कक्षा ५ हिंदी अध्याय 11 भाषा की बात के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
पाठ में से कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन्हें उनके मिलते-जुलते अर्थों के साथ रेखाएँ खींचकर मिलाइए — शब्द: शिलाखंड, गुफा, कुंड, भिक्षु। अर्थ: कंदरा, गुहा / संन्यासी, याचक / चट्टान, पत्थर / तालाब, जलाशय। (पुस्तक में ‘शिलाखंड’ से ‘चट्टान, पत्थर’ तक की रेखा उदाहरण के रूप में पहले से खिंची है।)
उत्तर

पूरा मिलान नीचे दिया है। पुस्तक में पहली रेखा — शिलाखंड → चट्टान, पत्थर — उदाहरण के रूप में पहले से खिंची है। बाकी तीन रेखाएँ आपको खींचनी हैं।

शब्दअर्थक्यों — पाठ की पंक्ति
शिलाखंड (उदाहरण)चट्टान, पत्थर“नदी में बड़े-बड़े शिलाखंड पड़े थे।” शिला यानी बड़ी चट्टान और खंड यानी टुकड़ा — मिलकर बना ‘चट्टान का टुकड़ा’।
गुफाकंदरा, गुहा“एक पहाड़ी पर एक पंक्ति में उनतीस गुफाएँ थीं।” गुफा यानी पहाड़ के भीतर बना खोखला स्थान। ‘कंदरा’ और ‘गुहा’ भी इसी के दूसरे नाम हैं।
कुंडतालाब, जलाशय“गुफा के ठीक नीचे एक कुंड बना था जिसमें पानी भरा हुआ था।” कुंड यानी पानी भरा गड्ढा। ‘जलाशय’ = जल + आशय, यानी जल रहने की जगह।
भिक्षुसंन्यासी, याचकभिक्षुओं को उपदेश देना, साधु के रूप में भिक्षा माँगने जाना।” भिक्षु यानी वह साधु जो माँगकर भोजन पाता है। ‘याचक’ का अर्थ भी माँगने वाला है।
पर्यायवाची शब्द: ये सब पर्यायवाची हैं — यानी एक ही अर्थ वाले अलग-अलग शब्द। ‘गुफा’ के लिए कंदरा और गुहा, ‘कुंड’ के लिए तालाब और जलाशय। भाषा में पर्यायवाची जानने से लिखते समय एक ही शब्द बार-बार नहीं दोहराना पड़ता।
प्र2.
“निशा और मौसी ने स्टेशन पर ही विश्रामगृह में रात बिताई।” यहाँ ‘विश्रामगृह’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है — ‘विश्राम’ और ‘गृह’। विश्राम का अर्थ है — आराम। गृह का अर्थ है — घर। अतः विश्रामगृह का अर्थ हुआ — आराम करने का घर या स्थान। पाठ में से ऐसे ही दो शब्दों के मेल से बने अन्य शब्दों को खोजकर उनके अर्थ लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर

पाठ और उसके अभ्यासों में ऐसे कई शब्द हैं जो दो शब्दों को जोड़कर बने हैं। नीचे पूरी सूची अर्थ के साथ दी गई है।

