कक्षा ५ हिंदी अध्याय 10 भाषा की बात के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
कहानी में आए कुछ संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण तथा क्रिया शब्द नीचे शब्द सरोवर में दिए गए हैं। इनकी पहचान करते हुए उन्हें उनके संबंधित परिवार के स्थान पर लिखिए — (शब्द सरोवर: कुछ, सभा, वह, बचना, सुंदर, तीन, सरोवर, पहली, रहना, हमने, मछली, सोचना, अच्छा, उन्होंने, मछुआरा, यद्भविष्य, दो, लिखना, जाना, मैं)
उत्तर

पहले चारों परिवारों को पहचानने का आसान तरीका देख लीजिए —

शब्द-परिवारक्या बताता हैपहचानने का सवाल
संज्ञाकिसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, प्राणी या भाव का नाम“यह किसका नाम है?” — जिसका नाम हो, वह संज्ञा।
सर्वनामसंज्ञा की जगह पर आने वाला शब्द“क्या यह नाम की जगह बोला जा रहा है?” — जैसे मछली की जगह ‘वह’।
विशेषणसंज्ञा की विशेषता — कैसा, कितना, कौन-सा“कैसा? कितने? कौन-सी?” — इनका उत्तर देने वाला शब्द विशेषण।
क्रियाजो काम हो रहा है“क्या किया जा रहा है?” — काम बताने वाला शब्द क्रिया।

अब बीसों शब्द अपनी-अपनी जगह पर। हर खाने में पाँच-पाँच शब्द आते हैं —

संज्ञासर्वनामविशेषणक्रिया
सभाकुछसुंदरबचना
सरोवरवहतीनरहना
मछलीहमनेपहलीसोचना
मछुआराउन्होंनेअच्छालिखना
यद्भविष्यमैंदोजाना

अब हर शब्द का कारण, कहानी की पंक्ति के साथ —

शब्दपरिवारक्यों — कहानी में इसका प्रयोग
सभासंज्ञाएक आयोजन का नाम — “सभी मछलियों को बुलाकर एक सभा की।”
सरोवरसंज्ञाएक स्थान का नाम — “एक सुंदर सरोवर में तीन मछलियाँ रहती थीं।”
मछलीसंज्ञाएक प्राणी का नाम — “पहली मछली का नाम था अनागतविधाता।”
मछुआरासंज्ञाएक व्यक्ति का नाम (काम के अनुसार) — “पहला मछुआरा बोला।”
यद्भविष्यसंज्ञाकिसी एक का अपना नाम, यानी व्यक्तिवाचक संज्ञा — “तीसरी मछली का नाम था यद्भविष्य।”
कुछसर्वनामनाम लिए बिना अनिश्चित बात के लिए — “मुझे कुछ करने की आवश्यकता नहीं है।” यह अनिश्चयवाचक सर्वनाम है।
वहसर्वनाममछली के नाम की जगह — “वह बहुत बुद्धिमती थी।”
हमनेसर्वनाम‘हम’ का रूप, बोलने वालों के नाम की जगह — “हमने पहले कभी नहीं देखीं।”
उन्होंनेसर्वनाम‘वे’ का रूप, मछुआरों के नाम की जगह — “उन्होंने आकर जाल डाल दिया।”
मैंसर्वनामबोलने वाला अपने नाम की जगह कहता है — “मैं तो यहीं रहूँगी।”
सुंदरविशेषणसरोवर कैसा है, यह बताता है — “एक सुंदर सरोवर”।
तीनविशेषणमछलियाँ कितनी हैं, यह बताता है — “तीन मछलियाँ”। यह संख्यावाचक विशेषण है।
पहलीविशेषणकौन-सी मछली, यह बताता है — “पहली मछली का नाम था अनागतविधाता।”
अच्छाविशेषणउपाय कैसा है, यह बताता है — “सबसे अच्छा उपाय यह है…”।
दोविशेषणमछुआरे कितने हैं, यह बताता है — “दो मछुआरे निकल रहे थे।”
बचनाक्रियाएक काम — “यदि भाग्य में बचना लिखा होगा…”।
रहनाक्रियाएक काम — “निश्चिंत होकर आनंद से रहना चाहिए।”
सोचनाक्रियाएक काम — “सोचने-विचारने से कोई लाभ नहीं।”
लिखनाक्रियाएक काम — “अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।”
जानाक्रियाएक काम — “पास के दूसरे सरोवर में चले जाएँ।”
ध्यान दीजिए — ‘ना’ वाले शब्द: बचना, रहना, सोचना, लिखना, जाना — पाँचों के अंत में ‘ना’ है। हिंदी में क्रिया का यह मूल रूप क्रियार्थक कहलाता है और इसे पहचानना सबसे आसान है। यदि किसी शब्द के अंत में ‘ना’ लगे और वह कोई काम बताए, तो वह क्रिया है।
एक बात जो उलझाती है: ‘कुछ’ कभी विशेषण भी होता है — जैसे “कुछ अन्य मछलियाँ”। पर यहाँ इसे सर्वनाम के खाने में रखिए, क्योंकि हर खाने में ठीक पाँच शब्द आने हैं और सर्वनाम में पाँचवाँ शब्द यही बचता है। कहानी में इसका सर्वनाम वाला प्रयोग भी है — “मुझे कुछ करने की आवश्यकता नहीं है।”
प्र2.
कहानी में आए एकवचन और बहुवचन शब्दों की खोज करते हुए निम्न तालिका को दिए गए उदाहरण के अनुसार पूर्ण कीजिए — (तालिका में पहली पंक्ति ‘मछली – मछलियाँ’ भरी है; दूसरी पंक्ति में बहुवचन ‘ध्वनियाँ’ दिया है; तीसरी पंक्ति में एकवचन ‘मैं’ दिया है; चौथी और पाँचवीं पंक्तियाँ पूरी खाली हैं।)
उत्तर

