कक्षा ५ हिंदी अध्याय 10 बातचीत के लिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
क्या आपने कभी नदी, पोखर या समुद्र तट का भ्रमण किया है? आपने वहाँ क्या-क्या देखा?
उत्तर

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। जो आपने सचमुच देखा हो, वही बताइए। यदि आप कभी नहीं गए हों, तो साफ़ कह दीजिए और यह बताइए कि आपने चित्रों या टी.वी. पर क्या देखा है। पोखर यानी छोटा तालाब, और भ्रमण यानी घूमने जाना।

अच्छे उत्तर में ये चार बातें होनी चाहिए —

  1. आप कहाँ गए और किसके साथ गए।
  2. पानी कैसा दिखा — साफ़ या मटमैला, शांत या लहरों वाला।
  3. वहाँ कौन-कौन से जीव-जंतु और पेड़-पौधे दिखे।
  4. लोग वहाँ क्या-क्या कर रहे थे, और आपको कैसा लगा।

नमूना उत्तर:

पिछली गरमी की छुट्टियों में हम नानी के गाँव गए थे। वहाँ गाँव के किनारे एक बड़ा पोखर है। एक शाम मैं और मेरे मामा वहाँ घूमने गए। पानी हरा-सा और बहुत शांत था। किनारे पर कीचड़ में बगुले खड़े थे। वे बिलकुल हिलते नहीं थे और अचानक चोंच मारकर मछली पकड़ लेते थे।

पानी में छोटी-छोटी मछलियाँ झुंड में तैर रही थीं। किनारे पर कमल के बड़े-बड़े पत्ते थे और दो-तीन गुलाबी फूल भी खिले थे। एक जगह मेंढक बैठा था, जो हमें देखकर छपाक से पानी में कूद गया। दो लड़के बंसी लेकर बैठे थे और एक औरत कपड़े धो रही थी। शाम को पानी पर लाल रंग की चमक फैल गई। मुझे वहाँ बहुत अच्छा लगा और मैं देर तक पानी की छोटी-छोटी लहरें देखता रहा।

क्या देखानदी के किनारेपोखर या तालाब के किनारेसमुद्र तट पर
पानीबहता हुआ, एक ओर को जाता हुआठहरा हुआ और शांतखारा पानी, बड़ी-बड़ी लहरें
जीव-जंतुमछलियाँ, कछुए, बगुले, जल-मुर्गीमेंढक, मछलियाँ, बत्तखें, जल-कीटकेकड़े, सीपियाँ, समुद्री पक्षी
पेड़-पौधेकिनारे की घास, कास, बड़े पेड़कमल, सिंघाड़ा, जलकुंभीनारियल और ताड़ के पेड़
ज़मीनगीली मिट्टी और गोल पत्थरकीचड़ और घासनरम रेत
लोग क्या करते हैंनहाना, कपड़े धोना, नाव चलानापानी भरना, मछली पकड़ना, पशुओं को नहलानाटहलना, नाव से मछली पकड़ना, खेलना
आवाज़ेंपानी के बहने की धीमी आवाज़मेंढकों की टर्र-टर्र, पक्षियों की चहचहाहटलहरों के टकराने की गरज
इस प्रश्न का कहानी से नाता: कहानी भी एक सरोवर के किनारे से शुरू होती है। मछुआरे भी इसी तरह किनारे बैठे और उन्होंने पानी में तैरती मछलियाँ देखीं — “क्षण भर में उनका ध्यान पानी में सैर करती हुई मछलियों पर गया।” जब आप स्वयं किसी जलाशय के किनारे बैठते हैं, तभी समझ आता है कि वहाँ कितना कुछ देखने लायक होता है।
ऐसे बताइए: कक्षा में बोलते समय एक-एक बात अलग वाक्य में कहिए। पहले जगह बताइए, फिर पानी, फिर जीव-जंतु, फिर लोग। इससे सुनने वाले के मन में पूरा चित्र बन जाता है।
प्र2.
क्या किसी कार्य को भाग्य के भरोसे छोड़ना चाहिए? अपने उत्तर का कारण दीजिए।
उत्तर

