोधक चिह्न“ठहरो” के बादयह रोकने की तेज़ पुकार है। “ठहरो।” कहने में वह ज़ोर नहीं आता जो “ठहरो!” में आता है।
,अल्पविराम“बैठते थे” के बादवाक्य लंबा है। यहाँ साँस लेने भर का ठहराव चाहिए, पूरा विराम नहीं।
पूर्ण विराम“थे”, “था” और “सकते हो” के बादयहाँ बात पूरी हो जाती है, इसलिए पूरा ठहराव।
-योजक चिह्नभोले-भालेदो शब्द मिलकर एक ही अर्थ दे रहे हैं, इसलिए बीच में छोटी लकीर लगती है।
विराम चिह्न क्यों ज़रूरी हैं: बिना चिह्नों वाला वाक्य एक ही साँस में दौड़ता चला जाता है और अर्थ फिसल जाता है। चिह्न बताते हैं कि कहाँ रुकना है और किस भाव से पढ़ना है — यही पुस्तक ने पृष्ठ 16 के बक्से में समझाया है।
ध्यान दीजिए: पुस्तक में यह अभ्यास बिना क्रमांक के छपा है और इसके बाद सीधे “2.” आ जाता है। इसलिए इसे ही प्रश्न 1 मानिए।
प्र2.
(ख) राजा बड़ी देर तक सोचता रहा फिर उसने मन ही मन कहा अगर एक लड़का इस पर बैठ सकता है तो भला मैं क्यों नहीं बैठ सकता हूँ मैं राजा हूँ मुझसे ज्यादा धनवान बलवान और बुद्धिमान भला और कौन होगा मैं अवश्य इस सिंहासन पर बैठने योग्य हूँ
उत्तर

विराम चिह्न लगाने के बाद वाक्य ऐसा बनेगा —

राजा बड़ी देर तक सोचता रहा फिर उसने मन ही मन कहा, अगर एक लड़का इस पर बैठ सकता है तो भला मैं क्यों नहीं बैठ सकता हूँ? मैं राजा हूँ मुझसे ज्यादा धनवान, बलवान और बुद्धिमान भला और कौन होगा? मैं अवश्य इस सिंहासन पर बैठने योग्य हूँ

कौन-सा चिह्न कहाँ और क्यों:

चिह्ननामकहाँ लगाक्यों लगा
पूर्ण विराम“सोचता रहा”, “मैं राजा हूँ”, “योग्य हूँ” के बादयहाँ हर बार बात पूरी हो जाती है।
,अल्पविराम“कहा” के बादइसके बाद राजा की अपनी कही हुई बात शुरू होती है।
“ ”उद्धरण चिह्नराजा के मन की पूरी बात के दोनों ओरयह राजा ने मन ही मन कहा है, इसलिए उसकी बात अलग दिखनी चाहिए।
?प्रश्नवाचक चिह्न“बैठ सकता हूँ” और “कौन होगा” के बाददोनों जगह राजा खुद से सवाल पूछ रहा है, इसलिए प्रश्नवाचक चिह्न आएगा, पूर्ण विराम नहीं।
,अल्पविराम“धनवान” के बादयहाँ तीन शब्दों की सूची है — धनवान, बलवान और बुद्धिमान। सूची में आख़िरी से पहले “और” आता है, बाकी के बीच अल्पविराम।
छोटा नियम याद रखिए: सूची में जितने शब्द हों, आख़िरी दो को “और” जोड़ता है और बाकी को अल्पविराम — जैसे “आम, केला और अमरूद”।
भाव भी बदल जाता है: प्रश्नवाचक चिह्न लगते ही पता चलता है कि राजा खुद को समझा रहा है। इन्हीं दो सवालों से उसका घमंड दिखता है — और यही घमंड आगे चलकर उसे सिंहासन से दूर कर देता है।
प्र3.
“तीसरी मूर्ति भी उड़ गई।” इस वाक्य के आधार पर प्रश्नों के उत्तर लिखिए — (क) इस वाक्य में संज्ञा शब्द कौन-सा है?
उत्तर

इस वाक्य में संज्ञा शब्द है — मूर्ति

क्यों: संज्ञा वह शब्द होता है जो किसी व्यक्ति, वस्तु, जगह या भाव का नाम बताता है। “मूर्ति” एक वस्तु का नाम है, इसलिए यही संज्ञा है।

जाँचने का आसान तरीका — दो चरण:

