कक्षा ५ हिंदी अध्याय 12 गगनयान के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
‘गगनयान’ रचना किस विधा में लिखी गई है और इसमें कौन-कौन बातचीत कर रहे हैं?
उत्तर

‘गगनयान’ एक संवाद के रूप में लिखी गई रचना है। संवाद यानी बातचीत। इसमें किसी ने कहानी की तरह वर्णन नहीं किया — बस बोलने वाले का नाम, फिर छोटी रेखा (–), और फिर उसका कहा हुआ लिखा गया है।

रचना कक्षा में घटती है। शुरुआत में कोष्ठक में लिखा है — “(कक्षा में अध्यापिका का प्रवेश और सभी विद्यार्थियों द्वारा अभिवादन)”। ऐसे कोष्ठक वाले वाक्य बताते हैं कि उस समय कौन क्या कर रहा है।

बोलने वालेवे क्या करते हैं
अध्यापिकाबच्चों को गगनयान के बारे में बताती हैं, उनके प्रश्नों के उत्तर देती हैं, बीच-बीच में मुस्कुराती और हँसती हैं
शर्मिलाकहती है कि उसने कल्पना में अपना अंतरिक्ष विमान भी सोच लिया है
साधनातारायान का अनुमान लगाती है; बाद में पूछती है कि गगनयान क्या करेगा
राकेशबादलयान का अनुमान लगाता है; बाद में प्रशिक्षण के बारे में आश्चर्य से पूछता है
दीक्षाशनियान का अनुमान लगाती है; बाद में व्योममित्र और उड़ान के समय के बारे में पूछती है
सानियामंगलयान का अनुमान लगाती है
मनोहरशुक्रयान का अनुमान लगाता है; बाद में पूछता है कि व्योममित्र कौन है
अशरफ़आकाशयान का अनुमान लगाता है और बताता है कि वह गरमियों में छत पर लेटकर आकाश देखता है
रत्नाकहती है कि बादल देखकर उसका मन उन पर चढ़कर आकाश की यात्रा करने का करता है
डोलमाकहती है कि उसका मन कई प्रकार के यानों के बारे में जानने का करता है
सतविंदरहँसते हुए बताता है कि डोलमा सब यानों में बैठकर घूमना चाहती है
संदीपकहता है कि उसने गगनयान के बारे में अभी तक कुछ नहीं सुना
विजयपूछता है कि गगनयान हमें आकाश में घुमाएगा क्या
पीटरबताता है कि मनुष्य पहले भी अंतरिक्ष जा चुका है; बाद में पूछता है कि तीसरे चरण में कितने यात्री जाएँगे
संवाद पढ़ने का मज़ा: संवाद में हर पात्र अपने ढंग से बोलता है, इसलिए पढ़ते समय लगता है कि हम भी उसी कक्षा में बैठे हैं। इसे कक्षा में बाँटकर पढ़िए — एक विद्यार्थी अध्यापिका बने और बाकी बच्चे अलग-अलग नाम लें। तब रचना और भी जीवंत हो उठती है।
प्र2.
बच्चों ने किन-किन यानों के नाम अनुमान लगाकर बताए? अध्यापिका ने अशरफ़ का अनुमान ‘लगभग सही’ क्यों कहा?
उत्तर

अध्यापिका ने पूछा — “क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि आज हम किस नए यान के बारे में जानेंगे?” इस पर बच्चों ने छह नाम बताए —

किसने कहायान का नामनाम कैसे बना
साधनातारायानतारा + यान
राकेशबादलयानबादल + यान
दीक्षाशनियानशनि + यान
सानियामंगलयानमंगल + यान
मनोहरशुक्रयानशुक्र + यान
अशरफ़आकाशयानआकाश + यान

अशरफ़ का अनुमान ‘लगभग सही’ इसलिए कहा गया क्योंकि उसने ‘आकाशयान’ कहा था, और असली नाम ‘गगनयान’ है। ‘गगन’ का अर्थ भी आकाश ही होता है।

