कक्षा ५ हिंदी अध्याय 1 समझ और अनुभव के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
“कहने लगी किरन यह सुनकर / मैं ही कब सो पाती हूँ। / तुम्हें सुलाकर एक दूसरी / दुनिया में मैं जाती हूँ।” किरन कितना परिश्रम करती है, यहाँ से वहाँ नियत समय पर प्रतिदिन आती-जाती है। आपको अपने आस-पास कौन-कौन परिश्रम करते दिखाई देते हैं?
उत्तर

मेरे आस-पास बहुत-से लोग किरन की तरह रोज़, नियत समय पर परिश्रम करते दिखाई देते हैं। इनमें से कई तो हमारे जागने से पहले ही काम शुरू कर देते हैं।

कौनक्या परिश्रम करते हैंकिरन से क्या मेल है
किसानअँधेरे में ही खेत पहुँच जाते हैं। जुताई, बुआई, सिंचाई और कटाई — सब धूप-बारिश में करते हैं।मौसम कोई भी हो, काम रुकता नहीं।
सफ़ाईकर्मीसुबह सबसे पहले सड़कें और गलियाँ साफ़ करते हैं, कूड़ा उठाते हैं।हमारे उठने से पहले ही उनका आधा काम हो चुका होता है।
दूधवाला और अख़बार वालाहर घर तक समय से पहुँचते हैं, चाहे सर्दी हो या बारिश।किरन की तरह ये भी नियत समय पर आते हैं।
माँ और घर के बड़ेसबसे पहले उठकर खाना बनाते हैं, बच्चों को तैयार करते हैं और सबसे बाद में सोते हैं।“मैं ही कब सो पाती हूँ” — यह पंक्ति उन पर पूरी उतरती है।
शिक्षकपढ़ाते हैं, कॉपियाँ जाँचते हैं और अगले दिन की तैयारी करते हैं।रोज़ नए बच्चों को नई बात सिखाते हैं, जैसे किरन रोज़ नए बच्चों को जगाती है।
डॉक्टर और नर्सरात की पाली में भी अस्पताल में काम करते हैं।रात में भी काम — किरन की ही तरह।
बस, ऑटो और रिक्शा चालकदिन भर लोगों को उनकी जगह पहुँचाते हैं।पूरा दिन आते-जाते रहना।
मज़दूर और मिस्त्रीधूप में ईंट, गारा और लोहा उठाकर मकान, सड़क और पुल बनाते हैं।कड़ी धूप में भी काम नहीं रुकता।
डाकिया और चौकीदारडाकिया घर-घर चिट्ठी पहुँचाता है; चौकीदार पूरी रात जागकर पहरा देता है।चौकीदार तो सचमुच रात भर जागता है।
पशु-पक्षी भीचींटी दाना ढोती है, मधुमक्खी फूल-फूल घूमती है, चिड़िया तिनके ला-लाकर घोंसला बनाती है।बिना कहे, बिना रुके, हर दिन।

नमूना उत्तर: मेरे आस-पास सबसे अधिक परिश्रम मैं अपनी माँ को करते देखता हूँ। वे सबसे पहले उठती हैं और सबसे बाद में सोती हैं। हमारे मोहल्ले की सफ़ाई करने वाली दीदी सुबह छह बजे ही झाड़ू लेकर आ जाती हैं। दूधवाले भैया बारिश में भी समय पर दूध देकर जाते हैं। खेतों में किसान सूरज निकलने से पहले पहुँच जाते हैं और शाम ढलने पर लौटते हैं। मुझे लगता है कि ये सब लोग किरन जैसे ही हैं — इनका काम भी रोज़ का है और इनके बिना हमारा दिन चल ही नहीं सकता।

कविता का भाव: किरन शिकायत नहीं करती। वह अपने काम की बात बड़ी सहजता से कहती है — “मैं ही कब सो पाती हूँ।” सच्चा परिश्रमी यही करता है — वह काम करता है, दिखावा नहीं। इसीलिए हमें ऐसे लोगों को देखकर उनका आदर करना चाहिए और उनके काम को आसान बनाना चाहिए।
प्र2.
वे कौन-कौन से लोग हैं जो किरन की भाँति आपको जगाते हैं, आपके साथ खेलते हैं और प्रोत्साहित करते हैं? उनके लिए आप क्या-क्या करते हैं, यह भी लिखिए।
उत्तर

