कक्षा ५ हिंदी अध्याय 9 पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
अपने सहपाठियों के साथ पुस्तकालय में जाइए और गौतम बुद्ध से संबंधित जातक कथाओं को पढ़िए।
उत्तर

यह करने वाला काम है। पहले यह जान लीजिए कि जातक कथाएँ हैं क्या।

जातक कथाएँ वे कहानियाँ हैं जो गौतम बुद्ध के पिछले जन्मों के बारे में बताई जाती हैं। इनमें बुद्ध कभी हिरण होते हैं, कभी बंदर, कभी हाथी और कभी राजा। हर कथा के अंत में एक सीख होती है — दया, सच्चाई, साहस या मित्रता की।

इस पाठ से इनका सीधा नाता है — इसी नाटक के राजकुमार सिद्धार्थ आगे चलकर गौतम बुद्ध कहलाए। घायल हंस को बचाने वाली यह घटना बुद्ध के बचपन की सबसे प्रसिद्ध कहानी है।

कैसे कीजिए — चार चरण:

  1. पुस्तकालय जाकर सहायक से कहिए — “हमें जातक कथाओं की पुस्तक चाहिए।” बाल-साहित्य वाली अलमारी में ये आसानी से मिल जाती हैं।
  2. अपने समूह में हर बच्चा एक-एक कथा चुने। एक ही कथा दो बच्चे न लें।
  3. कथा पढ़कर तीन बातें लिखिए — (क) कौन-कौन पात्र थे, (ख) क्या हुआ, (ग) क्या सीख मिली।
  4. अगले दिन कक्षा में सुनाइए। सुनाते समय एक चित्र भी बनाकर दिखाइए।

नमूना उत्तर — तीन प्रसिद्ध जातक कथाएँ:

कथाक्या होता हैक्या सीख मिलती है
बंदर और मगरमच्छनदी किनारे जामुन के पेड़ पर रहने वाला बंदर मगरमच्छ को रोज़ मीठे फल देता है। मगरमच्छ की पत्नी बंदर का कलेजा खाना चाहती है। मगरमच्छ उसे पीठ पर बैठाकर बीच नदी ले जाता है और सच बता देता है। बंदर चतुराई से कहता है कि उसका कलेजा तो पेड़ पर ही रखा है — और लौटकर बच निकलता है।मुसीबत में घबराना नहीं चाहिए; सूझबूझ से जान बच जाती है।
सुनहरा हिरण (निग्रोध मृग)राजा रोज़ एक हिरण का शिकार करता था। एक दिन बारी एक गर्भवती हिरणी की आती है। सुनहरा हिरण स्वयं उसकी जगह सिर झुकाकर खड़ा हो जाता है। यह देखकर राजा का मन बदल जाता है और वह शिकार करना ही छोड़ देता है।दूसरे के लिए आगे बढ़कर खड़ा होना सबसे बड़ी वीरता है — ठीक वैसे ही जैसे सिद्धार्थ हंस के लिए खड़े हुए।
बटेर और हाथीएक हाथी बटेर के अंडे कुचल देता है। नन्ही बटेर कौए, मक्खी और मेढक की मदद से उस विशाल हाथी को हरा देती है।छोटे भी मिलकर बड़ा काम कर सकते हैं — “एक और एक ग्यारह”।
कहाँ मिलेंगी: विद्यालय के पुस्तकालय के अलावा ये कथाएँ पंचतंत्र-जैसी बाल-पुस्तकों में, NCERT और NBT (राष्ट्रीय पुस्तक न्यास) की सचित्र किताबों में तथा साँची और भरहुत के पत्थरों पर खुदे चित्रों में भी मिलती हैं।
प्र2.
राजा विक्रमादित्य भी अपने न्याय के लिए प्रसिद्ध थे। राजा विक्रमादित्य के न्याय से जुड़ी कथाओं को पुस्तकालय सहायक एवं सहपाठियों की सहायता से ढूँढ़िए और उन्हें पढ़कर आपस में इन कथाओं पर बातचीत कीजिए।
उत्तर

राजा विक्रमादित्य उज्जैन के राजा माने जाते हैं। कहा जाता है कि वे रात में वेश बदलकर नगर में घूमते थे, ताकि लोगों की सच्ची परेशानी जान सकें। उनके न्याय की कहानियाँ आज भी सुनाई जाती हैं।

कहाँ मिलेंगी — दो प्रसिद्ध पुस्तकें:

  • सिंहासन बत्तीसी — विक्रमादित्य के सिंहासन में लगी बत्तीस पुतलियाँ हैं। हर पुतली राजा की एक न्याय-कथा सुनाती है।
  • बेताल पच्चीसी — बेताल राजा विक्रम को पच्चीस कहानियाँ सुनाता है और हर कहानी के अंत में एक कठिन प्रश्न पूछता है, जिसका सही उत्तर राजा देता है।