शब्ददो शब्दअर्थकहाँ मिला
विश्रामगृह (उदाहरण)विश्राम + गृहआराम करने का घर या स्थानपृष्ठ 129
कलामंदिरकला + मंदिरकला का मंदिर, यानी वह स्थान जहाँ कला मंदिर की तरह सँभालकर रखी होपाठ का शीर्षक, पृष्ठ 129
रेलगाड़ीरेल + गाड़ीपटरी पर चलने वाली गाड़ीपृष्ठ 129
शिलाखंडशिला + खंडचट्टान का बड़ा टुकड़ापृष्ठ 129
प्रातःकालप्रातः + कालसवेरे का समयपृष्ठ 129
आश्चर्यचकितआश्चर्य + चकितअचरज से हैरान रह जानापृष्ठ 130
कलाकृतिकला + कृतिकला से बनाई गई रचना या चीज़पृष्ठ 132
पाठ्यपुस्तकपाठ्य + पुस्तकपढ़ने-पढ़ाने की पुस्तकपृष्ठ 133
मानचित्रमान + चित्रनाप के अनुसार बनाया गया चित्र, यानी नक्शापृष्ठ 137
जलप्रपातजल + प्रपातऊपर से गिरता हुआ पानी, यानी झरनापृष्ठ 137 का मानचित्र
श्यामपट्टश्याम + पट्टकाले रंग का पट्ट या तख्ता, जिस पर कक्षा में लिखा जाता हैपृष्ठ 138
धन्यवादधन्य + वाद‘आप धन्य हैं’ ऐसा कहना, यानी आभार प्रकट करनापृष्ठ 140
पहचानने का तरीका: शब्द को बीच से तोड़कर देखिए। यदि टूटे हुए दोनों टुकड़ों का अपना-अपना अर्थ निकलता है, तो शब्द दो शब्दों के मेल से बना है। जैसे ‘रेलगाड़ी’ को तोड़िए — ‘रेल’ का अर्थ है और ‘गाड़ी’ का भी। पर ‘गुफा’ को तोड़ने से ‘गु’ और ‘फा’ का कोई अर्थ नहीं निकलता — इसलिए वह जुड़ा हुआ शब्द नहीं है।
एक और तरह के जोड़े: पाठ में पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, सुख-दुख, जड़ी-बूटी, रंग-बिरंगे, लंबी-चौड़ी जैसे शब्द भी हैं। इनमें दो शब्द बीच में छोटी रेखा (हाइफ़न) लगाकर जोड़े जाते हैं और दोनों का अपना अर्थ बना रहता है। इन्हें भी अपनी लेखन-पुस्तिका में अलग सूची बनाकर लिखिए।
प्र3.
निशा ने आश्चर्यचकित होकर कहा — “दो हजार वर्ष! पर आज भी इनके रंग ज्यों के त्यों कैसे हैं?” ‘ज्यों का त्यों’ का अर्थ है — कोई परिवर्तन न होना। इसी प्रकार के कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इनका प्रयोग करते हुए अपनी लेखन-पुस्तिका में वाक्य लिखिए — ज्यों का त्यों, जैसे का तैसा, बिलकुल वैसा ही, वैसा का वैसा, जैसे थे वैसे ही, वास्तविक रूप में।
उत्तर

ये सभी वाक्यांश एक ही बात कहते हैं — कोई बदलाव नहीं हुआ। नीचे छहों के अर्थ और वाक्य दिए गए हैं।

वाक्यांशअर्थवाक्य
ज्यों का त्योंजैसा था बिलकुल वैसा ही, कोई परिवर्तन नहींदो हजार वर्ष बाद भी अजंता के चित्रों का रंग ज्यों का त्यों बना हुआ है।
जैसे का तैसाठीक उसी हालत मेंमैं छुट्टी से लौटा तो मेरा कमरा जैसे का तैसा पड़ा था।
बिलकुल वैसा हीरत्ती भर भी अंतर नहींमेरे भाई ने बिलकुल वैसा ही चित्र बनाया जैसा पुस्तक में छपा था।
वैसा का वैसाजिस रूप में था, उसी रूप मेंबरसात बीत गई पर पुल वैसा का वैसा मज़बूत खड़ा है।
जैसे थे वैसे हीपहले जैसी ही स्थिति में (बहुवचन के लिए)मेले से लौटकर देखा तो सारे खिलौने जैसे थे वैसे ही रखे मिले।
वास्तविक रूप मेंअसली रूप में, सच्चे रूप मेंकैलाश मंदिर को चित्र में नहीं, वास्तविक रूप में देखने पर उसकी विशालता समझ आती है।
ध्यान दीजिए: ‘ज्यों का त्यों’, ‘जैसे का तैसा’ और ‘वैसा का वैसा’ — तीनों में ढाँचा एक जैसा है : एक शब्द + का + उससे मिलता-जुलता शब्द। हिंदी में ऐसे जोड़े बहुत हैं, जैसे ‘जहाँ का तहाँ’, ‘जब का तब’। इनका प्रयोग करने से भाषा में रस आ जाता है।
अपने लिए और वाक्य: इन्हीं वाक्यांशों से घर की चीज़ों के बारे में वाक्य बनाइए — जैसे “दादी की सिलाई मशीन तीस साल से ज्यों की त्यों चल रही है।” अपने आस-पास से उदाहरण लेने पर वाक्य अपने-आप सही बनते हैं।
प्र4.
“ऐसे सजीव चित्र थे कि लगता था अभी बोल पड़ेंगे।” “इन मूर्तियों की कारीगरी देखते ही बनती थी।” रेखांकित अंशों को ध्यान में रखते हुए अब नीचे दिए गए वाक्यांशों से वाक्य बनाइए — दंग रह जाना, ऐसा जैसे सपना हो, प्रशंसा के योग्य होना, आँखें न हटा पाना, दिल को छू जाना, कल्पना से परे होना, मन मोह लेना, दृश्य भूल न पाना, दृष्टि थम जाना।
उत्तर

