कक्षा ५ हिंदी अध्याय 9 न्याय के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
न्याय एक नाटक है। नाटक वह रचना है जिसे मंच पर खेलकर दिखाया जाता है। इसीलिए इसमें सबसे पहले पात्र परिचय दिया गया है — कौन-कौन इसमें आएगा और वह कौन है। फिर पहला दृश्य और दूसरा दृश्य हैं। दृश्य यानी नाटक का एक हिस्सा, जो एक ही जगह और एक ही समय में घटता है। रचनाकार का नाम पाठ के अंत में, पृष्ठ 109 पर छपा है — विष्णु प्रभाकर । विष्णु प्रभाकर हिंदी के प्रसिद्ध लेखक थे। उन्होंने कहानियाँ, नाटक और जीवनियाँ लिखीं। उनकी भाषा बहुत सरल है — छोटे-छोटे वाक्य, आसान शब्द, और बात सीधी मन तक पहुँचने वाली। पात्र परिचय इस प्रकार है — सिद्धार्थ (कपिलवस्तु के राजकुमार), शुद्धोदन (कपिलवस्तु के महाराजा), सखा (सिद्धार्थ का मित्र), देवदत्त (सिद्धार्थ का चचेरा भाई), मंत्री (महाराजा का मंत्री) और प्रतिहारी (द्वार पर खड़ा रहने वाला सेवक, जो आने-जाने की सूचना देता है)। ये वही सिद्धार्थ हैं जो आगे चलकर गौतम बुद्ध कहलाए।
त्वरित पुनरावृत्ति
| शब्द | अर्थ | पाठ की पंक्ति | अपने वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|---|
| नाटक | वह रचना जो मंच पर पात्रों द्वारा खेलकर दिखाई जाती है | “कक्षा को चार समूहों में विभाजित करके सभी समूहों से इस नाटक का मंचन करवाएँ।” | हमारी कक्षा ने वार्षिक उत्सव में एक नाटक खेला। |
| दृश्य | नाटक का वह हिस्सा जो एक ही जगह और एक ही समय में घटता है | “पहला दृश्य”, “दूसरा दृश्य” | नाटक के दूसरे दृश्य में राजा की सभा दिखाई गई। |
| नेपथ्य | मंच के पीछे का भाग, जो दर्शकों को दिखाई नहीं देता | “दूर नेपथ्य में वन से लौटती गायों का स्वर उठता हुआ।” | नेपथ्य से बाँसुरी की आवाज़ आ रही थी। |
| वेदी | बैठने या पूजा के लिए बनी ऊँची चौकोर जगह | “राजकुमार सिद्धार्थ प्रसन्न मन एक वेदी पर बैठे हैं।” | दादी मंदिर की वेदी के पास बैठ गईं। |
| सखा | मित्र, दोस्त | “पास ही उनका एक सखा है।” | राम और श्याम बचपन के सखा हैं। |
| व्याकुल | बहुत बेचैन, जिससे रुका न जाए | “वे अपने बच्चों से मिलने को व्याकुल हैं।” | माँ बेटे की चिट्ठी के लिए व्याकुल थीं। |
| अचरज | हैरानी, आश्चर्य | “ऐसा कैसे हो जाता है मित्र! बड़े अचरज की बात है।” | जादूगर का खेल देखकर मुझे बड़ा अचरज हुआ। |
| नियत | तय किया हुआ, ठहराया हुआ | “पानी भी हर साल नियत समय पर पड़ता है।” | रेल अपने नियत समय पर आ गई। |
| स्वभाव | किसी का अपना ढंग, जो अपने आप होता रहता है | “ऐसा मालूम होता है कि हर वस्तु का एक स्वभाव होता है।” | पानी का स्वभाव है नीचे की ओर बहना। |
| करुणा | दूसरे का दुख देखकर मन में उठने वाला दर्द और दया | “कुमार करुणा से भरकर उसे सँभालते हैं।” | घायल पिल्ले को देखकर मेरा मन करुणा से भर गया। |
| निर्दयी | जिसके मन में दया न हो | “किस निर्दयी ने इस भोले-भाले पक्षी को घायल किया है?” | निर्दयी व्यक्ति ने पेड़ की सारी डालें काट दीं। |
| निर्दोष | जिसका कोई दोष न हो, जिसने कुछ गलत न किया हो | “तुमने एक निर्दोष पक्षी को मारने का प्रयास किया है।” | निर्दोष बच्चे को यों डाँटना ठीक नहीं। |
| मरहम | घाव पर लगाने की दवा | “तुम दौड़कर राजवैद्य से मरहम तो ले आओ।” | चोट पर मरहम लगाते ही जलन कम हो गई। |
| प्रमाण | सबूत; वह चीज़ जिससे बात सच साबित हो | “इसका प्रमाण यह हंस है।” | अपनी बात के लिए मैंने रसीद प्रमाण के रूप में दिखाई। |
| आखेट | शिकार | “तुमने इसका आखेट किया है।” | पुराने समय में राजा वन में आखेट करने जाते थे। |
| शरणागत | जो अपनी रक्षा के लिए किसी के पास आ गया हो | “वीर शरणागत को भी नहीं छोड़ सकता।” | शरणागत की रक्षा करना सबसे बड़ा धर्म है। |
| धौंस | रोब जमाना, डरा-धमकाकर बात मनवाना | “तुम राजकुमार हो इसलिए धौंस जमाना चाहते हो।” | बड़े होने की धौंस देकर काम नहीं करवाना चाहिए। |
| विवश | मजबूर, जिसके पास कोई चारा न बचा हो | “ठीक है देवदत्त, मैं विवश हूँ।” | बारिश के कारण हम घर लौटने को विवश हो गए। |
| तिलमिलाना | गुस्से और खीझ से बेचैन हो उठना | “(तिलमिलाकर) कुमार…”, “देवदत्त तिलमिलाता है।” | हार जाने पर वह तिलमिला उठा। |
| स्तंभित | हैरानी से जड़ हो जाना, चुपचाप रह जाना | “सब लोग स्तंभित होकर एक-दूसरे को देखते हैं।” | यह खबर सुनकर पूरी कक्षा स्तंभित रह गई। |
| जटिल | उलझा हुआ, कठिन | “मंत्री जी! समस्या जटिल है।” | यह सवाल पहले जटिल लगा, पर समझ आते ही सरल हो गया। |
| प्रतिहारी | द्वार पर खड़ा रहने वाला सेवक, जो आने-जाने की सूचना देता है | “प्रतिहारी प्रवेश करता है। प्रणाम करके वह खड़ा हो जाता है।” | प्रतिहारी ने आकर मेहमानों के आने की सूचना दी। |
| पुचकारना | प्यार से मुँह से आवाज़ करके बुलाना | “(पुचकारकर) आओ… मेरे पास आओ।” | माँ ने बछड़े को पुचकारकर पास बुलाया। |
| सजल | आँसुओं से भरा हुआ | “महाराज के नेत्र सजल हो जाते हैं।” | विदाई के समय सबकी आँखें सजल थीं। |
अभ्यास
- बातचीत के लिए
- सोचिए और लिखिए
- अनुमान और कल्पना
- भाषा की बात
- पाठ से आगे
- पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत
- मैं भी सिद्धार्थ
- मेरा पक्षी