नहीं, किसी काम को भाग्य के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए। पहले अपनी ओर से पूरी कोशिश करनी चाहिए। भाग्य यानी वह जो हमारे हाथ में नहीं है। जो हमारे हाथ में है, वह तो हमें करना ही चाहिए।

इसके तीन कारण हैं —

  1. कोशिश करने से ही रास्ता निकलता है। अनागतविधाता ने पहले से सोचा, इसलिए वह बच गई। प्रत्युत्पन्नमति ने मौके पर सोचा, इसलिए वह भी बच गई।
  2. भाग्य के भरोसे बैठने से नुकसान होता है। यद्भविष्य ने कहा — “भाग्य में जो लिखा होगा वही होगा, मुझे कुछ करने की आवश्यकता नहीं है।” कहानी का अंत यही बताता है — “यद्भविष्य की जान नहीं बच सकी।”
  3. मेहनत का फल हमें दिखाई देता है। पढ़ने से ही सवाल हल होता है, बोने से ही फ़सल उगती है। कोई भी काम अपने आप पूरा नहीं होता।

कहानी की तीनों मछलियों की सोच इस तालिका से समझिए —

मछलीउसकी सोचउसने क्या कियाक्या हुआ
अनागतविधातामुसीबत आने से पहले ही उसका हल सोच लो।रात में ही सरोवर छोड़कर पास के दूसरे सरोवर में चली गई।पूरी तरह सुरक्षित रही।
प्रत्युत्पन्नमतिसमय आने पर परिस्थिति देखकर उपाय ढूँढ़ लूँगी।जाल में फँसने पर मरी हुई बनकर पड़ गई।जान बच गई, पर जोखिम उठाना पड़ा।
यद्भविष्यजो होना होगा सो तो होगा ही, कुछ करने की ज़रूरत नहीं।कुछ नहीं किया, वहीं पड़ी रही।जाल में फँसी और जान नहीं बची।
ध्यान रखने की बात: इसका अर्थ यह नहीं कि भाग्य कुछ भी नहीं। कभी-कभी पूरी मेहनत के बाद भी काम नहीं बनता — तब भी दुख कम होता है, क्योंकि मन में यह संतोष रहता है कि हमने अपनी ओर से कोई कमी नहीं छोड़ी। कहावत भी यही कहती है — “कर्म करो, फल की चिंता मत करो।” यह कर्म न करने की सीख नहीं है।
अपने जीवन से जोड़िए: परीक्षा के दिन ‘जो होगा देखा जाएगा’ कहकर सो जाना और पहले से पढ़ लेना — दोनों में अंतर वही है जो यद्भविष्य और अनागतविधाता में था।
प्र3.
यद्भविष्य मछुआरों से अपने प्राण नहीं बचा पाई। यदि उसके स्थान पर आप होते तो मछुआरों से अपने प्राण कैसे बचाते?
उत्तर

यदि मैं यद्भविष्य के स्थान पर होता, तो सबसे पहले वही करता जो अनागतविधाता ने किया — सवेरा होने से पहले सरोवर छोड़ देता। जान बचाने का सबसे पक्का उपाय यही था, क्योंकि जाल में फँसने के बाद बचना कठिन हो जाता है।

