कक्षा ५ हिंदी अध्याय 11 सोचिए और लिखिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
अजंता में निशा ने क्या-क्या देखा?
उत्तर

अजंता में निशा ने पहाड़ी पर एक पंक्ति में बनी उनतीस गुफाएँ, उनकी दीवारों पर बने दो हजार वर्ष पुराने चित्र और पत्थर तराशकर बनाई गई मूर्तियाँ देखीं। साथ ही उसने वहाँ का बाहरी दृश्य भी देखा।

पाठ के अनुसार उसने जो कुछ देखा, वह क्रम से यह है —

कहाँनिशा ने क्या देखा
गुफाओं के बाहरएक ओर बहती छोटी-सी नदी, नदी में पड़े बड़े-बड़े शिलाखंड, घाटी में खिले रंग-बिरंगे फूल
पहाड़ी परनदी के दक्षिण में एक पंक्ति में बनी उनतीस गुफाएँ, जिनका मुँह पूर्व दिशा की ओर था और जिन पर सवेरे की धूप पड़ रही थी
गुफा के ठीक नीचेपानी से भरा एक कुंड
गुफाओं की दीवारों परगौतम बुद्ध का घर छोड़कर तप के लिए जाना, भिक्षुओं को उपदेश देना, साधु के रूप में भिक्षा माँगने जाना — इनके अत्यंत सजीव चित्र
इसके अतिरिक्त चित्रों मेंपेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और स्त्रियों के चित्र
चित्रों की बारीकी मेंहाथों की मुद्रा, आँखों के भाव, अंगों की लोच, मुखों पर सुख-दुख के भाव तथा झुर्रियाँ
गुफाओं के भीतरपत्थरों को तराशकर बनाई गई मूर्तियाँ; कुछ गुफाएँ अत्यंत लंबी-चौड़ी और कुछ छोटी
सबसे बड़ी बात: निशा को सबसे अधिक आश्चर्य यह देखकर हुआ कि ये गुफाएँ बनाई नहीं गईं — पहाड़ों को ही काटकर निकाली गई थीं। यानी पहले पहाड़ था, फिर उसे भीतर से काटकर कमरा बना दिया गया।
लिखते समय: उत्तर को दो हिस्सों में बाँटिए — पहले बाहर का दृश्य (नदी, शिलाखंड, फूल, कुंड), फिर भीतर का दृश्य (चित्र और मूर्तियाँ)। ऐसा करने से उत्तर व्यवस्थित और पूरा दिखता है।
प्र2.
कैलाश मंदिर के बारे में आपको कौन-सी बात सबसे अधिक आश्चर्यजनक लगी?
उत्तर

सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि पूरा कैलाश मंदिर एक ही चट्टान से बना है — उसे जोड़कर नहीं बनाया गया, बल्कि एक ऊँचे पहाड़ को ऊपर की ओर से तराशकर काटा गया है।

मौसी जी ने यही बताया —

“निशा, यह अत्यंत प्रसिद्ध मंदिर है। पूरा मंदिर एक ऊँचे पहाड़ को ऊपर की ओर से
तराशकर बनाया गया है। देखो, एक ही चट्टान से बनी इतनी बड़ी और सुंदर
इमारत कितनी अद्भुत है!”

यह बात इतनी अनोखी क्यों है, इसे ऐसे समझिए —

  1. साधारण मंदिर नीचे से ऊपर बनाया जाता है — पहले नींव, फिर दीवार, फिर छत। पत्थर जोड़-जोड़कर रखे जाते हैं।
  2. कैलाश मंदिर ऊपर से नीचे बना — पहले पहाड़ की चोटी काटी गई, फिर नीचे उतरते हुए मंदिर निकाला गया।
  3. इसमें कोई पत्थर जोड़ा नहीं गया। जो नहीं चाहिए था, वह हटाया गया — जैसे मिट्टी के ढेले से खिलौना बनाते समय हम बाहर की मिट्टी हटाते हैं।
  4. इसमें एक भूल भी सुधारी नहीं जा सकती। एक बार पत्थर कट गया तो वापस नहीं जुड़ता। इसीलिए कारीगरों की कुशलता आश्चर्य में डाल देती है।
नमूना उत्तर: मुझे कैलाश मंदिर की यह बात सबसे अधिक आश्चर्यजनक लगी कि यह पूरा मंदिर एक ही चट्टान से बना है। इसे बनाने के लिए कारीगरों ने ऊँचे पहाड़ को ऊपर की ओर से तराशना शुरू किया और नीचे तक काटते चले गए। इतनी बड़ी और सुंदर इमारत बिना एक भी पत्थर जोड़े तैयार हो गई। मुझे लगता है इसमें बहुत वर्षों की मेहनत लगी होगी, क्योंकि एक बार गलती हो जाने पर उसे सुधारा नहीं जा सकता था।
ध्यान रखिए: पाठ में कैलाश मंदिर एलोरा में है, अजंता में नहीं। एलोरा में पहाड़ काटकर लगभग तीस मंदिर बनाए गए हैं और उनमें कैलाश मंदिर सबसे प्रसिद्ध है।
प्र3.
मौसी जी ने छोटी और बड़ी गुफा के बारे में क्या बताया?
उत्तर

