प्र1.
अनागतविधाता को बहुत बुद्धिमती किस कारण से बताया गया है? (i) नाम के अनुरूप स्वभाव होने के कारण (ii) सब कुछ भाग्य के भरोसे छोड़ देने और चिंता न करने के कारण (iii) भविष्य की संभावित समस्याओं का हल पहले से ही निकाल लेने के कारण (iv) श्रम और चिंतन से बचने की प्रवृत्ति के कारण
उत्तर
सही विकल्प — (i) और (iii)। इन दोनों पर मछली का चित्र बनाइए। याद रखिए, पुस्तक ने स्वयं लिखा है — “एक से अधिक विकल्प भी सही हो सकते हैं।”
पाठ की यह पंक्ति दोनों उत्तर एक साथ देती है —
“इनमें से पहली मछली का नाम था अनागतविधाता। वह बहुत बुद्धिमती थी
और अपने नाम के अनुसार भविष्य की संभावित समस्याओं का हल पहले से ही
निकालकर रखती थी।”
और अपने नाम के अनुसार भविष्य की संभावित समस्याओं का हल पहले से ही
निकालकर रखती थी।”
अब एक-एक विकल्प देखिए —
| विकल्प | सही या गलत | कारण |
|---|---|---|
| (i) नाम के अनुरूप स्वभाव होने के कारण | सही ✔ | पाठ में लिखा है “अपने नाम के अनुसार”। अनागतविधाता का अर्थ ही है — जो अभी आया नहीं है (अनागत), उसका प्रबंध पहले से करने वाली (विधाता)। उसका स्वभाव उसके नाम से पूरा-पूरा मिलता था। |
| (ii) सब कुछ भाग्य के भरोसे छोड़ देने और चिंता न करने के कारण | गलत ✘ | यह अनागतविधाता की नहीं, यद्भविष्य की बात है — “सब कुछ भाग्य के भरोसे छोड़ देना चाहिए और निश्चिंत होकर आनंद से रहना चाहिए।” और भाग्य के भरोसे बैठना बुद्धिमानी नहीं मानी गई; उसी से यद्भविष्य की जान गई। |
| (iii) भविष्य की संभावित समस्याओं का हल पहले से ही निकाल लेने के कारण | सही ✔ | यह पाठ का शब्द-दर-शब्द कारण है। कहानी में उसने यही करके दिखाया भी — मछुआरों की बात सुनते ही सभा बुलाई और सवेरा होने से पहले सरोवर छोड़ दिया। |
| (iv) श्रम और चिंतन से बचने की प्रवृत्ति के कारण | गलत ✘ | यह भी यद्भविष्य का स्वभाव है — “वह किसी भी संकट की संभावना पर ध्यान नहीं देती थी तथा श्रम और चिंतन से बचती थी।” मेहनत और सोच से बचना बुद्धिमानी का उलटा है। |
दो विकल्प सही क्यों हैं: (iii) बताता है कि उसने क्या किया, और (i) बताता है कि उसका स्वभाव कैसा था। पाठ की एक ही पंक्ति में दोनों बातें जुड़ी हुई हैं — “अपने नाम के अनुसार… हल पहले से ही निकालकर रखती थी।” इसलिए दोनों पर मछली बनेगी।
नाम में अर्थ छिपा है: तीनों मछलियों के नाम संस्कृत से बने हैं — अनागतविधाता (आगे का प्रबंध करने वाली), प्रत्युत्पन्नमति (जिसकी बुद्धि तत्काल उपजे), यद्भविष्य (जो होगा सो होगा)। पाठ स्वयं कहता है कि तीनों “अपने नाम के अर्थ को सार्थक करती थीं।”