पुस्तक में पत्र का ढाँचा पहले से छपा है — ऊपर “प्रिय भाई देवदत्त” और नीचे “आपका भाई सिद्धार्थ”। बीच की छह पंक्तियाँ आपको भरनी हैं।
अच्छे संदेश में ये चार बातें होनी चाहिए —
- झगड़े का दुख — रिश्ता टूटे नहीं, यह बात पहले आए।
- अपनी बात का कारण, बिना ताना मारे।
- देवदत्त की अच्छी बात की तारीफ़ — जैसे उसका निशाना।
- आगे के लिए एक न्योता या सुझाव।
नमूना उत्तर:
कल जो हुआ, उससे मेरा मन अब तक भारी है। मुझे तुमसे झगड़ा नहीं करना था।
मैंने हंस इसलिए नहीं रखा कि मैं जीतना चाहता था। मैंने इसलिए रखा कि वह
डरकर मेरी गोद में आ गिरा था। जो डरकर शरण में आ जाए, उसे लौटाया नहीं जाता।
तुम्हारा निशाना सचमुच बहुत अच्छा है। पर सोचो — वही निशाना यदि किसी की
जान बचाने के काम आए तो कितना बड़ा हो जाएगा! तीर से केवल जीत मिलती है,
दया से मित्र मिलते हैं।
हंस का घाव अब भर रहा है। कल सवेरे उद्यान में आ जाना। उसे साथ बैठकर दाना
खिलाएँगे। तुम देखोगे — वह तुमसे भी हिल जाएगा।
आपका भाई
सिद्धार्थ