विराम चिह्न लगाने के बाद वाक्य ऐसा बनेगा —
कौन-सा चिह्न कहाँ और क्यों — एक-एक करके:
| चिह्न | नाम | कहाँ लगा | क्यों लगा |
|---|---|---|---|
| , | अल्पविराम | “कहा” के बाद | अब किसी की कही हुई बात शुरू हो रही है, इसलिए ज़रा-सा ठहरना है। |
| “ ” | उद्धरण चिह्न | मूर्ति की पूरी बात के दोनों ओर | ये बताते हैं कि यह शब्द मूर्ति के अपने हैं, लेखक के नहीं। |
| ! | विस्मयादिबोधक चिह्न | “ठहरो” के बाद | यह रोकने की तेज़ पुकार है। “ठहरो।” कहने में वह ज़ोर नहीं आता जो “ठहरो!” में आता है। |
| , | अल्पविराम | “बैठते थे” के बाद | वाक्य लंबा है। यहाँ साँस लेने भर का ठहराव चाहिए, पूरा विराम नहीं। |
| । | पूर्ण विराम | “थे”, “था” और “सकते हो” के बाद | यहाँ बात पूरी हो जाती है, इसलिए पूरा ठहराव। |
| - | योजक चिह्न | भोले-भाले | दो शब्द मिलकर एक ही अर्थ दे रहे हैं, इसलिए बीच में छोटी लकीर लगती है। |