पाठ के अनुसार अजंता की गुफाएँ एक-सी नहीं थीं — कुछ गुफाएँ अत्यंत लंबी-चौड़ी थीं और कुछ छोटी थीं। इससे भी बड़ी बात यह बताई गई कि छोटी हो या बड़ी, हर गुफा पहाड़ को ही काटकर बनाई गई थी और भीतर की मूर्तियाँ पत्थर तराशकर बनी थीं।

पाठ की पंक्तियाँ ये हैं —

कुछ गुफाएँ अत्यंत लंबी-चौड़ी थीं, कुछ छोटी।
निशा को सबसे अधिक आश्चर्य यह देखकर हुआ कि ये गुफाएँ पहाड़ों को ही काटकर
बनाई गई थीं। इन गुफाओं में बनी मूर्तियाँ भी पत्थरों को तराशकर बनाई गई थीं।”
बातपाठ में क्या कहा गया है
गुफाओं का आकारकुछ अत्यंत लंबी-चौड़ी, कुछ छोटी — यानी सब एक नाप की नहीं थीं
गुफाओं की संख्यापहाड़ी पर एक पंक्ति में उनतीस गुफाएँ
गुफाएँ कैसे बनींपहाड़ों को ही काटकर बनाई गईं
भीतर की मूर्तियाँपत्थरों को तराशकर बनाई गईं
भीतर के चित्रदीवारों पर बने अत्यंत सुंदर और सजीव चित्र, जिनके रंग दो हजार वर्ष बाद भी फीके नहीं पड़े
एक बात साफ़ कर लीजिए: पुस्तक में छोटी-बड़ी गुफाओं वाली यह पंक्ति मौसी जी के संवाद के रूप में नहीं, कहानी सुनाने वाले के शब्दों में छपी है — “कुछ गुफाएँ अत्यंत लंबी-चौड़ी थीं, कुछ छोटी।” इसलिए उत्तर लिखते समय इसी पंक्ति को आधार बनाइए। मौसी जी ने गुफाओं के बारे में जो सीधे कहा, वह है — “निशा, ये गुफाएँ दो हजार वर्ष पुरानी हैं।”
प्र4.
क्या कारण है कि अजंता की गुफाओं का मुँह पूर्व दिशा में बनाया गया है?
उत्तर

गुफाओं का मुँह पूर्व दिशा में इसलिए बनाया गया ताकि सवेरे उगते सूरज की किरणें सीधे गुफाओं पर और उनके भीतर पड़ें। सूरज पूर्व से निकलता है, इसलिए पूर्व की ओर मुँह होने पर सुबह की धूप भीतर तक पहुँचती है।

पाठ यह बात इन शब्दों में कहता है —

“इन गुफाओं का मुँह पूर्व दिशा की ओर होने के कारण
प्रातःकाल के सूर्य की किरणें इन पर पड़ रही थीं।”