किरन तीन काम करती है — जगाती है, साथ खेलती है और आगे बढ़ने का उत्साह देती है। हमारे जीवन में भी ऐसे कई लोग हैं। नीचे तीनों कामों के हिसाब से उन्हें छाँटा गया है।

कौनवे मेरे लिए क्या करते हैंमैं उनके लिए क्या करता हूँ
माँरोज़ सुबह प्यार से जगाती हैं, नाश्ता और तैयार बस्ता देती हैं।समय पर उठ जाता हूँ, अपना बिस्तर खुद ठीक करता हूँ और घर के छोटे काम में हाथ बँटाता हूँ।
पिताजीपढ़ाई में मदद करते हैं और नई चीज़ें आज़माने का हौसला देते हैं।उनकी बात ध्यान से सुनता हूँ और अपनी गलती छिपाता नहीं।
दादी-दादाकहानियाँ सुनाते हैं और दुख के समय हौसला बढ़ाते हैं।उनके पास बैठकर बातें करता हूँ, अख़बार पढ़कर सुनाता हूँ और उनका सामान ला देता हूँ।
बड़े भाई-बहनमेरे साथ खेलते हैं और कठिन सवाल समझा देते हैं।उनकी चीज़ें बिना पूछे नहीं लेता और उनके काम में मदद करता हूँ।
मित्रमैदान में साथ खेलते हैं, कुछ छूट जाए तो बता देते हैं।अपना टिफ़िन बाँटता हूँ, उनकी बात सुनता हूँ और झगड़ा नहीं करता।
शिक्षक-शिक्षिकानई बातें सिखाते हैं, गलती सुधारते हैं और अच्छा करने पर शाबाशी देते हैं।समय पर विद्यालय जाता हूँ, गृहकार्य पूरा करता हूँ और कक्षा को साफ़ रखता हूँ।
सूरज की किरन और पक्षीसचमुच रोज़ सुबह मुझे जगाते हैं।पेड़ नहीं काटने देता, गरमी में पक्षियों के लिए पानी रखता हूँ और पौधे लगाता हूँ।

नमूना उत्तर: मुझे रोज़ सुबह मेरी माँ जगाती हैं, ठीक किरन की तरह। मेरे पिताजी और बड़ी बहन मेरे साथ खेलते हैं और पढ़ाई में मेरी हिम्मत बढ़ाते हैं। कक्षा में मेरी शिक्षिका मुझे प्रोत्साहित करती हैं, इसलिए मैं कठिन काम से डरता नहीं। मेरे मित्र मेरे साथ मैदान में खेलते हैं। मैं इन सबके लिए यह करता हूँ कि समय पर उठता हूँ, अपना काम खुद करता हूँ, घर के कामों में माँ की मदद करता हूँ, दादी को अख़बार पढ़कर सुनाता हूँ और अपने दोस्तों से कभी झगड़ा नहीं करता। मुझे लगता है कि जो लोग हमारे लिए इतना करते हैं, उन्हें बदले में हमारा प्यार और थोड़ी-सी मदद ज़रूर मिलनी चाहिए।

ध्यान दीजिए: प्रश्न के दो हिस्से हैं — पहला यह कि वे कौन हैं, और दूसरा यह कि आप उनके लिए क्या करते हैं। दूसरा हिस्सा भूलिए मत, वरना उत्तर अधूरा रह जाएगा।
प्र3.
आपके घर या प्रदेश में सूर्य अथवा चाँद से जुड़े किसी एक त्योहार का पता लगाइए और उसके बारे में लिखिए।
उत्तर

यह पता लगाकर लिखने वाला काम है। पहले जान लीजिए कि हमारे देश में सूर्य और चाँद से जुड़े कौन-कौन से त्योहार मनाए जाते हैं।