  1. वाक्य से पूछिए — “कौन उड़ गई?” उत्तर आया — मूर्ति
  2. जो उत्तर आया, वही संज्ञा है।

बाकी शब्द क्या हैं, यह भी देख लीजिए —

शब्दवह क्या है
मूर्तिसंज्ञा — वस्तु का नाम
तीसरीविशेषण — मूर्ति के बारे में बताता है
भीजोड़ने वाला छोटा शब्द
उड़ गईक्रिया — काम बताती है
प्र4.
(ख) कौन-सा शब्द इस संज्ञा शब्द के गुण या विशेषता को बता रहा है?
उत्तर

संज्ञा “मूर्ति” की विशेषता बता रहा है शब्द — तीसरी

तीसरी मूर्ति → कौन-सी मूर्ति? तीसरी
जो शब्द संज्ञा की विशेषता बताए, उसे विशेषण कहते हैं।
क्यों यही: मूर्तियाँ चार थीं। “तीसरी” शब्द बता देता है कि उनमें से कौन-सी उड़ी। यह मूर्ति को बाकी मूर्तियों से अलग कर देता है — यही विशेषण का काम है।
जानने की बात: जिस संज्ञा की विशेषता बताई जाती है, उसे विशेष्य कहते हैं। यहाँ तीसरी विशेषण है और मूर्ति विशेष्य। “तीसरी” गिनती के क्रम को बताता है, इसलिए यह संख्यावाचक विशेषण है।

अपने वाक्य बनाकर देखिए: पहली घंटी बजी। दूसरा प्रश्न कठिन था। पाँचवाँ खिलाड़ी सबसे तेज़ दौड़ा।

प्र5.
कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इनमें विशेषण शब्द पहचानकर उनके नीचे रेखा खींचिए — (क) एक दिन लड़कों का एक झुंड वहाँ खेल रहा था।
उत्तर

विशेषण हैं — एक और एक। (पुस्तक में ये दोनों पहले से रेखांकित करके नमूने के रूप में दिखाए गए हैं।)

एक दिन लड़कों का एक झुंड वहाँ खेल रहा था।
पहला एक → बताता है कि कौन-सा दिन → दिन का विशेषण
दूसरा एक → बताता है कि कितने झुंड → झुंड का विशेषण
क्यों “एक” विशेषण है: “एक” गिनती बताता है, और गिनती बताने वाला शब्द भी विशेषण होता है। इसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। यहाँ यह हर बार अपने आगे आई संज्ञा के बारे में कुछ बता रहा है।
प्र6.
(ख) उज्जैन की प्राचीन और ऐतिहासिक नगरी के बाहर एक लंबा-चौड़ा मैदान था।
उत्तर

विशेषण हैं — प्राचीन, ऐतिहासिक, एक और लंबा-चौड़ा

उज्जैन की प्राचीन और ऐतिहासिक नगरी के बाहर एक लंबा-चौड़ा मैदान था।
विशेषणकिसकी विशेषता बता रहा हैक्या बता रहा है
प्राचीननगरीनगरी बहुत पुरानी है।
ऐतिहासिकनगरीनगरी का इतिहास से नाता है — यहाँ पुराने समय की बड़ी घटनाएँ हुई हैं।
एकमैदानमैदान की गिनती — एक।
लंबा-चौड़ामैदानमैदान का आकार — बहुत बड़ा।
ध्यान दीजिए: “उज्जैन” विशेषण नहीं है। यह एक जगह का नाम है, इसलिए संज्ञा है। “लंबा-चौड़ा” दो शब्दों को योजक चिह्न (-) से जोड़कर बना एक ही विशेषण है।
प्र7.
(ग) इतनी छोटी उम्र में इतनी बुद्धि का होना आश्चर्य की बात है।
उत्तर

विशेषण हैं — इतनी, छोटी और इतनी

इतनी छोटी उम्र में इतनी बुद्धि का होना आश्चर्य की बात है।
विशेषणकिसके बारे मेंक्या बता रहा है
छोटीउम्रउम्र कम है।
इतनी (पहला)छोटीकितनी छोटी — बहुत ही छोटी। यह “छोटी” की मात्रा बढ़ा रहा है।
इतनी (दूसरा)बुद्धिकितनी बुद्धि — बहुत ज़्यादा।
“इतनी” का काम: यह मात्रा बताने वाला शब्द है। मात्रा बताने वाले विशेषण को परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं — जैसे थोड़ा दूध, बहुत पानी, इतनी बुद्धि।
प्र8.
(घ) राजा ने देखा कि वह पत्थर नहीं, बहुत ही सुंदर सिंहासन था।
उत्तर

