कक्षा ५ हिंदी अध्याय 10 तीन मछलियाँ के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

तीन मछलियाँ एक कहानी है। कहानी यानी ऐसी रचना जिसमें कोई घटना क्रम से सुनाई जाती है। यह कहानी मालती देवी ने लिखी है और यह पंचतंत्र पर आधारित है — यानी इसकी मूल कथा पंचतंत्र से ली गई है और लेखिका ने उसे अपने शब्दों में फिर से लिखा है। कहानी की जगह है उत्तर भारत का एक सुंदर सरोवर । सरोवर यानी बड़ा तालाब। वहाँ तीन मछलियाँ रहती थीं जिनमें गाढ़ी मित्रता थी — गाढ़ी यानी बहुत गहरी, बहुत पक्की। तीनों बाकी मछलियों के साथ मिल-जुलकर विनोद (हँसी-मज़ाक) और सैर करती रहती थीं। तीनों के नाम ही उनका स्वभाव बताते हैं। अनागतविधाता — जो आगे आने वाली मुसीबत का हल पहले से सोच लेती है। प्रत्युत्पन्नमति — जिसकी बुद्धि मौके पर तुरंत काम करती है। यद्भविष्य — जो कहती है ‘जो होना होगा सो तो होगा ही’ और कुछ नहीं करती। कहानी में लिखा है कि तीनों ‘अपने नाम के अर्थ को सार्थक करती थीं’ — सार्थक करना यानी नाम को सच कर दिखान

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शब्दअर्थपाठ की पंक्तिअपने वाक्य में प्रयोग
सरोवरबड़ा तालाब, झील“उत्तर भारत के एक सुंदर सरोवर में तीन मछलियाँ रहती थीं”गाँव के सरोवर में कमल के फूल खिले हैं।
गाढ़ीघनिष्ठ, बहुत गहरी“तीन मछलियाँ रहती थीं जिनमें गाढ़ी मित्रता थी”मीना और रज़िया की गाढ़ी दोस्ती है।
विनोदहँसी-मज़ाक, मन बहलाना“मिल-जुलकर विनोद और सैर करती रहती थीं”छुट्टी के दिन हम सब विनोद करते हैं।
बुद्धिमतीसमझदार स्त्री या मादा“वह बहुत बुद्धिमती थी”हमारी दादी बहुत बुद्धिमती हैं।
संभावितजो आगे हो सकता है“भविष्य की संभावित समस्याओं का हल पहले से ही निकालकर रखती थी”संभावित बारिश देखकर मैंने छाता रख लिया।
तीक्ष्णतेज़, पैनी“वैसी ही तीक्ष्ण और तीव्र उसकी बुद्धि थी”चाकू की धार बहुत तीक्ष्ण है।
तीव्रबहुत तेज़“तीक्ष्ण और तीव्र उसकी बुद्धि थी”रेल तीव्र गति से चली जा रही थी।
आशंकितजिसका डर हो, जिसकी चिंता हो“भविष्य की किसी भी आशंकित समस्या का पहले से समाधान”आशंकित तूफ़ान की खबर सुनकर सब घर लौट आए।
सूझ-बूझसमझदारी, मौके पर सही सोच“उसकी सूझ-बूझ इतनी पैनी थी”अपनी सूझ-बूझ से उसने आग बुझा दी।
पैनीतेज़, धारदार“उसकी सूझ-बूझ इतनी पैनी थी”बाज़ की नज़र बहुत पैनी होती है।
उलझनमुश्किल, गुत्थी“किसी भी उलझन का हल क्षण भर में निकाल लेती थी”यह सवाल पहले उलझन लगा, फिर आसान हो गया।
सार्थकजिसका अर्थ सच हो जाए, अर्थपूर्ण“अपने नाम के अर्थ को वह भी सार्थक करती थी”उसने मेहनत करके अपना नाम सार्थक कर दिखाया।
श्रममेहनत“श्रम और चिंतन से बचती थी”किसान का श्रम ही हमें अनाज देता है।
चिंतनगहराई से सोचना“श्रम और चिंतन से बचती थी”बड़ा निर्णय लेने से पहले चिंतन ज़रूरी है।
यत्नकोशिश, प्रयत्न“यत्न करने और सोचने-विचारने से कोई लाभ नहीं”बिना यत्न किए कुछ नहीं मिलता।
निश्चिंतबिना किसी चिंता के“निश्चिंत होकर आनंद से रहना चाहिए”काम पूरा करके मैं निश्चिंत हो गया।
अकस्मात्अचानक, बिना बताए“उस सरोवर के किनारे से अकस्मात् दो मछुआरे निकल रहे थे”अकस्मात् बादल घिर आए और वर्षा होने लगी।
रमणीयसुंदर, मन को भाने वाला“इतना रमणीय स्थान देखकर वे विश्राम करने बैठ गए”पहाड़ों का यह रमणीय दृश्य भूलता नहीं।
विश्रामआराम“सरोवर के किनारे विश्राम करने बैठ गए”दोपहर में दादी थोड़ी देर विश्राम करती हैं।
सहर्षखुशी-खुशी“दूसरे मछुआरे ने सहर्ष सम्मति दिखाई”मैंने सहर्ष उसकी मदद स्वीकार कर ली।
सम्मतिसहमति, राज़ी होना“दूसरे मछुआरे ने सहर्ष सम्मति दिखाई”सबकी सम्मति से यात्रा की तारीख तय हुई।
संबोधित करनाकिसी की ओर मुँह करके कहना, सबसे कहना“अनागतविधाता ने सब मछलियों को संबोधित करके बताया”प्रधानाचार्य ने सभा को संबोधित किया।
भयभीतडरा हुआ“सब मछलियाँ भयभीत हो गईं”गरज सुनकर छोटा भाई भयभीत हो गया।
आलस्यमयीआलस से भरी हुई“यद्भविष्य तो स्वभाव से ही आलस्यमयी थी”आलस्यमयी दिनचर्या से काम बिगड़ जाता है।
कदाचित्शायद, हो सकता है“मना रहीं थीं कि कदाचित् मछुआरे नहीं आएँगे”कदाचित् आज वर्षा हो जाए।
ध्वनिआवाज़“मछुआरों की ध्वनियाँ सुनाई पड़ीं”घंटी की ध्वनि सुनते ही सब कक्षा में चले गए।
निर्जीवजिसमें जान न हो“आँखें बंद करके निर्जीव सी बनकर पड़ गई”पत्थर एक निर्जीव वस्तु है।
प्रत्युत्पन्न बुद्धिमौके पर तुरंत काम करने वाली बुद्धि“अपनी प्रत्युत्पन्न बुद्धि के कारण उसकी जान बच गई”प्रत्युत्पन्न बुद्धि से उसने गिरता हुआ गमला थाम लिया।
  1. बातचीत के लिए
  2. पाठ से
  3. सोचिए और लिखिए
  4. भाषा की बात
  5. अनुमान और कल्पना
  6. बूझो तो जानें
  7. पुस्तकालय से
  8. आपकी अभिव्यक्ति
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