पहले दो शब्द समझ लीजिए। एकवचन यानी जो शब्द एक की बात करे। बहुवचन यानी जो शब्द एक से अधिक की बात करे।

पूरी भरी हुई तालिका यह रही —

पंक्तिएकवचन शब्दबहुवचन शब्दकहानी की पंक्ति
1 (उदाहरण, छपा हुआ)मछलीमछलियाँ“पहली मछली का नाम था अनागतविधाता।” / “तीन मछलियाँ रहती थीं।”
2 (बहुवचन छपा है)ध्वनिध्वनियाँ“मछुआरों की ध्वनियाँ सुनाई पड़ीं।”
3 (एकवचन छपा है)मैंहममैं तो यहीं रहूँगी।” / “हम सब बच ही जाएँगे।”
4 (दोनों खाली)मछुआरामछुआरे“पहला मछुआरा बोला।” / “दो मछुआरे निकल रहे थे।”
5 (दोनों खाली)बातबातें“बहुत समय पहले की बात है।” / “मछुआरों की बातें तीनों मछलियों ने सुन लीं।”

कहानी से और भी जोड़ियाँ मिल सकती हैं — इनमें से कोई भी चौथी-पाँचवीं पंक्ति में लिखी जा सकती है —

एकवचनबहुवचनकहानी की पंक्ति
समस्यासमस्याओं“भविष्य की संभावित समस्याओं का हल”
आँखआँखेंआँखें बंद करके निर्जीव सी बनकर पड़ गई”
कहानीकहानियाँ“इस ग्रंथ में नैतिक शिक्षा देने के उद्देश्य से लिखी कहानियाँ हैं”
पशु-पक्षीपशु-पक्षियों“विभिन्न पशु-पक्षियों के माध्यम से प्रस्तुत की गई हैं”
वहवेवह बहुत बुद्धिमती थी।”
बहुवचन बनाने के तीन आसान नियम: (1) पर खत्म होने वाले स्त्रीलिंग शब्दों में ‘ई’ हटाकर इयाँ लगाइए — मछली → मछलियाँ, ध्वनि → ध्वनियाँ, कहानी → कहानियाँ। (2) पर खत्म होने वाले पुल्लिंग शब्दों में ‘आ’ की जगह लगाइए — मछुआरा → मछुआरे, लड़का → लड़के। (3) व्यंजन पर खत्म होने वाले कई स्त्रीलिंग शब्दों में एँ जोड़िए — बात → बातें, आँख → आँखें।
ध्यान रहे: कुछ शब्दों का रूप बदलता ही नहीं, जैसे पानी, जल, भाग्य। ऐसे शब्द तालिका में मत रखिए, क्योंकि यहाँ दोनों खाने अलग-अलग भरने हैं।
प्र3.
नीचे दिए गए उपयुक्त शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए — (ने, में, को, के, का, की, पर) — (क) मछुआरों का ध्यान पानी में सैर करती हुई मछलियों ......... गया।
उत्तर

