यह कल्पना का प्रश्न है। इसका कोई एक “सही” उत्तर नहीं है। पर आपकी कल्पना कहानी से जुड़ी होनी चाहिए।
चरण 1 — तय कीजिए कि मूर्तियाँ कहाँ गईं (कोई एक जगह)।
चरण 2 — बताइए कि वहाँ वे क्या करती हैं।
चरण 3 — यह भी लिखिए कि उनका काम कहानी वाले काम से मिलता-जुलता क्यों है।
अच्छे उत्तर में यह ज़रूर हो — जगह, काम, और यह बात कि मूर्तियाँ अब भी न्याय की रखवाली कर रही हैं।
नमूना उत्तर: मुझे लगता है कि चारों मूर्तियाँ आकाश में उड़कर किसी और देश के किसी और मैदान में उतर गई होंगी। वहाँ भी बच्चे खेलते होंगे। मूर्तियाँ फिर से ज़मीन के नीचे छिप जाती होंगी और सिंहासन को अपने साथ छिपा लेती होंगी। जब कोई सच्चे मन वाला बच्चा वहाँ खेलते-खेलते ठोकर खाएगा, तभी सिंहासन बाहर आएगा। तब तक वे चुपचाप देखती रहती होंगी कि कौन सच बोलता है और कौन दूसरों की बात ध्यान से सुनता है। मुझे लगता है कि वे किसी की परीक्षा लिए बिना कभी सिंहासन किसी को नहीं देतीं।
दूसरा नमूना (छोटा): चारों मूर्तियाँ राजा विक्रमादित्य के पास लौट गई होंगी। वहाँ वे उन्हें बताती होंगी कि आज के राजाओं में से कोई भी उनकी कुर्सी के योग्य नहीं निकला। फिर वे सिंहासन को किसी सुरक्षित जगह रख आती होंगी और नए योग्य व्यक्ति के जन्म की प्रतीक्षा करती होंगी।