कक्षा ५ हिंदी अध्याय 1 सोचिए और लिखिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
किरन ने दूसरी दुनिया में जाने की बात क्यों कही होगी?
उत्तर

क्योंकि हमारी धरती गोल है और घूमती रहती है। जब हमारे यहाँ रात होती है, तब धरती के दूसरी ओर दिन होता है। किरन वहीं चली जाती है। उसी हिस्से को कविता में “दूसरी दुनिया” कहा गया है।

“तुम्हें सुलाकर एक दूसरी
दुनिया में मैं जाती हूँ।
बच्चे जो बिस्तर में सोए
होते, उन्हें जगाती हूँ।”

किरन के इस उत्तर के पीछे तीन बातें हैं —

  1. यह विज्ञान की सच्ची बात है। पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है। उसका जो भाग सूरज के सामने आता है, वहाँ दिन हो जाता है और पीछे वाले भाग में रात। यही बात पुस्तक ने पृष्ठ 6 के इसे भी जानिए बक्से में समझाई है।
  2. वह बालिका को समझा रही है। बालिका सोच रही थी कि किरन “सुख से सोई होगी”। किरन बताती है कि वह सोती नहीं — उसका काम कहीं और चलता रहता है।
  3. “दूसरी दुनिया” कहना ज़्यादा सुंदर लगता है। कवि चाहते तो लिख देते “पृथ्वी के दूसरे भाग में जाती हूँ।” पर बच्चों की कविता में दूसरी दुनिया कहने से मन में एक जादू-सा दृश्य बनता है — जैसे किरन कोई सहेली हो जो दूर किसी अनजाने देश की सैर पर निकल जाती हो।
असली अर्थ यही है: “दूसरी दुनिया” कोई परियों का देश नहीं है। वह हमारी ही धरती का दूसरा हिस्सा है — कोई और देश, जहाँ उस समय सुबह हो रही होती है और बच्चे बिस्तर में सोए होते हैं।
प्र2.
“वहाँ शाम हो जाती है तो / लौट यहाँ फिर आती हूँ।” उपर्युक्त पंक्तियों में ‘वहाँ’ और ‘यहाँ’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुए हैं?
उत्तर

ये दोनों शब्द धरती के दो अलग-अलग हिस्सों के लिए आए हैं।

शब्दकिसके लिए आया हैकैसे पता चला
वहाँवह दूसरी दुनिया, यानी धरती का दूसरा भाग — कोई और देश, जहाँ किरन बालिका को सुलाकर जाती है और वहाँ के सोए बच्चों को जगाती है।इससे ठीक पहले की पंक्तियाँ हैं — “तुम्हें सुलाकर एक दूसरी दुनिया में मैं जाती हूँ।” तो ‘वहाँ’ का मतलब वही दूसरी दुनिया है।
यहाँबालिका का अपना घर, अपना गाँव-शहर, अपना देश — वह जगह जहाँ से किरन गई थी।पूरी कविता बालिका के घर पर हो रही बातचीत है। ‘लौट… आती हूँ’ का अर्थ है — जहाँ से गई थी, वहीं वापस आ जाती हूँ।
दोनों पंक्तियों का सरल अर्थ: जब उस दूसरे देश में शाम हो जाती है, तब किरन वहाँ से चल पड़ती है और लौटकर फिर बालिका के पास आ जाती है। यानी उस देश की शाम ही यहाँ की सुबह बन जाती है। इसी से पता चलता है कि किरन का आना-जाना कभी रुकता नहीं — वह लगातार घूमती रहती है
व्याकरण की बात: ‘यहाँ’ और ‘वहाँ’ जगह बताने वाले शब्द हैं। ‘यहाँ’ पास की जगह के लिए आता है और ‘वहाँ’ दूर की जगह के लिए — जैसे “मेरी किताब यहाँ रखी है, तुम्हारी वहाँ मेज़ पर है।”
प्र3.
प्रकृति हमें प्रकाश, फल, फूल, लकड़ी, वायु, पानी और बहुत कुछ देती है। हम प्रकृति के लिए क्या-क्या कर सकते हैं? सोचिए और अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर

प्रकृति हमसे कुछ माँगती नहीं। हमें बस इतना करना है कि उसे नुकसान न पहुँचाएँ और जो लिया है, उसे लौटाते रहें। ये काम एक बच्चा भी आज से शुरू कर सकता है।

