प्र1.
ए.आई. क्या है? पुस्तकालय, शिक्षक-अभिभावकों एवं अन्य स्रोतों के माध्यम से इसके उपयोग और सीमाओं के बारे में पता कीजिए।
उत्तर
ए.आई. का पूरा नाम ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ है। हिंदी में इसे ‘कृत्रिम मेधा’ कहा जा सकता है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसके अंतर्गत कंप्यूटर अथवा मशीनों में मानवीय सूझ-बूझ की प्रणाली डाली जाती है। यही परिचय पुस्तक के पृष्ठ 158 पर छपा है।
पुस्तक के अनुसार ए.आई. वाली मशीन क्या-क्या कर सकती है —
| क्या कर सकती है | पुस्तक के शब्द |
|---|---|
| मनुष्य की तरह सोचना-समझना | “कोई मशीन किसी मनुष्य की तरह सोच-समझ सकती है।” |
| प्रश्नों के उत्तर देना | “वह आपके द्वारा पूछे गए प्रश्नों अथवा जिज्ञासाओं के उत्तर दे सकती है।” |
| समस्याएँ सुलझाना | “वह विभिन्न समस्याओं को सुलझाने के साथ-साथ…” |
| कविता या कहानी रचना | “…किसी रचनाकार की तरह कविता या कहानी भी रच सकती है।” |
‘कृत्रिम’ यानी बनावटी, जो अपने-आप नहीं बना बल्कि मनुष्य ने बनाया। ‘मेधा’ यानी बुद्धि। इसलिए ‘कृत्रिम मेधा’ का अर्थ हुआ — मनुष्य की बनाई हुई बुद्धि।
अब पता लगाने वाला भाग — उपयोग और सीमाएँ। पुस्तक कहती है कि आप स्वयं पता कीजिए। नीचे एक भरी हुई तालिका दी है, जिसे आप बड़ों और शिक्षक जी से पूछकर आगे बढ़ा सकते हैं —
| उपयोग — कहाँ काम आती है | सीमाएँ — कहाँ भरोसा नहीं किया जा सकता |
|---|---|
| पूछे गए प्रश्नों के उत्तर तुरंत दे देती है | कई बार गलत उत्तर भी दे देती है, इसलिए जाँचना ज़रूरी है |
| एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद करती है | मुहावरों और भावों का अनुवाद अकसर बेढंगा हो जाता है |
| बोली हुई बात को लिख देती है | जो उसे सिखाया ही नहीं गया, वह नहीं जानती |
| चित्र और कहानी रच सकती है | उसमें अपने अनुभव और सच्ची भावनाएँ नहीं होतीं |
| बीमारी की जाँच में डॉक्टरों की सहायता करती है | अंतिम निर्णय मनुष्य को ही लेना पड़ता है |
| मौसम और यातायात का अनुमान बताती है | बहुत उपयोग करने से हमारी अपनी सोचने की आदत घट सकती है |
पाठ से जोड़िए: यह बक्स ‘गगनयान’ के ठीक बाद रखा गया है, और यह अकारण नहीं है। व्योममित्र भी एक ह्यूमनॉइड रोबोट है — यानी वह भी ऐसी ही तकनीक से चलता है। जो मशीन अंतरिक्ष में जाकर जानकारी इकट्ठी कर सकती है और सुरक्षा की जाँच कर सकती है, उसमें ‘मानवीय सूझ-बूझ की प्रणाली’ ही डाली गई होती है।
नमूना उत्तर: मैंने अपने शिक्षक जी से पूछा तो उन्होंने बताया कि ए.आई. का उपयोग आजकल बहुत जगह होता है — मोबाइल में बोलकर संदेश लिखवाने में, एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद करने में, और मौसम का अनुमान बताने में। पर उन्होंने यह भी बताया कि ए.आई. कभी-कभी गलत उत्तर दे देती है, इसलिए उसकी बात को पुस्तक या बड़ों से जाँच लेना चाहिए। सबसे ज़रूरी बात उन्होंने यह कही कि सोचने का काम हमें स्वयं करना चाहिए, मशीन पर पूरी तरह निर्भर नहीं होना चाहिए।