विशेषण है — सुंदर। इसके साथ आया बहुत ही उसकी मात्रा बढ़ा रहा है।

राजा ने देखा कि वह पत्थर नहीं, बहुत ही सुंदर सिंहासन था।
कैसा सिंहासन? → सुंदर
कितना सुंदर? → बहुत ही
अंतर समझिए: “सुंदर” सीधे सिंहासन के बारे में बता रहा है, इसलिए वही विशेषण है। “बहुत ही” सिंहासन के बारे में नहीं, बल्कि सुंदर के बारे में बता रहा है। ऐसे शब्द को प्रविशेषण कहते हैं — यानी विशेषण की भी विशेषता बताने वाला शब्द। रेखा “सुंदर” के नीचे खींचिए; चाहें तो “बहुत ही सुंदर” को साथ रेखांकित कर सकते हैं।
ध्यान दीजिए: “पत्थर” और “सिंहासन” दोनों वस्तुओं के नाम हैं, इसलिए वे संज्ञा हैं, विशेषण नहीं।
प्र9.
(ङ) बात ही बात में वहाँ अच्छी खासी भीड़ जमा हो गई।
उत्तर

विशेषण है — अच्छी खासी (इसे “अच्छी-खासी” भी लिखा जाता है)।

बात ही बात में वहाँ अच्छी खासी भीड़ जमा हो गई।
कितनी भीड़? → अच्छी खासी यानी काफ़ी बड़ी भीड़
यह जोड़ा क्यों बना है: “अच्छी खासी” दो शब्दों का जोड़ा है, पर दोनों मिलकर एक ही अर्थ देते हैं — “काफ़ी ज़्यादा”। ऐसे जोड़े बोलचाल में बहुत चलते हैं, जैसे — भला-चंगा, साफ़-सुथरा, ठीक-ठाक। यह भीड़ की मात्रा बता रहा है, इसलिए विशेषण है।
अपने वाक्य बनाइए: मेले में अच्छी खासी भीड़ थी। उसने अच्छी खासी मेहनत की। आज अच्छी खासी ठंड है।
प्र10.
आपमें कौन-कौन सी विशेषताएँ होनी चाहिए जिससे आप कहानी के सिंहासन पर बैठ सकें? लिखिए—
उत्तर

पुस्तक में सात रिक्त पंक्तियाँ दी गई हैं। सातों इस तरह भरी जा सकती हैं —

क्र.विशेषताइसका मतलब मेरे रोज़ के जीवन में
1मैं कभी चोरी न करूँकिसी की पेंसिल, किताब या टिफ़िन बिना पूछे न लूँ।
2मैं सच बोलूँगलती हो जाए तो डाँट के डर से झूठ न बोलूँ, मान लूँ।
3मैं किसी को चोट न पहुँचाऊँन मारपीट करूँ, न किसी को चिढ़ाकर उसका मन दुखाऊँ।
4मेरे मन में कलुष न होकिसी से जलन या बैर न रखूँ; मन साफ़ रखूँ।
5मैं दोनों पक्षों की बात सुनूँझगड़े में एक की सुनकर फैसला न कर दूँ।
6मैं निष्पक्ष रहूँअपने दोस्त की गलती हो तो भी उसका पक्ष न लूँ।
7मुझमें घमंड न होअपने को सबसे बड़ा न समझूँ; गलती मानने में शर्म न करूँ।
ये सात ही क्यों: ये कोई मनगढ़ंत बातें नहीं हैं। पहली तीन ठीक वही हैं जो तीन मूर्तियों ने राजा से पूछी थीं — चोरी, झूठ और चोट। चौथी वह है जो चौथी मूर्ति ने कही — “उनके मन में कलुष नहीं था।” बाकी तीन उस लड़के के काम करने के तरीके से निकली हैं, जो बयान सुनकर, गवाही लेकर, बिना घमंड के फैसला सुनाता था।

नमूना उत्तर (एक वाक्य में): इस सिंहासन पर बैठने के लिए मुझे सच बोलना होगा, किसी की चीज़ नहीं लेनी होगी, किसी का दिल नहीं दुखाना होगा, मन में किसी के लिए मैल नहीं रखना होगा, दोनों पक्षों की बात ध्यान से सुननी होगी, बिना पक्षपात के फैसला करना होगा और अपनी गलती मानने में झिझकना नहीं होगा।

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