क्र.हम क्या कर सकते हैंइससे प्रकृति को क्या लाभ होगा
1पेड़ लगाइए और लगे हुए पेड़ों की रक्षा कीजिएपेड़ हवा को साफ़ करते हैं, छाया देते हैं और पक्षियों को घर देते हैं। हर जन्मदिन पर एक पौधा लगाना अच्छी आदत है।
2पानी बचाइएब्रश करते समय नल बंद रखिए। टपकते नल की मरम्मत करवाइए। बाल्टी से नहाइए। इससे नदियों और भूमि का पानी बचता है।
3कूड़ा कूड़ेदान में ही डालिएसड़क, नदी और तालाब में फेंका कूड़ा पानी और मिट्टी दोनों को गंदा करता है और जानवर उसे खा लेते हैं।
4प्लास्टिक की थैली कम से कम इस्तेमाल कीजिएघर से कपड़े का थैला ले जाइए। प्लास्टिक सैकड़ों साल तक नहीं गलता।
5बिजली बचाइएकमरे से निकलते समय पंखा और बत्ती बंद कीजिए। दिन में खिड़की खोलकर धूप का उजाला काम में लाइए।
6पक्षियों के लिए पानी और दाना रखिएगरमी में छत या खिड़की पर मिट्टी के सकोरे में पानी रखने से बहुत-से पक्षियों की जान बचती है।
7जीव-जंतुओं को मत सताइएघोंसले मत उजाड़िए, तितली-गिलहरी को मत पकड़िए, कुत्ते-बिल्ली को मत मारिए। हर जीव प्रकृति का हिस्सा है।
8पास की जगह पैदल या साइकिल से जाइएगाड़ी का धुआँ हवा को गंदा करता है। पैदल चलने से हवा भी बचती है और सेहत भी बनती है।
9कागज़ बरबाद मत कीजिएकागज़ पेड़ों से बनता है। कॉपी के दोनों तरफ़ लिखिए और बचे हुए पन्नों की नई कॉपी बनाइए।

नमूना उत्तर: प्रकृति हमें बहुत कुछ देती है, इसलिए हमें भी उसके लिए कुछ करना चाहिए। मैं हर वर्ष अपने जन्मदिन पर एक पौधा लगाता हूँ और उसमें नियम से पानी डालता हूँ। मैं ब्रश करते समय नल बंद रखता हूँ, जिससे रोज़ बहुत-सा पानी बचता है। मैं कूड़ा हमेशा कूड़ेदान में डालता हूँ और बाज़ार जाते समय घर से कपड़े का थैला ले जाता हूँ। कमरे से निकलते समय मैं पंखा और बत्ती बंद कर देता हूँ। गरमी में मैं छत पर एक सकोरे में पक्षियों के लिए पानी रखता हूँ। मैं किसी घोंसले को नहीं छेड़ता और किसी जीव को नहीं सताता। मुझे लगता है कि अगर हर बच्चा इतना भी कर ले तो हमारी धरती बहुत सुंदर हो जाएगी।

सोचने की बात: प्रकृति के लिए बड़े-बड़े काम करने की ज़रूरत नहीं है। रोज़ के छोटे-छोटे काम ही सबसे बड़ा फ़र्क डालते हैं — क्योंकि वे रोज़ होते हैं। एक दिन का बड़ा काम, हर दिन के छोटे काम के आगे कम पड़ जाता है।
प्र4.
कविता की किन पंक्तियों से पता चलता है कि किरन बालिका के साथ दिन भर रहती है? उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए।
उत्तर

ये रहीं वे पंक्तियाँ —

“कल तो तेरे साथ शाम तक
खेल बहुत से खेली मैं।
पर जब तू चल दी सोने को
तो रह गई अकेली मैं।”

इनके साथ कविता की पहली दो पंक्तियाँ भी जोड़ी जा सकती हैं —

“अरी किरन तू उठकर इतनी
जल्दी आज चली आई।”

इन पंक्तियों से यह कैसे पता चलता है — दो कदमों में समझिए:

पंक्तिवह क्या बताती है
“अरी किरन तू उठकर इतनी जल्दी आज चली आई।”किरन सुबह जल्दी आ जाती है — इतनी जल्दी कि बालिका अभी बिस्तर से निकली भी नहीं। यानी दिन का आरंभ किरन के साथ होता है।
“कल तो तेरे साथ शाम तक, खेल बहुत से खेली मैं।”बालिका किरन के साथ शाम तक खेलती रही। यानी दिन का अंत भी किरन के साथ ही होता है।
“पर जब तू चल दी सोने को, तो रह गई अकेली मैं।”बालिका तभी अकेली पड़ी जब किरन चली गई। इसका मतलब है कि इससे पहले तक वह अकेली नहीं थी — किरन उसके साथ थी।
निष्कर्ष: सुबह जल्दी आना + शाम तक साथ खेलना + जाने पर अकेलापन — इन तीनों बातों को जोड़िए तो साफ़ हो जाता है कि किरन बालिका के साथ पूरे दिन रहती है। असल में यह किरन का नहीं, सूरज के उजाले का दिन भर बने रहना है — सूरज निकलते ही उजाला आता है और डूबते ही चला जाता है।
लिखते समय ध्यान रखिए: प्रश्न कह रहा है “उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए”। इसलिए उत्तर में पंक्तियाँ ज्यों की त्यों, उद्धरण चिह्नों (“ ”) के भीतर लिखिए और जैसे कविता में हैं वैसे ही अलग-अलग पंक्तियों में लिखिए।
क्या यह उपयोगी रहा?