यह करने वाला काम है। पहले यह जान लीजिए कि जातक कथाएँ हैं क्या।
जातक कथाएँ वे कहानियाँ हैं जो गौतम बुद्ध के पिछले जन्मों के बारे में बताई जाती हैं। इनमें बुद्ध कभी हिरण होते हैं, कभी बंदर, कभी हाथी और कभी राजा। हर कथा के अंत में एक सीख होती है — दया, सच्चाई, साहस या मित्रता की।
इस पाठ से इनका सीधा नाता है — इसी नाटक के राजकुमार सिद्धार्थ आगे चलकर गौतम बुद्ध कहलाए। घायल हंस को बचाने वाली यह घटना बुद्ध के बचपन की सबसे प्रसिद्ध कहानी है।
कैसे कीजिए — चार चरण:
- पुस्तकालय जाकर सहायक से कहिए — “हमें जातक कथाओं की पुस्तक चाहिए।” बाल-साहित्य वाली अलमारी में ये आसानी से मिल जाती हैं।
- अपने समूह में हर बच्चा एक-एक कथा चुने। एक ही कथा दो बच्चे न लें।
- कथा पढ़कर तीन बातें लिखिए — (क) कौन-कौन पात्र थे, (ख) क्या हुआ, (ग) क्या सीख मिली।
- अगले दिन कक्षा में सुनाइए। सुनाते समय एक चित्र भी बनाकर दिखाइए।
नमूना उत्तर — तीन प्रसिद्ध जातक कथाएँ:
| कथा | क्या होता है | क्या सीख मिलती है |
|---|---|---|
| बंदर और मगरमच्छ | नदी किनारे जामुन के पेड़ पर रहने वाला बंदर मगरमच्छ को रोज़ मीठे फल देता है। मगरमच्छ की पत्नी बंदर का कलेजा खाना चाहती है। मगरमच्छ उसे पीठ पर बैठाकर बीच नदी ले जाता है और सच बता देता है। बंदर चतुराई से कहता है कि उसका कलेजा तो पेड़ पर ही रखा है — और लौटकर बच निकलता है। | मुसीबत में घबराना नहीं चाहिए; सूझबूझ से जान बच जाती है। |
| सुनहरा हिरण (निग्रोध मृग) | राजा रोज़ एक हिरण का शिकार करता था। एक दिन बारी एक गर्भवती हिरणी की आती है। सुनहरा हिरण स्वयं उसकी जगह सिर झुकाकर खड़ा हो जाता है। यह देखकर राजा का मन बदल जाता है और वह शिकार करना ही छोड़ देता है। | दूसरे के लिए आगे बढ़कर खड़ा होना सबसे बड़ी वीरता है — ठीक वैसे ही जैसे सिद्धार्थ हंस के लिए खड़े हुए। |
| बटेर और हाथी | एक हाथी बटेर के अंडे कुचल देता है। नन्ही बटेर कौए, मक्खी और मेढक की मदद से उस विशाल हाथी को हरा देती है। | छोटे भी मिलकर बड़ा काम कर सकते हैं — “एक और एक ग्यारह”। |