सुबह होने का पता हमें आँख, कान और नाक — तीनों से चलता है। सबसे पहला संकेत यही है कि अँधेरा हटने लगता है और उजाला फैलने लगता है।
| किससे पता चलता है | क्या दिखता या सुनाई देता है |
|---|---|
| आसमान से | आसमान का काला रंग पहले हल्का नीला होता है, फिर पूरब की ओर लाली छा जाती है और सूरज निकल आता है। |
| धूप से | खिड़की या दरवाज़े की झिरी से किरन कमरे में आ जाती है और दीवार पर चमकती है। |
| पक्षियों से | चिड़ियाँ चहचहाने लगती हैं, कौआ बोलता है और मुर्गा बाँग देता है। |
| आवाज़ों से | मंदिर की घंटी, अज़ान या गुरुद्वारे का पाठ सुनाई देता है। सड़क पर गाड़ियाँ चलने लगती हैं। |
| घर के कामों से | माँ चूल्हा जलाती हैं, चाय की महक आती है, दूधवाला और अख़बार वाला आ जाता है। |
| फूलों से | रात में बंद रहने वाले कई फूल — जैसे कमल और सूरजमुखी — सुबह खिल जाते हैं। |
नमूना उत्तर: मुझे सबसे पहले उजाले से पता चलता है कि सुबह हो गई है। खिड़की से किरन आकर मेरे बिस्तर पर पड़ती है। बाहर चिड़ियाँ चहचहाने लगती हैं और दूर से मंदिर की घंटी सुनाई देती है। रसोई से चाय की महक आने लगती है और माँ मुझे उठाने आ जाती हैं। इन सब बातों से मैं समझ जाता हूँ कि सुबह हो गई है।