इस प्रश्न के दो हिस्से हैं, इसलिए दोनों का उत्तर अलग-अलग सोचिए — एक, अगर किरन कभी आए ही नहीं; दो, अगर वह कभी जाए ही नहीं।
| स्थिति | क्या होगा |
|---|---|
| यदि किरन कभी न आए (हमेशा रात रहे) | चारों ओर हमेशा अँधेरा रहेगा। कड़ाके की ठंड पड़ेगी। पेड़-पौधे धूप के बिना अपना भोजन नहीं बना पाएँगे और सूखने लगेंगे। फ़सल नहीं उगेगी, इसलिए अनाज खत्म हो जाएगा। कपड़े नहीं सूखेंगे। बच्चे खेलने बाहर नहीं जा सकेंगे। हमें पता ही नहीं चलेगा कि सुबह हुई या नहीं। धीरे-धीरे पृथ्वी पर जीवन ही कठिन हो जाएगा। |
| यदि किरन कभी न जाए (हमेशा दिन रहे) | रात होगी ही नहीं। लगातार धूप से बहुत गरमी पड़ेगी। तालाब और नदियाँ सूखने लगेंगी। उजाले में ठीक से नींद नहीं आएगी और सब थके-थके रहेंगे। मनुष्य, पशु-पक्षी और पेड़-पौधे — किसी को आराम नहीं मिलेगा। रात में खिलने वाले फूल, जैसे रात-रानी और कुमुदिनी, कभी नहीं खिलेंगे। उल्लू और जुगनू जैसे रात के जीव मुश्किल में पड़ जाएँगे। तारे और चाँद कभी दिखाई नहीं देंगे। |
नमूना उत्तर: यदि किरन कभी न आए तो हमेशा रात बनी रहेगी। चारों ओर अँधेरा और ठंड होगी। पेड़-पौधे धूप के बिना अपना भोजन नहीं बना पाएँगे और सूख जाएँगे। खेतों में फ़सल नहीं होगी और सब भूखे रह जाएँगे। और यदि किरन कभी न जाए तो हमेशा दिन ही रहेगा। बहुत तेज़ गरमी पड़ेगी, नदी-तालाब सूख जाएँगे और किसी को नींद नहीं आएगी। न चाँद दिखेगा, न तारे। इससे मैं समझता हूँ कि किरन का आना जितना ज़रूरी है, उसका समय पर लौट जाना भी उतना ही ज़रूरी है। दिन और रात मिलकर ही जीवन को ठीक से चलाते हैं।