प्र1.
हरा रंग — सामग्री : पालक, मेहँदी, पुदीना या हरा धनिया, पानी। विधि : पालक के पत्तों को पानी में उबालिए और फिर पीस लीजिए। इस मिश्रण को छानकर गाढ़ा हरा रंग तैयार किया जा सकता है। पुदीना, धनिया व पालक की पत्तियों को धूप में सुखाकर और उसका पाउडर बनाकर आप हरे रंग को तैयार कर सकते हैं।
उत्तर
हरा रंग दो तरीक़ों से बन सकता है — गीला रंग (पीसकर) और सूखा रंग (पाउडर बनाकर)। दोनों की विधि नीचे चरणों में दी गई है।
| क्या चाहिए | गीला हरा रंग | सूखा हरा पाउडर |
|---|---|---|
| सामग्री | पालक के पत्ते, पानी | पुदीना, धनिया या पालक की पत्तियाँ |
| चरण 1 | पालक के पत्तों को अच्छी तरह धो लीजिए। | पत्तियों को धोकर उनका पानी सुखा लीजिए। |
| चरण 2 | पत्तों को पानी में उबालिए। यह काम बड़ों से कराइए। | पत्तियों को धूप में तब तक सुखाइए जब तक वे कड़क न हो जाएँ। |
| चरण 3 | उबले पत्तों को पीस लीजिए। | सूखी पत्तियों को हाथ से मसलकर या सिल पर पीसकर बारीक पाउडर बनाइए। |
| चरण 4 | मिश्रण को कपड़े या छलनी से छान लीजिए — गाढ़ा हरा रंग तैयार। | पाउडर को सूखी डिबिया में रखिए। ज़रूरत पड़ने पर थोड़े पानी में घोल लीजिए। |
पाठ से नाता: मौसी ने बताया था — “उस समय ये रंग पत्तों, जड़ी-बूटियों, फूलों आदि से बनाए जाते थे।” यह विधि ठीक वैसी ही है। पालक का हरापन उसके पत्ते में ही होता है; उबालने और पीसने से वह पानी में उतर आता है।
सावधानी: उबालने का काम अकेले मत कीजिए — माता-पिता या शिक्षक के साथ ही कीजिए। गरम बरतन को कपड़े से पकड़िए।