इससे क्या लाभ हुआ होगा, यह चरणों में समझिए —

  1. चरण 1 — गुफा पहाड़ के भीतर होती है, इसलिए वह अपने-आप अँधेरी होती है।
  2. चरण 2 — उस समय बिजली नहीं थी। रोशनी का एक ही पक्का साधन था — सूरज की धूप
  3. चरण 3 — मुँह पूर्व की ओर रखने से सवेरे की सीधी धूप गुफा के भीतर घुसती है।
  4. चरण 4 — इस उजाले में कारीगर दीवारों पर चित्र बना सकते थे और भिक्षु भीतर बैठकर पढ़-लिख सकते थे।
  5. चरण 5 — आज भी सवेरे-सवेरे जाने वाले यात्रियों को गुफाओं के चित्र इसी प्राकृतिक उजाले में साफ़ दिखते हैं।
सोचने की बात: पाठ केवल इतना बताता है कि मुँह पूर्व की ओर है, इसलिए सुबह की किरणें उन पर पड़ती हैं। भीतर उजाला मिलने वाली बात हम उसी पंक्ति से समझ सकते हैं — यह हमारा तर्क है, पुस्तक का छपा हुआ वाक्य नहीं। उत्तर लिखते समय पहले पाठ की पंक्ति लिखिए, फिर अपना कारण।
दिशा याद रखिए: सूरज पूर्व में उगता है और पश्चिम में डूबता है। इसीलिए सुबह की धूप चाहिए हो तो द्वार पूर्व की ओर रखा जाता है। पृष्ठ 137 के मानचित्र में भी दिशा बताने के लिए ‘उत्तर’ का चिह्न बना है।
प्र5.
अजंता और एलोरा तक पहुँचने के लिए यातायात के कौन-कौन से साधनों का प्रयोग कर सकते हैं?
उत्तर

पाठ के अनुसार निशा और उसकी मौसी ने दो साधन काम में लिए — पहले रेलगाड़ी और फिर बस। इनके अलावा आज कई और साधनों से भी वहाँ पहुँचा जा सकता है।

पहले पाठ में जो छपा है, वह देखिए —

चरणसाधनपाठ की पंक्ति
घर से छत्रपति संभाजीनगर तकरेलगाड़ी“रेलगाड़ी में आरक्षण छत्रपति संभाजीनगर तक था।”
संभाजीनगर से अजंता (लगभग 100 कि.मी.)बस“दूसरे दिन बड़े सवेरे ही उठकर वे बस से अजंता की ओर चल दीं।”
संभाजीनगर से एलोरा (लगभग 40 कि.मी.)बस“वे दूसरे दिन बस में बैठकर एलोरा की गुफाएँ देखने गईं।”
गुफाओं के प्रवेश-द्वार से गुफाओं तकशटल सेवापृष्ठ 137 के मानचित्र में ‘शटल सेवा’ और उसके पास ‘आप यहाँ हैं’ लिखा है।

इनके अलावा और कौन-से साधन काम आ सकते हैं —

  • हवाई जहाज़ — दूर के शहर से पहले छत्रपति संभाजीनगर तक हवाई जहाज़ से आया जा सकता है, फिर आगे सड़क से।
  • कार या टैक्सी — अपने वाहन या किराए की गाड़ी से भी जाया जा सकता है।
  • ऑटो या जीप — पास के कस्बे से गुफाओं तक।
  • पैदल — गुफाएँ एक पंक्ति में बनी हैं, इसलिए एक गुफा से दूसरी गुफा तक पैदल ही जाना होता है, और कहीं-कहीं सीढ़ियाँ भी चढ़नी पड़ती हैं।
नमूना उत्तर: अजंता और एलोरा तक पहुँचने के लिए हम रेलगाड़ी, बस, कार, टैक्सी और हवाई जहाज़ का प्रयोग कर सकते हैं। पाठ में निशा और उसकी मौसी छत्रपति संभाजीनगर तक रेलगाड़ी से गईं और वहाँ से अजंता तथा एलोरा बस से गईं। दूर रहने वाले यात्री पहले हवाई जहाज़ से संभाजीनगर आ सकते हैं और फिर बस या टैक्सी ले सकते हैं। प्रवेश-द्वार से गुफाओं तक जाने के लिए शटल सेवा भी चलती है और आगे थोड़ी दूर पैदल चलना पड़ता है।
ध्यान दीजिए: रेलगाड़ी और बस पाठ में छपे हुए साधन हैं, और शटल सेवा पृष्ठ 137 के मानचित्र में। हवाई जहाज़, कार और ऑटो हमारी अपनी जानकारी से जोड़े गए हैं — उत्तर लिखते समय इन दोनों को अलग-अलग रखिए।
क्या यह उपयोगी रहा?