प्र1.
“हमारे देश में बहुत सुंदर ऐतिहासिक स्मारक एवं कलाकृतियाँ हैं। ये हमारे देश की शोभा एवं गौरव बढ़ाते हैं। यह हमारा उत्तरदायित्व है कि हम भी इनकी सुंदरता को बनाए रखें। इन स्मारकों को छूने, इनकी दीवारों को खुरचने अथवा कुछ भी अंकन करने से इन्हें हानि पहुँचती है। इसलिए इन पर्यटन स्थलों का भ्रमण करते समय हमें सावधानी रखनी चाहिए।” — इस अंश में क्या कहा गया है? हम अपनी धरोहर की रक्षा कैसे कर सकते हैं?
उत्तर
इस अंश में कहा गया है कि हमारे देश के ऐतिहासिक स्मारक और कलाकृतियाँ हमारा गौरव हैं, और उन्हें बचाए रखना हर नागरिक का उत्तरदायित्व है। उत्तरदायित्व यानी ऐसा काम जिसे करना हमारा फ़र्ज़ हो।
अंश में तीन बातें साफ़ कही गई हैं —
- ये स्मारक देश की शोभा और गौरव बढ़ाते हैं।
- इन्हें छूने से, दीवारों को खुरचने से और उन पर कुछ भी लिखने से इन्हें हानि पहुँचती है।
- इसलिए घूमते समय हमें सावधानी रखनी चाहिए।
| यह मत कीजिए | क्यों नहीं | इसके बदले यह कीजिए |
|---|---|---|
| दीवार के चित्रों को हाथ लगाना | हाथ की चिकनाई और पसीना रंग को धीरे-धीरे खराब कर देता है | थोड़ा दूर खड़े होकर देखिए |
| दीवार पर नाम लिखना या खुरचना | एक बार खुरची हुई दीवार फिर कभी पहले जैसी नहीं होती | अपनी लेखन-पुस्तिका में उस जगह का नाम और तारीख़ लिखिए |
| मूर्तियों पर चढ़ना या उन्हें पकड़ना | पुराना पत्थर भार से टूट सकता है | चारों ओर घूमकर ध्यान से देखिए |
| वहाँ कूड़ा फेंकना | कूड़े से स्थान गंदा होता है और जानवर भी आ जाते हैं | कूड़ा अपने थैले में रखिए और कूड़ेदान में डालिए |
| शोर मचाना या दौड़ना | दूसरे यात्रियों को परेशानी होती है और टकराने से नुकसान हो सकता है | धीरे बोलिए और चलकर चलिए |
| वहाँ लगे सूचना-पट्ट न पढ़ना | मना की गई बात अनजाने में हो जाती है | पहले पट्ट पढ़िए, फिर आगे बढ़िए |
‘धरोहर’ का अर्थ: धरोहर वह चीज़ है जो किसी ने हमें सँभालने के लिए दी हो। अजंता और एलोरा हमें अपने पुरखों से मिले हैं। हमें उन्हें वैसा ही आगे की पीढ़ी को देना है, जैसा हमें मिला — तभी हमारा काम पूरा माना जाएगा।
सोचिए: दो हजार वर्ष तक जो रंग धूप, वर्षा और समय से नहीं बिगड़े, वे कुछ लोगों के हाथ लगाने से बिगड़ सकते हैं। इसीलिए पुस्तक ने इस बात को पाठ के अंत में अलग से छापा है।