मेरे आस-पास बहुत-से लोग किरन की तरह रोज़, नियत समय पर परिश्रम करते दिखाई देते हैं। इनमें से कई तो हमारे जागने से पहले ही काम शुरू कर देते हैं।
| कौन | क्या परिश्रम करते हैं | किरन से क्या मेल है |
|---|---|---|
| किसान | अँधेरे में ही खेत पहुँच जाते हैं। जुताई, बुआई, सिंचाई और कटाई — सब धूप-बारिश में करते हैं। | मौसम कोई भी हो, काम रुकता नहीं। |
| सफ़ाईकर्मी | सुबह सबसे पहले सड़कें और गलियाँ साफ़ करते हैं, कूड़ा उठाते हैं। | हमारे उठने से पहले ही उनका आधा काम हो चुका होता है। |
| दूधवाला और अख़बार वाला | हर घर तक समय से पहुँचते हैं, चाहे सर्दी हो या बारिश। | किरन की तरह ये भी नियत समय पर आते हैं। |
| माँ और घर के बड़े | सबसे पहले उठकर खाना बनाते हैं, बच्चों को तैयार करते हैं और सबसे बाद में सोते हैं। | “मैं ही कब सो पाती हूँ” — यह पंक्ति उन पर पूरी उतरती है। |
| शिक्षक | पढ़ाते हैं, कॉपियाँ जाँचते हैं और अगले दिन की तैयारी करते हैं। | रोज़ नए बच्चों को नई बात सिखाते हैं, जैसे किरन रोज़ नए बच्चों को जगाती है। |
| डॉक्टर और नर्स | रात की पाली में भी अस्पताल में काम करते हैं। | रात में भी काम — किरन की ही तरह। |
| बस, ऑटो और रिक्शा चालक | दिन भर लोगों को उनकी जगह पहुँचाते हैं। | पूरा दिन आते-जाते रहना। |
| मज़दूर और मिस्त्री | धूप में ईंट, गारा और लोहा उठाकर मकान, सड़क और पुल बनाते हैं। | कड़ी धूप में भी काम नहीं रुकता। |
| डाकिया और चौकीदार | डाकिया घर-घर चिट्ठी पहुँचाता है; चौकीदार पूरी रात जागकर पहरा देता है। | चौकीदार तो सचमुच रात भर जागता है। |
| पशु-पक्षी भी | चींटी दाना ढोती है, मधुमक्खी फूल-फूल घूमती है, चिड़िया तिनके ला-लाकर घोंसला बनाती है। | बिना कहे, बिना रुके, हर दिन। |
नमूना उत्तर: मेरे आस-पास सबसे अधिक परिश्रम मैं अपनी माँ को करते देखता हूँ। वे सबसे पहले उठती हैं और सबसे बाद में सोती हैं। हमारे मोहल्ले की सफ़ाई करने वाली दीदी सुबह छह बजे ही झाड़ू लेकर आ जाती हैं। दूधवाले भैया बारिश में भी समय पर दूध देकर जाते हैं। खेतों में किसान सूरज निकलने से पहले पहुँच जाते हैं और शाम ढलने पर लौटते हैं। मुझे लगता है कि ये सब लोग किरन जैसे ही हैं — इनका काम भी रोज़ का है और इनके बिना हमारा दिन चल ही नहीं सकता।