नमूना उत्तर — एक कथा जो बातचीत में सुनाई जा सकती है:

एक बार दो स्त्रियाँ एक ही बच्चे को अपना बता रही थीं। राजा ने दोनों की बात सुनी। कोई गवाह नहीं था। तब राजा ने कहा कि बच्चे को दो भागों में बाँट दिया जाए। यह सुनते ही एक स्त्री रो पड़ी और बोली — “मुझे बच्चा नहीं चाहिए, बस वह जीवित रहे।” राजा ने बच्चा उसी को दे दिया और कहा — “असली माँ वही है जो बच्चे की जान चाहती है, अपना हक़ नहीं।”

इसका ‘न्याय’ पाठ से क्या मेल है: दोनों जगह न्याय एक ही तरीके से हुआ। मंत्री ने हंस से उसकी पसंद पुछवाई; राजा ने माँ के प्रेम को परखा। दोनों ने कागज़ के सबूत नहीं, मन का सबूत देखा। दोनों जगह जीत उसी की हुई जो दूसरे की भलाई चाहता था।
बातचीत में यह पूछिए: “यदि राजा सचमुच बच्चे को बाँट देते तो?” — इस पर सोचने से समझ आएगा कि न्याय करने वाले को केवल चतुर नहीं, दयालु भी होना पड़ता है।
प्र3.
आपके घर अथवा आस-पास ऐसे कौन-से व्यक्ति हैं जिनके पास लोग अपनी समस्याओं को सुलझाने हेतु सहायता के लिए जाते हैं? उनके बारे में अभिभावकों से पूछिए और कक्षा में साझा कीजिए।
उत्तर

यह पता लगाने वाला काम है। घर पर माता-पिता या दादा-दादी से पूछिए — “हमारे यहाँ झगड़ा या कोई परेशानी हो तो लोग किसके पास जाते हैं?” उनके बताए नाम और काम लिखकर कक्षा में सुनाइए।

पूछने के लिए तीन सवाल: (1) वे कौन हैं और क्या करते हैं? (2) लोग उनके पास किस तरह की परेशानी लेकर जाते हैं? (3) वे बात कैसे सुलझाते हैं?

नमूना उत्तर:

कौनलोग किस काम से जाते हैंवे कैसे सुलझाते हैं
सरपंच / प्रधानखेत की मेड़ का झगड़ा, पानी की बारी, रास्ते का विवाद।ग्राम पंचायत में दोनों पक्षों को बुलाकर, गाँव के सामने बात सुनकर फ़ैसला करते हैं।
ग्राम पंचायत / वार्ड पार्षदनल, सड़क, नाली, बिजली और सफ़ाई की शिकायत।प्रस्ताव पास कराकर सरकारी विभाग तक बात पहुँचाते हैं।
मुहल्ले के बुज़ुर्गघर-परिवार की आपसी अनबन।दोनों घरों को बैठाकर, समझा-बुझाकर सुलह करा देते हैं।
विद्यालय के प्रधानाचार्य और शिक्षकबच्चों की पढ़ाई, आपसी झगड़े, छात्रवृत्ति के काग़ज़।दोनों बच्चों और माता-पिता से बात करके हल निकालते हैं।
थाना (पुलिस)चोरी, मारपीट, कोई चीज़ या व्यक्ति गुम हो जाना।शिकायत लिखकर जाँच करते हैं और आगे कार्रवाई करते हैं।
न्यायालय और वकीलज़मीन-मकान के काग़ज़ और बड़े विवाद।काग़ज़ और गवाह देखकर न्यायाधीश फ़ैसला सुनाते हैं।
पटवारी / लेखपालखेत की नापजोख और ज़मीन का रिकॉर्ड।नक्शा और रजिस्टर देखकर सीमा तय करते हैं।
आशा कार्यकर्ता / आँगनवाड़ी बहनबीमारी, टीका, गर्भवती माँओं और छोटे बच्चों की देखभाल।अस्पताल तक पहुँचाती हैं और सही सलाह देती हैं।
इस पाठ से जोड़िए: नाटक में सखा ने कहा था — “आपका झगड़ा इस प्रकार नहीं सुलझ सकता। मेरा सुझाव है कि हमें महाराज के पास चलना चाहिए।” यानी झगड़ा आपस में लड़कर नहीं, किसी निष्पक्ष व्यक्ति के पास जाकर सुलझता है। निष्पक्ष यानी जो किसी एक की तरफ़ न हो। आज महाराज की जगह पंचायत, थाना और न्यायालय हैं।
क्या यह उपयोगी रहा?