‘गगनयान’ एक संवाद के रूप में लिखी गई रचना है। संवाद यानी बातचीत। इसमें किसी ने कहानी की तरह वर्णन नहीं किया — बस बोलने वाले का नाम, फिर छोटी रेखा (–), और फिर उसका कहा हुआ लिखा गया है।
रचना कक्षा में घटती है। शुरुआत में कोष्ठक में लिखा है — “(कक्षा में अध्यापिका का प्रवेश और सभी विद्यार्थियों द्वारा अभिवादन)”। ऐसे कोष्ठक वाले वाक्य बताते हैं कि उस समय कौन क्या कर रहा है।
| बोलने वाले | वे क्या करते हैं |
|---|---|
| अध्यापिका | बच्चों को गगनयान के बारे में बताती हैं, उनके प्रश्नों के उत्तर देती हैं, बीच-बीच में मुस्कुराती और हँसती हैं |
| शर्मिला | कहती है कि उसने कल्पना में अपना अंतरिक्ष विमान भी सोच लिया है |
| साधना | तारायान का अनुमान लगाती है; बाद में पूछती है कि गगनयान क्या करेगा |
| राकेश | बादलयान का अनुमान लगाता है; बाद में प्रशिक्षण के बारे में आश्चर्य से पूछता है |
| दीक्षा | शनियान का अनुमान लगाती है; बाद में व्योममित्र और उड़ान के समय के बारे में पूछती है |
| सानिया | मंगलयान का अनुमान लगाती है |
| मनोहर | शुक्रयान का अनुमान लगाता है; बाद में पूछता है कि व्योममित्र कौन है |
| अशरफ़ | आकाशयान का अनुमान लगाता है और बताता है कि वह गरमियों में छत पर लेटकर आकाश देखता है |
| रत्ना | कहती है कि बादल देखकर उसका मन उन पर चढ़कर आकाश की यात्रा करने का करता है |
| डोलमा | कहती है कि उसका मन कई प्रकार के यानों के बारे में जानने का करता है |
| सतविंदर | हँसते हुए बताता है कि डोलमा सब यानों में बैठकर घूमना चाहती है |
| संदीप | कहता है कि उसने गगनयान के बारे में अभी तक कुछ नहीं सुना |
| विजय | पूछता है कि गगनयान हमें आकाश में घुमाएगा क्या |
| पीटर | बताता है कि मनुष्य पहले भी अंतरिक्ष जा चुका है; बाद में पूछता है कि तीसरे चरण में कितने यात्री जाएँगे |