ये नौ वाक्यांश किसी चीज़ की सुंदरता या अचरज को बताने के लिए काम आते हैं — ठीक वैसे ही जैसे पाठ में “लगता था अभी बोल पड़ेंगे” और “देखते ही बनती थी”। नीचे नौ के नौ वाक्यांशों के अर्थ और वाक्य दिए गए हैं।

वाक्यांशअर्थवाक्य
दंग रह जानाहैरान रह जानाकैलाश मंदिर एक ही चट्टान से बना है, यह सुनकर निशा दंग रह गई।
ऐसा जैसे सपना होइतना सुंदर कि सच लगे ही नहींपहाड़ काटकर बनी उन गुफाओं को देखकर लगा, ऐसा जैसे सपना हो।
प्रशंसा के योग्य होनातारीफ़ किए जाने लायक होनादो हजार वर्ष पुराने इन चित्रों को बनाने वाले कारीगरों का काम प्रशंसा के योग्य है।
आँखें न हटा पानानज़र हटाने का मन ही न करनाअजंता के चित्रों से निशा आँखें न हटा पाई।
दिल को छू जानामन के भीतर तक अच्छा लगनामूर्तियों के चेहरों पर बने सुख-दुख के भाव दिल को छू गए।
कल्पना से परे होनाइतना बड़ा या अनोखा कि सोचा भी न जा सकेपूरा मंदिर एक ही पहाड़ को ऊपर से तराशकर बना है — यह बात कल्पना से परे है।
मन मोह लेनामन को अपनी ओर खींच लेनाघाटी में खिले रंग-बिरंगे फूलों ने निशा का मन मोह लिया।
दृश्य भूल न पानादेखा हुआ दृश्य याद से न जानाघर लौटकर भी निशा एलोरा का वह दृश्य भूल न पाई।
दृष्टि थम जानानज़र एक ही जगह टिक जानागुफा की दीवार पर बने बुद्ध के चित्र पर मेरी दृष्टि थम गई।
ऐसे वाक्यांश क्यों काम आते हैं: यदि हम बार-बार “बहुत सुंदर था” लिखें तो लेख फीका लगता है। ये वाक्यांश उसी बात को नए-नए ढंग से कहते हैं — कोई कहता है ‘आँखें न हटा पाना’, कोई ‘मन मोह लेना’। पाठ ने भी यही किया — “लगता था अभी बोल पड़ेंगे।”
सुझाव: इन नौ वाक्यों में से कोई तीन चुनकर उनसे अपनी किसी यात्रा का छोटा-सा वर्णन लिखिए। वाक्यांश जब अपने अनुभव पर लगते हैं, तभी वे सचमुच याद रहते हैं।
प्र5.
नीचे एक वर्ग पहेली दी गई है। इस वर्ग पहेली में कुछ विशेषण शब्द छिपे हुए हैं। शब्दों को खोजिए और उन शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए —
उत्तर

यह छह पंक्तियों और छह स्तंभों की वर्ग पहेली है। इसमें कुल ग्यारह विशेषण छिपे हैं — कुछ आड़े (बाएँ से दाएँ) और कुछ खड़े (ऊपर से नीचे)। पुस्तक में पहला शब्द बेजोड़ उदाहरण के रूप में लाल घेरे से घेरा हुआ है।

