कक्षा ५ हिंदी अध्याय 11 मानचित्र के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
नदी का क्या नाम है?
उत्तर

नदी का नाम वाघोरा नदी है।

मानचित्र में नदी नीले रंग में बनी है और वह एक बड़ा घुमाव लेती हुई गुफाओं के सामने से बहती है। नदी के ऊपर सफ़ेद डिब्बे में लिखा है — वाघोरा नदी

पाठ से मिलाइए: पाठ में इस नदी का नाम नहीं दिया गया, केवल इतना लिखा है — “एक ओर छोटी-सी नदी बह रही थी। नदी में बड़े-बड़े शिलाखंड पड़े थे। नदी के दक्षिण में एक पहाड़ी पर एक पंक्ति में उनतीस गुफाएँ थीं।” नाम हमें मानचित्र से मिला। यही मानचित्र का काम है — वह वे बातें बताता है जो लिखे हुए वर्णन में छूट जाती हैं।
प्र2.
कुल कितनी गुफाएँ दिखाई गई हैं?
उत्तर

मानचित्र में गुफाओं को 1 से 30 तक क्रमांक दिए गए हैं, यानी कुल तीस गुफाएँ दिखाई गई हैं।

मानचित्र को ध्यान से देखिए —

  1. गुफाएँ नदी के दूसरी ओर पहाड़ी के किनारे-किनारे एक पंक्ति में बनी हैं।
  2. हर गुफा के भीतर एक अंक लिखा है — 1, 2, 3 … और आगे बढ़ते-बढ़ते 28, 29, 30 तक।
  3. हर गुफा के पास सफ़ेद डिब्बे में ‘गुफा’ भी लिखा है।
एक बात ध्यान देने की: पाठ में लिखा है — “एक पहाड़ी पर एक पंक्ति में उनतीस गुफाएँ थीं।” पर मानचित्र में क्रमांक तीस तक जाते हैं। दोनों बातें अपनी-अपनी जगह पर पढ़िए — जो प्रश्न मानचित्र से पूछा गया है उसका उत्तर मानचित्र से दीजिए (तीस), और जो पाठ से पूछा जाए उसका उत्तर पाठ से (उनतीस)। उत्तर लिखते समय यह अंतर भी बता दीजिए, तो उत्तर और अच्छा हो जाएगा।
गिनने का तरीका: सबसे बाईं गुफा पर लिखा अंक देखिए — वह 1 है। फिर पंक्ति के साथ-साथ दाईं ओर बढ़ते जाइए और सबसे बड़ा अंक ढूँढ़िए — वह 30 है। लगातार क्रमांक हों तो गिनना नहीं पड़ता, सबसे बड़ा अंक ही कुल संख्या बता देता है।
प्र3.
चारों दिशाओं में से कौन-सी दिशा का संकेत दिया गया है?
उत्तर

मानचित्र में उत्तर दिशा का संकेत दिया गया है।

मानचित्र के नीचे दाईं ओर एक तारे जैसा चिह्न बना है और उसके नीचे लिखा है — उत्तर। यही दिशा-सूचक चिह्न है।

एक दिशा से चारों दिशाएँ: मानचित्र में केवल एक दिशा लिखने का रिवाज है, क्योंकि एक पता चल जाए तो बाकी अपने-आप निकल आती हैं। उत्तर की ओर मुँह करके खड़े होइए — तब पीछे दक्षिण, दाएँ पूर्व और बाएँ पश्चिम होगा।
पाठ से जोड़िए: पाठ कहता है — “नदी के दक्षिण में एक पहाड़ी पर… गुफाएँ थीं” और “इन गुफाओं का मुँह पूर्व दिशा की ओर” है। मानचित्र पर उत्तर का चिह्न देखकर आप ये दोनों बातें अपनी आँखों से मिलाकर देख सकते हैं।
प्र4.
“आप यहाँ हैं” से क्या आशय है?
उत्तर

“आप यहाँ हैं” का आशय यह है कि मानचित्र देखने वाला इस समय ठीक उसी जगह खड़ा है। यानी वह चिह्न आपकी अपनी जगह बताता है।

पृष्ठ 137 के मानचित्र में यह चिह्न नीचे बाईं ओर बना है — ‘शटल सेवा’ लिखे स्थान के पास। इसका अर्थ यह हुआ कि यात्री पहले वहीं पहुँचता है, और वहाँ से गुफाओं तक जाता है।

ऐसा चिह्न क्यों बनाया जाता है, यह चरणों में समझिए —

  1. चरण 1 — कोई नई जगह पर पहुँचता है और उसे कुछ पता नहीं होता कि वह कहाँ खड़ा है।
  2. चरण 2 — बोर्ड पर लगा मानचित्र उसे बताता है — “आप यहाँ हैं”।
  3. चरण 3 — अब वह अपनी जगह जान गया, इसलिए वह नाप सकता है कि उसे किस ओर और कितनी दूर जाना है।
  4. चरण 4 — इसी से वह तय करता है कि पैदल जाए या शटल सेवा ले।
और कहाँ दिखता है: ऐसा चिह्न रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, चिड़ियाघर, अस्पताल और बड़े बाज़ारों के मानचित्रों पर भी लगा होता है। बिना इस चिह्न के मानचित्र आधा-अधूरा रहता है — रास्ता तभी समझ आता है जब हमें अपनी जगह पता हो।
प्र5.
कुंड का क्या नाम है?
उत्तर

कुंड का नाम सप्तकुंड है।

मानचित्र में ऊपर दाईं ओर, ‘जल प्रपात’ लिखे स्थान के पास, तिरछे अक्षरों में लिखा है — सप्तकुंड। जल प्रपात यानी ऊपर से गिरता हुआ पानी, जिसे हम झरना भी कहते हैं।

नाम का अर्थ: सप्त का अर्थ है सात और कुंड का अर्थ है पानी भरा गड्ढा। यानी ‘सप्तकुंड’ का अर्थ हुआ — सात कुंडों वाला स्थान। झरने का पानी गिरते-गिरते चट्टान में कई गड्ढे बना देता है, और उन्हीं गड्ढों में पानी भर जाता है।
पाठ से मिलाइए: पाठ में लिखा है — “गुफा के ठीक नीचे एक कुंड बना था जिसमें पानी भरा हुआ था।” पाठ ने नाम नहीं बताया; नाम मानचित्र से मिला। इसी तरह मानचित्र पर संरक्षित वन, ऊपरी दृश्य बिंदु, निम्न दृश्य बिंदु, जल प्रपात और शटल सेवा भी लिखा है — इन्हें भी पढ़िए, तो पूरा स्थान समझ में आ जाएगा।
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