पहले यह याद कर लीजिए कि उसकी पहली योजना क्या थी — मरी हुई मछली बनकर पड़ जाना, क्योंकि मछुआरों को “स्वस्थ और जीवित मछलियाँ ही चाहिए” थीं। यदि यह चाल न चलती, यानी मछुआरे उसे मरी हुई मानकर न फेंकते, तो उसे कोई दूसरा उपाय सोचना पड़ता।
यह कल्पना का प्रश्न है, पर कल्पना कहानी से मेल खानी चाहिए। प्रत्युत्पन्नमति के पास ये उपाय हो सकते थे —
| अन्य योजना | वह कैसे करती | यह क्यों चल सकती थी |
|---|---|---|
| 1. जाल के छेद से निकल भागना | शरीर को और सिकोड़कर, जाल के किसी ढीले या फटे हिस्से से फिसलकर पानी में लौट जाना। | वह पहले भी शरीर सिकोड़ चुकी थी। जाल में जगह-जगह जोड़ होते हैं और जब वह पानी से बाहर उठाया जाता है, तब कहीं-न-कहीं ढीलापन आ ही जाता है। |
| 2. उछलकर पानी में गिर जाना | जिस क्षण जाल ऊपर उठे और वह किनारे के पास हो, पूरी ताकत से उछलना। | मछलियाँ उछल सकती हैं। किनारा पास था, इसलिए एक अच्छी छलाँग उसे वापस पानी में पहुँचा सकती थी। |
| 3. बीमार-सी दिखना | पंख ढीले छोड़कर, एक ओर लुढ़ककर, बीमार मछली जैसी बन जाना। | मछुआरे बीमार मछली भी नहीं ले जाते, क्योंकि वह बिकती नहीं। मछुआरों को “स्वस्थ” मछलियाँ चाहिए थीं। |
| 4. सबसे नीचे दब जाना | जाल की सबसे नीचे की तह में, बाकी मछलियों के नीचे दुबक जाना और मौका मिलते ही निकल भागना। | जाल में “इतनी सारी” मछलियाँ थीं। मछुआरे एक-एक को देखने में समय लगाते, और उसी बीच उसे मौका मिल सकता था। |
| 5. मछुआरों का ध्यान बँटाना | ज़ोर से फड़फड़ाकर जाल का एक कोना हिला देना, ताकि मछुआरे उधर देखें और वह दूसरी ओर से खिसक जाए। | यह उसकी ‘क्षण भर में उपाय निकालने’ वाली बुद्धि से मेल खाता है। |
नमूना उत्तर: यदि मरी हुई बनने की चाल न चलती, तो प्रत्युत्पन्नमति सबसे नीचे की मछलियों के नीचे दुबक जाती और चुपचाप मौका देखती रहती। जैसे ही मछुआरे जाल को किनारे पर पलटते, वह पूरी ताकत से उछलकर पानी में कूद जाती। वह जानती थी कि किनारा पास है और पानी में पहुँचते ही उसे कोई नहीं पकड़ सकता।