उत्तर: मछुआरों का ध्यान पानी में सैर करती हुई मछलियों पर गया।

कहानी में यही वाक्य छपा है —

“क्षण भर में उनका ध्यान पानी में सैर करती हुई मछलियों पर गया।”
‘पर’ ही क्यों: हिंदी में ध्यान हमेशा किसी चीज़ ‘पर’ जाता है — “ध्यान पर जाना”, “ध्यान देना”। हम कहते हैं “मेरा ध्यान बोर्ड पर गया”, “उसका ध्यान आवाज़ पर गया”। ‘में’, ‘को’ या ‘की’ लगाने पर वाक्य कान को गलत लगेगा।
छोटा-सा जाँच का तरीका: रिक्त स्थान भरकर वाक्य को ज़ोर से पढ़िए। जो शब्द सुनने में सहज लगे, प्रायः वही सही होता है — और फिर उसे पाठ की पंक्ति से मिला लीजिए।
प्र4.
(ख) मछुआरों ......... बातें तीनों मछलियों ......... सुन लीं।
उत्तर

उत्तर: मछुआरों की बातें तीनों मछलियों ने सुन लीं।

“मछुआरों की बातें तीनों मछलियों ने सुन लीं।”

इस वाक्य में दो अलग-अलग काम हो रहे हैं —

रिक्त स्थानसही शब्दकारण
मछुआरों ......... बातेंकीयह बताता है कि बातें किसकी थीं। ‘बातें’ स्त्रीलिंग और बहुवचन है, इसलिए ‘का’ या ‘के’ नहीं, ‘की’ लगेगा।
तीनों मछलियों ......... सुन लींनेयह बताता है कि सुनने का काम किसने किया। बीते हुए काम में करने वाले के साथ ‘ने’ लगता है।
‘ने’ कब लगता है: जब काम पूरा हो चुका हो और वाक्य में यह बताना हो कि वह काम किसने किया, तब करने वाले के आगे ‘ने’ आता है — “मछलियों ने सुन लीं”, “उन्होंने जाल डाल दिया”, “मछुआरों ने फेंक दिया”। पर हर बीते वाक्य में नहीं — “वह चली गई” में ‘ने’ नहीं आता।
प्र5.
(ग) वह कहने लगी कि मैं तो अपने इस पुराने निवास स्थान ......... छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगी।
उत्तर

उत्तर: वह कहने लगी कि मैं तो अपने इस पुराने निवास स्थान को छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगी।

“वह कहने लगी कि मैं तो अपने इस पुराने निवास स्थान को छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगी।”
‘को’ ही क्यों: जिस चीज़ पर काम किया जा रहा है, उसके आगे प्रायः ‘को’ लगता है। यहाँ काम है ‘छोड़ना’ और जिसे छोड़ा जा रहा है वह है ‘निवास स्थान’। इसी तरह हम कहते हैं — “घर को छोड़कर”, “गाँव को छोड़कर”।
यह किसका कथन है: यह यद्भविष्य की बात है। निवास स्थान यानी रहने की जगह। उसके इसी हठ ने उसकी जान ले ली — अगली सुबह वह जाल में फँस गई।
प्र6.
(घ) उत्तर भारत ......... एक सुंदर सरोवर ......... तीन मछलियाँ रहती थीं।
उत्तर

उत्तर: उत्तर भारत के एक सुंदर सरोवर में तीन मछलियाँ रहती थीं।

“उत्तर भारत के एक सुंदर सरोवर में तीन मछलियाँ रहती थीं।”
रिक्त स्थानसही शब्दकारण
उत्तर भारत ......... एक सुंदर सरोवरकेयह बताता है कि सरोवर कहाँ का है। ‘सरोवर’ पुल्लिंग है और आगे ‘में’ आ रहा है, इसलिए ‘का’ बदलकर ‘के’ हो जाता है।
सरोवर ......... तीन मछलियाँ रहती थींमेंयह बताता है कि मछलियाँ कहाँ रहती थीं — सरोवर के भीतर। जगह के भीतर होने के लिए ‘में’ लगता है।
यह वाक्य कहानी की पहली पंक्ति है। कहानी की शुरुआत ही जगह बताकर होती है — पहले देश का भाग (उत्तर भारत), फिर ठीक जगह (सुंदर सरोवर), फिर पात्र (तीन मछलियाँ)। कहानी लिखते समय आप भी यही क्रम रख सकते हैं।
प्र7.
दिए गए विराम चिह्नों ( ? , । ! “ ” - ) में से उचित विराम चिह्न का प्रयोग करते हुए नीचे दिए गए वाक्यों को पुनः अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए — (क) एक समय की बात है
उत्तर