गगन = आकाश
गगन + यान = गगनयान = आकाश में जाने वाला यान

यानी अर्थ वही था, बस शब्द दूसरा था। इसीलिए अध्यापिका ने कहा — “अशरफ़ का अनुमान लगभग सही था।”

पर्यायवाची शब्द: ‘गगन’ और ‘आकाश’ एक ही अर्थ वाले दो शब्द हैं। ऐसे शब्दों को पर्यायवाची कहते हैं। आकाश के और नाम भी हैं — नभ, अंबर, व्योम। यह चौथा शब्द याद रखिए, क्योंकि इसी से रोबोट का नाम बना है — व्योममित्र, यानी आकाश का मित्र।
प्र3.
गगनयान क्या है? इसका उद्देश्य क्या है? पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर

गगनयान भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान परियोजना है। इसका उद्देश्य मनुष्य को अंतरिक्ष में भेजना है।

अध्यापिका के शब्दों में —

“गगनयान हमें संपूर्ण अंतरिक्ष की यात्रा कराएगा।
इसका उद्देश्य मनुष्य को अंतरिक्ष में भेजना है।”

“किंतु गगनयान मिशन भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान परियोजना है।
इसमें तीन सदस्यों के चालक दल को तीन दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा
और उन्हें भारतीय समुद्री जल में उतारकर सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा।”
बातपाठ क्या कहता है
यह है क्याभारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान परियोजना
उद्देश्यमनुष्य को अंतरिक्ष में भेजना
कितने लोग जाएँगेतीन सदस्यों का चालक दल
कितने दिनतीन दिन
वापसी कहाँभारतीय समुद्री जल में उतारकर सुरक्षित पृथ्वी पर
अभी स्थिति क्या है“हमारे देश के वैज्ञानिक इस यान के निर्माण कार्य में लगे हुए हैं। आशा है कि यह मिशन शीघ्र ही पूरा हो जाएगा।”
सफल होने पर“अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।”
पीटर की बात का उत्तर: पीटर ने कहा था — “मनुष्य तो पहले भी अंतरिक्ष में जा चुका है।” अध्यापिका ने उसे सही ठहराया, पर एक अंतर बताया — गगनयान भारत की अपनी पहली मानव उड़ान है। यानी अब तक भारतीय दूसरे देशों के यानों से गए हैं; इस बार यान भी भारत का होगा।
ध्यान दीजिए: इस रचना में गगनयान के बारे में केवल वही बातें दी गई हैं जो ऊपर लिखी हैं। उत्तर लिखते समय इन्हीं बातों पर टिके रहिए।
प्र4.
गगनयान मिशन कितने चरणों में बाँटा गया है? हर चरण में क्या होगा?
उत्तर

गगनयान मिशन तीन चरणों में बाँटा गया है। पहले दो चरण मानवरहित होंगे और तीसरे चरण में तीन अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जाएगा।

अध्यापिका के शब्द —

“गगनयान मिशन तीन चरणों में विभाजित है।
पहले दो चरण मानवरहित होंगे तथा तीसरे चरण में तीन अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जाएगा।”
चरणकौन जाएगापाठ के अनुसार क्या होगा
पहला चरणमानवरहित — व्योममित्र रोबोट“नहीं, पहले चरण में व्योममित्र को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।” यानी यान खाली नहीं जाएगा, रोबोट जाएगा।
दूसरा चरणमानवरहितपाठ बस इतना कहता है कि पहले दो चरण मानवरहित होंगे — यानी इसमें भी कोई मनुष्य नहीं जाएगा।
तीसरा चरणतीन अंतरिक्ष यात्री“तीसरे चरण में तीन अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की योजना है। उन्हें अंतरिक्ष में भेजने से पहले अंतरिक्ष में रहने का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।”

मानवरहित का अर्थ है — जिसमें कोई मनुष्य न हो। साधना ने यही पूछा था — “तो क्या पहले चरण में खाली यान अंतरिक्ष में भेजा जाएगा?” उत्तर मिला कि खाली नहीं, व्योममित्र रोबोट जाएगा।

