प्र1.
यदि अजंता की दीवारों के चित्र बोल सकते तो वे हमें क्या कहानियाँ सुनाते?
उत्तर
यह कल्पना का प्रश्न है, इसलिए एक ही सही उत्तर नहीं है। पर अच्छा उत्तर वही होगा जो पाठ में दिखाए गए चित्रों से जुड़ा हो। पाठ बताता है कि दीवारों पर किन-किन चीज़ों के चित्र हैं — वही चित्र बोलते तो अपनी-अपनी कहानी सुनाते।
| दीवार का चित्र (पाठ से) | वह क्या कहानी सुनाता |
|---|---|
| गौतम बुद्ध का घर छोड़कर तप के लिए जाना | एक राजकुमार की कहानी, जिसने महल का सुख छोड़कर सच्चाई खोजने के लिए जंगल की राह पकड़ी। |
| भिक्षुओं को उपदेश देना | उस दिन की कहानी जब बहुत-से लोग चुपचाप बैठकर एक अच्छी बात सुन रहे थे — दया, सच और शांति की बात। |
| साधु के रूप में भिक्षा माँगने जाना | गाँव-गाँव घूमने की कहानी — किस घर ने भोजन दिया, किसने दरवाज़ा नहीं खोला, और भूख में भी मन शांत कैसे रहा। |
| पेड़-पौधों के चित्र | उस समय के जंगल की कहानी — कौन-से पेड़ थे, किन पत्तों और फूलों से रंग बनाए जाते थे। |
| पशु-पक्षियों के चित्र | हाथी, हिरन और चिड़ियों की कहानी, जो गुफा के पास की घाटी में घूमते थे। |
| स्त्रियों के चित्र | उस ज़माने के रहन-सहन की कहानी — कैसे कपड़े पहने जाते थे, कैसे गहने बनते थे, त्योहार कैसे मनाए जाते थे। |
| मुखों पर सुख-दुख के भाव और झुर्रियाँ | उन लोगों की कहानी जो सचमुच जिए — किसी की खुशी, किसी का दुख, और बुढ़ापे तक का सफ़र। |
नमूना उत्तर: यदि अजंता की दीवारों के चित्र बोल सकते तो सबसे पहले वे अपने बनाने वालों की कहानी सुनाते। वे बताते कि दो हजार वर्ष पहले कुछ कारीगर पहाड़ काटकर यहाँ आए थे। उनके पास बिजली नहीं थी, इसलिए वे सवेरे की धूप में काम करते थे। वे पत्तों, जड़ी-बूटियों और फूलों को पीसकर रंग बनाते थे। फिर बुद्ध वाला चित्र बोलता — “मैंने देखा है कि एक राजकुमार सब कुछ छोड़कर तप के लिए निकल पड़ा था।” पेड़-पौधों के चित्र बताते कि उस समय यहाँ कैसा घना जंगल था। पशु-पक्षियों के चित्र अपनी घाटी की बातें सुनाते। और अंत में सब मिलकर कहते — “हमें छूना मत, हमारे रंग दो हजार साल से टिके हैं, इन्हें ऐसे ही रहने दो।”
अच्छे उत्तर में क्या होना चाहिए: (1) कम-से-कम दो-तीन ऐसे चित्रों का नाम जो पाठ में सचमुच बताए गए हैं। (2) चित्र की अपनी आवाज़ में एक-दो वाक्य, यानी संवाद। (3) अंत में एक भाव — जैसे उन्हें सँभालकर रखने की बात।