कक्षा ५ हिंदी अध्याय 1 अनुमान और कल्पना के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
यदि किरन कभी न आए या न जाए तो क्या होगा?
उत्तर

इस प्रश्न के दो हिस्से हैं, इसलिए दोनों का उत्तर अलग-अलग सोचिए — एक, अगर किरन कभी आए ही नहीं; दो, अगर वह कभी जाए ही नहीं।

स्थितिक्या होगा
यदि किरन कभी न आए
(हमेशा रात रहे)
चारों ओर हमेशा अँधेरा रहेगा। कड़ाके की ठंड पड़ेगी। पेड़-पौधे धूप के बिना अपना भोजन नहीं बना पाएँगे और सूखने लगेंगे। फ़सल नहीं उगेगी, इसलिए अनाज खत्म हो जाएगा। कपड़े नहीं सूखेंगे। बच्चे खेलने बाहर नहीं जा सकेंगे। हमें पता ही नहीं चलेगा कि सुबह हुई या नहीं। धीरे-धीरे पृथ्वी पर जीवन ही कठिन हो जाएगा।
यदि किरन कभी न जाए
(हमेशा दिन रहे)
रात होगी ही नहीं। लगातार धूप से बहुत गरमी पड़ेगी। तालाब और नदियाँ सूखने लगेंगी। उजाले में ठीक से नींद नहीं आएगी और सब थके-थके रहेंगे। मनुष्य, पशु-पक्षी और पेड़-पौधे — किसी को आराम नहीं मिलेगा। रात में खिलने वाले फूल, जैसे रात-रानी और कुमुदिनी, कभी नहीं खिलेंगे। उल्लू और जुगनू जैसे रात के जीव मुश्किल में पड़ जाएँगे। तारे और चाँद कभी दिखाई नहीं देंगे।
असली बात यह है: दोनों में से कोई भी हाल अच्छा नहीं है। दिन और रात, दोनों ज़रूरी हैं। दिन काम करने के लिए है और रात आराम करने के लिए। किरन का समय पर आना और समय पर जाना — दोनों उतने ही ज़रूरी हैं। इसीलिए कविता में किरन कहती है कि वह “नियत समय पर” आती-जाती है।

नमूना उत्तर: यदि किरन कभी न आए तो हमेशा रात बनी रहेगी। चारों ओर अँधेरा और ठंड होगी। पेड़-पौधे धूप के बिना अपना भोजन नहीं बना पाएँगे और सूख जाएँगे। खेतों में फ़सल नहीं होगी और सब भूखे रह जाएँगे। और यदि किरन कभी न जाए तो हमेशा दिन ही रहेगा। बहुत तेज़ गरमी पड़ेगी, नदी-तालाब सूख जाएँगे और किसी को नींद नहीं आएगी। न चाँद दिखेगा, न तारे। इससे मैं समझता हूँ कि किरन का आना जितना ज़रूरी है, उसका समय पर लौट जाना भी उतना ही ज़रूरी है। दिन और रात मिलकर ही जीवन को ठीक से चलाते हैं।

प्र2.
यदि आपको किरन के साथ दूसरी दुनिया में जाने का अवसर मिले तो आप कहाँ जाना चाहेंगे और क्यों?
उत्तर

यह कल्पना का प्रश्न है। इसका कोई एक “सही” उत्तर नहीं है। पर आपकी कल्पना के साथ कारण ज़रूर होना चाहिए।

कैसे लिखें — तीन चरण:
चरण 1 — एक जगह चुनिए (कोई देश, समुद्र, पहाड़, जंगल, चाँद या कोई कल्पना का लोक)।
चरण 2 — बताइए कि आप वहाँ क्या-क्या देखना और करना चाहेंगे।
चरण 3 — बताइए कि आप उसी जगह क्यों जाना चाहते हैं और लौटकर क्या बताएँगे।

कुछ अच्छे विकल्प और उनके कारण —

कहाँ जाएँगेक्यों
धरती का वह हिस्सा जहाँ अभी सुबह हो रही हैयह देखना कि वहाँ के बच्चे कैसे उठते हैं, क्या खाते हैं, कौन-सा खेल खेलते हैं और किस भाषा में बात करते हैं।
समुद्र के भीतरकिरन पानी के भीतर भी जाती है। वहाँ रंग-बिरंगी मछलियाँ, मूँगे की चट्टानें और समुद्री कछुए देखने को मिलेंगे।
बर्फ़ वाले देश (ध्रुव प्रदेश)वहाँ कई महीने सूरज डूबता ही नहीं और कई महीने निकलता ही नहीं। मैं देखना चाहूँगा कि वहाँ लोग रहते कैसे हैं।
घने जंगल मेंयह देखना कि सूरज की किरन ऊँचे पेड़ों के बीच से छनकर ज़मीन तक कैसे पहुँचती है और कौन-कौन से जीव उससे जागते हैं।
चाँद परवहाँ से अपनी नीली धरती को देखना और यह जानना कि सुनीता विलियम्स जैसे अंतरिक्ष यात्री वहाँ कैसे रहते हैं।
अपने दादा-दादी के गाँवक्योंकि वहाँ की सुबह शहर से बिलकुल अलग होती है — मुर्गे की बाँग, खेतों की हरियाली और चूल्हे का धुआँ।

नमूना उत्तर: यदि मुझे किरन के साथ दूसरी दुनिया में जाने का अवसर मिले तो मैं धरती के उस हिस्से में जाना चाहूँगा जहाँ उस समय सुबह हो रही होगी। मैं देखना चाहता हूँ कि वहाँ के बच्चे किस तरह उठते हैं, नाश्ते में क्या खाते हैं और स्कूल में कौन-सी भाषा पढ़ते हैं। मैं उनके साथ कोई खेल भी खेलना चाहूँगा और उन्हें अपना खेल कबड्डी सिखाऊँगा। मैं उन्हें अपने देश के त्योहारों के बारे में बताऊँगा और उनसे उनके त्योहारों के बारे में पूछूँगा। शाम होते ही मैं किरन के साथ लौट आऊँगा और अपने दोस्तों को बताऊँगा कि दुनिया के दूसरे कोने में भी बच्चे हमारे जैसे ही हैं — बस उनका दिन तब शुरू होता है जब हमारी रात होती है।

दूसरा नमूना (छोटा): मैं किरन के साथ समुद्र के भीतर जाना चाहूँगा। मैंने सुना है कि किरन पानी में थोड़ी दूर तक ही जा पाती है और उससे नीचे अँधेरा रहता है। मैं देखना चाहूँगा कि जहाँ तक किरन पहुँचती है, वहाँ मूँगे कैसे रंग बदलते हैं और मछलियाँ किस तरह चमकती हैं। लौटकर मैं अपनी कक्षा में समुद्र का एक बड़ा चित्र बनाऊँगा।

ध्यान रखिए: कल्पना करते समय भी कविता का नियम मत तोड़िए। इस कविता में किरन रुकती नहीं — वह जाती है और शाम होते ही लौट आती है। इसलिए आपकी यात्रा भी एक दिन की होनी चाहिए, हमेशा के लिए वहीं रह जाने की नहीं।
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