पहले रोबोट क्यों: क्योंकि अंतरिक्ष में मनुष्य को भेजने से पहले यह जाँच लेना ज़रूरी है कि यान सुरक्षित है या नहीं। यही काम व्योममित्र करेगा। राकेश ने ठीक ही पूछा था कि वहाँ चलने के लिए भूमि नहीं होगी और घर का भोजन भी नहीं होगा — इसीलिए यात्रियों को “अंतरिक्ष के वातावरण में रहने के कौशल” सिखाए जा रहे हैं।
प्र5.
व्योममित्र कौन है? वह अंतरिक्ष में जाकर क्या-क्या करेगा?
उत्तर

व्योममित्र इसरो का बनाया हुआ एक ह्यूमनॉइड रोबोट है, जिसे गगनयान मिशन के पहले चरण में अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।

अध्यापिका ने बताया —

इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) ने व्योममित्र नाम का
ह्यूमनॉइड रोबोट बनाया है जिसे गगनयान मिशन के अंतर्गत
पहले चरण में अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।”

ह्यूमनॉइड रोबोट यानी ऐसा रोबोट जो देखने में मनुष्य जैसा लगता है और मनुष्य जैसे कुछ काम कर सकता है।

व्योममित्र अंतरिक्ष में जाकर तीन काम करेगा —

  1. जानकारी इकट्ठी करेगा — “व्योममित्र अंतरिक्ष से संबंधित जानकारी एकत्रित करेगा।”
  2. सुरक्षा की जाँच करेगा — देखेगा कि वहाँ रहना मनुष्य के लिए सुरक्षित है या नहीं।
  3. यान-प्रणाली पर नज़र रखेगा — “अंतरिक्ष यान प्रणाली पर नजर रखेगा ताकि जब अंतरिक्ष यात्री वहाँ जाएँ तो उन्हें अधिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।”
नाम का अर्थ: ‘व्योम’ का अर्थ है आकाश या अंतरिक्ष, और ‘मित्र’ का अर्थ है दोस्त। इसलिए व्योममित्र यानी अंतरिक्ष का मित्र। नाम बहुत सोच-समझकर रखा गया है — जो पहले जाकर रास्ता देख आए और यात्रियों की सहायता करे, वह मित्र ही तो है।
इसरो क्या है: इसरो का पूरा नाम है — भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन। यही संस्था भारत के उपग्रह और यान बनाती है। पाठ में इसका उल्लेख इसी रूप में आया है। (पुस्तक में इस स्थान पर ‘अंतरिक्ष’ शब्द ‘अतंरिक्ष’ छपा है — यह छपाई की छोटी-सी चूक है; शुद्ध वर्तनी ‘अंतरिक्ष’ ही है।)
प्र6.
शिक्षण-संकेत — शिक्षक विद्यार्थियों को ‘इसरो’ के विषय में बताएँ। साथ ही उन्हें टैब एवं अन्य उपकरणों के माध्यम से इसरो में होने वाली गतिविधियों की जानकारी भी दें।
उत्तर

पृष्ठ 157 के नीचे यह शिक्षण-संकेत छपा है। यह शिक्षक जी के लिए है, पर विद्यार्थी भी इसे एक गतिविधि की तरह कर सकते हैं। नीचे बताया गया है कि इस कार्य में क्या-क्या आना चाहिए।