मैं ये कदम उठाता —

  1. चेतावनी पर भरोसा करता। मछुआरों की बात मैंने अपने कानों से सुनी थी। जब खतरे की बात पक्की हो, तब उसे टालना नहीं चाहिए।
  2. उसी रात सरोवर छोड़ देता। पास वाले सरोवर तक जाने का रास्ता तो अनागतविधाता जानती ही थी। उसके साथ चला जाता।
  3. दूसरी मछलियों को भी समझाता। जो मछलियाँ मेरी राय से सहमत होकर रुक गई थीं, उनसे कहता — “एक रात की तकलीफ़ जान से बड़ी नहीं है।”
  4. यदि किसी कारण रुकना ही पड़ता, तो सवेरे पानी की तली में, पत्थरों या जलकुंभी की जड़ों के नीचे छिप जाता, क्योंकि जाल ऊपर के पानी में डाला जाता है।
  5. और यदि फिर भी जाल में फँस जाता, तो प्रत्युत्पन्नमति की तरह शरीर सिकोड़कर, आँखें बंद करके निर्जीव बन जाता — क्योंकि मछुआरों को स्वस्थ और जीवित मछलियाँ ही चाहिए थीं।
उपायकब काम आता हैकितना सुरक्षित
पहले ही जगह छोड़ देनाखतरे की खबर मिलते ही, रात मेंसबसे सुरक्षित — जाल तक बात पहुँचेगी ही नहीं
तली में या पौधों के नीचे छिपनाजाल डलने से ठीक पहलेकुछ हद तक सुरक्षित, पर पक्का नहीं
निर्जीव बन जानाजाल में फँस जाने के बादआख़िरी उपाय — बहुत जोखिम भरा
यह क्रम ही सही क्यों है: जान बचाने में सबसे अच्छा उपाय वही है जो खतरे से पहले किया जाए। यद्भविष्य के पास तीनों उपाय थे — पर उसने एक भी नहीं आज़माया। कहानी उसकी मौत से यही सिखाती है कि खतरे की खबर मिल जाने पर चुप बैठना सबसे बड़ी भूल है।
प्र4.
आपको कौन-सी मछली सबसे अच्छी लगी और क्यों?
उत्तर

यह आपकी अपनी पसंद का प्रश्न है, इसलिए उत्तर हर बच्चे का अलग हो सकता है। पर पसंद के साथ कारण देना ज़रूरी है, और कारण कहानी से निकलना चाहिए।

नमूना उत्तर: मुझे अनागतविधाता सबसे अच्छी लगी।

इसके तीन कारण हैं। पहला, उसने खतरे की बात सुनते ही केवल अपनी नहीं सोची — उसने तुरंत सारी मछलियों को बुलाकर सभा की और सबको बताया। दूसरा, उसने सही उपाय भी बताया — “सवेरा होने से पहले हम सब यह सरोवर छोड़कर पास के दूसरे सरोवर में चले जाएँ।” तीसरा, उसने कहकर छोड़ नहीं दिया, बल्कि उस पर चली भी। इसीलिए उसे और उसके साथ जाने वाली मछलियों को जाल का सामना ही नहीं करना पड़ा।

तीनों मछलियाँ इस तरह अलग हैं —

मछलीनाम का अर्थअच्छी बातकमी
अनागतविधाताजो आगे आने वाली बात का प्रबंध पहले से कर लेदूरदर्शी; सबको साथ लेकर चली; सुरक्षित बच निकलीकुछ भी नहीं — पर उसकी बात सबने नहीं मानी
प्रत्युत्पन्नमतिजिसकी बुद्धि मौके पर तुरंत काम करेहिम्मत नहीं हारी; जाल में फँसकर भी उपाय सोच लियाबचाव का काम आख़िरी क्षण पर छोड़ा — बहुत जोखिम था
यद्भविष्यजो होना होगा सो होगाकोई नहीं — केवल यह कि वह अपने घर से बहुत जुड़ी थीआलस्य; न सोचा, न कुछ किया; जान गँवा दी
दूसरा उत्तर भी सही है: यदि आपको प्रत्युत्पन्नमति अच्छी लगी, तो यह कहिए कि उसने जाल में फँसकर भी हिम्मत नहीं हारी और अपनी सूझ-बूझ से जान बचा ली — “उसने उसी क्षण अपना शरीर सिकोड़ लिया और आँखें बंद करके निर्जीव सी बनकर पड़ गई।” यह उत्तर भी पूरा और सही है, बशर्ते आप कारण दें।
क्या यह उपयोगी रहा?