उत्तर: एक समय की बात है

यह एक सीधा-सादा कथन है — न प्रश्न, न किसी की कही हुई बात, न आश्चर्य। ऐसे वाक्य के अंत में केवल पूर्ण विराम (।) लगता है।

विराम चिह्ननामकब लगता है
पूर्ण विरामजब वाक्य पूरा हो जाए और वह सीधा कथन हो।
?प्रश्नवाचक चिह्नजब कुछ पूछा जा रहा हो।
!विस्मयादिबोधक चिह्नजब आश्चर्य, खुशी या डर प्रकट हो।
,अल्प विरामवाक्य के भीतर थोड़ा रुकने के लिए, और सूची में शब्दों के बीच।
“ ”उद्धरण चिह्नजब किसी की कही हुई बात ज्यों-की-त्यों लिखी जाए।
-योजक चिह्नदो शब्दों को जोड़ने के लिए, जैसे बड़ी-बड़ी, मिल-जुलकर।
ध्यान दीजिए: कहानी का पहला वाक्य भी ऐसा ही है — “बहुत समय पहले की बात है।” कहानी शुरू करने वाले ऐसे वाक्य के अंत में हमेशा पूर्ण विराम आता है।
प्र8.
(ख) पहला मछुआरा बोला अरे देखो इस सरोवर में कितनी बड़ी बड़ी मछलियाँ हैं
उत्तर

उत्तर: पहला मछुआरा बोला, अरे! देखो, इस सरोवर में कितनी बड़ी-बड़ी मछलियाँ हैं!”

इस एक वाक्य में पाँच जगह चिह्न लगे। एक-एक देखिए —

कहाँकौन-सा चिह्नक्यों
“बोला” के बाद, (अल्प विराम)बोलने वाले का परिचय पूरा हुआ, अब उसकी कही हुई बात शुरू होगी। बीच में थोड़ा रुकना है।
कही हुई बात के शुरू और अंत में“ ” (उद्धरण चिह्न)यह मछुआरे के अपने शब्द हैं। किसी की कही हुई बात हमेशा उद्धरण चिह्नों के भीतर लिखी जाती है।
“अरे” के बाद! (विस्मयादिबोधक)‘अरे’ आश्चर्य का शब्द है। मछुआरा चौंककर बोला था।
“देखो” के बाद, (अल्प विराम)बुलाने या पुकारने के बाद ज़रा-सा ठहराव आता है — “देखो, यह क्या है!”
“बड़ी” और “बड़ी” के बीच- (योजक चिह्न)एक ही शब्द दो बार आकर एक अर्थ दे रहा है, इसलिए बीच में योजक चिह्न — बड़ी-बड़ी
“हैं” के बाद! (विस्मयादिबोधक)यह पूछना नहीं, चकित होकर कहना है। यहाँ ? लगाना भी चल जाएगा, क्योंकि वाक्य में ‘कितनी’ शब्द है।
पुस्तक में यह वाक्य ऐसे छपा है: “अरे! देखो इस सरोवर में कितनी बड़ी मछलियाँ हैं” पहला मछुआरा बोला। — वहाँ बोलने वाले का नाम बाद में आया है, इसलिए चिह्नों का क्रम थोड़ा अलग है। अभ्यास में नाम पहले आया है, इसलिए अल्प विराम और उद्धरण चिह्न ऊपर बताए क्रम में लगेंगे।
प्र9.
(ग) मछुआरों ने सरोवर में अनागतविधाता प्रत्युत्पन्नमति यद्भविष्य और बड़ी बड़ी स्वस्थ मछलियाँ देखीं
उत्तर

उत्तर: मछुआरों ने सरोवर में अनागतविधाता, प्रत्युत्पन्नमति, यद्भविष्य और बड़ी-बड़ी स्वस्थ मछलियाँ देखीं