पूरी भरी हुई वर्ग पहेली नीचे है। रंगीन खाने वे हैं जो किसी छिपे शब्द का हिस्सा हैं —

स्तंभ 1स्तंभ 2स्तंभ 3स्तंभ 4स्तंभ 5स्तंभ 6
पंक्ति 1द्भुछो
पंक्ति 2बेसुंनोटी
पंक्ति 3जोठिप्र
पंक्ति 4ड़जीसि
पंक्ति 5विशाद्ध
पंक्ति 6ड़ीरंबिरंगा

अब देखिए कौन-सा शब्द कहाँ छिपा है और उसका वाक्य क्या बनेगा —

छिपा शब्दकहाँ हैअर्थवाक्य में प्रयोग
अद्भुतपंक्ति 1, स्तंभ 1 से 4 (आड़ा)जो देखकर अचरज होएक ही चट्टान से बना कैलाश मंदिर सचमुच अद्भुत है।
बेजोड़ (उदाहरण)स्तंभ 1, पंक्ति 2 से 4 (खड़ा)जिसकी जोड़ी या बराबरी न होअजंता की कलाकृतियाँ बेजोड़ हैं।
सुंदरपंक्ति 2, स्तंभ 2 से 4 (आड़ा)देखने में अच्छा लगने वालागुफाओं की दीवारों पर बहुत सुंदर चित्र बने हैं।
कठिनपंक्ति 3, स्तंभ 2 से 4 (आड़ा)मुश्किल, जो आसानी से न होपहाड़ काटकर मंदिर बनाना बहुत कठिन काम रहा होगा।
सजीवपंक्ति 4, स्तंभ 2 से 4 (आड़ा)जीता-जागता सा, जिसमें जान लगेचित्र इतने सजीव थे कि लगता था अभी बोल पड़ेंगे।
विशालपंक्ति 5, स्तंभ 2 से 4 (आड़ा)बहुत बड़ाकारीगरों ने विशाल शिलाओं को तराशकर मूर्तियाँ बनाईं।
रंगबिरंगापंक्ति 6, स्तंभ 2 से 6 (आड़ा)कई रंगों वालाघाटी में रंगबिरंगे फूल खिले हुए थे।
मनोरमस्तंभ 5, पंक्ति 1 से 4 (खड़ा)मन को भाने वाला, सुंदरअजंता पहुँचकर निशा ने जो दृश्य देखा, वह बड़ा मनोरम था।
छोटीस्तंभ 6, पंक्ति 1 से 2 (खड़ा)आकार में कमगुफाओं के पास एक छोटी-सी नदी बह रही थी।
प्रसिद्धस्तंभ 6, पंक्ति 3 से 5 (खड़ा)जिसे बहुत लोग जानते हों, मशहूरएलोरा का कैलाश मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध है।
बड़ीस्तंभ 1, पंक्ति 5 से 6 (खड़ा)आकार में अधिकनदी में बड़ी-बड़ी चट्टानें पड़ी थीं।
ये सब विशेषण क्यों हैं: विशेषण वह शब्द है जो किसी संज्ञा की विशेषता बताए। ‘सुंदर चित्र’ में ‘सुंदर’ बता रहा है कि चित्र कैसा है। ऊपर के ग्यारहों शब्द यही काम करते हैं — अद्भुत मंदिर, विशाल शिला, सजीव चित्र, प्रसिद्ध मंदिर, रंगबिरंगे फूल।
दो बातें और: (1) पंक्ति 5 का ‘’ खाना किसी शब्द का हिस्सा नहीं है — वह केवल भरने के लिए रखा गया है। पहेलियों में ऐसे खाने जान-बूझकर रखे जाते हैं ताकि शब्द तुरंत न दिख जाएँ। (2) इनमें से कठिन को छोड़कर बाकी सभी शब्द किसी-न-किसी रूप में इसी पाठ में आए हैं। खोजते समय पहले पाठ के विशेषण याद कर लीजिए — पहेली फिर आसान हो जाती है।
क्या यह उपयोगी रहा?