त्योहारसूर्य या चाँदकहाँ मनाया जाता हैक्या किया जाता है
छठ पूजासूर्यबिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेशनदी या तालाब के किनारे खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। ठेकुआ का प्रसाद बनता है।
मकर संक्रांतिसूर्यपूरे भारत में, अलग-अलग नामों सेसूर्य के उत्तर की ओर बढ़ने का दिन। तिल-गुड़ के लड्डू बनते हैं और पतंग उड़ाई जाती है।
पोंगलसूर्यतमिलनाडुनई फ़सल के चावल से मिट्टी के बरतन में पोंगल पकाकर सूर्य को चढ़ाया जाता है।
बिहू (माघ बिहू)सूर्य / फ़सलअसमअलाव जलाकर फ़सल कटने की खुशी मनाई जाती है।
रथ सप्तमीसूर्यदक्षिण और पश्चिम भारतइसे सूर्य का जन्मदिन माना जाता है। सुबह स्नान कर सूर्य की पूजा होती है।
करवा चौथचाँदउत्तर भारतदिन भर व्रत रखकर रात में चाँद देखने के बाद ही भोजन किया जाता है।
शरद पूर्णिमाचाँदपूरे भारत मेंइस रात चाँद सबसे बड़ा और चमकीला दिखता है। चाँदनी में खीर रखकर खाई जाती है।
ईद-उल-फ़ितरचाँदपूरे भारत मेंचाँद दिखने पर ही ईद मनाई जाती है। इसीलिए इससे पहले की रात को “चाँद रात” कहते हैं।
बुद्ध पूर्णिमा / गुरु पूर्णिमाचाँद (पूर्णिमा)पूरे भारत मेंपूरे चाँद वाले दिन मनाए जाते हैं।
पता कैसे लगाइए — तीन चरण:
चरण 1 — घर के बड़ों से पूछिए कि आपके यहाँ ऐसा कौन-सा त्योहार मनाया जाता है।
चरण 2 — पूछिए कि उस दिन क्या-क्या बनता है, क्या पहना जाता है और क्या किया जाता है।
चरण 3 — पुस्तकालय की किताब या कैलेंडर से उसकी तिथि देख लीजिए, फिर पाँच-छह वाक्य लिख डालिए।

नमूना उत्तर (छठ पूजा): हमारे यहाँ सूर्य से जुड़ा त्योहार छठ पूजा मनाया जाता है। यह दीवाली के छह दिन बाद आता है और चार दिन तक चलता है। इसमें घर की महिलाएँ कठिन व्रत रखती हैं। तीसरे दिन शाम को सब लोग नदी या तालाब के घाट पर जाते हैं और डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। चौथे दिन सुबह अँधेरे में ही फिर घाट पर जाकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। बाँस के सूप में ठेकुआ, केला, नारियल और गन्ना सजाया जाता है। घाट पर दीये जलते हैं और छठ के गीत गाए जाते हैं। मुझे यह त्योहार इसलिए अच्छा लगता है क्योंकि इसमें डूबते हुए सूर्य को भी उतना ही मान दिया जाता है जितना उगते हुए सूर्य को।

नमूना उत्तर (मकर संक्रांति): हमारे प्रदेश में मकर संक्रांति मनाई जाती है। यह हर वर्ष 14 या 15 जनवरी को आती है। कहा जाता है कि इस दिन से सूर्य उत्तर की ओर बढ़ने लगता है और दिन धीरे-धीरे बड़े होने लगते हैं। इस दिन तिल और गुड़ के लड्डू बनते हैं, क्योंकि सर्दी में ये शरीर को गरमी देते हैं। बच्चे छत पर चढ़कर पतंग उड़ाते हैं। कई जगह लोग नदी में स्नान करते हैं और गरीबों को कपड़े और अनाज दान करते हैं। यही त्योहार तमिलनाडु में पोंगल, असम में बिहू और पंजाब में लोहड़ी के आस-पास मनाया जाता है।

कविता से जोड़िए: कविता में किरन रोज़ आती-जाती है और उससे दिन-रात बनते हैं। ये त्योहार भी सूर्य और चाँद के इसी नियम से चलने पर टिके हैं — कब दिन बड़े होते हैं, कब पूरा चाँद निकलता है, कब नई फ़सल आती है। इससे पता चलता है कि हमारे पुरखों ने आकाश को कितने ध्यान से देखा था।
क्या यह उपयोगी रहा?