कहाँकौन-सा चिह्नक्यों
अनागतविधाता के बाद,यह एक सूची है। सूची में नामों के बीच अल्प विराम लगता है।
प्रत्युत्पन्नमति के बाद,वही कारण — सूची अभी चल रही है।
यद्भविष्य के बादकोई चिह्न नहींयहाँ ‘और’ शब्द आ गया है। सूची के आख़िरी नाम से पहले ‘और’ आ जाए तो अल्प विराम नहीं लगाते।
बड़ी और बड़ी के बीच-दोहराए हुए शब्द को जोड़ने के लिए योजक चिह्न — बड़ी-बड़ी
वाक्य के अंत मेंयह सीधा कथन है, इसलिए पूर्ण विराम।
सूची का नियम याद रखिए: तीन या अधिक चीज़ों के नाम एक साथ लिखने हों तो बीच-बीच में अल्प विराम (,) लगाइए और आख़िरी से पहले ‘और’ लगाकर अल्प विराम छोड़ दीजिए — “राम, श्याम, मोहन और सीता आए।”
प्र10.
(घ) हाँ हाँ और इतनी सारी मछलियाँ एक ही जगह हमने पहले कभी नहीं देखीं दूसरा मछुआरा बोला
उत्तर

उत्तर: हाँ, हाँ, और इतनी सारी मछलियाँ एक ही जगह हमने पहले कभी नहीं देखीं।” दूसरा मछुआरा बोला

कहाँकौन-सा चिह्नक्यों
वाक्य के आरंभ मेंयहीं से मछुआरे की कही हुई बात शुरू होती है।
पहले ‘हाँ’ के बाद,‘हाँ’ दो बार आया है। दोहराए जाने पर बीच में अल्प विराम लगता है।
दूसरे ‘हाँ’ के बाद,यहाँ कही हुई बात का पहला हिस्सा पूरा हुआ और आगे नई बात जुड़ रही है।
“देखीं” के बाद।”कही हुई बात यहाँ पूरी हुई — पहले पूर्ण विराम, फिर उद्धरण चिह्न बंद।
वाक्य के अंत में“दूसरा मछुआरा बोला” अपने आप में एक पूरा कथन है, इसलिए पूर्ण विराम।
पुस्तक की छपाई देखिए: पृष्ठ 118 पर यह वाक्य ऐसे छपा है — “हाँ, हाँ, और इतनी सारी मछलियाँ एक ही जगह हमने पहले कभी नहीं देखीं” दूसरा मछुआरा बोला। वहाँ उद्धरण के भीतर अंतिम पूर्ण विराम नहीं है। दोनों तरीके चलते हैं, पर उद्धरण के भीतर वाक्य पूरा हो तो चिह्न लगाना अधिक अच्छा माना जाता है।
प्र11.
(ङ) मछुआरों की बातें तीनों मछलियों ने सुन लीं
उत्तर

उत्तर: मछुआरों की बातें तीनों मछलियों ने सुन लीं

इस वाक्य में केवल एक ही चिह्न लगेगा — अंत में पूर्ण विराम (।)। बाकी किसी चिह्न की ज़रूरत नहीं, क्योंकि —

  • यह किसी की कही हुई बात नहीं है, इसलिए उद्धरण चिह्न नहीं।
  • इसमें कुछ पूछा नहीं जा रहा, इसलिए प्रश्नवाचक चिह्न नहीं।
  • इसमें आश्चर्य नहीं है, इसलिए विस्मयादिबोधक चिह्न नहीं।
  • इसमें कोई सूची या ठहराव नहीं है, इसलिए अल्प विराम नहीं।
  • इसमें कोई दोहराया हुआ शब्द नहीं है, इसलिए योजक चिह्न नहीं।
सबसे बड़ा नियम: विराम चिह्न सजावट के लिए नहीं लगाए जाते। जितने ज़रूरी हों उतने ही लगाइए। बिना ज़रूरत का चिह्न वाक्य को बिगाड़ देता है।
पाँचों वाक्य एक साथ:
(क) एक समय की बात है।
(ख) पहला मछुआरा बोला, “अरे! देखो, इस सरोवर में कितनी बड़ी-बड़ी मछलियाँ हैं!”
(ग) मछुआरों ने सरोवर में अनागतविधाता, प्रत्युत्पन्नमति, यद्भविष्य और बड़ी-बड़ी स्वस्थ मछलियाँ देखीं।
(घ) “हाँ, हाँ, और इतनी सारी मछलियाँ एक ही जगह हमने पहले कभी नहीं देखीं।” दूसरा मछुआरा बोला।
(ङ) मछुआरों की बातें तीनों मछलियों ने सुन लीं।
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