कक्षा ५ हिंदी अध्याय 9 पाठ से आगे के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
हंस वाली घटना के बाद सिद्धार्थ, देवदत्त को एक संदेश देना चाहते हैं। आपके अनुसार सिद्धार्थ ने देवदत्त को क्या संदेश लिखकर भेजा होगा — (पुस्तक में “प्रिय भाई देवदत्त” से आरंभ और “आपका भाई सिद्धार्थ” से अंत होने वाला ख़ाली पत्र दिया गया है।)
उत्तर

पुस्तक में पत्र का ढाँचा पहले से छपा है — ऊपर “प्रिय भाई देवदत्त” और नीचे “आपका भाई सिद्धार्थ”। बीच की छह पंक्तियाँ आपको भरनी हैं।

अच्छे संदेश में ये चार बातें होनी चाहिए —

  1. झगड़े का दुख — रिश्ता टूटे नहीं, यह बात पहले आए।
  2. अपनी बात का कारण, बिना ताना मारे।
  3. देवदत्त की अच्छी बात की तारीफ़ — जैसे उसका निशाना।
  4. आगे के लिए एक न्योता या सुझाव।

नमूना उत्तर:

प्रिय भाई देवदत्त

कल जो हुआ, उससे मेरा मन अब तक भारी है। मुझे तुमसे झगड़ा नहीं करना था।
मैंने हंस इसलिए नहीं रखा कि मैं जीतना चाहता था। मैंने इसलिए रखा कि वह
डरकर मेरी गोद में आ गिरा था। जो डरकर शरण में आ जाए, उसे लौटाया नहीं जाता।

तुम्हारा निशाना सचमुच बहुत अच्छा है। पर सोचो — वही निशाना यदि किसी की
जान बचाने के काम आए तो कितना बड़ा हो जाएगा! तीर से केवल जीत मिलती है,
दया से मित्र मिलते हैं।

हंस का घाव अब भर रहा है। कल सवेरे उद्यान में आ जाना। उसे साथ बैठकर दाना
खिलाएँगे। तुम देखोगे — वह तुमसे भी हिल जाएगा।

आपका भाई
सिद्धार्थ
यह संदेश सिद्धार्थ जैसा क्यों लगता है: क्योंकि इसमें कहीं भी देवदत्त को बुरा नहीं कहा गया। नाटक में भी सिद्धार्थ ने देवदत्त का अपमान नहीं किया था — उन्होंने केवल मुस्कुराकर कहा था, “मैं कब कहता हूँ तुम राजकुमार नहीं हो।” जो सही होता है, उसे ऊँची आवाज़ की ज़रूरत नहीं पड़ती।
पत्र लिखने का ढंग: (1) ऊपर संबोधन — “प्रिय भाई देवदत्त”। (2) बीच में अपनी बात, दो-तीन छोटे अनुच्छेदों में। (3) नीचे दाईं ओर अपना नाम। पुस्तक ने संबोधन और नाम पहले ही दे दिए हैं, इसलिए आपको केवल बीच का भाग लिखना है।
प्र2.
बगीचे में सुंदर-सुंदर गुलाब के फूल लगे हैं। प्रमोद को ये फूल बहुत सुंदर लगते हैं। वह उन फूलों को तोड़कर अपने पास रख लेता है। करुणा को भी फूल बहुत पसंद हैं। वह प्रतिदिन फूलों को खाद-पानी देकर उनकी देखभाल करने का निर्णय लेती है। आप इन फूलों से अपना प्रेम कैसे दर्शाएँगे एवं क्यों? अपनी कक्षा के साथियों के साथ चर्चा कर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर

पहले दोनों के तरीके आमने-सामने रखिए। दोनों को फूल अच्छे लगते हैं — पर प्रेम दिखाने का ढंग अलग है।

बातप्रमोद का तरीकाकरुणा का तरीका
क्या करता/करती हैफूल तोड़कर अपने पास रख लेता है।रोज़ खाद-पानी देकर देखभाल करती है।
फूल का क्या होगातोड़ा हुआ फूल एक-दो दिन में मुरझा जाएगा।पौधे पर लगा फूल कई दिन खिला रहेगा और नए फूल भी आएँगे।
प्रेम किसके लिएअपने लिए — “मुझे अच्छा लगता है, इसलिए मेरा हो जाए।”फूल के लिए — “यह खिला रहे, बढ़ता रहे।”
दूसरों के लिएतोड़ लेने पर बाकी लोग वह फूल नहीं देख पाएँगे।पूरा बगीचा सबके देखने के लिए खिला रहेगा।
तितली और मधुमक्खीफूल टूट जाने पर उन्हें रस नहीं मिलेगा।उन्हें रस मिलता रहेगा और बीज भी बनेंगे।

नमूना उत्तर: मैं फूलों से अपना प्रेम करुणा की तरह दिखाऊँगा/दिखाऊँगी। मैं फूल तोड़ूँगा नहीं। मैं यह करूँगा —

  1. रोज़ सवेरे पौधों में पानी दूँगा और महीने में एक बार खाद डालूँगा।
  2. सूखी पत्तियाँ और घास-फूस हटाता रहूँगा, ताकि पौधा साफ़ रहे।
  3. फूल को तोड़ने के बजाय उसका चित्र बनाऊँगा या उसे देखकर दो पंक्तियाँ लिखूँगा।
  4. घर आने वालों को बगीचा दिखाऊँगा, ताकि सुंदरता सबकी हो जाए।

क्यों — क्योंकि सच्चा प्रेम पाने का नहीं, बचाने का नाम है। तोड़ा हुआ फूल मेरा तो हो जाएगा, पर वह मुरझा जाएगा। पौधे पर लगा फूल मेरा नहीं होगा, पर वह जीवित रहेगा और कई दिन सबको सुंदर लगेगा।

