कक्षा ५ हिंदी अध्याय 1 भाषा की बात के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
“कल तो तेरे साथ शाम तक / खेल बहुत से खेली मैं।” ‘शाम’ के लिए हम संध्या, साँझ, सायं जैसे शब्दों का भी प्रयोग करते हैं। मिलते-जुलते या समान अर्थ वाले ऐसे शब्दों को समानार्थी शब्द कहते हैं। नीचे दिए गए शब्दों के समान अर्थ वाले शब्दों पर घेरा बनाइए — • नभ — आकाश, अंबर, नभचर • हवा — वायु, व्योम, पवन • पेड़ — विशाल, वृक्ष, तरु • फूल — कुसुम, सरिता, सुमन • दुनिया — भूमि, संसार, विश्व
उत्तर

हर पंक्ति में तीन शब्द दिए हैं। उनमें से दो समानार्थी हैं और एक मेल नहीं खाता। घेरा उन्हीं दो पर बनेगा।

शब्ददिए गए शब्दघेरा किन पर (समानार्थी)जो छूट गया, वह क्यों नहीं
नभआकाश, अंबर, नभचरआकाश, अंबरनभचर — इसका अर्थ है नभ में चलने वाला, यानी पक्षी। यह आकाश नहीं, आकाश में उड़ने वाला जीव है।
हवावायु, व्योम, पवनवायु, पवनव्योम — इसका अर्थ है आकाश, हवा नहीं। यह शब्द ‘नभ’ की पंक्ति में जाता।
पेड़विशाल, वृक्ष, तरुवृक्ष, तरुविशाल — इसका अर्थ है बहुत बड़ा। यह किसी चीज़ की विशेषता बताता है, नाम नहीं। पेड़ विशाल हो सकता है, पर विशाल का अर्थ पेड़ नहीं है।
फूलकुसुम, सरिता, सुमनकुसुम, सुमनसरिता — इसका अर्थ है नदी। नदी और फूल में कोई मेल नहीं।
दुनियाभूमि, संसार, विश्वसंसार, विश्वभूमि — इसका अर्थ है ज़मीन, धरती की मिट्टी। दुनिया में केवल ज़मीन नहीं, उस पर रहने वाले सब लोग और चीज़ें भी आती हैं।
पहचानने का आसान तरीका — दो चरण:
चरण 1 — दिए गए शब्द को वाक्य में रखिए और उसकी जगह हर विकल्प रखकर देखिए।
चरण 2 — जिससे वाक्य का अर्थ नहीं बदले, वही समानार्थी है।
जैसे — “नभ में तारे चमक रहे हैं।” → “आकाश में तारे चमक रहे हैं।” ✓ · “अंबर में तारे चमक रहे हैं।” ✓ · “नभचर में तारे चमक रहे हैं।” ✗ — अर्थ बिगड़ गया, इसलिए नभचर समानार्थी नहीं है।
जोड़कर याद कीजिए: इस पाठ से मिले समानार्थी शब्द —
शाम = संध्या, साँझ, सायं · नभ = आकाश, अंबर, गगन, व्योम · हवा = वायु, पवन, समीर · पेड़ = वृक्ष, तरु, द्रुम · फूल = कुसुम, सुमन, पुष्प · दुनिया = संसार, विश्व, जगत
प्र2.
दिए गए रिक्त स्थानों की पूर्ति रेखांकित शब्दों के विपरीत अर्थ वाले शब्दों से कीजिए — (क) मैं आज यह परी-कथा पढ़ूँगा, ................. आप पढ़ लेना।
उत्तर

रिक्त स्थान में आएगा — कल

मैं आज यह परी-कथा पढ़ूँगा, कल आप पढ़ लेना।
क्यों: रेखांकित शब्द है आज। ‘आज’ का विपरीत शब्द है कल। वाक्य का अर्थ भी यही माँग रहा है — किताब एक ही है, इसलिए जिस दिन एक पढ़ेगा, उस दिन दूसरा नहीं पढ़ सकता। इसलिए दूसरा उसे अगले दिन पढ़ेगा।
जानने की बात: हिंदी में ‘कल’ शब्द दो काम करता है — बीता हुआ दिन भी और आने वाला दिन भी। यहाँ ‘पढ़ लेना’ भविष्य की बात कह रहा है, इसलिए ‘कल’ का अर्थ आने वाला कल है।
प्र3.
(ख) मैं जब तक खेलने के लिए आई तब तक हरिका चली ................. थी।
उत्तर

रिक्त स्थान में आएगा — गई

मैं जब तक खेलने के लिए आई तब तक हरिका चली गई थी।
क्यों: रेखांकित शब्द है आई। ‘आना’ का विपरीत है ‘जाना’, इसलिए ‘आई’ का विपरीत हुआ गई। वाक्य का अर्थ भी यही है — जब तक एक लड़की खेलने पहुँची, तब तक दूसरी वहाँ से निकल चुकी थी। इसीलिए “चली गई थी” लिखा जाएगा।
ध्यान दीजिए: यहाँ ‘हरिका’ एक लड़की का नाम है। स्त्रीलिंग है, इसलिए ‘गया’ नहीं, ‘गई’ लिखा जाएगा। विपरीत शब्द भरते समय वाक्य का लिंग और काल दोनों मिलाकर देखिए।
प्र4.
(ग) वह ................. आया और शाम को चला गया।
उत्तर

