पृष्ठ 115 पर चार चित्र छपे हैं। हर चित्र में कोई-न-कोई किसी की मदद कर रहा है। पहले चारों को पहचान लीजिए —
| चित्र | चित्र में क्या हो रहा है | कौन-सा गुण दिखता है |
|---|---|---|
| ऊपर बाएँ | पेड़ के नीचे दीवार पर एक चौड़ा बरतन रखा है, जिसमें पानी भरा है। उस पर तीन चिड़ियाँ बैठी पानी पी रही हैं। एक उड़कर आ रही है। | करुणा — बेज़ुबान पक्षियों की प्यास का ध्यान रखना। |
| ऊपर दाएँ | व्यस्त सड़क पर ज़ेब्रा क्रॉसिंग है। एक लड़का और एक लड़की हाथ थामकर एक बुज़ुर्ग को, जिनके हाथ में छड़ी है, सड़क पार करा रहे हैं। पीछे बस खड़ी है और सिग्नल लाल है। | सहायता — बड़ों का सहारा बनना। |
| नीचे बाएँ | ‘पेयजल’ लिखी एक सार्वजनिक पानी की टंकी है। एक लड़का और एक लड़की उसकी टोंटी से पानी पी रहे हैं। पीछे घर और हरियाली है। | समझदारी — साफ़ पानी का मिल-बाँटकर उपयोग करना, पानी बहाना नहीं। |
| नीचे दाएँ | एक लड़की खेत के पास खड़ी है और दो गायों को अपने हाथ से रोटी खिला रही है। | करुणा — पशुओं को भोजन देना। |
समूह में संवाद के लिए तीन प्रश्न: (1) इस चित्र में कौन किसकी मदद कर रहा है? (2) यदि यह मदद न होती तो क्या होता? (3) ऐसा काम आप कब-कब कर सकते हैं?
नमूना उत्तर — पहले चित्र (पक्षियों का पानी) पर कुछ पंक्तियाँ:
छत की मुँडेर पर किसी ने एक चौड़ा बरतन रखकर उसमें पानी भर दिया था।
पहले एक गौरैया आई। उसने चारों ओर देखा, फिर चोंच डुबोई और सिर ऊपर उठा लिया।
फिर दूसरी आई, फिर तीसरी। एक अभी हवा में ही थी।
वे पानी पीती रहीं और उनके गले की हलचल दूर से दिखाई देती रही।
बरतन रखने वाले ने कुछ बड़ा नहीं किया था — बस एक बरतन और थोड़ा-सा पानी।
पर उस दोपहर में वह थोड़ा-सा पानी चार जानों के बराबर था।
अब मैंने भी अपनी छत पर एक सकोरा रख दिया है।