इसका ‘न्याय’ नाटक से क्या नाता है: देवदत्त को भी हंस “सुंदर” लगा था। सखा ने कहा भी था — “यह सुंदर जो है, प्यारा जो लगता है।” उस पर सिद्धार्थ ने पूछा — “क्यों, क्या सुंदर होना पाप है? क्या प्यारा लगना बुरा है?” यही बात यहाँ फूलों की है। जो चीज़ सुंदर लगे, उसे छीनना नहीं — उसे बचाना चाहिए। प्रमोद देवदत्त जैसा है, करुणा सिद्धार्थ जैसी।
चर्चा में यह भी कहिए: यदि कभी फूल की सचमुच ज़रूरत हो — जैसे पूजा में — तो जो फूल अपने आप गिर गया हो, उसे उठाइए। इससे प्रेम भी रहेगा और पौधे को चोट भी नहीं लगेगी।
प्र3.
कुछ पक्षियों की संख्या निरंतर कम होती जा रही है। कई पक्षी तो ऐसे हैं जो विलुप्त होने की स्थिति में आ गए हैं, उदाहरण के लिए गौरैया। चित्रों के माध्यम से नीचे कुछ ऐसे संकेत दिए गए हैं जो पक्षियों की दिन-प्रतिदिन कम होती संख्या के लिए उत्तरदायी हैं। चित्रों को देखकर अपने सहपाठियों के साथ इन कारणों पर चर्चा कीजिए। यह भी पता लगाइए कि हम इन पक्षियों के बचाव और उनकी संख्या में वृद्धि के लिए कैसे योगदान दे सकते हैं।
उत्तर

पृष्ठ 114 पर बीच में एक घबराया हुआ पक्षी बना है, जिसके चारों ओर नीली रेखाएँ उलझी हुई हैं — यह उसकी परेशानी दिखाती हैं। उसके चारों ओर चार चित्र हैं। हर चित्र एक कारण बताता है। विलुप्त यानी जिसकी जाति ही खत्म हो जाए, जो अब कहीं न बचे।

चित्रचित्र में क्या हैयह कैसे नुकसान करता है
ऊपर बाएँपतंग और उसकी डोर, पास ही उड़ता हुआ पक्षीपतंग की तेज़ डोर (माँझा) में पक्षी उलझ जाते हैं। उनके पंख और गरदन कट जाते हैं। कई तो पेड़ों और तारों में फँसकर मर जाते हैं।
ऊपर दाएँकटे हुए पेड़ों के ठूँठ और पड़ी हुई लकड़ियाँपेड़ कटने से पक्षियों के घोंसले, अंडे और रहने की जगह खत्म हो जाती है। खाने के लिए फल-बीज और कीड़े भी नहीं बचते।
नीचे बाएँकारखानों का धुआँ, गंदा पानी और कूड़े का ढेर, ऊपर से उड़ते पक्षीधुएँ से हवा ज़हरीली होती है और गंदे पानी से बीमारी फैलती है। प्लास्टिक का कचरा पक्षी खा लेते हैं, जिससे उनकी जान चली जाती है।
नीचे दाएँमोबाइल टावर और उससे निकलती तरंगें, पास में उड़ता पक्षीटावर की तरंगों से छोटे पक्षी दिशा भूल जाते हैं और उनके अंडों पर भी असर पड़ता है। गौरैया इसी से कम होती जा रही है।

हम क्या कर सकते हैं — पक्षियों को बचाने के आठ काम

क्रमक्या करेंइससे क्या होगा
1छत या खिड़की पर मिट्टी के सकोरे में रोज़ पानी रखें, और गरमी में दाना भी।गरमी में पक्षी प्यास से नहीं मरेंगे।
2पेड़ों पर या दीवार पर घोंसले के लिए लकड़ी या मिट्टी का घर टाँगें।गौरैया जैसे छोटे पक्षियों को रहने की जगह मिलेगी।
3चीनी माँझे वाली पतंग न उड़ाएँ। सादी सूती डोर काम में लें।पक्षियों के पंख और गरदन नहीं कटेंगे।
4पेड़ लगाएँ और लगे हुए पेड़ों को कटने से बचाएँ। नीम, पीपल और बरगद पक्षियों के प्रिय हैं।घोंसले और भोजन दोनों मिलेंगे।
5प्लास्टिक कम करें और कूड़ा खुले में न फेंकें।पक्षी प्लास्टिक नहीं निगलेंगे।
6खेतों और बगीचों में कीटनाशक कम डालें।पक्षियों को साफ़ कीड़े खाने को मिलेंगे, जो उनका मुख्य भोजन है।
7पक्षियों को पिंजरे में न रखें और न ही किसी को पकड़ने दें।पक्षी खुले में रहेंगे और उनकी संख्या बढ़ेगी।
8कक्षा में ‘गौरैया दिवस’ (20 मार्च) पर चित्र-प्रदर्शनी लगाएँ और दूसरों को बताएँ।ज़्यादा लोग जुड़ेंगे तो असर भी ज़्यादा होगा।
गौरैया का ही नाम क्यों लिया गया: गौरैया वही छोटी भूरी चिड़िया है जो पहले हर घर के रोशनदान और आँगन में दिखती थी। अब पक्के मकानों में उसके घोंसले की जगह नहीं बची, आँगन में दाना नहीं गिरता और कीड़े भी कम हो गए हैं। इसीलिए वह कम होती जा रही है। यह वह पक्षी है जिसे बचाने का काम हर बच्चा अपने घर से शुरू कर सकता है।
क्या यह उपयोगी रहा?