कक्षा ५ हिंदी अध्याय 12 आपकी अभिव्यक्ति के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
दिए गए चित्र को ध्यानपूर्वक देखिए और इस पर आधारित कोई अनुच्छेद, कहानी अथवा कविता अपने शब्दों में लिखिए —पृष्ठ 159 पर दिया गया चित्र। बीच का सफ़ेद भाग वह जगह है जहाँ पुस्तक में लिखने के लिए पंक्तियाँ बनी हैं।
उत्तर
पहले चित्र को ध्यान से देखिए। पृष्ठ 159 और 160, दोनों पर एक ही दृश्य फैला है। उसमें ये चीज़ें दिखती हैं —
चित्र में क्या है
ध्यान से देखने पर क्या दिखता है
आकाश
नीला आकाश, सफ़ेद बादल, और बाईं ओर चमकता हुआ सूरज
पेड़
दोनों ओर घने हरे पेड़; दाईं ओर के पेड़ पर लाल-लाल फल लदे हैं
चिड़ियाँ
एक चिड़िया उड़ रही है, दो एक डाल पर साथ बैठी हैं, एक दूसरी डाल पर चोंच खोले बोल रही है, और एक नीचे घास पर चोंच में पत्ता लिए खड़ी है
पत्तियाँ
हवा में बहुत-सी हरी पत्तियाँ घूमती हुई नीचे गिर रही हैं
ज़मीन
पीली-हरी घास, बिखरे हुए पत्थर, रंग-बिरंगे फूल
और जीव
एक धारीदार गिलहरी घास पर बैठी है, और दो-तीन तितलियाँ उड़ रही हैं
अब तीनों में से जो आपको अच्छा लगे, वह लिखिए — अनुच्छेद, कहानी या कविता। तीनों के नमूने नीचे दिए हैं।
नमूना 1 — अनुच्छेद : सवेरे का उपवन
सवेरे का समय है। सूरज पेड़ों के पीछे से झाँक रहा है और आकाश में सफ़ेद बादल तैर रहे हैं। दोनों ओर घने हरे पेड़ खड़े हैं। एक पेड़ पर लाल-लाल फल लदे हैं, जो हरी पत्तियों के बीच बहुत सुंदर लगते हैं। हवा चलती है तो पत्तियाँ डाल छोड़कर घूमती हुई नीचे उतरने लगती हैं। एक डाल पर दो चिड़ियाँ पास-पास बैठी हैं, जैसे आपस में कुछ बात कर रही हों। दूसरी डाल पर बैठी चिड़िया चोंच खोलकर गा रही है। नीचे घास पर एक गिलहरी बैठी है और एक चिड़िया चोंच में पत्ता लिए घोंसले की ओर जा रही है। तितलियाँ फूलों पर मँडरा रही हैं। यह दृश्य देखकर मन शांत हो जाता है। ऐसा लगता है कि प्रकृति हमें चुपचाप कुछ सिखा रही है।
नमूना 2 — कहानी : चिड़िया का घोंसला
उस उपवन में एक चिड़िया रहती थी। उसका नाम था चीं। एक दिन तेज़ हवा चली और चीं का घोंसला डाल से गिर गया। चीं उदास होकर घास पर बैठ गई। तभी वहाँ एक गिलहरी आई और बोली, “तुम रो क्यों रही हो?” चीं ने अपनी बात बताई। गिलहरी बोली, “चिंता मत करो, मैं तुम्हारी सहायता करूँगी।” गिलहरी ने इधर-उधर से सूखी घास इकट्ठी की। चीं एक-एक पत्ता चोंच में लाकर जोड़ने लगी। तभी एक तितली आई और उसने बताया कि लाल फलों वाले पेड़ की डाल मोटी है, वहाँ हवा कम लगती है। तीनों ने मिलकर उसी डाल पर नया घोंसला बनाया। शाम तक घोंसला तैयार था। चीं ने कहा, “अकेले मैं यह कभी न कर पाती।” उस दिन उपवन के सब जीवों ने जाना कि मिलकर काम करने से हर मुश्किल आसान हो जाती है।
नमूना 3 — कविता : पत्तों का नाच
हवा चली तो डाल हिली, पत्ती-पत्ती नाच उठी। घूम-घूमकर नीचे आई, घास पे आकर सो भी गई।
लाल-लाल फल डाल पे झूले, चिड़िया गाए फूले-फूले। गिलहरी बैठी घास किनारे, तितली उड़ती फूल सहारे।
सूरज हँसकर बोला धीरे — “सुबह हुई, अब जागो प्यारे!”
चित्र-वर्णन लिखने की विधि — चार चरण: चरण 1 — चित्र में जो दिखता है, उसकी सूची बनाइए — ऊपर क्या, बीच में क्या, नीचे क्या। चरण 2 — तय कीजिए कि क्या लिखना है — अनुच्छेद (जो दिखता है वही बताना), कहानी (कोई घटना जोड़ना), या कविता (लय में लिखना)। चरण 3 — ऊपर से नीचे के क्रम में लिखिए — आकाश, फिर पेड़, फिर ज़मीन। इससे लिखा हुआ बिखरा नहीं लगता। चरण 4 — अंत में अपने मन की एक पंक्ति जोड़िए — “यह दृश्य देखकर मन शांत हो जाता है।” इसी से लेखन पूरा लगता है।
ध्यान दीजिए: यही वीणा पुस्तक का अंतिम पृष्ठ है। पृष्ठ 160 के बाद इस अध्याय में और कुछ नहीं छपा — न शब्दकोश, न आभार-पृष्ठ। इसलिए इस चित्र पर लिखा हुआ आपका अनुच्छेद, कहानी या कविता ही आपकी इस पुस्तक की अंतिम रचना होगी। उसे मन लगाकर लिखिए।