पहले दोनों चिह्न पहचान लीजिए।
- अनुस्वार ( ं ) — केवल एक बिंदु, अक्षर के ऊपर। इसे बोलते समय नाक के साथ-साथ एक हल्का व्यंजन भी सुनाई देता है, जैसे हंस में ‘न्’ जैसा।
- चंद्रबिंदु ( ँ ) — आधा चाँद और उसके ऊपर बिंदु। इसे बोलते समय आवाज़ केवल नाक से निकलती है, कोई अलग व्यंजन नहीं सुनाई देता, जैसे हँस में।
“हंस उनकी गोद में चिपक जाता है।” बनाम “सिद्धार्थ – (हँसकर) सच मित्र!”
पाठ में आए अनुस्वार ( ं ) वाले शब्द —
| शब्द | पाठ की पंक्ति | अपने वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|
| हंस | “हंस उनकी गोदी में आ गिरता है।” | तालाब में एक सफ़ेद हंस तैर रहा था। |
| रंगमंच | “रंगमंच पर राज-उद्यान का एक दृश्य।” | हमारा नाटक विद्यालय के रंगमंच पर हुआ। |
| मंच | “मंच पर लालिमा।” | मुख्य अतिथि मंच पर आकर बैठ गए। |
| संध्याकाल | “संध्याकाल। मंच पर लालिमा।” | संध्याकाल में मंदिर की घंटियाँ बजने लगीं। |
| शांति | “कैसा सुहावना समय है! कैसी शांति है!” | पुस्तकालय में पूरी शांति रहती है। |
| सुंदर | “ऊपर तो देखो, कैसे सुंदर पक्षी हैं।” | दादी ने मेरी कॉपी पर सुंदर चित्र बनाया। |
| प्रसन्न | “राजकुमार सिद्धार्थ प्रसन्न मन एक वेदी पर बैठे हैं।” | परिणाम सुनकर पिता जी बहुत प्रसन्न हुए। |
| परंतु | “तुमने मारा है परंतु मैंने बचाया है।” | मैंने बुलाया, परंतु वह नहीं आया। |
| मंत्री | “मंत्री जी! समस्या जटिल है।” | मंत्री ने गाँव में नया विद्यालय खुलवाया। |
| शांत | “(शांत स्वर) ठीक है देवदत्त, मैं विवश हूँ।” | शोर सुनकर शिक्षक ने कक्षा को शांत कराया। |
| स्तंभित | “सब लोग स्तंभित होकर एक-दूसरे को देखते हैं।” | यह समाचार सुनकर सब स्तंभित रह गए। |
| कंठ | “सिद्धार्थ के कंठ से स्नेहपूरित शब्द निकलते ही…” | गाते-गाते उसका कंठ सूख गया। |
पाठ में आए चंद्रबिंदु ( ँ ) वाले शब्द —
| शब्द | पाठ की पंक्ति | अपने वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|
| हँसकर | “(हँसकर) सच मित्र! तुम तो बहुत बातें जानते हो।” | भाई ने हँसकर मेरी बात टाल दी। |
| सँभालते | “कुमार करुणा से भरकर उसे सँभालते हैं।” | गिरते हुए घड़े को माँ ने सँभाल लिया। |
| काँपता | “(काँपता-सा) कुमार…” | ठंड से मेरा हाथ काँपने लगा। |
| साँस | “(साँस खींचकर) नहीं कुमार! मैं इसको नहीं मार सकूँगा।” | दौड़ने के बाद मेरी साँस तेज़ चलने लगी। |
| आँखें | “देखो तो, इसकी आँखें कितनी भोली हैं!” | नींद में उसकी आँखें बंद हो गईं। |
| मुँह | “देवदत्त मुँह लटकाए पीछे हटते हैं।” | खाना खाने से पहले मुँह-हाथ धो लो। |
| रँभाने | “गायों के बछड़े-बछियों के रँभाने के स्वर उठते हैं।” | शाम को गाय के रँभाने की आवाज़ आई। |
| दूँगा | “मैं यह हंस तुमको कभी नहीं दूँगा।” | मैं तुम्हें अपनी नई पेंसिल दूँगा। |
| पूछूँगा | “मैं गुरुजी से पूछूँगा, योगी किसे कहते हैं…” | यह सवाल मैं दीदी से पूछूँगा। |
| सकूँगा | “मैं इसको नहीं मार सकूँगा।” | इतना भारी बस्ता मैं नहीं उठा सकूँगा। |
| लौटाऊँगा | “हंस मेरी शरण में आ चुका है। मैं उसे नहीं लौटाऊँगा।” | तुम्हारी किताब मैं कल लौटाऊँगा। |
| कहाँ / यहाँ / वहाँ | “कुमार अब कहाँ हैं?”, “हंस यहाँ आसन पर बैठा है।”, “वहाँ प्रवेश करते हैं।” | तुम कहाँ थे? मैं यहाँ हूँ, वहाँ मत ढूँढ़ो। |