अच्छे कार्य में ये बातें होनी चाहिए —

  1. इसरो का पूरा नाम — भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन। अंग्रेज़ी में ISRO।
  2. इसरो करता क्या है — उपग्रह और यान बनाना, उन्हें अंतरिक्ष में भेजना, और अंतरिक्ष के बारे में खोज करना।
  3. पहले के अभियानों से जोड़ना — रचना की शुरुआत में ही अध्यापिका कहती हैं — “कक्षा 3 में हमने चंद्रयान को जाना और कक्षा 4 में आदित्य-एल 1 के साथ सूर्य से भी भेंट कर आए।” यानी चंद्रयान चंद्रमा के लिए, आदित्य-एल 1 सूर्य के लिए, और अब गगनयान मनुष्य को अंतरिक्ष भेजने के लिए।
  4. अभी का काम — गगनयान और व्योममित्र रोबोट।
  5. देखने-दिखाने की सामग्री — टैब या कंप्यूटर पर उपग्रह के प्रक्षेपण (लॉन्च) का चित्र या वीडियो दिखाना।
नमूना उत्तर (कक्षा में बोलने के लिए): इसरो का पूरा नाम है — भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन। यह भारत सरकार की वह संस्था है जो हमारे देश के उपग्रह और अंतरिक्ष यान बनाती है। इसरो ने चंद्रमा के लिए चंद्रयान भेजा और सूर्य का अध्ययन करने के लिए आदित्य-एल 1 भेजा। अब इसरो के वैज्ञानिक गगनयान बना रहे हैं, जो भारत का पहला ऐसा यान होगा जो मनुष्य को अंतरिक्ष में लेकर जाएगा। इसरो ने ही व्योममित्र नाम का ह्यूमनॉइड रोबोट भी बनाया है। हमें गर्व है कि हमारे देश के वैज्ञानिक इतना बड़ा काम कर रहे हैं।
गतिविधि का सुझाव: कक्षा में एक ‘अंतरिक्ष कोना’ बनाइए। एक चार्ट पर तीन खाने बनाइए — चंद्रयान, आदित्य-एल 1, गगनयान — और हर खाने में उसका चित्र तथा दो पंक्तियाँ लिखिए। जो नई बात पता चले, उसे उसी चार्ट में जोड़ते जाइए।
प्र7.
‘गंगा की कहानी’ और ‘गगनयान’ — दोनों रचनाएँ इसी अध्याय में एक साथ छपी हैं। इन दोनों में क्या समानता है?
उत्तर

दोनों रचनाएँ यही सिखाती हैं कि जो हमारे पास है उसे जानो, उस पर गर्व करो और उसकी सँभाल करो। एक रचना धरती की ओर देखती है और दूसरी आकाश की ओर — पर दोनों का भाव एक ही है।

बातगंगा की कहानीगगनयान
विधाआत्मकथात्मक वर्णन — गंगा स्वयं ‘मैं’ कहकर सुनाती हैसंवाद — कक्षा में अध्यापिका और बच्चों की बातचीत
विषयएक नदी की यात्रा — गोमुख से बंगाल की खाड़ी तकएक यान की यात्रा — पृथ्वी से अंतरिक्ष तक
दिशापहाड़ से नीचे मैदान और समुद्र की ओरपृथ्वी से ऊपर आकाश की ओर
भारत की बातगंगा को भारतवासी पवित्र नदी मानते हैंगगनयान सफल हुआ तो “भारत के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी”
संदेशअपनी नदी को साफ़ रखो — प्रकृति की सँभाल करोविज्ञान से नया जानो — आगे बढ़ो, मन में जिज्ञासा रखो
भविष्य की आशा“मुझे उस दिन की प्रतीक्षा है जब मेरा जल वैसा ही स्वच्छ और निर्मल हो जाएगा।”“इसके लिए हमें अधिक प्रतीक्षा नहीं करनी होगी।”
ध्यान देने लायक बात: दोनों रचनाएँ प्रतीक्षा पर आकर मिलती हैं। गंगा उस दिन की प्रतीक्षा करती है जब वह फिर निर्मल होगी; बच्चे उस दिन की प्रतीक्षा करते हैं जब गगनयान अंतरिक्ष में जाएगा। एक प्रतीक्षा हमें सँभालना सिखाती है, दूसरी आगे बढ़ना — और अच्छा नागरिक बनने के लिए दोनों चाहिए।
क्या यह उपयोगी रहा?