रिक्त स्थान में आएगा — सुबह

वह सुबह आया और शाम को चला गया।
क्यों: रेखांकित शब्द है शाम। ‘शाम’ का विपरीत शब्द है सुबह। वाक्य में एक ही व्यक्ति के आने और जाने की बात है, इसलिए दोनों समय एक-दूसरे के उलट होने चाहिए — आया सुबह, गया शाम को। इसका मतलब वह पूरा दिन वहीं रहा।
जोड़िए: ‘सुबह’ के समानार्थी शब्द हैं — प्रातः, भोर, सवेरा। और ‘शाम’ के — संध्या, साँझ, सायं। यानी प्रातः × संध्या भी विपरीत जोड़ी बनती है।
प्र5.
(घ) मेरे जागने और ................. का समय निश्चित है।
उत्तर

रिक्त स्थान में आएगा — सोने

मेरे जागने और सोने का समय निश्चित है।
क्यों: रेखांकित शब्द है जागने। ‘जागना’ का विपरीत है ‘सोना’। वाक्य में ‘जागने’ के साथ ‘का’ लगा है, इसलिए दूसरा शब्द भी उसी रूप में आएगा — सोने, न कि ‘सोना’।
इस पाठ से बनी विपरीत जोड़ियाँ:
आज × कल · आना × जाना · सुबह × शाम · जागना × सोना · दिन × रात · उजाला × अँधेरा · यहाँ × वहाँ
कविता से जोड़िए: यह वाक्य कविता की किरन पर भी पूरा बैठता है। किरन का भी आने और जाने का समय निश्चित है — “नियत समय पर प्रतिदिन आती-जाती है।”
प्र6.
“चिड़ियाँ गाती गीत चलीं / हवा चली, खिल उठे पेड़ सब।” इन पंक्तियों को सामान्य बातचीत के रूप में लिखा जाए तो ऐसे लिखेंगे — “चिड़ियाँ गीत गाती हुई उड़ रही थीं, हवा चलने लगी, हवा के चलने से पेड़-पौधों की पत्तियाँ भी हिलने लगीं जैसे कि वे प्रसन्नता से झूम रही हों।” आप भी सामान्य ढंग से कही गई बात को कविता का रूप दे सकते हैं। … “चंद्रमा चमक रहा है, तारे भी चमक रहे हैं, आकाश में प्रकाश ही प्रकाश हो गया है।” … “चंदा चमका तारे चमके / चमका सारा अंबर”। आप भी सामान्य रूप से कही गई किसी बात को कविता के रूप में लिखने का प्रयास कीजिए।
उत्तर

यह करके देखने वाला अभ्यास है। पहले यह समझ लीजिए कि पुस्तक ने उदाहरण में क्या-क्या बदला।

सामान्य बातकविता का रूपक्या बदला
“चंद्रमा चमक रहा है, तारे भी चमक रहे हैं, आकाश में प्रकाश ही प्रकाश हो गया है।”“चंदा चमका तारे चमके
चमका सारा अंबर”
‘चंद्रमा’ की जगह छोटा और मीठा शब्द चंदा आया। ‘आकाश’ की जगह अंबर आया। लंबे वाक्य कटकर छोटी पंक्तियाँ बन गए। एक ही शब्द चमका बार-बार आया, जिससे लय बन गई।
कविता बनाने के चार चरण:
चरण 1 — जो कहना है, उसे पहले सीधे-सादे वाक्य में लिख लीजिए।
चरण 2 — फ़ालतू शब्द हटा दीजिए। “चमक रहा है” को केवल “चमका” कर दीजिए।
चरण 3 — जहाँ हो सके, छोटा या मीठा शब्द रख दीजिए — चंद्रमा → चंदा, आकाश → अंबर, हवा → पवन।
चरण 4 — पंक्तियाँ छोटी और लगभग बराबर लंबाई की रखिए, और अंत में मिलती-जुलती आवाज़ (तुक) लाने की कोशिश कीजिए।

नमूना उत्तर — कुछ जोड़े:

सामान्य बातकविता का रूप
“सुबह हो गई है, सूरज निकल आया है और उसकी किरनें मेरे कमरे में आ गई हैं।”“सूरज निकला किरन आई
मेरे कमरे धूप छाई”
“बादल घिर आए हैं, बिजली चमक रही है और तेज़ बारिश होने लगी है।”“बादल आए बिजली चमकी
रिमझिम-रिमझिम बरसा पानी”
“नदी बह रही है, उसमें नावें चल रही हैं और किनारे पर बच्चे खेल रहे हैं।”“नदिया बहती नाव चले
तट पर बच्चे खेल रहे”
“खेत में हरी फ़सल लहरा रही है और किसान उसे देखकर बहुत खुश है।”“खेत हरे-हरे लहर उठे
किसान का मन भी झूम उठे”
“चिड़िया तिनके ला रही है और पेड़ पर अपना घोंसला बना रही है।”“तिनका-तिनका चिड़िया लाए
पेड़ पे अपना घर बनाए”
ध्यान दीजिए: कविता बनाने के लिए तुक मिलाना ज़रूरी नहीं है — पाठ की कविता किरन में भी हर पंक्ति में तुक नहीं है। कविता तब बनती है जब बात थोड़े शब्दों में, लय के साथ और एक चित्र बनाते हुए कही जाए। पहले चित्र बनाइए, तुक अपने आप आ जाएगी।
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